Shivpiri mein 27 sep se pipelone badal rahe hein manikheda ki...pehle kaam poora hone a din 12 oct tha...but us taarik ko badakar 20 oct kar diya gaya...ye log apni latelatifi ki wajah se janta ko kyu pareshan karte hein...kya aisi companies par koi fine nahi lagana chahiye..
रावण तो महान था। उसने सीता का अपहरण अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए किया था। और उसने सीता को सम्मान लंका में रखा, कोई जबरदस्ती नहीं की
आपको कई जगहों पर ऊपर लिखी बातें पढ़ने को मिलेंगी। और विश्वास जानिए, हममें से अधिकांश ऐसे हैं जो इन बातों पर कहते मिल जाते हैं, बल्कि उनका दृढ़ विश्वास है कि ऐसे लोगों और ऐसे लेखों को इग्नोर कर देना चाहिए।
जबकि होता यह है कि आम जनता जो अपने दैनिक कामों में, रोजमर्रा की जिंदगी में उलझी है, वह इतनी सरल और स्पष्टता से लिखी बात को, इस लॉजिक को सही मान लेती हैं।
पर क्या यह सब सही है? सच में रामायण में ऐसा है?
रावण की कथा से एक बात स्पष्ट हो जाती है कि कोई अधर्मी व्यक्ति कितना भी सुन्दर स्वरूप बना ले, स्वयं को कितना भी धार्मिक बता दे, उसपर विश्वास नहीं किया जाना चाहिये। यदि विश्वास करेंगे तो आपका हरण होगा...
अब प्रश्न यह है कि आप पहचानेंगे कैसे? साधु वेश में आया व्यक्ति सचमुच संत है, या कोई रावण, यह कैसे तय होगा? तो इसका बड़ा ही सहज उत्तर है। जो व्यक्ति आपको आपकी लक्ष्मण रेखा पार करने को कहे, यकीन कीजिये वह संत नहीं है। धूर्त है, अधर्मी है। किसी भी तरह आपको आपकी मर्यादा की सीमा से बाहर निकलने की प्रेरणा देने वाला कभी भी आपका शुभचिंतक नहीं हो सकता।
सबके चारों ओर मर्यादा की एक लक्ष्मण रेखा होती है। वह रेखा समाज द्वारा खींची गई हो सकती है, हमारे अपनों द्वारा, हमारे परिवार द्वारा खींची गई हो सकती है, या स्वयं हमारे द्वारा ही खींची गई हो सकती है। आप पुरुष हों या स्त्री, सुरक्षित जीवन जीने के लिए उस रेखा का ध्यान रखना आवश्यक होता है। आप उसके बाहर निकलते ही असुरक्षित हो जाते हैं।
आप श्रीराम की महायात्रा को देखिये, वे जिस भेष में घर से निकलते हैं, चौदह वर्षों के बाद उसी भेष में वापस लौटते हैं। इस बीच उनमें कोई परिवर्तन नहीं आता... धर्म को भेष बदलने की आवश्यकता नहीं होती, अपना नाम बदलने, नाम छुपाने की आवश्यकता नहीं होती। इसकी आवश्यकता अधर्म को ही होती है। हर रावण किसी सीता का हरण करने के लिए पहले अपना भेष ही बदलता है। वह होगा राक्षस, पर स्वयं को बताएगा साधु। तिलक लगा लेगा, कलावा बांध लेगा... उसको पहचानना, उसे स्वयं से दूर भगाना आपका कर्तव्य है।
रावण की बहन थी सूर्पनखा! उसका चरित्र भी वही था जो उसके भाई रावण का था। वह भी श्रीराम का हरण करने ही आयी थी न? उसने भी श्रीराम से मर्यादा की सीमा लांघने को कहा! "अपनी पत्नी को छोड़ कर मुझसे विवाह करो..." यह सीमा से बाहर ले जाने का ही प्रयत्न था। राम दृढ़ थे, सो उन्होंने रेखा नहीं लांघी। स्पष्ट है, राक्षस का प्रेम स्वीकार नहीं तो राक्षसी का भी नहीं। इतनी कट्टरता होनी ही चाहिये।
फिर रावण आया। सूर्पनखा प्रेम दिखा कर ठगने में असफल हुई थी, सो उसने योजना बदली। वह याचक बन कर आया। भिक्षाम देही कहते हुए... लंका का राजा क्षण भर में भिखमंगा बन गया। अधर्मी के गिरने की कोई सीमा नहीं होती, वह अपना हित साधने के लिए सौ बार आपके पैर पकड़ सकता है। पर हमें समझना होगा। कुछ भी हो जाय, उसे उसके लक्ष्य में सफल होने नहीं दिया जा सकता।
लोग कहते हैं कि हर वर्ष रावण का पुतला जलाने की क्या आवश्यकता है। मैं कहती हूं, बिल्कुल आवश्यकता है। बल्कि यह आवश्यकता सदैव रहेगी। क्या अब भेष बदल कर लड़कियों के साथ छल करने वाले रावण नहीं है धरती पर? गृहस्थों की गृहस्थी तबाह करने वाली सूर्पनखाएँ नहीं क्या? सज्जन दिखने वाले पर अपने अधर्मी भाई के लिए लड़ जाने वाले कुम्भकर्णों की संख्या कम हो गयी क्या? जबतक ये तीन चरित्र हैं धरती पर, तबतक हर वर्ष रावण के दहन की आवश्यकता रहेगी।
और हाँ! अंदर के रावण को वो मारें जिनके अंदर हो! हमें इस फर्जीवाड़े की आवश्यकता नहीं।
Jo chaprasi ban ne layak nahi hein,agar wo shiksha mantri reh sakte hein,9bi fail sansad or vidhayak ban sakte hein,50% or 60% laane wala,arakshn ke been bajake ips,ias,collector ban sakta hai..to is baat ko lekar rudaali kahe ban rahein log..
