Two of India's leading experts on the Andaman & Nicobar Islands, Dr. Manish Chandi and Dr. Vardhan Patankar sat down with me to explain what is truly at stake in Great Nicobar.
From the leatherback turtles that cross entire oceans to nest at Galathea Bay, to birds, fish and wildlife found nowhere else on Earth, to the stunning coral reels that could be wiped out completely - these islands are an ecological treasure unlike anything India has.
We also spoke about something deeply troubling: how the Forest Rights Act was bypassed, and how the Nicobarese and Shompen tribal communities were manipulated into signing away land that is rightfully theirs.
This is a podcast every Indian should hear. The more people understand what is being destroyed - and how quietly it is being done - the harder it becomes for this government to get away with it.
Tune in:
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#GreenOverGreed
PM @narendramodi जी,
INS Baaz, UPA सरकार में स्थापित किया गया नौसैनिक अड्डा, पिछले पाँच साल से विस्तार की माँग कर रहा है। मगर, सरकार ने नौसेना की बात अनसुनी कर दी।
अगर आप Great Nicobar project को देश की सुरक्षा से जोड़ते हैं तो आज ही INS Baaz का विस्तार कीजिए। मैं पूरी तरह समर्थन में हूं और पूरा विपक्ष आपके साथ है।
INS Baaz तट पर है - इसके लिए न 1.5 करोड़ पेड़ काटने की ज़रूरत है, न जनजातियों को विस्थापित करने की।
पर सच्चाई यह है - यह project देश की सुरक्षा के लिए नहीं है। यह project है हमारे देश की सबसे अनमोल ज़मीन को एक व्यापारी के हाथों सौंपने के लिए। और हमेशा की तरह इसके लिए भी सेना के नाम का सहारा लिया जा रहा है।
@narendramodi जी - देश की रक्षा सेना करती है। होटल और casino नहीं।
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राजेश एक्सपोर्ट घोटाला और नरेंद्र मोदी
👉एक और घोटालेबाज़ राजेश मेहता के साथ मोदी जी का पुराना नाता सामने आ रहा है
▪️जिस राजेश मेहता ने 15 लाख करोड़ से ऊपर का स्कैम कर के लाखों छोटे shareholders की लुटिया डुबो दी - उसके मोदी जी से प्रगाढ़ संबंध हैं - खूब सारे पुराने फोटो वगैरह भी हैं
▪️ खैर, राजेश एक्सपोर्ट्स, एक भारतीय ज्वेलरी कंपनी ने FY21 से FY25 के बीच 5 वर्षों में ₹15.15 लाख करोड़ का फर्जी राजस्व मतलब revenue दिखाया - सीधे साफ़ शब्दों में, उसकी 99% कमाई फर्जी थी!
▪️ कंपनी ने अपनी विदेशी कंपनियों, खासकर स्विस इकाई Valcambi SA से भारी राजस्व दिखाया. पर उसके पास न तो कोई इनवॉइस था, न ग्राहक का डिटेल, न इन्वेंटरी, न ही खरीद फरोख्त की कोई पुष्टि
▪️ प्रमोटर से जुड़ी कंपनियों में बिना मंजूरी या खुलासे के धड़ल्ले से फंड डायवर्ट किए गए
▪️ 3 जून 2026 को SEBI ने अपने 109 पन्नों के आदेश में कंपनी के मालिक और चेयरमैन राजेश मेहता के साथ ही साथ कंपनी पर भी Indian market में ट्रेडिंग करने से बैन लगा दिया
▪️ स्टॉक 80% गिर गया - एक ही दिन में shareholders की ₹12,726 करोड़ की संपत्ति बर्बाद हो गई. हमेशा की तरह छोटे निवेशक ने ही इन बड़े घोटालों की कीमत चुकाई
▪️ LIC ने कंपनी में ₹2,000 करोड़ से ज्यादा निवेश किया था और स्टॉक क्रैश होने पर उसने करीब ₹1,600 करोड़ का नुकसान उठाया - जो आम भारतीयों का पैसा है
▪️ यह घोटाला 5 साल तक मोदी सरकार की नाक के ठीक नीचे चला - प्रधानमंत्री राजेश मेहता के साथ फोटो खिंचवाते रहे
👉 इस स्कैम से एक भारत में क्रोनी कैपिटलिज्म, conflict of interest और मोदी सरकार तथा प्रधानमंत्री के रिकॉर्ड भ्रष्टाचार का पता चलता है
👉 करोड़ों का चूना लगा कर बड़े बड़े ठग नरेंद्र मोदी की नाक के नीचे से विदेश फरार हो गए. और पिछले 12 साल में उनमें से एक को भी यह सरकार भारत वापस नहीं ला पाई
👉 राजेश मेहता के साथ फोटो खिंचवाने के अलावा - प्रधानमंत्री ने इस घोटाले में लाखों छोटे निवेशकों की मेहनत की कमाई को बचाने और वापस दिलाने के लिए क्या कदम उठाए?
👉👉 उनका खोखला और फर्जी नारा “ना खाऊँगा, ना खाने दूँगा” एक बार फिर जोर से गूंज रहा है!
👉👉15 लाख करोड़ में 12 ज़ीरो होते हैं, गिनते गिनते उँगलियाँ थक जायें
👉👉लेकिन मोदी जी की कृपा है - चौतरफा घोटाले पनप रहे हैं - और सबसे साहेब का पुराना नाता है!
