बोत्सवाना अपने देश का ईलेक्शन इंडिया की #EVM से कराना चाहता था।
बोत्सवाना के कोर्ट ने इंडिया के इलेक्शन कमिशन को कोर्ट के सामने मशीनों का हैक प्रुफ होने का डेमो दिखाने के लिये कहा।
ई. कमीशन ने मना कर दिया कहा कि हमारे पास मशीनों की कमी है। नही दे सकते। https://t.co/bHmhYjByrI
होटल में EVM
सड़क पर EVM
ट्रक में EVM
कार में EVM
टैम्पो में EVM
ईंट भट्ठे पर भी EVM
कूड़े के ढेर पर EVM
जब सब जगह EVM है ही तो स्ट्रांग रूम की क्या आवश्यकता थी ??
वैसे पत्रकारों को स्वतन्त्र होना चाहिए पर स्वतन्त्रता के नक्से पर व्यक्तिगत लालच,और अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए देश को अंधेरे में धकेल देना भी अपराध है।
देश भर से ईवीएम मशीनें बदलने की सूचना आ रही है। अभी लोकसभा गाज़ीपुर,उत्तर प्रदेश के स्ट्रॉग रूम में ईवीएम मशीनों से भरी गाड़ी को लेकर गठबंधन प्रत्याशी अफज़ाल अंसारी अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठे हुए हैं। यह लोकतंत्र की हत्या है।
जो तड़ीपार जज को मरवा सकता है, अपने दल के उभरते नेता को मरवा सकता है, नकली एनकाउंटर करवा सकता है, फिरौती का धन्धा कर सकता है वो EVM नहीं बदलवा सकता?
चुनाव "अयोग्य" में कितनी जान, कितनी विश्वसनीयता है वो सब जा���ते हैं!
एग्ज़िट से पहले बाज़ार की अपनी मजबूरियाँ एग्जिट पोल के नाम ���े बेची जाती हैं।संघ समर्थित संस्थानों और संसाधनों की मदद से वंचितो के मनोविज्ञान से खेलना इनका पुराना हथियार है।इसे ख़ारिज करें।हम जीत रहे है। स्ट्रोंग रूम पर कड़ी निगरानी रखे।गंदे खेल के माहिर लोगों की चाल कामयाब ना हो।
ये बनारस से महज 35KM दूर चंदौली के दलित हैं, इनका कुसूर सिर्फ इतना है कि ���े बसपा समर्थक हैं, और इन लोगों ने मोदी जी की रैली में जाने से इंकार कर दिया, फिर क्या था गाँव के सवर्णों ने जो हाथ में आया उससे इन्हें बर्बरतापूर्वक पीटा, ना महिलाओं को छोड़ा और ना बच्चों को।
अगर तुमने उस बाल भगवान कन्हैया के लिए मेहनत करने के बजा�� गुजरात मे मेहनत की होती तो दलितों को वहां सम्मान से जीने में हक़ दिला सकते और मजबूरियों को बारीकी से समझ पाते।
अलवर सामूहिक बलात्कार मामले में हमने खुलकर कहा है कि अगर अलवर के तत्कालीन SP को निलंबित नहीं किया जाता तो हमारा आंदोलन जारी रहेंगा। लेकिन @narendramodi जी आप बताईये कि गुजरात मे 4 दिन में 5 गांवों के दलितों को घोडी पर नही चढने दिया, इस बारे में आप के मुँह पर ताला क्यों लगा है?
रामराज्य अपने पूरे निखार पर है, गुजरात में घोड़ी चढ़े दलित दूल्हे को रोकने को महिलाएँ सड़क पर भजन गाने लगती है, गुजरात का पुलिस प्रशासन भी इससे अछूता नहीं रहता है मोदी के विकास ने महिलाओं पे इस कदर जहर भ�� दिया है कि उनको गलत/सही का फर्क नहीं दिखता है हम यह किस समाज में रह रहे है