#WATCH | Delhi air quality | Bishnu Kumar Pal, a morning walker in the area around Red Fort, says, "Pollution is high. I am from Guwahati and I came here only yesterday. The pollution is not this high there...I have been carrying the mask, everyone should have this. I am aged, I can face breathing problems due to pollution so I need to stay safe..."
Inse pooch le..ki inke future perception ke hisaab se ye kb hinduism chod rahi hein..ya intezaar karengi kisi or ke aane ka..jo inhe convert karne mein inki help kare...just asking..
"India is racist, Hindu supremacist, upper caste supremacist, fascist, etc. The future of India will be without Hinduism." - Divya Dwivedi, Assoc. Prof. (IITD)
"The India-Russia oil deal is scandalous. The US's failure to impose sanctions on India shows its double standards." - Kavita Krishnan, Author, JNU Alumni.
Both of these statements were given yesterday to a foreign media during the G20.
Both of them are Marxist and support communism. If they were Chinese and said these things against China, Xi would have ensured that none of them saw the free world for the rest of their lives. If only Modi was 1% of the fascist they portray him to be!
A Bihari Brahmin defending a Tamil Christian who is giving eradication call of entire Hindus.
This is the real beauty of Secular India as envisaged by Nehru ji.
देखिए, हिन्दू त्योहारों को बदनाम करने के लिए कैसे हर साल नई-नई चीजें लाई जाती हैं। अब ये गिरोह रक्षाबंधन को प्रॉपर्टी से जोड़ रहा है।
अपनी लुल्ली कटवा चुके मीठे, भारत में उत्तराधिकार के मामले में शरिया चलता है मुस्लिमों के लिए। जहाँ हिन्दू बेटियों को बराबर का अधिकार है संपत्ति में, मुस्लिमों में ऐसा कुछ भी नहीं है। जितनी संपत्ति बेटों को मिलती है, उसका आधा ही बेटियों को मिलता है। क्या तू ईद-बकरीद पर कभी कहता है अब भारत में शरीयत हटे और मुस्लिम लड़कियों को संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिले? नहीं, लेकिन तू #Rakshabandhan को बदनाम करने के लिए आ गया जबकि हिन्दू कानून के हिसाब से बराबर की संपत्ति की अधिकारी होती हैं महिलाएँ।
महाभारत में अगर तुमने राजा ययाति की कथा पढ़ी होती तो तुम्हें पता होता कि बेटी और दौहित्र (नाती-नातिन) भी श्राद्ध कर सकते हैं मृतक का, उन्हें श्राद्धकर्म में पवित्र माना गया है। राजा ययाति को उनकी बेटी ने ही तारा था और वापस स्वर्ग में भेजा था। इसीलिए, अपने कौम के लोगों को सिखा, हिंदुओं को नहीं।
मुसलमानों ने कब्जा नहीं किया है। हिंदू जातियों ने अपने काम छोड़ दिए। मुसलमानों ने मौके का लाभ उठाया है। मार्केट में डिमांड है वो पूरी कर रहे हैं। पानी वहीं भरता है जहां गड्ढा होता है। मुसलमानों को हर समय कोसने से कुछ नहीं होगा। अब ये बोरिंग हो चुका है।
Is desh mein sabse aasan kaam yahi hai,har 2-4 mahine mein hinduon ko,uchi jaati ke logo ko gaaliya do..or apni or logo ka dhyan aakarshit karo...or vote lete raho..
मंच पर अपने पिता का अपमान कर सकते हैं
चाचा को पार्टी से बाहर फेंक सकते हैं
लेकिन स्वामी प्रसाद को ना कुछ कह सकते ना उसके बयान का खंडन कर सकते ना उनको पार्टी से बाहर फेंक सकते अखिलेश जी
देश को बेवक़ूफ़ समझा है प्रवक्ता महोदय स्वामी प्रसाद से सब कुछ बुलवा ही अखिलेश रहे हैं
धर्म विरोध खून में जो रहा….🙏