#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
#JusticeForTeachers
देश के सभी राज्यों में आरटीई लागू होने के पूर्व राज्यों द्वारा निर्धारित अर्हता रखने वाले अभ्यर्थियों को ही शिक्षक पद पर नियुक्त किया गया है जोकि 25-30 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं ।
परन्तु आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।
@PMOIndia@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@jayantrld@CMOfficeUP@myogiadityanath@rajnathsingh@aajtak@brajeshlive@Aamitabh2@ABPNews
#NoTetBeforeRteAct
यह शिक्षक वर्ग हैं ,सब समझते हैं ।
आरटीई में 2017 में संशोधन करके सभी कार्यरत शिक्षकों को टेट आपने अनिवार्य किया है ।तो पिछली सरकार की क्या गलती है ?पिछली सरकार ने तो 23 अगस्त 2010 के राजपत्र में आरटीई से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को स्पष्ट छूट दी है ।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अध्यादेश भारत सरकार लायेगी ,तो पश्चिम बंगाल की सरकार से इसका क्या लेना देना है?
यह इस प्रकार की गारण्टी है जैसे 2014 के यूपी चुनाव में शिक्षा मित्रों के लिए ली गई थी ।जिसका परिणाम सब देख रहे हैं ।20 लाख शिक्षक तनाव में हैं,कुछ तो आत्महत्या कर चुके हैं।वकीलों की फीस हेतु शिक्षकों की मेहनत की कमाई जा रही है और आप राजनीतिक बयान दे रहे हैं ।
यदि इसी सत्र में यह अध्यादेश लाते हैं तो सही है ,अन्यथा शिक्षक सड़क पर उतर कर आंदोलन करने के लिए तैयार रहें ।