आम आदमी पार्टी की दोहरी मानसिकता।
एक तरफ "आप" के नेता दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को छात्रों-युवाओं की लड़ाई बताकर उसका समर्थन कर रहे हैं, वहीं पंजाब में उन्हीं की सरकार रोजगार मांग रहे युवाओं पर लाठियां बरसा रही है।
केजरीवाल, ये "आप" का कौन-सा दोहरा चरित्र है?
इसपर नजर रखना। यह "जय भीम" कहकर आपका मूर्ख बना सकता है। क्योंकि इसका उदय किसी विचार से नही बल्कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के युवाओ पर टिपण्णी से हुआ है।
भाजपा को केंद्र में लाने का श्रेय अन्ना हजारे के आंदोलन को जाता है जिससे केवल नेता निकले, जँहा एससी/एसटी कोई विषय नही रखते थे। अन्ना हजारे का सबसे बड़ा नुकसान बहुजन मूवमेंट को हुआ था। जिसे एससी भांप नही सके।।जैसे;
1.नरेंद्र मोदी की सरकार इसी आंदोलन के कारण बनी।
2.जिसका नुकसान एससी पार्टियो को हुआ। बसपा का नई दिल्ली में वोट 14% से 1% से कम पर आ गया जबकि नई दिल्ली में 20% एससी है। अकेले जाटव नई दिल्ली में 8% है। यह वोटर्स कँहा गया? केजरीवाल के पास। केजरीवाल ने एससी का सबसे बड़ा नुकसान किया।
कोंग्रेस तक ने अपने पैनल को इस पर नजर रखने के लिए कहा है क्योंकि उसे भी पता है कि यह केजरीवाल इन पार्टी की कोई नई मुहिम है जिससे हाशिये पर पहुच सके अपने सँगठन के प्रति सहानुभूति मोड़ सके।
यह किसी अन्य की कठपुतलिया है, व विशेष तौर से यह बन्दा केजरीवाल एंड कम्पनी की छत्रछाया में काफी दिन रहा है। जिनका रिकॉर्ड एससी विरोधी रहा है जैसे राज्यसभा में एक भी एससी को नही भेजना।।
इसलिए पैनी नजर रखिए।
विकास कुमार जाटव
समाजवादी पार्टी 2017 में बुरी तरह हारी। इतनी की 224 से सीधा 47 शीट पर आ गई व लोकसभा 2014 व 2019 में केवल 5 सांसद पर सिमट गई वो भी तब जब स्वयं 2014 में सत्ता में थीं इतनी बुरी हालत अन्य किसी ऐसी पार्टी की नही हुई जितनी सपा की सत्ता में रहते हुए हुई।
आरजेडी लगातार हार रही है। लोकसभा में जीरो शीट तक लाई। विधानसभा चुनाव लगातार हार रही है।
अगर वास्तव में देखा जाए तो सपा व आरजेडी का बसपा स कई गुणा बुरा हाल हुआ क्योंकि;
"सपा व आरजेडी को मुस्लिम का 90% सें उपर बिना किसी सवाल करे, बिना अपेक्षा करे, हमेशा वोट मिल रहा है। न किसी विचारधारा के कारण और न ही कोई विकास का मुद्दा है। मुद्दा केवल "भाजपा का डर दिखाओ"। यह फ्री का वोट है और एक जिम्मेदारी के तौर पर मिलता है। इस स्तर तक कि जँहा ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व अन्य सामान्य, अन्य ओबीसी की वोटिंग 40% से 50% बूथों पर होती है, वंही मुस्लिम "भाजपा आ जायेगी" के नाम पर बूथों पर 80% से ऊपर तक वोटिंग करता है और उत्तर प्रदेश की 19% मुस्लिम जनसँख्या होने के बाद भी बूथों पर 30% तक हो जाती हैऔर 90% से उपर समाजवादी पार्टी व आरजेडी को करता है। इतना सभी कुछ फ्री में मिल रहा हैं उंसके बाद भी सरकार नही बना पाए रहे है. अगर मुस्लिम वोट सपा से हटा दिया जाए तो सपा का वोट प्रतिशत 3% से 5% के बीच दिखेगा। "
लेकिन क्या लगातार हार के बाद भी कभी किसी;
