*जनगणना कार्य में लापरवाही पर होगी कठोर कार्रवाई, मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने दिए निर्देश - Abhinav Prabhat*
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आगरा के अछनेरा ब्लाक ग्राम शाही के सूर्य सिटी कॉलोनी की संतोषी देवी पत्नी गणेश जाति जाटव है। इनके साथ गंभीर मारपीट करने का मामला है।
इनका आरोप है कि पुलिस मुकदमा दर्ज नहीं कर रही है, प्रशासन मामले को संज्ञान लें @agrapolice@adgzoneagra@digrangeagra
दलितों पर आतंकी हमला बंद करो।
पंजाब के मुक्तसर में मोबाइल चोरी की शक में दलित युवकों के साथ बर्बर पिटाई एवं निर्वस्त्र कर पूरे गांव में घुमाने की घटना पर पूरा देश मौन क्यों है? आखिर कब तक दलितों को यूं ही कुछ भी आरोप लगाकर मारा-काटा जाता रहेगा?
दलित युवक पर तालिबानी आतंक। 😡💔।
हरियाणा के हांसी में भीड़ ने एक दलित युवक पर जबरन चोरी का आरोप लगाया। जब युवक ने इसे झूठ बताया तोउन्होंने उसे बेरहमी से पीटा, जातिगत गालियां दीं और हत्या की नीयत से उसे रस्सियों से बांधकर कुएं में उल्टा लटका दिया।
इस आतंक को देखकर तालिबान भी शर्मा जाए। पीड़ित युवक स्टील की ग्रिल और गेट बनाने का काम करता है। परसों शाम वह काम से लौट रहा था। रास्ते में टॉयलेट करने के लिए रुका, तो अंधेरे में गांव के कुछ युवकों ने उसे "चोर-चोर" कहकर पकड़ लिया। दलित समुदाय का होने की जानकारी मिलते ही उन्होंने उसे लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा। युवकों ने उस पर चोरी का आरोप लगाते हुए उसके हाथ-पैर बांध दिए और उसे कुएं में उल्टा लटकाकर घंटों तक प्रताड़ित किया। किसी ने 112 पर कॉल करके सूचना दी, जिससे पुलिस मौके आई और तब जाकर उस युवक की जान बच सकी।
यह सरासर जातीय आतंक का मामला है। ग्रामीण गुंडे कानून व्यवस्था को ताक पर रखकर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। दलितों पर चोरी का झूठा आरोप लगाकर अपनी कुंठा निकालने वाले ऐसे गुंडों पर NSA, SC-ST Act, BNS एवं अन्य उचित धाराओं के तहत हत्या के प्रयास और संगठित अपराध की धाराओं में कार्रवाई की जानी चाहिए। ये कायर गुंडे अपनी सामंती, जातिवादी एवं दकियानूसी मानसिकता से ग्रसित हैं। एक-एक को चुन-चुनकर सजा दी जानी चाहिए।
बीबीसी की यह रिपोर्ट देखकर आप समझ पायेंगे कि हिंदू राष्ट्र का गुजरात माडल क्या है ?
गुजरात में साबरकांठा में रूपाल गांव में दलित समुदाय के लोग अपना गांव छोड़ना चाहते हैं. उनका आरोप है कि उनके साथ इस गांव में छुआछूत का व्यवहार होता है.
