जाति का सर्टिफिकेट माँगने वाले, स्वयं की जाति को 'बैकवर्ड' में सम्मिलित करने के लिए आंदोलन करने वाले कह रहे हैं कि आरक्षण किसी की दया नहीं है! वर्तमान रूप में, दया ही है, भीख ही है, बैसाखी ही है! कमाने वाले सवर्ण जिस दिन टैक्स देना बंद कर देंगे, तुम्हारी फ़ीस सरकार अपनी जेब से नहीं भरेगी। इसलिए, कृतज्ञता दिखाओ, बकचोदी मत करो।
ट्रेन में कोई कोना नहीं होता। मुसलमान आने-जाने के रास्ते केपी ब्लॉक करते हैं, ट्रेन में भी, सड़कों पर भी। कांवड़ियों की सारी सीट है, हिंदू बैठे हैं, बोल-बम का नारा लगा रहे हैं, तुम्हें क्यों पेट में दर्द हो रहा है? तुम्हारे मस्जिद में या मक्का की फ्लाइट में तो बोल-बम नहीं बजा दिया ना? हिंदू अपने देश में ट्रेन में नाचे नहीं कह कि कोई मुल्ला नाराज़ हो जाएगा! कहाँ है यहाँ कोई मुल्ला?
जगन्नाथ भगवान की डॉक्टरों द्वारा जाँच वास्तविक चिकित्सा नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक धार्मिक परंपरा है ।
समझने के लिए ऐसे समझिए की आपने देखा होगा मुस्लिम धर्मावलंबी मिना नामक स्थान पर स्थित एक कंक्रीट की दीवार को शैतान समझ कर उस पर छोटे-छोटे कंकड़ फेंकते हैं।
पर वाक़ई में वहाँ कोई शैतान तो रहता नहीं है और ना उस पत्थर से उसे चोट लग रही ।
बस वो एक प्रतीकात्मक अनुष्ठान है ।
उम्मीद है आप अच्छे से समझ गए होंगे ।
जगन्नाथ भगवान समस्त विश्व का कल्याण करें।
जय जगन्नाथ ।।।