भक्तों के पैसे खा गए BJP के चोर
राम लला को लूट लिया, ये है इनका दौर
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी हुई- महापाप हुआ है।
लेकिन राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से लेकर शिलान्यास करने वाले नरेंद्र मोदी 'चढ़ावा चोरी' पर एक शब्द नहीं बोल र��े हैं।
: AICC-सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चे��रपर्सन @SupriyaShrinate जी
📍 दिल्ली
माननीय प्रधानमंत्री जी
भारत सरकार
नई दिल्ली
@PMOIndia@narendramodi
विषय: भारत को संभावित जल आपदा से बचाने हेतु "राष्ट्रीय जल सुरक्षा मिशन" लागू करने एवं कठोर जल संरक्षण कानून बनाने के संबंध में।
माननीय प्रधानमंत्री जी,
जय माता दी 🙏
मैं आपका ध्यान भारत के सामने तेजी से बढ़ते जल संकट की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
आज यह केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, आर्थिक विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है।
भारत विश्व की लगभग 18% जनसंख्या का घर है, जबकि हमारे पास विश्व के केवल लगभग 4% नवीकरणीय मीठे जल संसाधन उपलब्ध हैं। बढ़ती जनसंख्या, अनियोजित शहरीकरण, भूजल का अत्यधिक दोहन, नदियों का प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन इस संकट को और गंभीर बना रहे हैं।
वर्तमान स्थिति (विश्लेषणात्मक तथ्य)
भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1951 में लगभग 5,177 घन मीटर थी, जो घटकर लगभग 1,500 घन मीटर के आसपास रह गई है। यदि यह 1,000 घन मीटर से नीचे जाती है तो देश गंभीर जल संकट की श्रेणी में आ जाएग��।
विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार:
वर्ष 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से लगभग दोगुनी हो सकती है।
देश के करोड़ों नागरिक जल संकट का सामना कर सकते हैं।
अनेक बड़े शहरों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।
भारत में उपलब्ध मीठे जल का लगभग 80% कृषि में उपयोग होता है, जबकि पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों के कारण भारी मात्रा में पानी व्यर्थ चला जाता है।
कई राज्यो��� में भूजल का दोहन उसकी प्राकृतिक पुनर्भरण क्षमता से कहीं अधिक हो चुका है।
नदियों, तालाबों एवं झीलों का अतिक्रमण तथा प्रदूषण जल संकट को और भयावह बना रहा है।
यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो संभावित परिणाम
पीने के पानी का गंभीर संकट।
कृषि उत्पादन में भारी गिरावट एवं खाद्य महंगाई।
उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव।
ग्रामीण क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर पलायन।
राज्यों के बीच जल विव��दों में वृद्धि।
सामाजिक अशांति एवं आर्थिक नुकसान।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल असुरक्षा।
मेरा विनम्र सुझाव
माननीय प्रधानमंत्री जी, कृपया निम्नलिखित कदम राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कृपा करें—
1. राष्ट्रीय जल सुरक्षा अधिनियम
जल संरक्षण को कानूनी दायित्व बनाया जाए।
2. वर्षा जल संचयन अनिवार्य
सभी सरकारी, निजी भवनों, स्कूलों, कॉलेजों, उद्योगों एवं आवासीय परियोजनाओं में Rain Water Harvesting अनिवार्य ��ो।
3. भूजल पुनर्भरण अभियान
देशव्यापी Recharge Wells, Check Dams, Farm Ponds एवं Recharge Parks बनाए जाएँ।
4. जल बर्बादी पर कठोर दंड
अनावश्यक जल बर्बादी, पाइपलाइन लीकेज की अनदेखी तथा अवैध भूजल दोहन पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाए।
5. प्रत्येक जिले का Water Budget
हर जिले में जल उपलब्धता एवं उपयोग का वार्षिक वैज्ञानिक आकलन अनिवार्य किया जाए।
6. राष्ट्रीय नदी एवं तालाब पुनर्जीवन मिशन
सभी नदियों, तालाबों एवं झीलों को अतिक्रमण मुक्त एवं प्रदूषण मुक्त बनाया जाए।
7. कृषि सुधार
ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित किया जाए तथा जल बचाने वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाए।
8. स्कूलों में जल शिक्षा
जल संरक्षण को अनिवार्य विषय बनाया जाए तथा प्रत्येक विद्यार्थी को "जल प्रहरी" बनाया जाए।
9. स्मार्ट वाटर मॉनिटरिंग
AI, GIS, ड्रोन एवं IoT आधारि�� जल निगरानी प्रणाली विकसित की जाए।
10. "जल बचाओ – राष्ट्र बचाओ" जन आंदोलन
स्वच्छ भारत अभियान की तरह पूरे देश में जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण अभियान चलाया जाए।
मेरा आग्रह
भारत ने अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, आधारभूत संरचना तथा आर्थिक विकास में विश्व को नई दिशा दिखाई है। अब समय आ गया है कि भारत "जल संरक्षण में विश्व का नेतृत्व" करे।
यदि आज हमने प्रत्येक वर्षा की बूंद बचा ली, प्रत्येक तालाब को पु��र्जीवित कर दिया, प्रत्येक नागरिक को जल संरक्षण का सहभागी बना दिया, ��ो आने वाली पीढ़ियाँ हमें धन्यवाद देंगी।
जल ही जीवन नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की नींव है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इस विषय को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित कर शीघ्र ठोस एवं समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने की कृपा करें।
"आज बचाया गया प्रत्येक बूंद, कल भारत की सबसे बड़ी पूंजी होगी।"
सादर,
अजय अवस्थी
akawasthi.official@gmail.