Newsclick पर झूठ बोलने वाले इस शख्स में इतनी भी हिम्मत नहीं की ट्रम्प की आलोचना तो दूर अमरीका का नाम भी ले सके . विदेशी साजिश पर इनकी प्रेस वार्ता याद है? यहां दिख रहा है- मगर ये कायर खामोश हैं . Shame on you Anurag
जो लोग लालू जी को देखते ही ,उनके हाथों से खाना लेते ही रो पड़े सोचिए उनके मन में लालू जी के प्रति कितना प्रेम-आदर है।
ये कोई NRI नहीं ,वो ग़रीब-गुरबा है जो लालू जी को अपना मसीहा मानता है, मानता था और मानता रहेगा।
ये प्रेम पाना हर किसी के लिए संभव नहीं।
तो नेहरू जी को किसने कहा था कि वे इतने जल्दी जन्में? इंटरनेट क्रांति में नेहरू का दौर होता तो उन्हें भी पता चलता कि इन दिनों किन क्यूटीयों से पाला पड़ता है।
देश में मचा हाहाकार है,
मोदी जिम्मेवार है।
“मोदी है तो बर्बादी है,
और इस बर्बादी से देश को बचाना,
कांग्रेस की जिम्मेदारी है”
📍AICC meeting, Indira Bhawan.
लालू जी केवल एक नाम नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन, सामाजिक न्याय और वंचित तबकों की आवाज़ का एक सशक्त प्रतीक हैं। उन्हें राजनीतिक रूप से समाप्त करने की कोशिशें आज की बात नहीं हैं। जब वे बिहार के मुख्यमंत्री थे, तब भी उनके खिलाफ अनेक षड्यंत्र रचे गए। जब वे देश के रेल मंत्री बने, तब भी उन्हें कमजोर करने और उनकी लोकप्रियता को कम करने के प्रयास हुए। लेकिन इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिन नेताओं की जड़ें जनता के बीच गहराई तक होती हैं, उन्हें साजिशों के बल पर मिटाया नहीं जा सकता।
आज भी लालू जी को राजनीतिक रूप से खत्म करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन उनकी पहचान किसी पद, सत्ता या कुर्सी तक सीमित नहीं है। उनकी पहचान उन करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ी हुई है, जिन्हें सदियों तक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से हाशिये पर रखा गया। यही कारण है कि उनकी विरासत को मिटाना संभव नहीं है। न वे कभी मिटे हैं, और न ही कभी मिटाए जा सकते हैं।
यदि हम समाज के दबे-कुचले, शोषित, वंचित, पिछड़े वर्गों, दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के उत्थान की बात करें, तो वहाँ लालू जी का योगदान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने उन वर्गों को आवाज़ दी, जिन्हें लंबे समय तक व्यवस्था में सम्मानजनक स्थान नहीं मिला था। उन्होंने सामाजिक न्याय की उस धारा को मजबूत किया, जिसने समाज के अंतिम व्यक्ति को भी सम्मान और अधिकार दिलाने का प्रयास किया।
यदि राजनीतिक सशक्तिकरण की बात करें, तो लालू जी का नाम प्रमुखता से सामने आता है। उन्होंने उन समुदायों को राजनीति की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया, जो पहले केवल वोट देने तक सीमित थे, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन पाते थे। उन्होंने लोकतंत्र को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व का साधन बनाया।
यदि आर्थिक सशक्तिकरण की चर्चा करें, तो भी लालू जी का योगदान महत्वपूर्ण दिखाई देता है। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के लिए अवसरों का विस्तार करने, संसाधनों तक उनकी पहुँच बढ़ाने और सम्मानजनक जीवन की दिशा में उन्हें आगे बढ़ाने का कार्य किया। उनका राजनीतिक जीवन केवल सत्ता प्राप्ति का नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और बराबरी की लड़ाई का इतिहास है।
इसीलिए लालू जी एक व्यक्ति मात्र नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता, सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों के संघर्ष का एक जीवंत अध्याय हैं
सामाजिक न्याय के पुरोधा, वंचितों की आवाज़ और करोड़ों लोगों की उम्मीद, आदरणीय लालू प्रसाद जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामनाएँ।
मोदी इस जन्म में तो नेहरु से बड़े नहीं हो सकते . चाहे मंत्रियों को मंदिर भेजकर पूजा अर्चना करवा लें . चाहे NDA नेताओं से वंदना करवा लें . चाहे भक्तों से तालियां बजवा लें . चाहे मीडिया से चौबीसों घंटे चाटुकारिता करवा लें .