It’s not about swimming skill or scuba expertise.
𝐈𝐓’𝐒 𝐅𝐄𝐀𝐑 𝐕𝐒 𝐅𝐄𝐀𝐑𝐋𝐄𝐒𝐒𝐍𝐄𝐒𝐒
That’s the difference between the two videos.
That’s the difference between these two men.
Are you dumb or delusional?
Just yesterday RBI lowered its GDP growth forecast to 6.6% for the current year. Said oil prices, war & weather risks mount
Petrol past ₹100
Diesel near ₹100
CNG costlier by ₹8
Electricity prices up
Rupee is falling
Net FDI negative
FIIs exiting
तीन काले कृषि क़ानून पर तो नरेंद्र मोदी को मुँह की खानी पड़ी थी, इसलिए इस बार अडानी को पीछे के दरवाज़े से खेती के क्षेत्र में घुसाने की साज़िश रची गई है. समझिए कैसे👇
• Food Corporation of India अनाज को सुरक्षित रखने के लिए 20,000 करोड़ रुपये का Hub & Spoke प्रोजेक्ट लाया है, जिसमें साइलो बनाए जायेंगे
• शुरू में इस टेंडर में anti monopoly clause था जिससे कि एक ही कंपनी का क़ब्ज़ा ना हो जाये
• लेकिन धीमे से नीति आयोग और वित्त मंत्रालय की सलाह पर यह क्लॉज़ हटा दिया गया
• बस फिर जादू हुआ. 134 साइलो के लिए टेंडर निकाला गया, जिसमें से 110 साइलो के टेंडर Adani Agri Logistics और Leap India को मिल गए
• अडानी ने अकेले लगभग 9,700 करोड़ रुपये के टेंडर जीत लिया
• अडानी इन साइलो में अनाज रखने के लिए और उसके आवा गमन का पैसा लेगा. और यह टेंडर 30 साल तक के लिए होगा
👉यह और कुछ नहीं बल्कि खाद्यान्न और खेती में चुपके से अडानी की पिछले दरवाजे से एंट्री है - और इसके लिए anti monopoly clause भी हटाया गया.
CM यानी करप्ट माउथ
• ANI पर गाली।
• सदन में नेता प्रतिपक्ष जैसे वयोवृद्ध को अभद्र शब्दों से संबोधित किया।
• गुरुजनों से अभद्र वाचिक व्यवहार
• मंच से गाली।
• और अब भाषण का यह निम्न स्तर।
आख़िर क्यों?
विज्ञान कहता है की किशोरावस्था में किया गया “वनस्पति” का अत्यधिक सेवन व्यक्ति के बोलने और समझने की छमता को प्रभावित करता है। वही मनोविज्ञान कहता है कि बचपन और किशोरावस्था के अनुभव व्यक्ति की भाषा, व्यवहार और व्यक्तित्व पर गहरी छाप छोड़ते हैं। वही संस्कार आगे चलकर सार्वजनिक जीवन में भी झलकते हैं।
CM के “करप्ट माउथ” होने की वजह शायद यही है।
जिन्हें CM का इतिहास नहीं पता, उनके लिए यह दबाई गई जानकारी है:
• मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय में सहयोग कर रहे थे।
• उस समय उनके पास तीन बसें और एक ट्रक था।
• संभवतः उन्होंने यह भाषिक अभद्रता उसी दौर में, डग्गामार वाहन चलवाते समय सीखी।
• अजय सिंह बिष्ट के पिता श्री आनंद सिंह बिष्ट और गोरखनाथ मठ के पूर्व महंत श्री अवैद्यनाथ जी यानी श्री कृपाल सिंह बिष्ट जी, रिश्ते में भाई बताए जाते हैं।
• कहा जाता है कि बाद में उनके चाचा ने ही उन्हें मठ में बुलाया।
• महंत श्री अवैद्यनाथ जी ने अपने भतीजे अजय सिंह बिष्ट को कुछ ही वर्षों में मठ का उत्तराधिकारी बना दिया।
सवाल उठता है: उत्तराधिकारी के रूप में उन्हीं को क्यों चुना गया? क्या यह केवल योग्यता का निर्णय था या रिश्तेदारी का भी प्रभाव था? पहले मठ की गद्दी मिली, फिर कुछ ही वर्षों में लोकसभा की सीट भी।
स्पष्ट किया जाए कि मठ में महंत चुनने के लिए क्या कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया हुई थी? डग्गामार वाहन चलवाने वाला व्यक्ति क्या 4 वर्षों में ही इतना योग्य हो गया? यदि नहीं, तो क्या इसे ‘पक्षपाती परिवारवाद’ नहीं कहा जाना चाहिए?
और अंत में- पद और परिधान रिश्तों और समय की मदद से मिल सकते हैं, पर भाषा और व्यवहार नहीं।
#असफल_मुख्यमंत्री
#CM_CorruptMouth
भाजपा राज में महाभ्रष्ट ‘शासन-प्रशासन’ ने जनता का विश्वास खो दिया है। हत्याओं और एनकाउंटर ने उप्र की छवि को पूरी तरह नकारात्मक बना दिया है। भाजपा ख़ुद अपराधी है।