राजस्थान फिर हुआ शर्मशार 🥺
एक दलित महिला के साथ अलवर जिले में रेप करके बेरहमी से पिटाई की फेफड़ा फाड़ दिए गए।
बलात्कार की घटनाएं दलित आदिवासी महिलाओं के साथ ही क्यों होती हैं? क्योंकि SC ST सबके लिए सबसे आसान टारगेट हैं।
#DalitlivesMatter
ये रास्ते में दलित महिला नहीं बल्कि राजस्थान की कानून व्यवस्था पड़ी है।
अम्बेडकर जयंती पर एटा के इसी गांव में ठाकुर समाज के लोगों ने दलित समाज की रैली को रोककर पत्थरबाजी की थी.....आज दलित समाज ने वहां उनकी कलश यात्रा को रोक दिया
यह प्रतिक्रिया सवर्ण समाज द्वारा फैलाई गयी नफरत व दलित उत्पीड़न के परिणामस्वरूप है..!!
जमीन से 384400 किलोमीटर दूर चांद पर जाने के लिए हम चंद्रयान बना सकते हैं ,
लेकिन जमीन के दस फीट नीचे जाने के लिए हम आज भी इंसान को भेजते हैं।
वाह रे विश्वगुरु ❣️
आज़ादी के इतने वर्ष बाद भी अगर प्रार्थना करने के लिए पुलिस बल चाहिए तो आप ख़ुद सोच सकते हैं हम आज भी सामाजिक न्याय से कितने दूर खड़े हैं।
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ये मणिपुर नहीं, बंगाल के एक राहत शिविर की तस्वीर है . वक्फ कानून के विरोध में सड़कों पर उतरे दंगाइयों ने मुर्शिदाबाद इलाके में लोगों को मारा -पीटा. हत्या और आगजनी की .
नतीजा ये हुआ कि जान बचाने के लिए बहुत से हिंदू परिवार अपना गांव
छोड़कर राहत शिविर में आ गए हैं . दंगाइयों को कंट्रोल करने में ममता सरकार पूरी तरह से विफल रही है . आठ अप्रैल से हिंसक विरोध शुरू हुआ और 12 अप्रैल तक चलता रहा . हाईकोर्ट की फटकार और केंद्रीय बलों की तैनाती ने ममता सरकार को बुरी तरह एक्सपोज कर दिया है .सरकार और पुलिस ने अगर दंगाइयों से सख्ती से निबटा होता तो ये नौबत नहीं आती . ये कोई पहला मौका नहीं है जब बंगाल में ममता सरकार की नाकामी के सबूत मिले हैं . मुस्लिम बहुल इलाकों में उपद्रवियों और दंगाइयों के खिलाफ सख्ती न बरतने के आरोपों से घिरी ममता बनर्जी ऐसे मौकों पर हर बार अपनी विफलता के सबूत देती हैं .
दूर दराज़ के इलाके छोड़ दीजिए, यह दिल्ली की तस्वीर है। नेशनल कैपिटल। और मैं दावे से कह सकता हूँ यह काम कोई सवर्ण नहीं कर रहा होगा। हम सामाजिक न्याय से कोसों दूर हैं।
छुआछूत को समाज से ख़त्म करने के लिए अगले सत्र में बिल लाइए और उसमें हिंदुओं के जितने भी ट्रस्ट और कमेटियां हैं, उसमें 80% दलित, आदिवासी और पिछड़े हिंदुओं को आरक्षण दीजिए : संजय सिंह
दलितों की बारात पर पत्थर बरसते देख रहे हो?
क्यों बरस रहे हैं ये पत्थर? क्योंकि उस बारात में एक भी ऐसा शक्स नहीं है जो उस छत पर चढ़कर उस पत्थरबाज़ को नीचे गिरा दे।
जब तक मारने वालों के पिछवाड़े तोड़ना शुरू नहीं करोगे, तब तक तुम्हें कभी ठाकुर, कभी ब्राह्मण, कभी यादव तो कभी दूसरे लठैत कूटते रहेंगे।
उत्तर प्रदेश : आगरा की फर्म ने मथुरा में 6 करोड़ रुपए से ये टंकी बनाई। 2021 में निर्माण पूरा हुआ। टंकी में लीकेज था। लोगों ने शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। नतीजा...आज पूरी टंकी ढह गई।
DM ने कहा- 'टंकी का गिरना इंजीनियरिंग की कमी को दर्शाता है। जांच के आदेश दिए गए हैं'
साहेब कांसीराम कहते हैं कि जब तक खुद मजबूत न हो जाओ, तब तक जहां BJP मजबूत है वहां BJP को हराकर कॉन्ग्रेस को जीताओ और जहां कांग्रेस मजबूत है वहां कांग्रेस को हराकर BJP को जीता दो। फिर ख़ुद बजबूत होकर सत्ता में काबिज हो जाओ।
चुनाव के बाद भी .@BhimArmyChief का पसीने में तरबतर कमीज़, कांसीराम साहेब के उसी "हराओ - जीताओ" वाले रास्ते पर आगे बढ़ने की ओर इशारा कर रहा है।
अभी मज़ा आएगा खेल में।