जय हो लक्ष्मी माई ये बेरी दलीदर भाजपाई सब को बिहार से भगाई। जबतक तेजस्वी भईया के सरकार ना आई बिहार में बेरोजगारी, गरीबी आ कुशासन जईसन अंधकार ना मिटी।
@yadavtejashwi@RJDforIndia
ये डराने वाली खबर है … जिसने भी ये हिमाक़त किया है उसका HALF नहीं FULL एनकाउंटर होना चाहिए ..!
होटल के कमरे से बाप के सामने बेटी को अगवा करने की कोशिश ..वो भी राजधानी पटना में @bihar_police
विशेष आग्रह :
भाजपा की गलत नीतियों की वजह से उप्र में जो असहनीय बिजली संकट चल रहा है, उसके लिए बिजली विभाग के कनिष्ठ कर्मचारियों या लाइनमैन पर जनता अपना गुस्सा न निकाले। बिजली विभाग के हज़ारों संविदा कर्मचारियों की छँटनी के बाद वो पहले से ही बहुत दबाव में काम कर रहे हैं।
दरअसल इस ‘महा विद्युत आपदा’ के लिए भाजपा सरकार, भाजपा के बिजली मंत्री, भाजपा के सांसद, विधायक, मेयर, पार्षद से लेकर बिजली विभाग के उच्चाधिकारी व भ्रष्ट ठेकेदार ज़िम्मेदार हैं, जो इस नाकाम सत्ता में अप्रत्यक्ष-प्रत्यक्ष रूप से हिस्सेदार हैं। सवाल-जवाब इन लोगों से किया जाए।
सच तो ये है कि भाजपा सरकार ने बिजली व्यवस्था को ठप्प कर दिया है। न नई माँग की पूर्ति के लिए जेनरेशन हेतु कोई नया पावर प्लांट लगाया है, न ट्रांसमिशन के लिए नई व्यवस्था की गयी है, न डिस्ट्रीब्यूशन के लिए। ऊपर से स्मार्ट मीटर का महाभ्रष्टाचार भी करेले पर नीम चढ़ा रहा है।
ये बेहद निंदनीय है कि भाजपाई और उनके संगी-साथी बिजली की शिकायत करनेवालों को धमका रहे है और शिकायतकर्ताओं पर FIR तक हो रही है। अस्पताल तक बिजली के बिना बेहद परेशान हैं। जेनरेटर महंगे डीज़ल की वजह से शांत हैं।
हमारा ये भी आग्रह है कि घर के बड़े बुजुर्गों, बीमारों व बच्चों का विशेष ख़्याल रखें और जब भी बिजली आए तो मोबाइल चार्ज कर लें और टार्च तैयार करके रखें। ये भी ध्यान रखें कि अंधेरे का फ़ायदा उठाकर कोई असामाजिक तत्व आपके वाहनों, घर के सामनों पर हाथ न साफ़ कर जाएं। पशुओं का भी विशेष ध्यान रखें। बिजली की कमी से पीने की पानी का भी सीधा संबंध है, इसलिए पानी भरकर रखें और गर्मी से बचने के लिए पानी पीते रहें।
आपका
अखिलेश
बिहार के युवाओं के साथ अन्याय और विश्वासघात कर रही है NDA सरकार।
बिहार के युवा तो वहीं मांग रहे हैं, वही याद दिला रहे है जो एनडीए ने चुनाव पूर्व 1 करोड़ नौकरी का वादा किया था। फिर युवाओं पर अब ये अत्याचार क्यों? TRE-4 परीक्षा की मांग करना अपराध कैसे? पेपरलीक का विरोध करना गुनाह कैसे? क्यों बिहार के युवाओं पर बार-बार लाठीचार्ज हो रहा है?
