लोकतंत्र और न्याय के पक्षधर डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने एक ऐसे राष्ट्र की कल्पना की थी जहां समानता पनपती हो। उनकी विरासत हमें लचीलेपन की शक्ति और न्याय के लिए लड़ने का महत्व सिखाती है।
आप सभी को बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर जी कि 135वी जयंती का शुभकामनाएं
- डॉ. बी आर अम्बेडकर 🙏💙#jaibhim
पटना उच्च न्यायालय में हाल ही में सात नए जजों की नियुक्ति और उनमें सामाजिक प्रतिनिधित्व के पूर्ण अभाव ने एक बार फिर न्यायपालिका में व्याप्त संरचनात्मक असमानता को उजागर कर दिया है। यह अत्यंत गंभीर विषय है कि बहुजन समाज (अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों) से योग्य एवं अनुभवी अधिवक्ता उपलब्ध होने के बावजूद नियुक्तियों में उनकी भागीदारी नहीं है।
पटना उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम में तथाकथित सवर्ण वर्चस्ववादी तंत्र पर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायपालिका यदि समाज की विविधता का प्रतिनिधित्व नहीं करेगी, तो सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता के दावे कमजोर पड़ जाएंगे।
कॉलेजियम व्यवस्था को लेकर लंबे समय से पारदर्शिता, जवाबदेही और सामाजिक बहिष्करण के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया की समीक्षा कर एक ऐसी पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिसमें समाज के सभी वर्गों को न्यायपूर्ण अवसर मिले।
हम @mygovindia से मांग करते हैं कि ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विस कमीशन का गठन कर न्यायिक नियुक्तियों में सामाजिक प्रतिनिधित्व, पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं। देश का संविधान 140 करोड़ भारतीयों का है, इसलिए न्यायपालिका में भी भारत की सामाजिक विविधता का प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।
@BhimArmyChief#Collegium सिस्टम के जगह कोई judicial public service Commission जैसा कोई आयोग बनना चाहिए जिससे सभी लोगो को अपना प्रतिभा दिखाने का मौका मिले।
पटना उच्च न्यायालय में हाल ही में सात नए जजों की नियुक्ति और उनमें सामाजिक प्रतिनिधित्व के पूर्ण अभाव ने एक बार फिर न्यायपालिका में व्याप्त संरचनात्मक असमानता को उजागर कर दिया है। यह अत्यंत गंभीर विषय है कि बहुजन समाज (अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों) से योग्य एवं अनुभवी अधिवक्ता उपलब्ध होने के बावजूद नियुक्तियों में उनकी भागीदारी नहीं है।
पटना उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम में तथाकथित सवर्ण वर्चस्ववादी तंत्र पर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायपालिका यदि समाज की विविधता का प्रतिनिधित्व नहीं करेगी, तो सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता के दावे कमजोर पड़ जाएंगे।
कॉलेजियम व्यवस्था को लेकर लंबे समय से पारदर्शिता, जवाबदेही और सामाजिक बहिष्करण के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया की समीक्षा कर एक ऐसी पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिसमें समाज के सभी वर्गों को न्यायपूर्ण अवसर मिले।
हम @mygovindia से मांग करते हैं कि ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विस कमीशन का गठन कर न्यायिक नियुक्तियों में सामाजिक प्रतिनिधित्व, पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं। देश का संविधान 140 करोड़ भारतीयों का है, इसलिए न्यायपालिका में भी भारत की सामाजिक विविधता का प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।
कल से इधर X पर दिग्गज पत्रकार कोचिंग कल्चर बंद करने के लिए झंडा उठाए हुए हैं।
आज बिहार के मुख्यमंत्री PM के फोटो के साथ कोचिंग का टीशर्ट पहने JEE Advanced के टॉपर को अपने हैंडल से बधाई दे रहे हैं… अब ऐसे में कोचिंग वालों का मन बढ़ेगा कि नहीं?