रिपोर्ट- तेजस वैद्य, बीबीसी संवाददाता
शूट- परेश पटियार
एडिट- रिपुल मकवाना
साभार - @BBCHindi
मनु की औलादों से लीचड़ व्यक्ति दुनिया में दूसरा नहीं है, उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में एक 10 साल की बच्ची मंदिर प्रांगण में खेल रही थी, तभी वहां मौजूद हवस के पुजारी विजय पंडित ने इस बच्ची को शिकार बनाना चाहा,
बच्ची से दुष्कर्म का प्रयास किया गया, उससे छेड़छाड़ करी, अश्लील हरकत करी, जब बच्ची रोने लगी और शोर मचाया तो आस पास मौजुद लोग इकठ्ठा हो गए और आरोपी पुजारी के चंगुल से बालिका को छुड़ाया,
इसके बाद साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो के तहत् मुकदमा पंजीकृत करके गिरफ्तार किया, गिरफ्तारी के विरोध में समस्त विप्र समुदाय इकट्ठा हो गया,
आरोपी की जाति देखकर समर्थन करने वाले यह लोग इंसान नहीं किसी सुवर की औलादें है, सोचिए उस मासूम बच्ची पर क्या बीत रही होगी,
शास्त्रों में लिखा है "पूजहूं विप्र सकल गुण हिना" इसी मंत्र के तहत् यह लोग आरोपी के पक्ष में उतरे हैं, उनको लगता है पुजारी है तो गलत कर ही नहीं सकता,
दलित पर भयावह हमला।
राजस्थान के झुंझुनूं में दलित युवक पवन मेघवाल को जबरन ट्रैक्टर पर बिठाकर सुनसान जगह ले जाया गया और फिर उसके कपड़े उतारकर उसे बेरहमी से पीटा गया।
राकेश दड़िया नामक गुंडे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। भाजपा राज में दलितों को चुन चुनकर मारा जा रहा है।
महान त्याग, समर्पण एवं संघर्ष की प्रतिमूर्ति बाबासाहेब की जीवनसाथी माता रमाबाई आम्बेडकर जी के महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें शत शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि!
हमारी मुस्कान के खातिर आपने बहुत तकलीफ का सामना किया है माँ। हम आपके संघर्षों को कभी भी भुला नहीं सकते।
जय माता रमाबाई 🙏
जातिवादी पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज!
गोरखपुर में Dec 2025 में कार्रवाई के नाम पर पुलिसकर्मी आनंद स्वरुप उपाध्याय व संतोष मौर्या ने एक दलित परिवार की महिलाओं-बच्चों पर बुरी तरह हमला किया और कहा;
"चमरिया साले, तुम लोग ही बवाल करते हो..."
पुलिसिया गुंडे पीड़ित को थाने ले गए और उसके कान पर इतने वार किए कि वह बहरा हो गया। साथ ही, उन्होंने फर्जी मुकदमा दर्ज कर पीड़ित परिजनों पर ही उल्टी कार्रवाई कर दी, जबकि पीड़ित पक्ष के पास घटना के वीडियो सहित सभी साक्ष्य मौजूद थे। इसके बाद पीड़ित ने इन जातिवादी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए SC-ST जिला न्यायालय में याचिका दायर की।
सभी साक्ष्यों को देखते हुए माननीय न्यायालय ने पुलिसकर्मी आनंद स्वरुप उपाध्याय एवं संतोष मौर्या के खिलाफ SC-ST Act और BNS की गंभीर धाराओं में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। दोनों को तत्काल पद से हटाकर गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
मैं हमेशा समाज के युवाओं से कहता हूँ कि यदि स्थानीय थाना आपकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं करता, पुलिसकर्मी दुर्व्यवहार करते हैं, और पुलिस अधीक्षक भी आपकी शिकायत पर संज्ञान नहीं लेते, तो अपने शिकायत पत्रों, सबूतों और गवाहों के आधार पर दोषी पक्ष के साथ-साथ SHO, पूरे थाने और SP के खिलाफ भी SC-ST जिला न्यायालय में याचिका दायर करें। कोर्ट के आदेश पर इन सभी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
रक्षक ही भक्षक बन गया।⚠️😡
मध्य प्रदेश के विदिशा से मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक दलित युवक ने भैंस चोरी की शिकायत दर्ज कराने के लिए आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल किया था। पुलिस का काम चोरों को पकड़ना था, लेकिन मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी दीपक गुर्जर ने शिकायतकर्ता दलित युवक को ही बर्बरता से पीटना शुरू कर दिया।
आरोप है कि पीड़ित को थाने ले जाकर जातिसूचक गालियां दी गईं, अमानवीय यातनाएं दी गईं और उसे पेशाब पिलाने का प्रयास किया गया। पेट पर लगातार किए गए हमलों के कारण युवक बेहोश हो गया, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।
शिकायत के बाद आरोपी पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत आपराधिक मामला दर्ज हुआ है। यह घटना कानून व्यवस्था और वंचित समाज की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
"पत्रकारिता के नाम पर सोशल मीडिया पर जहर उगलना और दलित समाज के महापुरुषों का अपमान करना अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम साहेब और चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं आदरणीय बहन मायावती जी के खिलाफ इस्तेमाल की गई जातिवादी, घटिया और गाली-गलौज वाली भाषा सीधे तौर पर एक पूरे समाज की गरिमा पर हमला है।
यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं, बल्कि सरेआम सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और नफरत फैलाने की साजिश है। खुद को पत्रकार बताने वाले ऐसे अराजक तत्वों का असली ठिकाना जेल होना चाहिए।
कानून @Uppolice@lkopolice@LkoCp@adgzonelucknow@Igrangelucknow@dgpup@ChiefSecyUP@Cybercellar के रखवालों से अपील है कि इस गंभीर मामले में बिना किसी ढिलाई के तुरंत सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
पुलिस वाला या गुंडा?