यदि पुलिस के इस्तेमाल का इतना ही शौक है तो NDA सरकार भ्रष्टाचार और अपराध रोकने के लिए, अपराधियों के खिलाफ करें, बिहार के युवाओं पर बार-बार ये लाठीचार्ज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ऐसा लगता है कि टीआरई-4 की वैकेंसी जारी करने की इस सरकार की नीयत ही नहीं है। अन्यथा हमने अपने केवल 𝟏𝟕 महीने के कार्यकाल में बिना पेपरलीक के सफलतापूर्वक 𝐓𝐑𝐄-𝟏 एव 𝐓𝐑𝐄--𝟐 के तहत 𝟐 लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की तथा 𝟏 लाख 𝟑𝟎 हजार पदों पर बहाली प्रक्रियाधीन कराई थी।
साल 2024 और 2025 बीत गए, लोकसभा चुनाव हो गए, विधानसभा चुनाव हो गए, 2 मुख्यमंत्री और 4 उपमुख्यमंत्री बदल गए। समूचा मंत्रिमंडल बदला। NDA नेताओं के शहजादों को बिना चुनाव लड़े डायरेक्ट मंत्री पद बांट दिए गए। नई सरकार के गठन के 6 महीने बीत गए, लेकिन अब तक TRE-4 की वैकेंसी नहीं आई, टीआरई-4 से जुड़ा कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री और मंत्री रील्स बना रहे हैं, बड़े-बड़े बयान दे रहे हैं। लेकिन युवाओं के भविष्य की इस सरकार को जरा भी चिंता नहीं है। चुनाव से पहले युवाओं के सामने हाथ जोड़ने वाले NDA नेताओं की सरकार में आज परीक्षा की मांग करने पर लाठियां मिल रही है। NDA का ये छल-कपट बिहार के युवा कभी नहीं भूलेंगे।
यह अस्पताल BJP के बड़े नेता अजय आलोक @alok_ajay जी का है। उम्मीद है कि थोड़ा मानवता दिखाएंगे अजय आलोक जी।
नोट:- या तो मानवता दिखाएं या नाम से आलोक हटा लें।
देश के युवाओं के सामने एक गंभीर बात रखना चाहता हूँ।
एक काम कीजिए - खुद Google कीजिए: “NEET 2024 की भयंकर चोरी के दौरान NTA का DG कौन था, और मोदी सरकार ने उसे आज कहां बैठाया है?”
देखा? समझ आया?
BJP इसी तरह आप जैसे लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम देती है - उनकी रक्षा करती है, ऊपर से उन्हें तरक्की देती है।
साफ़ है - मोदी जी और भाजपा आपके भविष्य की चोरी में ख़ुद साझेदार हैं।
जिस बाज़ार में आपकी मेहनत, आपके सपने नीलाम हो रहे हैं, उसका एक ही उसूल है - जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशान्त कुमार जी की देहयष्टि और उनकी ड्रेसिंग सेंस पर तफ़्सरा करने के लिए हम नहीं हैं और न ही यह हमसे अपेक्षित है। बतौर मंत्री उनके कामकाज का मूल्यांकन समय-समय पर हम करेंगे। उनका कुर्ता ढीला है या चुस्त है, यही सब देखना हमारा काम रह गया है? मने, हम इतने निठल्ले हो गये हैं कि सरकार की नाकामी की गंभीर आलोचना और पुख़्ता विरोध के बजाय यही सब हल्की-फुल्की बातें करके उसे वॉकओवर देते जाएं और लोकतंत्र को चुटकुला तंत्र बनाने की भाजपा की परियोजना को विफल करने में किसी रचनात्मक भूमिका से मुंह मोड़ते रहें?
भारत के संसदीय राजनीति के विमर्श को इस मोड़ पर लाने के लिए भाजपा और उसके कारकून ज़िम्मेदार हैं जिसमें जदयू ने बराबर का हाथ बंटाया है।
आदरणीय लालू प्रसाद जी, आदरणीया राबड़ी देवी जी, माननीय तेजस्वी जी ने तो हमेशा चाहा कि निशांत जी राजनीति में आएं ताकि गिरोह और प्रबंधकों के चंगुल से जदयू की रक्षा हो सके!
पर, परिवारवाद की मनमानी और सुविधाजनक व्याख्या तो स्वयं नीतीश जी करते रहे हैं और आज भी उनके प्रवक्ता बेशर्मी से बात करने में नहीं चूकते। हमने तो कभी भी परिवारवाद को कोई मुद्दा ही नहीं माना। जिनको भी राजनीति में आना हो, आएं। बस, आएं तो थम कर काम करें और सिर्फ़ राजनीति करें।
उम्मीद करता हूं कि कोई भी बॉडी शेमिंग नहीं करेंगे। यह बहुत ही अमर्यादित, असंवेदनशील और अनावश्यक है और मानव गरिमा के सर्वथा प्रतिकूल है।
मुझे याद है, 2019 में जेएनयू के स्कूल ऑव सोशल साइंसेज़ में कन्वेनर रिपोर्ट पर बहस चल रही थी। किसी वक्ता ने एक केंद्रीय मंत्री की देहयष्टि पर टिप्पणी की जो जेएनयू की राजनैतिक परवरिश के ठीक उलट थी। मैंने तत्क्षण एक प्वॉइंट ऑव ऑर्डर दिया और संचालक को उसकी भर्त्सना करनी पड़ी।
हमने छात्र जीवन में भी चाहा कि छात्र राजनीति में संसदीय राजनीति का ग्रेस आन बसे। अब जबकि पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स में ही ग्रेस छीजता जा रहा है, तो छात्र राजनीति को क्या कहूं! हालांकि, कभी-कभी छात्र राजनीति ज़्यादा ग्रेसफ़ुल मालूम पड़ती है और कभी-कभी छात्र राजनीति में जिसको हम एबेरेशन समझते थे, उस तरह की बातें संसद के अंदर गूंजती दीखती हैं, तो कोफ़्त होती है। मेरे मन में संसदीय राजनीति को लेकर गहरा सम्मान है। मैं चाहता हूं कि वह बचा रहे!
