सांसद जी ऐसी सज़ा देंगे कि कोई ज़ुर्रत नहीं करेगा “NEET अखबार” लीक करने की
किस चीज़ का सेवन करते हैं यह?
यह तो इन लोगों की संजीदगी है बच्चों के भविष्य और NEET पेपर लीक के लिए
@oprajbhar अरे चिचा 69000 शिक्षक भर्ती मेँ ओबीसी के हजारों पद खा लिए गए वो अखिलेश जी ने नहीं खाए I वह उन लोगों ने खाए हैं जिनकी आप दिन भर चरण बन्दना कर रहे हैं I अंग्रेज और मुग़ल याद हैं आपको लेकिन 4 साल पहले 16000 ओबीसी लड़कों के जीवन मेँ अंधेरा कर दिया वह नहीं दिख रहा
@khurpenchh बात भाजपा ज्वाइन करने की नहीं है भाई I बात सत्ताधारी पार्टी ज्वाइन करने की है I जब भी कोइ विपक्षी नेता सत्ता वाली पार्टी ज्वाइन करेगा तो मतलब सीधा सा है कि मलाई मारने के लिए लार टपक रही है I सत्ता वाली पार्टी का नेता विपक्ष वाली पार्टी मेँ या एक विपक्षी पार्टी से दूसरी विपक्षी
@BabuSahab_0003 पूर्वांचल/अवध के गांवों में एक चर्चा और चल रहा है कि यदि भाजपा बाबू शिकारी सिंह को ,CM बनाये तो 2027 में भाजपा और सपा में नेक टू नेक फाइट होगा। अगर किसी दूसरे को CM बनाने पर अडे़ रहेंगे तो सपा एकतरफा चुनाव जीत जायेगी।
आइए UPPSC में हो रहे आरक्षण घोटाले से पर्दा उठाते है🔥
"यूपी पीसीएस 2023 – ये कैसा आरक्षण का खेल है??"
प्रीलिम्स में कटऑफ था:
Gen – 125 | OBC – 128 | EWS – 129
और अब मेंस में आया है:
Gen – 734 | OBC – 738 | EWS – 750
क्या अब आरक्षण का मतलब ये है कि OBC और EWS को सिर्फ उनकी 27% और 10% सीटों में ही सीमित कर दिया जाए?
जनरल मेरिट की सीटों पर उनका हक नहीं?
अब पूरा खेल इस उदाहरण से समझिए👇
मान लीजिए UPPCS में सीटों की संख्या 100 है तो इसमें आरक्षण के नियमानुसार 40 सीटें GN की,27 सीटें OBC की,10 सीटें EWS की,21 सीटें SC की,2 सीटें ST की हुई।
UPPCS प्री में 15 गुना अभ्यर्थी पास किए जाते है।अब चूंकि आयोग प्री में आरक्षण नहीं दे रहा है और आरक्षित वर्ग को अपने संबंधित कोटे में ही पास किया जा रहा है, यानी ओवरलैपिंग नहीं कराया जा रहा है इसी कारण प्री में आरक्षित वर्ग का कटऑफ GEN से ज्यादा जा रहा है।
इस हिसाब से मेंस परीक्षा में GN से 600 अभ्यर्थी,OBC वर्ग से 405 अभ्यर्थी,SC वर्ग से 315 अभ्यर्थी,ST वर्ग से 30 अभ्यर्थी क्वालीफाई हुए। यहां ध्यान रखिएगा ओवरलैपिंग नहीं हुई है।
अब बात करते है इंटरव्यू की, सीटों का तीन गुना इंटरव्यू के लिए क्वालीफाई कराया जाता है।
इस हिसाब से GEN के 600 अभ्यर्थियों में से 40 सीटों के सापेक्ष 120 अभ्यर्थी क्वालीफाई हुए,OBC के 405 अभ्यर्थियों में से 27 सीटों के सापेक्ष 81 अभ्यर्थी,SC के 315 अभ्यर्थियों में से 21 सीटों के सापेक्ष 63 अभ्यर्थी,EWS के 10 सीटों के सापेक्ष 30 अभ्यर्थी तथा ST के 2 सीटों के सापेक्ष 6 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए क्वालीफाई हुए। ध्यान दीजियेगा यहां भी ओवरलैपिंग नहीं हुई है क्योंकि मेंस का कटऑफ भी आरक्षित वर्ग का GN से ज्यादा गया है।