"यादव या अन्य ओबीसी को" सपा व आरजेडी का कार्यालय पर धरना देते हुए देखा है? जबकिं मुस्लिम भी पूछ सकते थे क्योंकि सपा के वोटर्स में 80% हिस्सा मुस्लिम का है"
बल्कि यादव इस बात पर खुश हो जाते है कि मध्य प्रदेश में यादव मुख्यमंत्री भाजपा ने बनाया है। केबिनेट मंत्री तक यादव मोदी सरकार में है।
लेकिन यह खुलजी मनोबलहीन केवल और केवल दलितो को होती है। इसका कारण निम्न है;
1.डीएन में इस स्तर तक सैकड़ो वर्षों के शोषण के कारण उपजी कमजोरी अंदर तक जा चुकी है कि उन्हें यकीन नही होता कि केंद्रीय राजनीति में उनके समाज को महत्व मिल रहा है। इस स्तर तक कि वो नही देखते की उनके स्वयं के जिले में उनका व्यापार से लेकर अन्य क्षेत्रों में टिकने नही दिया जाता है तब भी सिद्ध देश की केंद्रीयकृत राजनीति की धुरी में क्यो है?
2.जो केंद्रीयकृत राजनीति में है। इसे कमजोर करने या खत्म करने के लिए ऐसे ही कुछ व्यक्तिगत लाभ की अभिलाषा रखने वाले दलितो को पकड़कर कुछ पद देकर आगर किया जाता है जिससे वो के केन्द्रीकृत राजनीति के बीच मे बैठी पावर को खत्म कर सके।
बाबा साहब डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर का संघर्ष में जब सोचना शुरू करता हूँ तब मुझे आश्चर्य लगता है कि जी समाज के लिए वो लड़ रहे थे, उसका व्यवहार उस समय भी ऐसा ही था। फिर भी उन्होंने शिक्षा, राजनीती व समाज मे महत्वहीन देश के 18% एससी व 9% एसटी समाज को मुख्यधारा में लाकर महत्वयुक्त बना दिया।
इसलिए हरिजन मत बनो। अम्बेडकरवादी बनो।
विकास कुमार जाटव
नाम = अभिजीत दीपके
शिक्षा = अमरीका की बोस्टन से मास्टर
कार्य = आम आदमी पार्टी की 2020 से 2023 तक सोशल मीडिया संचालन
जन्म = शम्भाजी नगर (महाराष्ट्र)
सबसे हॉट प्रश्न = जाति
उत्तर = अनुसुचित जाति
उपलब्धि ;
"Gen Z जी ओ का नया मसीहा। बस गलत देश मे क्योंकि भारत मे एक मजबूत सँविधान है। इंहा Gen Z टाइप की खुजलीं जो अराजकता, दंगो को देखना ☺️😊😊😊"
लेकिन बन्दे के नाम ऐसी उपलब्धि दर्ज हो गयी जो वाकई में विशेष है। जँहा;
"भाजपा को अपने 8.4 मिलियन फॉलोवर बनाने में अभी तक का समय लगा, वंही अभिजीत दीपके ने सीजीआई सूर्यकांत की बेरोजगारों पर की गई टिपण्णी के विरोध में बनाई भारतीय कॉकरोच पार्टी ने कुछ घण्टो में सीधा 12 मिलियन फॉलोवर अर्जित कर लिए। इसका प्रभाव लगातार फैलने लगा जिसके बाद एकाउंट बन्द कर दिया गया क्योंकि किसी व्यक्ति का नही बल्कि कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से था"
इस बन्दे ने पूरी बकैती करी। हमारी महिलाओ को 50% आरक्षण की मांग है। फलाना ढिलकाना। लेकिन न तो सामाजिक परिवर्तन और न ही सामाजिक न्याय के लिए एससी/एसटी/ओबीसी के लिए कुछ था। इसलिए;
"यह हमारे लिए महत्वहीन है"
इसने यह कि में "दलित हूँ" तब बताया जब इसने हमारी यह माँग पर ट्रोल होना शुरू हो गया कि एससी/एसटी/ओबीसी के लिए क्या है। जैसे इनकीं पार्टी आम आदमी पार्टी बहुजन को ठेंगा दिखाती थी, उसी सोच से यह भी ग्रस्त है।
ओर मुझे लगता है और शायद याद है कि;
"राजेन्द्र पाल गौतम ने समाज कल्याण मंत्री रहते हुए शायद कुछ को बाबा साहब के नाम पे योजना चलाकर विदेश भेजने की घोषणा की थी। मुझे यकीन तो नही लेकिन लग रहा है उसी में यह बन्दा "में भी एससी हूँ" कहकर अमरीका न चला गया हो"
