#जननायक_प्रताप जब इब्राहि��� लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थे।तब उन्होने अपनी माँ से पूछा कि- हिंदुस्तान से क्या लेकर आए? तब माँ का जवाब मिला- ”उस महान देश की वीरभूमि हल्दीघाटी से एक मुट्ठी धूल लेकर आना,जहाँ का राजा अपनी प्रजा के प्रति व��़ादार था कि उसने के बदले अपनी मातृभूमि को चुना।”
#जननायक_प्रताप अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है,तो आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे, पर बादशाहत अकबर की ही रहेगी | लेकिन महाराणा प्रताप ने किसी की भी अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया |
#जननायक_प्रताप महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलोग्राम और कवच का वजन भी 80 किलोग्राम ही था| कवच,भाल��,ढाल और हाथ में तलवार का वजन मिलाएं तो कुल वजन 207 किलो था।
इतना वजन लेकर महाराणा युद्ध भूमि में रण लड़ते थे।
#जननायक_प्रताप अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है,तो आधे हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे,पर बादशाहत अकबर की ही रहेगी | लेकिन महाराणा प्रताप ने किसी की भी अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया |
#जननायक_प्रताप मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में अकबर की फौज को अपने तीरो से रौंद डाला था । वो महाराणा प्रताप को अपना बेटा मानते थे और राणा बिना भेदभाव के उन के साथ रहते थे ।
#जननायक_प्रताप महाराणा का घोड़ा चेतक महाराणा को 26 फीट का दरिया पार करने के बाद वीरगति को प्राप्त हुआ | उसकी एक टांग टूटने के बाद भी वह दरिया पार कर गया। जहाँ वो घायल हुआ वहां आज खोड़ी इमली नाम का पेड़ है,जहाँ पर चेतक की मृत्यु हुई वहाँ चेतक मंदिर है |
#जननायक_प्रताप आगे अल बदायुनी लिखता है कि - वो हाथी इतना समझदार व ताकतवर था कि उसने हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को मार गिराया था ।
#जननायक_प्रताप जनशक्ति को जागृत करने हेतु प्रताप ने भीषण प्रतिज्ञा की ‘‘जब तक मैं शत्रुओं से अपनी मातृभूमि को स्व��ंत्र नहीं करा लेता तब तक मैं न तो महलों में रहूँगा, न ही सोने चाँदी के बर्तनों में भोजन करूँगा। घास ही मेरा बिछौना तथा पत्तल दोनें ही मेरे भोजन पात्र होंगे।‘‘