नालंदा के जांगीपुर गांव के चिंटू यादव की कोनंद गांव के हुड़दंगी चंदा छाप गैंग ने चौहरमल बाबा मेला के लिए मनचाहा ₹1000 चंदा नहीं मिलने पर जाति पूछ कर पीटते-पीटते हत्या कर दी!
चूंकि मृतक एक जाति विशेष का है, जिस जाति से सम्राट चौधरी को नफरत है और उसकी हत्या करने वाले उस जाति विशेष के नहीं बल्कि किसी अन्य जाति के हैं इसीलिए अभी तक @bihar_police जानबूझकर मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है!
हद तो यह हो गई है की पुलिस हत्या को बाइक दुर्घटना का नाम देकर मामले में लीपापोती कर रही है!
बिहार पुलिस को 7 हत्याओं के अभियुक्त मुख्यमंत्री का अलिखित निर्देश प्राप्त है कि एक जाति विशेष के लोगों को हर तरह से हर क्षेत्र में प्रताड़ित करना है!
उन पर आरोप मात्र लगते ही वास्तविक दोषी की चिंता किए बिना उनका फर्जी एनकाउंटर कर दो!
और अगर उस जाति विशेष के लोग ही पीड़ित हों तो सुनिश्चित कर दो कि उन्हें किसी भी सूरत में न्याय ना मिले!
इसके लिए चाहे अपराधियों को भगाना पड़े, संरक्षण देना पड़े अथवा दोषी होने के बावजूद निर्दोष ही सिद्ध क्यों न कर देना पड़े!
कोई कुकर्म करना पड़े, करो!
पर उस जाति विशेष के लोगों की हत्या करने में कोई गुरेज मत करो!
गिद्धों के कोसने से गाय नहीं मरती सम्राट चौधरी!
@yadavtejashwi
#RJD #bihar
पटना में अपनी जायज़ मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे चौकीदार-दफादार साथियों पर लाठीचार्ज की घटना अत्यंत दुखद और निंदनीय है। गांवों की सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ रहे इन वफादार कर्मियों की आवाज़ को बल प्रयोग से दबाना किसी भी संवेदनशील व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।
यह घटना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। चौकीदार-दफादार साथियों की समस्याओं तथा उनके साथ हुए व्यवहार को लेकर हमारी पार्टी ने निर्णय लिया है कि सांसद श्री @ArunBhartiLJP के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल बिहार के माननीय उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री से शीघ्र भेंट करेगा। यह प्रतिनिधिमंडल एक विस्तृत ज्ञापन सौंपेगा, जिसमें उनकी उचित मांगों के समाधान, सेवा-संबंधी समस्याओं के स्थायी निराकरण तथा दोषी प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग शामिल होगी।
मैं स्वयं भी इस विषय पर माननीय मुख्यमंत्री जी से मिलकर चौकीदार-दफादार साथियों की आजीविका, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान की रक्षा हेतु आवश्यक कदम उठाने का आग्रह करूंगा तथा दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग करूंगा।
सुधार के नाम पर वर्षों से सेवा दे रहे परिवारों की आजीविका और गरिमा से समझौता स्वीकार्य नहीं है। गांवों की सुरक्षा करने वालों का सम्मान और भविष्य सुरक्षित रखना समाज एवं सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है।