अब दिमाग़ लगाकर सोचिए 100 सीटों के सापेक्ष कुल 300 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में जाना था उनमें से 150(120GEN+30EWS) सवर्ण अभ्यर्थी गए है और 150(81OBC+63SC+6ST) आरक्षित वर्ग से गए है। यानी सवर्ण अभ्यर्थियों को इंटरव्यू तक पहुंचाने में सीधे 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है।
प्री और मेन्स में आरक्षण ने देकर, ओवरलैपिंग न करवाकर बड़ी संख्या में OBC,SC,ST अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में पहुंचने से पहले से रोक दिया गया।
अब जब फाइनल सिलेक्शन होना है तो GEN की 40 सीटों के लिए 120 सवर्ण,54 OBC,42 SC,20 EWS और 4 ST अभ्यर्थियों के बीच मुकाबला होगा यानी 40 GN सीटों के लिए 140 सवर्ण और 100 आरक्षित वर्ग (OBC,SC,ST)के अभ्यर्थियों के बीच मुकाबला होगा तो यहां कम से कम 28 सीटें सवर्ण अभ्यर्थियों को मिलेंगी और ज्यादा से ज्यादा 12 सीटें आरक्षित वर्ग(OBC,SC,ST) को मिलेंगी।
अब अगर देखें को 100 सीटों में से 38(28+10) सीटें सवर्णों को मिली जिनकी आबादी 10-15 प्रतिशत है वहीं 62 सीटें आरक्षित वर्ग(OBC,SC,ST) को मिली जिसकी संख्या 85-90 प्रतिशत है।
यूपी सरकार और लोक सेवा आयोग जवाब दें कि क्या यही है ‘समान अवसर’?
या फिर ‘सिस्टम’ अब काबिलियत से नहीं, कैटेगरी देखकर फैसला करता है?"
@yadavakhilesh@ManojSinghKAKA@LaljiVermaSP@rajkumarbhatisp
@theswapnilsri भाई आप पहले सैलरी बढ़ा दो, उनकी जायज मांगे मान लो फिर ये साजिस वाली बकलोली करना I अगर सैलरी बढ़ने के बाद भी आन्दोलन जारी रहे तब ....................
@Voiceofpavan कृषि विभाग मेँ तकनीकी सहायक की भर्ती मेँ अनुसूचित जाति का आरक्षण खा गई सरकार l उस पर भी बोल लो कुछ या फिर ये 2 रुपये के चक्कर मेँ गुलामी का कॉन्ट्रैक्ट सिग्नेचर कर रखा है
“SC-ST-OBC का CUT OFF सामान्य वर्ग से ज्यादा क्यों?”
— Anupriya Patel
जब आरक्षण इसलिए दिया गया कि वंचित वर्गों को बराबरी का मौका मिले,
तो फिर नौकरी पाने के लिए उन्हें सामान्य वर्ग से ज्यादा अंक क्यों लाने पड़ें?
अगर आरक्षित वर्ग को ही ज्यादा नंबर लाने पड़ें,
तो फिर यह कैसा आरक्षण और कैसा सामाजिक न्याय?
आरक्षण का मतलब अवसर बराबर करना है,
प्रतिस्पर्धा को और कठिन बनाना नहीं।
अगर UPSC के इंटरव्यू में सच में कोई भेदभाव नहीं होता, तो टॉप-10 में कम से कम 5 से अधिक अभ्यर्थी SC, ST और OBC वर्ग से दिखाई देते।
अगर UPSC में इंटरव्यू की व्यवस्था ही नहीं होती और सिर्फ लिखित परीक्षा के आधार पर चयन होता, तो टॉप-100 में आधे से अधिक अभ्यर्थी SC, ST और OBC समाज से होते।
लेकिन हर साल हम देखते हैं कि लिखित परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कई बहुजन अभ्यर्थियों के इंटरव्यू में कम अंक दे दिए जाते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इंटरव्यू बोर्ड में ही SC, ST और OBC समाज का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, तो फिर निष्पक्षता की गारंटी कैसे दी जा सकती है?
UPSC जैसी सर्वोच्च संवैधानिक संस्था में चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
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