एमपी के विदिशा में भैंसों की चोरी हो रही थी। एक दलित युवक ने 112 पर शिकायत कर पुलिस को बुलाया।
पुलिसकर्मी दीपक गुर्जर ने चोरों पर कार्रवाई करने के बजाय दलित युवक को बेरहमी से पीटा। आरोप है कि थाने ले जाकर उसे पेशाब पिलाने का प्रयास किया गया, जातिसूचक गालियां दी गईं और लगातार उसके पेट पर वार किए गए, जिससे वह बेहोश हो गया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया।
पीड़ित परिवार ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से शिकायत की, जिसके बाद पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया और उसके खिलाफ SC-ST Act सहित अन्य विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई। दलितों की पहचान सुनते ही जातिवादियों का खून खौलने लगता है, मानो वे उनका खून पीने को आतुर हो जाते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव बताएं कि उनके राज में दलित समुदाय जब पुलिसकर्मियों से ही सुरक्षित नहीं है तो अन्य जातिवादी गुंडों से उनकी रक्षा कौन करेगा?
मध्यप्रदेश में एक दलित युवक को खंभे से बांधकर जातिवादी कट्टरपंथियों द्वारा बेरहमी से प्रताड़ित किया गया। यह भयावह घटना भारत में दलितों के खिलाफ जारी अमानवीय जातीय उत्पीड़न की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए।
शर्मनाक! घृणित! और निंदनीय!😡⚠️
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से आई खबर सभ्य समाज के लिए एक गहरा तमाचा है। यहाँ एक दलित युवक की बिंदौली के दौरान जो हुआ, वह केवल गुंडागर्दी नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही उस सड़ी-गली मानसिकता का प्रदर्शन है जो इंसान को इंसान मानने से इनकार करती है।
पीड़ित परिवार ने पहले ही हमले की आशंका जताते हुए पुलिस सुरक्षा मांगी थी। लेकिन इन 'तथाकथित रक्षकों' का दुस्साहस देखिए—देवेंद्र राजपूत, गणेश राजपूत, भंवर गोस्वामी और प्रभु जाट जैसे लोगों ने पुलिस की मौजूदगी में ही दूल्हे को घोड़ी से उतारने की कोशिश की और शादी में खलल डाला। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इन चारों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।
1- आखिर एक जानवर की पीठ पर बैठने भर से किसका 'सम्मान' खतरे में पड़ जाता है?
2- घोड़ी किसी की निजी संपत्ति या 'जातीय गौरव' का प्रतीक कब से हो गई?
3- जब कानून सबको बराबरी का हक देता है, तो ये 'स्वयंभू ठेकेदार' संविधान से ऊपर कैसे हो गए?
यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि हमारे समाज में आज भी कुछ लोग 'बराबरी' के नाम से ही कांपने लगते हैं। उनकी श्रेष्ठता इतनी कमजोर है कि एक दलित युवक की खुशी उन्हें 'दर्द' देने लगती है।
पुलिस की यह कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब ऐसी सोच रखने वाले समाज से बहिष्कृत किए जाएंगे। अपराधी चाहे कोई भी हो, उसे यह समझ लेना चाहिए कि यह बाबा साहेब का संविधान है, किसी की निजी रियासत नहीं।
MP के कटनी मे ST महिला SDM पर मनुवादी वकील ने की आपत्तिजनक टिप्पणी जो पूरे एससी एसटी समाज का अपमान है, जिस पर SDM ने अच्छे से वकील की क्लास लगा दी, आज संविधान होते हुए भी आदिवासी और दलित अधिकारियों के प्रति कुंठित मानसिकता रखते हैं सामंती, SC/ST एक्ट और मजबूत होना चाहिए!