श्री @narendramodi की सरकार ने एक और व्यवसाय जो अच्छा चल रहा था, उसकी रेड मार दी है। एक नया कानून लाए हैं ताकि आपका ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ तेल लेने चला जाए।
यदि आप कोई सामान या सेवा दे कर विदेशी मुद्रा अर्जित करते हैं, तो आपको अब एक नया फॉर्म भरना होगा, यदि किसी क्लायंट ने आपको पैसे नहीं दिए तो उसका कुछ नहीं होगा, आप दूसरे किसी क्लायंट को अपनी सेवा नहीं दे पाएँगे।
यदि आप विदेशी बच्चों को ट्यूशन देते हैं, फ्रीलान्स ग्राफिक्स, एडिटिंग आदि कार्य करते हैं, तो आपको बर्बाद करने के लिए यह नियम लाया गया है। आप फॉर्म भरते रहिए। कुछ भी मिसमैच हुआ तो आपका पैसा अटका रहेगा जैसे कि एक्सचेंज रेट।
अभी तक @RBI ने स्पष्ट नहीं किया है कि यूट्यूब आदि के माध्यम से धन अर्जित करने वाले इसमें कवर्ड हैं या नहीं? यदि हैं तो उनका क्लायंट कौन है? यदि उसके वीडियो पर चलने वाले विज्ञापन भारतीय लोग देखते हैं तो उसका क्या होगा? यदि विदेशों के लोग देखते हैं तो उसका क्या?
यह सरकार लाइसेंस राज का बाप बन चुकी है। @nsitharaman जी, यदि यह आपके कार्यालय का कार्य है तो थोड़ी बहुत स्पष्टता आवश्यक है। क्या ऐसे विचित्र नियम बनाने से पहले AI से बने पोस्टर डालने के अलावा और कोई स्पष्टीकरण आप लोगों ने कहीं दिया है?
Unfortunately, we are being blocked by certain oligarchs in order to maintain their monopolistic chokehold on the Indian people. You can guess who they are …
This is a crime against the people of India!
कक्षा 7 की पुस्तक में आंबेडकर के कदमों में एक ब्राह्मण को दिखाकर सामाजिक असमानता दूर करने वाली शिक्षा नीति का श्रेय कांग्रेस को नहीं, BJP को जाता है।
#ModiHaiToMumkinHai
I have stopped taking him seriously or listen to him as if a PM is speaking.
His words are just pravachan with no action. There is no substance. Govt is running on the auto mode. Collect taxes, distribute freebies, make the govt, repeat.
No delivery.
आदरणीय @myogiadityanath जी, क्या सामान्य वर्ग में निर्धन परिवार नहीं हैं? उनके लिए कोई कोचिंग, हॉस्टल, स्कॉलरशिप आदि क्यों नहीं है? मुसलमान तक के लिए आपका कोष खुला हुआ है, ब्राह्मणों के लिए नहीं?
ब्राह्मण-ठाकुरों के घर मिट्टी के हैं, सर पर छत नहीं, भिक्षा माँग कर खाने को विवश हैं, हर दिन ऐसे रिपोर्ट दिखता सुनता हूँ। आपको वो बच्चे नहीं दिखते?
सवर्णों लिख नहीं सकते तो रीट्वीट तो कर सकते हो...
तुम्हारे हिस्से की लड़ाई लड़ रहे लोगों को संबल दो, साथ दो, यह लड़ाई छोटी नहीं है...भाई प्रीत सिंह जैसे राष्ट्रवादी लोग निरंतर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
हम समाज को टूटने नहीं देंगे....
घर घर जाकर जगाते रहेंगे और सिर्फ़ दो बात करेंगे।
SCST मोदी एक्ट के दुरुपयोग पर रोक...
#UGC_Rollback को रद्द होने तक...
जिस हाथ से वोट के लिए कमल का बटन दबाया, उसी हाथ से छोटे भाई की चिता जलाई!"