ऐसे कॉकरोच अगर यह भी कहे कि हम एससी है तो भी हमारे किसी काम के नही है। वो अपना है जिसके कार्यो में बहुजन का विकास है।
विकास कुमार जाटव
@abhijeet_dipke@AdvRajendraPal
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शर्मा जातिवादी नहीं है, वो बिल्कुल निष्पक्ष है, जाति देखकर कभी फैसला नहीं देते, उनका फैसला ही है उनका शासन,
पुजा पांडे नाम की DSP ने अक्टूबर 2025 में मध्यप्रदेश के सिवनी में सोना कारोबारी का पैसा ले जा रही कार को रोका, कुल 2.96 करोड़ थी,
पूजा पांडे ने जप्त राशि सिर्फ़ 1.45 करोड़ बताई और बाकि 1.5 करोड़ रुपया गायब कर दिया,
आज इस मामले में मिलार्ड ने पूजा पांडे को यह कहकर ज़मानत दे दी कि वह छोटे बच्चे की मां है 🔥🔥
भारत में अभी लगभग 1537 महिला बंदी है जो छोटे छोटे बच्चों के साथ जेल में सजा काट रही है, इनमें से लगभग 85% महिलाए अंडर ट्रायल है,
उम्मीद है मिलार्ड का यह फैसला तमाम ज्यूडिशियरी में लागू होगा और जिन महिलाओं के बच्चे छोटे हैं,उन्हें जमानत मिलेगी और सुनवाई भी त्वरित होगी,
किसी ने आगर मिलार्ड की निष्पक्षता पर सवाल उठाया तो दो मुक्के मारूंगा 🔥🔥🔥
राजकुमार भाटी के बयाँ को अगर आप हल्के में व अनायास गलती से निकला हुआ ले रहे है तो गलत है। यह 2027 के चुनाव की भाजपा-सपा के अप्रत्यक्ष समझौते का एक हिस्सा मात्र है। क्योंकि;
1.ब्राह्मण वोट सपा को नही मिलेगा। बसपा को भी गलतफहमी है अगर बसपा सोचती है कि उसे मिलेगा। ब्राह्मण का डेस्टिनेशन भाजपा था। जब भाजपा कमजोर थी तब श्री मुलायम सिंह यादव के मुस्लिम प्रेम वाले शासन से तंग आकर बसपा पर गया। यह समर्थन बसपा को नैतिक, समाज सुधार या अन्य वाला नही बल्कि एक मजबूरी थी। मजबूरी श्री मुलायम के शासन से बचाव की थी। बसपा को मान्यवर कांशीराम के समय से ही दलित व अति पिछड़ी जातियों के समन्वय ने अच्छी शीट दिलवाई। अति पिछड़ी जातियों का व्यवहार्ज़ जरूरत एससी जैसा है, इसलिए वो बसपा के नजदीक रही।
फिर जब देखा कि बसपा शासन में एससी की जातिया तक सरकारी ठेकों में आरक्षण लेकर ठेकेदार बन रही है और उन्हें महत्व मिल रहा है तो सभी समाज एक होकर बसपा के खिलाफ 2012 में सपा को लेकर आये। उंसके बाद अखिलेश यादव के एससी पर किये शोषण के कारण एससी का कुछ प्रतिशत वोट पहली बार भाजपा को मिला जिससे भाजपा सरकार बन गयी और ब्राह्मण को उसका फाइनल व अंतिम डेस्टिनेशन मिल गया। यह बिल्कुल ऐसा ही है जैसे;
"किसी तूफान के कारण पानी के जहाज के डूबने की स्तिथि में नाविक छोटी नांव पर बचने के लिए बैठकर निकल लेते है और फिर आसपास के निर्जन टापू पर फँस जाते है और तब तक संघर्ष करते है जब तक बचा न लिए जाए ओर किसी तरह बचा किये जाते है और अपनी धरती पर पहुच जाते है। इंहा निर्जन टापू उनकी इच्छा नही बल्कि बचने का एक जरिया मात्र था, जो उन्हें अपने फाइनल डेस्टिनेशन तक पहुचने के लिए जिंदा रखता है। सपा और बसपा भी ब्राह्मण वोट के लिए ऐसे ही निर्जन टापू है, लेकिन अब वो अपने फाइनल डेस्टिनेशन भूमि अथार्त भाजपा का सत्ता में होना पा चुके हजिम फिर काहे वो निर्जन टापू पर वापस जाएंगे?"
