"कॉकरोच जनता पार्टी" को समर्थन देना है या नहीं, ये आपकी मर्ज़ी है।
लेकिन अगर आज भी सोनम वांगचुक जैसे इंसान के संघर्ष पर चुप हो, तो कल अपने हक़ के लिए किसी और से लड़ने की उम्मीद मत रखना।
जो सत्ता के डर से खामोश हैं, इतिहास उन्हें नहीं, संघर्ष करने वालों को याद रखता है।
‘हवा में उड़ते हुए’ सड़क परिवहन मंत्री का इंटरव्यू
सवाल : आपने जो आम दिए हैं वे खट्टा है।
जवाब : आप इमली की बात मत कीजिए।
इथेनॉल के मुद्दे पर नितिन गडकरी के इस इंटरव्यू का एक पंक्ति में सा सार यही है।
पूरा इंटरव्यू सुन लीजिए। अगर आप अपना माथा नहीं पकड़ लेंगे तो फिर कहिएगा!
मेघा ने माइलेज के मुद्दे पर पहले सवाल से ही घेरा। अपनी गाड़ी की माइलेज का भी उदाहरण दिया। पर गडकर ने कहा, माइलेज मापने की मशीन घर में नहीं होती, डीलर से जांच कराइए! दिक़्क़त हो तो कंज़्यूमर कोर्ट जाइए!
मतलब कुछ भी!
माइलेज बताने का मीटर घर में नहीं होता पर हर गाड़ी में तो होता ही है। इसको नकार दिया गडकरी ने!
कार कंपनियों के लिए ये बहुत ही आपत्तिजनक बात है कि दशकों से हर कार के साथ बनाए गए उनके माइल-मीटर पर गडकरी ने सवाल उठा दिया है!
पर शायद कार कंपनियाँ गडकरी की इस बात के ख़िलाफ़ फिर भी ना बोलें! संभवतः कोई डर या दबाव होगा! नहीं तो कार कंपनियों को सामने आकर स्वीकारने चाहिए कि कार में फिट माइल-मीटर धोखा है!
बात इतनी भर नहीं है।
क़रीब आधे घंटे के इस इंटरव्यू में गडकरी ने किसी सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया है। गोल गोल घुमाया है। ज़्यादा कुरेदने पर अपरोक्ष रूप से FIR और परोक्ष रूप से Defamation केस तक की धमकी दी है!
सवाल पूछा जा रहा है E10 वाली गाड़ियों में E20 डाले जाने की और जवाब दे रहे हैं 100% इथेनॉल या पेट्रोल से चलने वाले फ़्लेक्सी फ़्यूल इंजन की!
इथेनॉल के बाद भी पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं हुआ?
जवाब : आयं बाएँ साएं
जब एक सवाल का जवाब न सूझा तो पेट्रोलियम मिनिस्ट्री पर बात टाल दी!
इस पूरे इंटरव्यू पर एर रिसर्च पेपर लिखा जा सकता है। रिसर्च पेपर इस बात पर कि जब तर्क और तथ्य न पेश कर पा रहे हों तो अपनी ज़िद को सही साबित करने के लिए इंटरव्यू नहीं देना चाहिए।
बहुत लंबा लिखा जा सकता है। लेकिन निचोड़ ये कि अगर प्रधानमंत्री @narendramodi अपने मंत्री @nitin_gadkari की इन तमाम बातों को सुनने के बाद भी इन पर समुचित ‘नीतिगत’ कार्रवाई नहीं करते हैं तो फिर समझ लीजिए कि ईश्वर नहीं, अब इथेनॉल ही सबका मालिक है 🙏
और अंत में @MeghaSPrasad के लिए एक शब्द
Superb 🙌
Video Credit @ABPNews YT
सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़ताल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्द सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी की जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी सुनेगा?
लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता सिर्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk
"I used to get happy that we'd become Vishwaguru
But in reality I am seeing things happening that contradict the "Vishwaguru" title
Either we should stop all these
contradictory things or we stop calling ourselves VISHWAGURU"
Singer Anuradha Paudwal gives reality check !!
.@SrBachchan made a KBC episode on him. Amir Khan made 3 idiots inspired by him & shot partly in his school.
Yet as Sonam Wangchuk has lost >8KG on his 16th day of fast at Jantar Mantar, staking his life for the future of children’s education, they ignore him!
ये सब न्यूज़ वाले... एक ये दीदी, दूसरे वो गज़बे भाई... डिजिटल बोर्ड पर न्यूज़ में कैसी नौटंकी करते हैं।
आजकल न्यूज़ चैनलों में पत्रकार कम, शिक्षक बनने का शौक ज़्यादा हो गया है।कभी कोई डिजिटल बोर्ड लेकर माइलेज पढ़ा रहा है, कभी कोई अर्थशास्त्र, कभी कोई विज्ञान...
इतना ही पढ़ाने का शौक है तो न्यूज़रूम छोड़िए, क्लासरूम आइए... शिक्षक बन जाइए। बोर्ड पकड़ लेने से कोई शिक्षक नहीं बन जाता।
शिक्षक बनने के लिए वर्षों का अध्ययन, अनुभव और ईमानदारी चाहिए...
उलूल-जुलूल डेटा का आधा-अधूरा विश्लेषण करके देश को गुमराह मत कीजिए।
खुद पाठशाला में सही से पढ़ लिया होता, तो आज देश के वास्तविक दृश्य पर चर्चा करते, सरकार से सवाल करते और जनता के हित को समझते...PR की क्लास नहीं चलाते।देश को न्यूज़ चाहिए... न्यूज़ के नाम पर नौटंकी नहीं।
If you are a top influencer then you can earn 3-5 lakhs rs by discrediting and defaming khan.
Govt, Media and Bihar politics desperately wants a scapegoat and they found it in Khan.
#amitkilhor#kilhor#khan
सवाल सुनने की क्षमता नेताओं और अधिकारियों को दोनों में भयंकर कम हो गई।
मथुरा में 11 लोगों की जान चली गई,हमारे साथी @Saurabh_Pinch ने सवाल पूछा तो DM साहब तमतमा गए