सार्वजनिक जीवन का विमर्श गंदला न हो, यह हम सबकी ज़िम्मेदारी है, सत्ता पक्ष की ज़्यादा।
सत्यमेव जयते!
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें।
देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।
जिन लोगों ने लालू जी की राह देखी हीं नहीं है वे लालू जी की राह पर ज्ञान बांट रहे हैं तो वे अपने ज्ञान को दुरुस्त कर लें और स्व श्री रघुवंश प्रसाद सिंह, स्व पं श्री रघुनाथ झा, श्री जगदानंद सिंह, श्री शिवानन्द तिवारी, मो इलियास हुसैन, श्री राम जीवन सिंह, श्री वैद्यनाथ पाण्डेय, श्री रमई राम, श्री कमल पासवान, स्व श्री रामविलास मिश्र, श्री विद्यासागर निषाद, श्री वृषण पटेल, स्व मो. तस्लीमुद्दीन , डॉ रामचन्द्र पूर्वे, स्व श्री राम परीक्षण साहु , स्व श्री तुलसी दास मेहता, स्व श्री जंगी सिंह चौधरी, प्रो जाबिर हुसैन, स्व श्री करमचंद भगत , स्व भोला राम तुफानी, श्रीमती गिरीजा देवी, श्रीमती इन्दु देवी, स्व श्रीमती सरोज दूबे जैसे दिग्गज राजनेताओं की एक लम्बी सूची है जो लालू जी के राह के सहयात्री थे । अब इसमें कितने MY वाले हैं जरा समझा दीजिए
छात्र नेता दिलीप कुमार एवं उनके साथ गिरफ्तार छात्र शाहबाज आलम,नवीन कुमार,शशि शेखर कुमार राज को अविलंब पुलिस हिरासत से मुक्त किया जाए। यदि उन पर गलत मुकदमा कर जेल भेजा गया तो यह लोकतंत्र के लिए कलंक साबित होगा।
एक तो TRE4 को लेकर सरकार लगातार गलत बयानी कर शिक्षक अभ्यार्थियों को गुमराह करती रही है। और जब वे सरकार के वादाखिलाफी के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे तो बर्बरतापूर्वक उन्हें पिटा गया, उन्हें गिरफ्तार कर 24 घंटे से अपराधी की तरह पुलिस लॉकअप में बंद कर रखा गया है।
#TRE4_Notification #TRE4Notification #TRE4
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परिवारवाद के पोषक है इसका जीता-जागता उदाहरण दे रहा हूँ कि कैसे वंशवाद की बेल में 𝐏𝐌 खाद-पानी डाल परिवारवाद के संपोषक, संरक्षक और पालनहार बने हुए है।
𝟏. सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री, पिता- पूर्व मंत्री, माता- पूर्व विधायक, भाई- पूर्व विधायक प्रत्याशी, भाई- जेडीयू नेता
𝟐. विजय चौधरी उपमुख्यमंत्री - पिता- पूर्व विधायक
𝟑. निशांत कुमार मंत्री - पिता- पूर्व मुख्यमंत्री ( पिता 𝟐𝟐 साल से चुनाव ही नहीं लड़े है), बेटा भी बिना चुनाव लड़े, बिना किसी संघर्ष, सामाजिक राजनीतिक कार्यों में योगदान व बिना रुचि के सीधे 𝐖𝐢𝐥𝐝 𝐂𝐚𝐫𝐝 𝐄𝐧𝐭𝐫𝐲 से मंत्री)
𝟒. नीतीश मिश्रा मंत्री - पिता- पूर्व मुख्यमंत्री, चाचा- पूर्व मंत्री
𝟓. संतोष सुमन मंत्री - पिता- पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान केंद्रीय मंत्री, पत्नी- विधायक, सास- विधायक, साढ़ू- दर्जा प्राप्त मंत्री
𝟔. दीपक प्रकाश मंत्री (बिना 𝐌𝐋𝐀-𝐌𝐋𝐂 बने) - पिता- सांसद-पूर्व मंत्री, माता- वर्तमान विधायक
𝟕. श्रेयसी सिंह मंत्री- पिता- पूर्व मंत्री, माता- पूर्व सांसद ,
𝟖. अशोक चौधरी मंत्री- पिता- पूर्व मंत्री, बेटी- वर्तमान सांसद
𝟗. सुनील कुमार मंत्री- पिता- पूर्व मंत्री, भाई- पूर्व सांसद
𝟏𝟎. रमा निषाद मंत्री- पति- पूर्व सांसद , ससुर - पूर्व केंद्रीय मंत्री