2.सपा को पता है ब्राह्मण वोट भाजपा पर जाएगा। इसलिए जो अपना वोटर्स है अथार्त मुस्लिम उसे पक्का कर किया जाए और ब्राह्मण हाय-हाय करके भावनाओ में बहने वाले एससी का भी झटक लिया जाए।
3.भाजपा के लिए खतरा सपा से ज्यादा बसपा है क्योंकि उसके पास उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी जाति जाटव जो 12% है, उसका वोट है, प्लस अन्य एससी का भी है। उसमे भी यह वोटर्स सहरानपुर की हिमाचल-उत्तराखंड-हरियाणा से लगती सीमा के अंतिम गांव से लेकर बिहार से लगती सीमा बलिया के अंतिम गांव तक फैला हुआ है। जबकि सपा को नुकसान यह है कि उसका कोर वोटर यादव पूरे उत्तर प्रदेश में केवल पूर्वांचल या उससे लगते बुंदेलखंड की कुल 30 लोकसभा तक सीमित है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश मे लालटेन लेकर तक नही मिलता है। जैसे सहारनपुर में 2400 गांबो में केवल 5 से 10 गांव में यादव कुछ अच्छी तादात में है। बाकी जगह 99% गाँवो में सिंगल परिवार तक नही है।
4.अब अगर बसपा के वोटर्स में मुस्लिम मिल गया तो यह 402 कि 402 विधानसभाओं में प्रभाव डालेगा। भाजपा पुनः पुराने दिनों में आ जायेगी। इसलिए वो लड़ाई में केवल सपा को दिखाना चाहती है। इसलिए राजकुमार भाटी के बयान पर सपा बचाव कर रही है जिससे मुस्लिम को दिखाया जा सके कि हिन्दुवाद के खिलाफ हम खड़े है, प्लस भावनाओ में बहते दलितो मे सॉफ्ट कॉर्नर बनाया जा सके। नही तो उत्तर प्रदेश में गुर्जर वोटर्स केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, कैराना व सहरानपुर के गंगोह, नकुड़ एरिया व नोयडा, गाजियाबाद, बागपत तक सीमित है।
5.इसमे बसपा को लड़ाई से बाहर करने की पूरी रणनीति है। जो सफलतापूर्वक 2022 में अपनाई जा चुकी है। जिसका लाभ भी सपा को 111 विधायक के रूप में व भाजपा को सरकार बनाने के रूप में मिला। वर्ष 2027 में सपा को पता है कि सरकार नही बना सकती है, लेकिन कम से कम 111 विधायक या कुछ ज्यादा बनाकर रखे जिससे राज्यसभा में जया बच्चन, परिवार के रामगोपाल को पहचाया जा सके।
इसलिए राजकुमार भाटी इतना कॉन्फिडेंट है। क्योंकि सपा-भाजपा का अप्रत्यक्ष रूप से राकुमार भाटी के सर पर हाथ है।
समझे राजनीति।
विकास कुमार जाटव
नाम = जोसेफ विजय थेलापति
पिता = एस.ए. चंद्रशेखर (ईसाई)
माँ = शोभा चंद्रशेखर (हिन्दू)
इतना काफी है या ओर लिखना है। इसपर आवाज आएगी। जाति लिखिए जी।।