नेहरु होने के लिए सालों - साल जेल में गुजारने होते हैं . आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लेना होता है .Glimpses of world history और Discovery of india जैसी कालजयी रचनाएं लिखनी होती है . नफ़रत मुक्त राजनीति
करते हुए देश के लिए बड़े - बड़े संस्थान गढ़ने होते हैं. विपक्ष का सम्मान करना होता है . पादुका पूजकों का समूह और अंध भक्तों की फौज मोदी को नेहरु नहीं बना सकती .
पहली बार बिना किसी सुरक्षा के लालू जी पटना की सड़कों पर निकले हैं। अगर लालू जी को किसी भी प्रकार की कोई समस्या होती है तब इसके जिम्मेदार सम्राट चौधरी होंगे। राजनीति में इतनी भी घृणा ठीक नहीं है।
मैं तो ये सोच रहा ही कि देश में सबसे ज़्यादा समय से कोई व्यक्ति राज्य और भारत सरकार का मुखिया रहा है उसे आपने नेहरू जी के सामने ऐसा दिखाया है तो राहुल गांधी क्या हाल होगा आपके इस हिसाब से 😂😂
कितनी सत्ता चाहिए BJP को?
कितनी सीटों से इनका पेट भरेगा?
कितना और नीचे गिरेंगे?
कितना और कलंकित होंगे?
कितनी और संस्थाओं का दम घोटेंगे?
मध्यप्रदेश से काँग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन रद्द करना BJP का एक और कुत्सित पैंतरा है
उनके नामांकन में किसी गलती या गैर-खुलासे का आरोप कोरी बकवास है और कांग्रेस से एक सीट छीनने की घटिया कोशिश है
जब हमारे MLA नहीं तोड़ पाये तो नामांकन खारिज कराने की नीचता पर उतर आए
संविधान को ताक पर रख कर यह लोकतंत्र की दिनदहाड़े हत्या है
अगर आपकी लोकतंत्र में ज़रा सी भी आस्था है तो इसका विरोध कीजिए - क्योंकि BJP के लालच का कोई अंत नहीं है - और इसका ख़ामियाज़ा मेरा देश उठा रहा है
तेरे इस लॉजिक से तो अब तक तुझे भी बी जे पी ने अपना पालतू कुत्ता बना लिया होता, लेकिन नहीं बना पाए क्योंकि तुझे सिर्फ आप का ही पालतू रहना है। तो इतना समझ जो बिकाऊ है वही बिकेगा ।
BJP is desperately trying to make India into a one party dictatorship.
Shiv Sena, NCP, AAP, BJD, TMC..
They are breaking up one political party after another using money power, bribery, threats of arrest, extortion. This is not just highly undemocratic but it is setting a new precedent for the future.
It is pretty much a guarantee now that the day BJP goes out of power in centre, they will also be broken up into multiple pieces.
राहुल गांधी जी सहित पूरी कांग्रेस पार्टी अपने परिवार के सदस्य हमारे साथी राष्ट्रीय सचिव सूरज हेगड़े के परिवार के साथ इस दुख की घड़ी में खड़ी है।
ऐसी कोई वीडियो मोदी जी की हो तो भाजपा वालो से अनुरोध है कि यहाँ डाले, ताकि पता चले मोदी जी भी अपनी पार्टी के किसी पदाधिकारी के यहाँ दुख में शामिल होते हैं
हा भाई पहले जब प्रधानमंत्री के विमान में यात्रा करने को मिलता था तो सब सही था अब जब कोई घास नहीं डाल रहा है तो भाषा पे प्रश्न उठाया जा रहा। असली गोदी मीडिया इसे ही कहते है।
चित्रा, शायद तुमने असावधानी से पीआईबी PIB की विज्ञप्ति को अपनी ओर से जारी कर दिया है…क्योंकि तुम्हारी जैसी ‘प्रखर-निडर’ सितारा पत्रकार ऐसे गद्गद भक्तिभाव से किसी की आरती नहीं कर सकती। यह पत्रकार की भाषा नहीं है।