जो शजर सूख गया है वो हरा कैसे हो
मैं पयम्बर तो नहीं मेरा कहा कैसे हो ॥
जिस को जाना ही नहीं उस को ख़ुदा क्यूँ मानें
और जिसे जान चुक��� हैं वो ख़ुदा कैसे हो ॥
दूर से देख के मैं ने उसे पहचान लिया
उस ��े इतना भी नहीं मुझ से कहा कैसे हो ॥
~शहज़ाद अहमद
अब किसी की कहाँ पड़ी है मुझे
चोट ऐसी ही कुछ लगी है मुझे
ऐ मेरे यार अब तेरी सूरत
ज़र्र��� ज़र्रे में दिख रही है मुझे
तेरे जाने से बस उदास हूँ मैं
और किस बात की कमी है मुझे
साँस लेना हो जैसे मौत की कश
साँस थमना भी ज़िन्दगी है मुझे
#संजू_शब्दिता
कविता संग्रह : नदियाँ नहीं रुकतीं
लेखक : आदित्य रहबर
प्रकाशक : पंक्ति प्रकाशन @Hindi_panktiyan
यह किताब आप अमेजन से मंगवा सकते हैं। लिंक बायो में है।
(ट्वीट क्रेडिट: @smritiii_ )
तुम कहते हो कि तुम्हें
बारिश से प्यार है
लेकिन उसमें चलने के लिए
तुम छाता इस्तेमाल करते हो
तुम कहते हो तुम्हें हवा से प्यार है
लेकिन जब वो आती है तो
तुम खिड़कियां बंद कर देते है
इस लिए मैं डरता ���ूँ
जब तुम कहते हो
कि तुम मुझे प्यार करते हो।
~ बॉब मार्ले
एक ही मुज़्दा सुब्ह लाती है
धूप आँगन में फैल जाती है
सोचता हूँ कि उस की याद आख़िर
अब किसे रात भर जगाती है
क्या स��तम है कि अब तिरी सूरत
ग़ौर करने पे याद आती है
कौन इस घर की देख-भाल करे
रोज़ इक चीज़ टूट जाती है
#जौन_एलिया
💐💐 सुब्ह बाख़ैर 🙏🙏
Tired —> Nap
Sad —> Music
Stressed —> Walk
Angry —> Exercise
Burnt out —> Read
Feeling lost —> Pray
Overthinking —> Write
Anxious —> Meditate