तो भाई विजय के पूर्वज हिन्दू की वेललालार जाति से है जो समर्द्ध व कृषि प्रधान जाति है, जिसके पास जमीनें थी, यानि के ओबीसी की मजबूत जाति।
अब ऐसा इसलिए लिखा क्योंकि;
1.काफी दलित सोशल मीडिया पर इसे क्रांति बता रहे है। आत्ममुग्ध हो रहे है।
2.ब्राह्मण सँगठन/व्यक्ति सोशल मीडिया पर विजय के जितने के बाद पूजा करने पर लोहलोट होकर कह रहे है कि देख लो अम्बेडकरवादियो हिन्दू सरकार बन गई।
अब दलितो के बारे में;
1.यह बेचारे सत्ता से दूर है। इसलिए इन्हें आस रहती है कि हमारा व्यक्ति मुख्यमंत्री बन गया।
2.लेकिन यह पड़ोसी को जबर्दस्ती एससी बताकर जिंदाबाद तो कर सकते है लेकिन कभी अपने मे से ही निकले व्यक्तिओ का हाथ मजबूत नही करना चाहते। बाबा साहब इसी समाज के लिए संघर्ष कर रहे थे, यह उन्हें कोंग्रेस द्वारा भड़काने पर बाबा साहब को काले झंडे दिखा रहे थे।
3.दलित को सभी मे महापुरुष दिखेगा। इंहा तक कि 2012 से 2017 तक सामने से, डंके की चोट पर, कह कहकर दलितो के खिलाफ लगातार निर्णय लेने वाले अखिलेश में महापुरुष दिखेगा। मतलब इस स्तर तक कि बाप को बहनजी ने प्रमोशन में आरक्षण देकर बाबू से अधिकारी बना दिया, चपरासी से क्लर्क बना दिया और उसे फिर से जिस अखिलेश ने बाबू से चपरासी व अधिकारी से क्लर्क बना दिया, उसी अखिलेश में बेटे को महापुरुष दिखेगा और यह दिखेगा की बहनजी ने समाज बेच दिया।
बाबू जगजीवनराम जी या श्री रामविलास पासवान जी या की मेने कभी बुराई नही करी, क्योंकि उन्होनें पद पर रहते हुए, बड़ी जिम्मेदारी के साथ उस समाज के लिए कार्य करा जिस एससी वर्ग से वो आते है। अपने स्तर से उन्होंने बेस्ट किया।
4.बहनजी सार्वजनिक मिल नही रही, पदाधिकारी जनता तक जा नही रहे, ग्राफ गिर रहा है। यह समस्या है। इसपर बात हो सकती है लेकिन एकाएक बहनजी को नकारकर हाय हाय करना, बिल्कुल ऐसा ही है जैसे स्वयं के बाप या मां को यह कहकर की "तुमने आजतक करा ही क्या है" हम तो पड़ोसी को माँ-बाप मानकर जिंदाबाद करेंगे।
इसलिए "दलित" समाजिक रूप से दलित है ,परिवर्तन हो सकता है, लेकिन मानसिक रूप से "दलित" है, यह गम्भीर समस्या है।।
विकास कुमार जाटव
सिबिल कम्पनी व छोटे छोटे लोन वाले कितना गरीब मजदूर को परेशान करते है इसका मुझे विगत रविवार को एक गांव में "Pay back to Society" के कार्यक्रम में पता लगा।
एक बेचारा गरीब कुल्दीप नाम का व्यक्ति, हमारे पास आया, रोने लगा, कहने लगा कि लड़कीं की शादी लोन लेकर करना चाहता है, दो बार रिश्ता टूट गया क्योंकि बन्दे को लोन नही मिल गया।
कारण?