चित्रकूट के देवा द्विवेदी के बड़े भाई का यह दर्दभरा बयान सीधे सत्ता के अहंकार और व्यवस्था की नाकामी पर करारा तमाचा है। एक परिवार ने अपना युवा बेटा खो दिया, लेकिन हुक्मरान और प्रशासन मौन हैं।
यह मौत नहीं, बल्कि सीधे-सीधे कानून के दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है:
• SC/ST एक्ट या प्रताड़ना का हथियार?
क्या इस कानून का इस्तेमाल अब बिना किसी ठोस जांच के सीधे निर्दोषों को मानसिक रूप से तोड़ने और उन्हें मौत के मुंह में धकेलने के लिए किया जाएगा?
• जिस जनता ने आपको वोट देकर कुर्सी पर बिठाया, आज उसी के घर का चिराग बुझ गया। क्या चुनावी वादों में मसरूफ सत्ता को इस परिवार की चीखें सुनाई नहीं दे रहीं?
My salute to the Indian pilot Captain Smit Machchhar for his extraordinary bravery.
Despite being stabbed and seriously injured, he fought back, resisted, opened the cockpit door, and enabled passengers and crew to overpower the attacker — preventing a catastrophic mid-air disaster.
He saved the lives of 174 people, including Israeli citizens and other nationals.
I wish Captain Machchhar a speedy and full recovery.
He is a true hero.
सोचिए, मात्र 22 साल का लड़का था देवा द्विवेदी। 22 साल क्या age होती है? कॉलेज का लड़का, पढ़ने-लिखने वाला और ब्राह्मण था और मोदी एक्ट, जिसे SC-ST Act भी कहा जाता है कुछ लोगों के द्वारा, उसमें उसे फँसाया गया और अंत में उसने आत्महत्या कर ली।
अब एक और नाम याद आता है, विष्णु तिवारी का। विष्णु तिवारी वो भी 22 ही वर्ष के थे। जब वो आगरा सेंट्रल जेल से बाहर निकले तो 45 के हो चुके थे।
माता-पिता, दो भाई की मृत्यु हो चुकी थी, परिवार की ज़मीन बिक गई और रिहाई के बाद उनके सामने फिर से जीवन आरंभ करने का प्रश्न खड़ा हो गया।
सरकार को समझना चाहिए कि सबके सहने की एक सीमा होती है, और उसके बाद आम नागरिक क़ानून अपने हाथ में लेने लगता है।
8वीं क्लास की NCERT किताब में ये लिखा है:
-ब्राह्मण आर्य थे, बाहर से आये थे
-उन्होंने मूलनिवासियों पर आक्रमण किया, उनको दबाया
-भारत मूलनिवासियों का है
-ब्राह्मणों ने धर्म की तलवार से लोगों की संपन्नता का गला काट दिया
-200 साल पहले महिलाओं को कोई अधिकार नहीं थे, हिंदू और मुसलमान, दोनों कई पत्नियां रखते थे, स्त्रियों को पतियों की चिता के साथ जला देते थे
-बहुत जातिवाद था-ब्राह्मण क्षत्रिय खुद को ऊंचा मानते थे, दलितों के साथ बड़ा अत्याचार हुआ
-अम्बेडकर ने बहुत जातिवाद सहा
-फुले नीची जाति के थे, उनकी गुलामगिरी में जाति व्यवस्था की आलोचना की, बड़ी अच्छी अच्छी बातें लिखीं
और भी बहुत कुछ👇👏👏
No placards. No media outrage. No Vivek Srivasta-like creatures crying and howling through the night for justice for this 20 to 22-year-old Hindu youth.
A 22-year-old Brahmin youth, Deva Dwivedi, died by suicide in fear of the SC-ST Act.
A fight between two families took place in July in Pateria village, Manikpur, Chitrakoot.
An SC-ST Act case was filed against Deva in July 2026.
Deva Dwivedi was under severe mental pressure because of this fear.
But he won't give them TRP.
Neither will his death matter to vote-bank-hungry demons.
This is what happens when outrage is selective, justice is selective, and even death is filtered through political usefulness.
#SCSTActMisuse
Markets are crashing like anything and its mostly because of the manipulation done by the govt in all data they publish and Tax terrorism that they have unleashed on India