𝟏𝟏. शीला मंडल मंत्री - ससुर- पूर्व मंत्री, पूर्व राज्यपाल
𝟏𝟐. बुलो मंडल- मंत्री, पत्नी- पूर्व विधायक
𝟏𝟑. लेसी सिंह- मंत्री, पति- पूर्व जिला अध्यक्ष
𝟏𝟒. श्वेता गुप्ता मंत्री, पति- पूर्व लोकसभा प्रत्याशी (उनकी जाली सर्टिफिकेट वाला मामला सब जानते है)
𝟏𝟓. संजय टाइगर- मंत्री, भाई- पूर्व विधायक
𝟏𝟔. भगवान सिंह कुशवाहा- मंत्री, ससुर- वामपंथी नेता
𝟏𝟕. रामकृपाल यादव मंत्री- सुपुत्र- राजनीति में सक्रिय
शेष मंत्रियों के अधिकांश परिजन भी पंचायत से लेकर ऊपर तक जनप्रतिनिधि और राजनीति में सक्रिय है।
हमें चिंता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब किसे शहजादा, राजकुमार और युवराज कहेंगे? बेचारे प्रधानमंत्री को अब मंत्रिमंडल में बिहार के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों नीतीश कुमार, जीतनराम मांझी और जगन्नाथ मिश्रा के बेटों की अब युवराज और शहज़ादा कहकर संबोधन करना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री जी के साथ बिहार में उनके गठबंधन में शामिल सभी पारिवारिक पार्टियां है- चाहे वो रामबिलास पासवान जी की पार्टी हो, नीतीश कुमार की पार्टी हो, जीतनराम मांझी की पार्टी हो या उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी हो। और उनकी ख़ुद की 𝐁𝐉𝐏 पार्टी हो- उन्होंने भी अधिकांश मंत्री परिवादी-वंशवादी ही बनाये है।
अपने-अपने बच्चे को मंत्री बना लो, युवाओं पर लाठी चला दो!
बिहार में यही हो रहा है। NDA के नेताओं ने बिना चुनावी प्रक्रिया में भागीदार किये, अपने बच्चों को मंत्री बना दिया। लेकिन बिहार के लाखों युवा, जिन्होंने सालों मेहनत कर पढ़ाई की है, उनसे चुनाव से पूर्व NDA के नेताओं द्वारा वादा किया गया था कि TRE-4 की वैकेंसी जारी की जाएगी। लेकिन सरकार गठन के 6 महीने बाद भी TRE-4 का विज्ञापन नहीं निकला है। उल्टे वैकेंसी की मांग करने पर लाठियां बरसाई जा रही है।
बिहार के युवाओं से इतनी नफरत क्यों है NDA सरकार को? क्यों उन पर अत्याचार किया जा रहा है? वे तो बस वादा निभाने के लिए कह रहे हैं, जिस वादे के आधार पर उनसे वोट मांगा गया था? ये युवा बस अपना अधिकार मांग रहे हैं, वे केवल परीक्षा आयोजित करने के लिए कह रहे हैं। ताकि अपनी प्रतिभा दिखा सके। लेकिन रोजगार विरोधी ये सरकार कर रही है अत्याचार, NDA की युवाओं से वादाखिलाफी नहीं भूलेगा बिहार
#Bihar #RJD
प्रिय देशवासियों,
आज प. बंगाल आकर चुनाव की महाधांधली और महाबेईमानी के बारे में जानकर ये लगा कि अब बात केवल चुनाव की प्रक्रिया को बचाने की नहीं है, देश को बचाने की है।
आज देश उन गलत हाथों में चला गया है जो संविधान, लोकतंत्र, आरक्षण, स्वतंत्रता, समता-समानता, न्याय, गरिमा, देश की एकता-अखंडता, सद्भाव-सौहार्द-बंधुत्व, महिलाओं के मान-सम्मान, युवाओं, किसानों, मज़दूरों, शोषित, वंचित, ग़रीब कुल मिलाकर पीड़ित-पीडीए के वर्तमान व भविष्य के हक़ और अधिकारों के घोर विरोधी हैं।
भाजपाई और उनके मुख़बिर संगी-साथी आज़ादी से पहले भी देश के विरोधी थे और आज़ादी के बाद भी हैं।
अब देशवासियों को ये समझना है कि :
- देश की एकता और व्यवस्था को भंग करके कमज़ोर करनेवाले ये लोग किसके एजेंट हैं?