Crif नाम की सिबिलि रेटिंग ने उसके पैन कार्ड पर 30 से ऊपर फर्जी लोन दिखा रखे है जिसमे Mpocket नाम की कम्पनी ने बार बार दिखा रखा। बेचारे को फालिस भी मार गयी
इसे भी Pay back to Society के तौर पर लेकर मेने Mpocket में शिकायत करी। वँहा स जवाब आया कि हमारा कोई लोन नही है, Crif से बात करे। Crif में शिकायत करी, Crif वाले व मपॉकेट वाले एक दूसरे पर छोड़ रहे है, उधर बेचारे को लोन नही मिल रहा।
अब दोनो की RBI Ombudsment में शिकायत क्ररूँगा। यह भी तय है कि में दोनो को सीधा करके लोन हटवा दूँगा। लेकिन काफी गरीब मजदूर को यह सभी पता भी नही होता।
@CRIF_India@mPokketOfficial
बंगाल के चुनाव में मुझे कोई आश्चर्य नही हुआ है। यह मेने 2015 के बाद ही बतानां शुरू कर दिया था। इसपर मेरा वर्ष 2019 में लिखा गया लेख निम्न है;
ममता बनर्जी "भाजपा" को पश्चिमी बंगाल में स्थापित कर रही है.
*************************
पश्चिमी बंगाल में मुख्य लड़ाई में केवल पार्टी है पहली ममता बनर्जी की तुन्मुल कोंग्रेस व दुसरे नम्बर पर वाम दल, कोंग्रेस व भाजपा वंहा पर तीसरे व चौथे नम्बर के लिए लड़ते है.
भाजपा ऐसी पार्टी है जो की पश्चिमी बंगाल में 2014 की मोदी लहर के बाद भी 17% वोट के साथ 2 शीट ही जीत पाई थी. और वर्तमान में तो कोई मोदी लहर भी नही है बल्कि यह लहर उल्टे पाँव वापस आ रही है.
ऐसी स्तिथि में जब की उत्तर प्रदेश में गठबंधन के कारण सपा-बसपा 70 से उपर शीट जितने की स्तिथि में और भाजपा का सफाया करने वाली है उस स्तिथि में भाजपा देश की लोकसभा की संख्या के हिसाब से तीसरे बड़े राज्य पश्चिमी बंगाल में डेरा इसलिए डाल रही हिया जिससे की वंहा से लोकसभा की शीट निकाली जा सके. अब;
1.अब इस मामले में "ममता बनर्जी" ड्रामेबाजी करके भाजपा को स्पेस दे रही है, भाजपा को पश्चिमी बंगाल में इतना महत्व दे रही है जिससे की वोटरों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, साम्प्रदायिक धुव्रिकरण होगा, जिसका लाभ लेने में भाजपा चेम्पियन है. भाजपा को 2014 में 17 प्रतिशत वोट मिला था जिसमे अगर 3 या 4% और जोड़ दिया जाए तो भाजपा आधी शीटो पर काबिज हो जाएगी. इसलिए ममता बनर्जी ऐसी ड्रामेबाजी करके भाजपा को पुन सत्ता की तरफ ले जाने में मदद कर रही है.
2.दूसरा विकल्प यह भी है की आरएसएस को दिख गया है की उसकी टीम नम्बर ए "कोंग्रेस" सरकार बनाने की स्तिथि में नही है, उसकी टीम नम्बर "बी" भाजपा की विदाई भी तय है इसलिए इस स्तिथि में "ब्राह्मण" ममता बनर्जी को इतना मशहूर कर दिया जाए की वर्तमान चुनाव भाजपा वर्सेस ममता बनर्जी होकर सत्ता इन दोनों में से एक को मिले, जिससे की सत्ता के सर्वोच्च पर ब्राह्मण अपना प्रभुत्व बरकरार रख सके.
3.आगर आप सोचते है की ममता बनर्जी की छवि "कट्टरवादी हिन्दू" विरोधी है तो ध्यान से सोचने के लिए आपको एक उदाहरण देता हूँ की "प्रणव मुखर्जी" पूरी जिन्दगी हिन्दू कट्टरवाद वाली "आरएसएस" का विरोध दिखाकर कोंग्रेस की तरफ से लड़ते रहे और अंत में आरएसएस ने उन्हें "भारत रत्न" दे दिया.
आपको अजीब लग सकता है. लेकिन ध्यान से आरएसएस के नजरिये से सोचिये, आपको सच्चाई मिलेगी.
