@DrDCSHARMAUPPSS माननीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी से निवेदन है कि जिस अध्यादेश से आज 27 लाख शिक्षकों का परिवार अधर में है उस अन्याय पूर्वक आदेश को वापस लें।
#TFI जिंदाबाद
मा सुप्रीम कोर्ट द्वारा टेट की अनिवार्यता के संबंध में दिनांक 1 सितम्बर 2025 को दिये गये निर्णय के बाद इस मुद्दे पर संघ द्वारा की जा रही कार्यवाही के संबंध में सबाल करने वाले साथियों को हमने सदैव कहा कि लोकतंत्र में संसद सर्वोपरि है ।हमारी समस्या का निराकरण संसद द्वारा ही होगा ।इसलिए टीएफआई द्वारा देश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंप कर अपनी बात संसद तक पहुँचायी गई ।संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकांश सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया और समस्या के निराकरण की मांग की ।टीएफआई द्वारा सभी जनपदों के मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करते हुए जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से मा प्रधान मंत्री जी को ज्ञापन प्रेषित किये गये ।
टीएफआई द्वारा 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली आयोजित करके भारत सरकार तक अपनी बात पहुँचाई गई ।रैली में भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मा सांसद श्री जगदंबिका पाल जी को आमंत्रित किया गया और श्री पाल साहब ने आपकी लाखों की उपस्थिति और आप के मुद्दे की जानकारी सरकार तक पहुँचाई ।
माननीय केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान जी , भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष
श्री पंकज चौधरी जी एवं केंद्रीय राज्यमंत्री श्री जितिन प्रसाद जी से मिलकर उच्च स्तरीय वार्ता एवं निराकरण की मांग की गई ।
चूँकि आदेश सुप्रीम कोर्ट से आया है इसलिए कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ना आवश्यक है ।रिव्यू स्वीकार होने पर ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए टीएफआई ने सीनियर एडवोकेट श्री पी एस पटवालिया एवं श्री वी गिरि जी को कोर्ट में उतारा ।श्री पटवालिया जी ने टीएफआई के महासचिव श्री राम मूर्ति ठाकुर के राज्य संगठन अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के रिव्यू में तथा श्री वी गिरी जी द्वारा उ प्र प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से श्री मेघराज सिंह एवं 232 अन्य के नाम से दाखिल रिव्यू में अपना पक्ष रखा ।जिसको आप वीडियो में देख सकते हैं ।
सुनवाई के दौरान सभी विद्वान अधिवक्ताओं ने भारत सरकार (श्री मनमोहन सिंह सरकार)के दौरान संसद द्वारा आरटीई एक्ट के लागू होने पर दिनांक 23 अगस्त 2010 के द्वारा इससे पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को टेट से छूट देने का तर्क दिया गया ।लेकिन जज साहब भारत सरकार (श्री मोदी सरकार) के दौरान संसद द्वारा पारित किए गए संशोधन के क्रम में निर्गत राजपत्र दिनांक 10 अगस्त 2017 के द्वारा 31 मार्च 2015 को नियुक्त एवं कार्यरत सभी शिक्षकों पर टेट परीक्षा पास करने की अनिवार्यता लागू करने पर ही अडिग दिखे ।
सुनवाई के दौरान 10 राज्य सरकारों के अधिवक्ता मौजूद थे लेकिन किसी ने भी यह स्वीकार नहीं किया कि गत 8 वर्षों में किसी भी राज्य सरकार द्वारा सभी शिक्षकों पर टेट लागू करने हेतु कोई भी नोटिस या आदेश जारी नहीं किया है ।
कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है जिसके शीघ्र ही आने की उम्मीद है ।वकीलों का अपना मत है लेकिन हम कामना करते हैं कि निर्णय आपके पक्ष में हो ।
निर्णय अनुकूल होने पर सभी को बधाई और यदि प्रतिकूल हो तो हतोत्साहित न हो ।हम अपना आंदोलन आगे बढ़ाते हुए आगे बढ़ेंगे और श्री मोदी सरकार से कहेंगे कि जो पाप/अन्याय /संशोधन आपकी सरकार के दौरान हुआ है ।ऐसे संशोधन को वापस लेकर देश के 25 लाख शिक्षकों के करोड़ों परिजनों के साथ न्याय करें ।🙏🙏
#JusticeForTeachers#NoTetBeforeRteAct
TFI के नेतृत्व में टेट अनिवार्यता के विरोध में कल पूरे प्रदेश में शिक्षकों का सैलाब सड़क पर उतर आया।
इसी क्रम से संतकबीरनगर में भी जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन सौंपा गया।
@DrDCSHARMAUPPSS
@TFI_2025
@narendramodi
काले कानून टी ई टी के विरोध में uppss संतकबीरनगर की जिला अध्यक्ष अंबिका देवी यादव के नेतृत्व में जनपद के सभी नौ ब्लॉक में शिक्षकों काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया।
@DrDCSHARMAUPPSS@KCSinghUPPSS@UPPSSSKN
2011 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट का कानून लागू करने के विरोध में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करते हुए विद्यालय के समस्त शिक्षक गण।
@DrDCSHARMAUPPSS#JusticeForTeachers
आज से 26 तक पूरे देश में शिक्षक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य कर टेट का विरोध कर रहे हैं। सरकार से यह मांग है कि वर्ष 2011 से पहले के शिक्षकों को टेट से मुक्त कर इस काले कानून को वापस लिया जाए नहीं तो समूचे देश के शिक्षक सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे
@DrDCSHARMAUPPSS
आज से 26 तक पूरे देश में शिक्षक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य कर टेट का विरोध कर रहे हैं। सरकार से यह मांग है कि वर्ष 2011 से पहले के शिक्षकों को टेट से मुक्त कर इस काले कानून को वापस लिया जाए नहीं तो समूचे देश के शिक्षक सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे
@DrDCSHARMAUPPSS
RTE ACT लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षक राज्य निर्धारित अर्हताओं के अनुसार चयनित हुए और दशकों से सेवा दे रहे हैं। बाद की योग्यताओं को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर थोपना अन्याय है। भारत सरकार संसद से कानून बनाकर लाखों शिक्षकों को न्याय दे।
#JusticeForTeachers@dpradhanbjp