वैसे शुभम कुमार को हमारी तरफ से भी बधाई।
"गाँधी जी सो सकते है, क्योंकि उनका समाज जाग रहा है।
में इसलिए जाग रहा हूँ, क्योंकि मेरा समाज सो रहा है"
यह वाक्य बाबा साहब ने अमरीका के प्रसिद्ध लेखक व पत्रकार लुई फिशर को 1942 की मुलाकात में कही थी। क्योंकि लुई फिशर महात्मा गाँधी के साथ रहकर उन्हें जान रहे थे व काफी बार महात्मा गाँधी के आराम करने पर वो बाबा साहब से मिलने गए तब बाबा साहब उन्हें अध्ययन करते हुए मिले। तब लुई फिशर ने पूछा कि गाँधीजी आराम कर रहे है और आप अधयन्न। तब बाबा साहब ने उपरोक्त वाक्य कहा था।
लुई फिशर भारत विशेष तौर से महात्मा गाँधी पर उनकी जीवनी लिखने आये थे व उनकी लिखी जीवनी "The Life of Mahatma Gandhi" पर बनी फिल्म "गाँधी" को ऑस्कर मिला था।
चूँकि लुई फिशर महात्मा गाँधी पर जीवनी लिखने आये थे लेकिन उन्होंने काफी मुलाकात डॉक्टर बी आर अम्बेडकर जी के साथ करी। जिसे उन्होंने विस्तार से लिखा कि;
"में देखकर दंग रह गया कि डॉक्टर अम्बेडकर के पास हजारो किताबे थी। इतनी किताबे की यह किसी लाइब्रेरी में भी नही मिलेगी। उसमे भी डॉक्टर अम्बेडकर हर समय अधयन्न करते हुए मुझे मिले। बाबा साहब का राजगृह में एक घर नही बल्कि बौद्धिक विचारो का एक जीवंत मन्दिर है"
लुई फिशर ने अपनी किताब में विस्तार से डॉक्टर अम्बेडकर व महात्मा गाँधी विवाद पर लिखा है। उन्होंने इसपर भी बाबा साहब की काफी सराहना करी।
इस तश्वीर में बाबा साहब व लुई फिशर है। बाबा साहब व लुई फिशर की कई मुलाकातों की तश्वीर है। बाबा साहब का व्यक्तित्व ही ऐसा था कि बन्दा गाँधीजी पर किताब लिखने आया और कई मुलाकातें बाबा साहब से करके गया, उसपर भी बाबा साहब के बारे में विस्तार से विश्व को बताया। जिसमे सबसे मुख्य यह कि;
"उनके पास ऐसी दुर्लभ किताबे थी जो आसानी से किसी लाइब्रेरी तक मे नही मिलेगी। हजारो किताबे। पूरे दिन अधयन्न करना"
तो जनाब;
"सम्मान पाना है, समाज का भला करना है, अपनी एक अलग छवि बनानी है तो अध्ययन करने की आदत डालें। इसी एक गुण ने बाबा साहब को एक अलग व्यक्तित्व बना दिया"
लेकिन;
"बाबा साहब का समाज का बड़ा हिस्सा अभी भी सो रहा है"
विकास कुमार जाटव
माननीय न्यायालय द्वारा बार-बार अपने आदेशों और व्याख्याओं के माध्यम से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजातियों अत्याचार निवारण अधिनियम को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। यह बेहद चिंताजनक और दुर्भावनापूर्ण है।
दिनांक 11 मई को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश में “सार्वजनिक दृष्टि” की शर्त लगाकर जातिसूचक गाली को अपराध की परिभाषा से बाहर किया गया। वहीं, कुछ महीनों पूर्व दिसंबर 2025 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने यह कहा कि फोन पर 'जातिसूचक' गाली-गलौज किए जाने पर SC/ST एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होते, जो कि न्याय की मूल भावना के खिलाफ है।
मेरा सवाल है माननीय न्यायालय से- क्या अब दलितों का अपमान “लोकेशन” और “माध्यम” देखकर तय होगा? क्या चारदीवारी के भीतर या फोन पर किया गया जातीय अपमान अपराध नहीं माना जाएगा?
ऐसे फैसले यह संकेत देते हैं कि न्यायिक व्याख्या के जरिए इस सशक्त कानून के प्रभाव को सीमित किया जा रहा है, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में और अधिक कठिनाई उत्पन्न हो सकती है।
हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन संविधान और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों की रक्षा के लिए ऐसे फैसलों पर सवाल उठाना भी उतना ही आवश्यक है।हम इस संबंध में शीघ्र ही माननीय उच्चतम न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर करेंगे।
श्री लखेंद्र कुमार रौशन, माननीय मंत्री द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 अंतर्गत हत्या के मामले में पीड़ित के आश्रित श्री सूरज कुमार को परिचारी के पद पर नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया।
#SCSTWelfarwDept#JobOpportunity#Bihar#BiharGovernment
TVK ने तमिलनाडु में DMK, AIADMK और BJP तीनों विचारधारा के खिलाफ चुनाव लड़ा.
बंगाल में ममता बनर्जी की TMC ने भी BJP, CPM और Congress के खिलाफ चुनाव लड़ा.
UP में बहुजन समाज पार्टी भी यही काम करती है. BJP, SP और Congress के खिलाफ अपनी राजनीतिक करती हैं.
BSP की स्पष्ट नीति है किसी के साथ राजनीति नही करनी है, किसी के पीछे चलकर राजनीति नही करनी. राजनीति केवल अपने दम पर करनी है.
बाकी दलों को बीजेपी या Congress की B टीम नही कहा जाता है, केवल BSP को ही B टीम कहकर बदनाम किया जाता है.
Asking for a Deputy CM post with just two MLAs is ambitious.
But how are you comfortably living like a slave in the DMK with six MLAs?
You didn’t even dare to ask Stalin for a minister post.
Answer that, @thirumaofficial?