केवल अम्बेडकरवादी ही इस रणनीति को पकड़ सकते है।
विकास कुमार जाटव
चमारों को पूछकर फुदने गई थी तब तुझे नहीं पता था कि चंदू शादीशुदा है
चंदू का नाम लेकर पूरे समाज को टारगेट करना भारी पड़ जाएगा
जाटव इतने भी बेले नहीं है कि तुझे छोड़ देंगे चंदू से तेरा रिश्ता था तो चंदू को बोल जो बोलना है पूरे समाज को टारगेट मत कर
चंदू ने तेरी जवानी का मजा लिया है तो किसने रोका कार्यवाही करवा जाकर
अच्छा यह तो बता देते की;
"सपा को अपनी लड़ाई में मानते हो या नही?"
मतलब दामोदर यादव ने जातीय पक्ष को पहला महत्व देते हुए श्री अखिलेश यादव की सपा का नाम तक नही लिया, जबकिं सपा भी मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ती है।। केवल "बसपा" के बारे में कहना , यह धूर्तता है।।
इसे कहते है लक्ष्मण यादव की तरह "जातीय पक्ष" पहले, बाकी बहुजन, वग़ैरह बाद में।
चन्द्रशेखर ने एक से बढ़कर एक नमूना पकड़ पड़कर अपने सन्गठन में जोड़ रखा है । जो ऐसी हरकतें करते है जिससे;
"10 में से 9 चन्द्रशेखर को गालियाँ सुनाते है"
☺️😊
वैसे ऐसे लोग बसपा को लाभ पहुचाते है
अब इसके इस शब्दो से किसके स्वाभिमान व मनोबल पर एकाएक चोट लगी? उसी वर्ग के जिसमे सेंध लगाना चाह रहे है। ऐसे में पुनः बसपा से मजबूती से जुड़ता है।
विकास कुमार जाटव।
यूपी के हरदोई में सनबीम स्कूल की प्रिंसिपल ममता मिश्रा है इनकी भाषा देखिए कैसे पैरेंट्स को जलील कर रही हैं,
साथ में बोल रही कोटा वाले बच्चों का नाम हटाओ रजिस्टर से।
पंजाब के दलित भारत का ऐसा समुदाय है जिसके सामने से उंसके वोट लेकर उसका मूर्ख बना दिया गया ओर अभी तक उसे दिखता तक नही।
पँजाब में सबसे ज्यादा एससी है। लगभग 32 से 38% के बीच तक है। आम आदमी पार्टी को दनादन वोट दिया और वो सरकार बना ली। जाट मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। अब इससे आगे सुने;
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के प्रत्याशी का डेटा देखे किये;
राघव चड्ढा (खत्री पंजाबी सिख))
डॉ संदीप पाठक (ब्राह्मण)
अशोक कुमार मित्तल (बनिया)
संजीव अरोड़ा (खत्री पंजाबी सिख)
हरभजन सिंह (रामगढ़िया ओबीसी)
संजय सिंह (ठाकुर)
एनडी गुप्ता (बनिया)
सुशील गुप्ता (बनिया)
बलबीर सिंह सीचेवाल (सम्भवतः सिख जाट)
विक्रमजीत सिंह साहनी = खत्री पंजाबी सिख
अब लाला केजरीवाल के राज्यसभा प्रत्याशियो का प्रतिशत देखे;
ब्राह्मण व पंजाबी खत्री सिख = 40%
वैश्य = 30%
छत्रिय = 10%
जट सिख = 10%
सिख ओबीसी = 10%
एससी = क्या करोगे बनकर
एसटी = क्या करोगे बनकर
अल्पसंख्यक = भाजपा को रोकना है। उससे ज्यादा मत सोचो।
अब ब्राह्मण, खत्री पँजाबी, बनिया से 7 या 8 सांसद एससी का बहुताय वोट से बने एमएलए के वोट से सांसद बनकर भाजपा में भाग गए।
लाला केजरीवाल को पता है कि एससी छोटे लोग है, और उनकी मानसिकता भी छोटी है, भावनाओ में बह जाते है, तथ्यो का अवलोकन नही करते और उस स्तर तक अपनी जड़ ही खोदने पर उतारू हो जाते है ।।इन्हें दफ्तर में बाबा साहब की तश्वीर लगाकर खुश कर दो, समझो एससी को काफी दे दिया।
राजनीति में अगर आप भावनाओ मे बह रहे है तो घर बैठे। इन्हा समाज के प्रतिनिधित्व के आंकडे देखे जाने चाहिए।
विकास कुमार जाटव