- स्वदेशी की बात करके विदेश से पैसा लेनेवाले ये लोग कौन हैं?
- ये अनरजिस्टर्ड क्यों हैं और अंडरग्राउंड क्यों रहते हैं?
- ये कोविड के नाम पर जनता से जमा किये चंदे का हिसाब क्यों नहीं देते हैं?
- ये भ्रष्टाचार को बढ़ाकर देश को बर्बाद क्यों कर रहे हैं?
- ये देश की तरक़्क़ी के लिए योजना बनानेवाले ‘योजना आयोग’ को समाप्त करके देश के विकास को ख़त्म करने की चाल क्यों चल रहे हैं?
- ये शिक्षा पर क़ब्ज़ा करके देश की मानसिक शक्ति को खोखला क्यों कर रहे हैं?
- ये सरकारी स्कूलों को बंद करके आम जनता के बच्चों को अनपढ़ रखने का षड्यंत्र क्यों कर रहे हैं?
- नोटबंदी से छोटे कारोबार के ख़ात्मे की साज़िश क्यों करी?
- नोटबंदी घोटाले में बैंकिंग व्यवस्था को नोट बदलने के नाम पर भ्रष्ट क्यों किया?
- जीएसटी को जानबूझकर उलझाऊ और भ्रष्ट बनाकर ये देश की अर्थव्यवस्था को चौपट क्यों कर रहे है?
- ये अपने लोगों को पैसा जमाकर करके बाहर क्यों भेज देते हैं?
- विश्वगुरु का दावा करनेवाले विश्व के विभिन्न देशों में भाग गये, देश के लुटेरों को ये लोग वापस क्यों नहीं ला रहे हैं?
- ये साम्प्रदायिकता का ज़हर फैलाकर देश की एकता को क्यों तोड़ना चाहते हैं?
- राजनीतिक दलों को तोड़कर ये लोग देश की राज-व्यवस्था को नेस्तनाबूद करने पर क्यों आमादा है?
अब वो निर्णायक समय आ गया है, जब हम सबको मिलकर इन देश विरोधी नकारात्मक ताक़तों को हमेशा के लिए हराना होगा, देश को बचाना होगा, और देश की नई आज़ादी के लिए तिंरगा उठाना होगा!
आपका
अखिलेश
पत्रकार:-केश हो गया है आपके ऊपर आपने बिना अनुमति आर्केस्ट्रा प्रोग्राम में भीड़ इकठ्ठा करके प्रशासनिक चुनौती उत्पन्न कराई है।
अनंत सिंह:-हमरा झां.. से हो गया है।
नोट:- भाजपाइयों का जब स्वर्णकाल आया है तो कानून, संविधान और व्यवस्था सब सामंतवादियों के झा.. पर ही रहेगा।
Some in the Congress, and others, are gloating about TMC’s loss.
They need to understand this clearly - the theft of Assam and Bengal’s mandate is a big step forward by the BJP in its mission to destroy Indian democracy.
Put petty politics aside. This is not about one party or another. This is about 🇮🇳.
अब क्या सत्ताधारी राजनीति को पाताल से भी नीचे ले जाएंगे। देश के राजनीतिक इतिहास का ये एक घनघोर ‘काला दिन’ है। आज पूरा देश आक्रोशित है और लोकतंत्र व्यथित।
चुनावी व्यवस्था के नाम पर केंद्रीय बलों का जो दुरुपयोग मतगणना में आज बंगाल में हुआ है, ठीक वैसा ही घपला 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में अधिकांश जगह किया गया था, जिसकी साक्षात गवाह कन्नौज की विधानसभाएं थीं। फिर इसी निंदनीय मॉडल को फ़र्रुख़ाबाद के 2024 लोकसभा चुनाव में दोहराया गया था।
सब जानते हैं क्या हुआ है और सच क्या है और जनमत की खुली लूट कैसे हुई है।
घोर, घोर, घोर निंदनीय!!!