इनका नाम श्रद्धेय श्री यशपाल गौतम है। ये बहुजन समाज पार्टी के मिशनरी कार्यकर्ता थे।
श्रद्धेय यशपाल गौतम इस भारी कट-आउट को लेकर आदरणीया बहन कु0 मायावती जी की हर रैली में जाते थे।
कोरोना महामारी में श्रद्धेय श्री यशपाल गौतम का आकस्मिक निधन हो गया था।
दिवंगत यशपाल गौतम बेहद ही साधारण और गरीब परिवार से थे। इनके आकस्मिक निधन के बाद परिवार आर्थिक तंगी से भी गुजर रहा था।
दिवंगत श्री यशपाल गौतम के बच्चों की शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी सामाजिक संस्था डॉ0 अम्बेडकर अकादमी मझौता,गाजियाबाद ने ली।
ध्यान रहे ! डॉ0 अम्बेडकर अकादमी मझौता,गाजियाबाद को बीएसपी समर्थित अधिकारी और प्रोफेसर संचालित करते हैं।
कल यूपी बोर्ड का 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम जारी हुआ।
दिवंगत श्री यशपाल गौतम की पुत्री इति गौतम ने यूपी बोर्ड की 10वीं कक्षा में 564/600 (94%) अंक प्राप्त कर अपने दिवंगत पिता श्री यशपाल गौतम एवं समाज का नाम रौशन किया।
बिटिया को बधाई। ऐसे ही अपने पिता का नाम रौशन करो। जय भीम! जय भारत!
चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया, न्यायमूर्ति के॰ जी॰ बालकृष्णन के साथ मंच साझा करते हुए अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा था।
प्रोग्राम था जश्न -ए -संविधान (14 अप्रैल, 2006 ).
The arrest of our colleague Nikhil Chawda by the @AhmedabadPolice is a disgrace to justice and freedom of expression. His only “offense” was responding to posts that insulted B. R. Ambedkar.
In this country, it seems Dalits are not even allowed the right to express their voice.
नाम : अनुज शुक्ला
जाति : ब्राह्मण
धर्म : हिन्दू
मानसिकता : मनुवादी एवं जातिवादी
कुकृत्य 1 : अनुसूचित जाति वर्ग की नाबालिग बच्ची का फ़ोटो उसकी बिना मर्जी के सोशल मीडिया पर गलत उद्देश्य के साथ डालना।
कुकृत्य 2 : अनुसूचित जाति वर्ग की नाबालिग सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के फोटो के ऊपर बेहद ही शर्मनाक,अशोभनीय एवं महिला विरोधी टिप्पणी करना।
हिमांगी गौतम इटावा की रहने वाली हैं। यह सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं।
अनुज शुक्ला ने एससी वर्ग की नाबालिग बच्ची की फोटो एक वीडियो में से ली है,जिसमें वह बौद्ध भन्ते को खाना परोस रही हैं।
अब यह जातिवादी मानसिकता का व्यक्ति अनुज शुक्ला इस फोटो के साथ बेहद ही शर्मनाक व महिला विरोधी बातें लिख रहा है।
प्रिय @Uppolice@etawahpolice, कृपया मामला संज्ञान में लीजिए और इस व्यक्ति के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट 1989 और BNS 2023 की सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर उचित वैधानिक कार्यवाही कीजिये।
@AnujShukla00009@Uppolice
हिमांगी गौतम इटावा की काफी प्रसिद्ध इंफ्लुएंसर है। यह बन्दा बिना उनकी सहमति के गलत तरीके से फ़ोटो का यूज कर रहा है। कृपया इसपर संज्ञान ले।
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अब तो हाल ये है कि कुछ लोगों के हिसाब से दुनिया का हर आविष्कार, हर खोज व हर सिद्धांत आदि वेद से ही निकले हैं।
@Khurpench_@khurpenchh