आबादी के अनुरूप आरक्षण 😂
एक कहानी बताता हूँ, आज के 60 वर्ष पहले एक व्यक्ति ‘रायचंद’ के पास 8 बीघे जमीन थी, उसके दो लड़के भी थे,
‘आशाचंद और झाँसाचंद’
आशाचंद मेहनत करता साथ में थोड़ी बहुत पढ़ाई लिखाई करता, विवाहोपरांत उसके दो संतान हुए.
दूसरी तरफ़ झाँसाचंद आवारा था, पढ़ाई लिखाई से को नाता नहीं, विवाहोपरांत उसके 6 संतान हुए,
एक तरफ़ आशाचंद अपने छोटे और शिक्षित परिवार के साथ सुखमय जीवन व्यतीत कर रहा था, उसको मनुवाद ब्राह्मणवाद से कोई आपत्ति नहीं थी,
दूसरी तरफ़ झाँसाचंद अपने 6 संतानों के साथ दुखमय जीवन काट रहा था, अनपढ़ और कामचोर होने के कारण वो ब्राह्मणवाद को गरियाने लगा,
फिर झाँसाचंद ने कहा की उसके पिता के 8 बीघे की जमीन में उसको ‘आबादी के अनुरूप हिस्सेदारी’ चाहिए, माने 8 बीघे में 6 बीघा उसको चाहिए,
उसका कहना था -
जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी
अब गाँव में पंचायत बैठी,
चूँकि झाँसाराम की माँग ही तर्कसंगत/न्यायसंगत नहीं थी, तो निर्णय उसके ख़िलाफ़ आया, अब झाँसाराम पंचायत में निर्णय लेने वाले लोगों और ब्राह्मणवाद को गाली दे दे कर अपनी भड़ास निकालता था,
झाँसाचंद अपने निकम्मेपन को छिपाने के लिए अपने बच्चों को बताता है की मनुवादी सामंतवादी लोगों ने उसे पानी नहीं पीने दिया, उसका शोषण किया,
जबकि रायचंद की दूसरी संतान माने आशाचन्द जिसके मात्र दो बच्चे थे वो चैन से अपना जीवन जी रहा है,
ये आदमी खुद को हिन्दू कहने पर शर्मिन्दा है,एक कन्नड़ ब्राह्मण के साथ विवाहित है, लेकिन पौराणिक कथा में दधीचि है इस बात का विश्वास करता है,मुझसे दधीचि बनने की अपेक्षा कर रहा था, और लोगों को इसी दुष्ट ने भड़काया तब मुझे धमकियां मिली,आज बीजेपी का ये मीडिया एडवाइजर है
#BJPAgainstGC
बहुत चौंकाने वाली खबर है! 🚒
आज मैं उत्तर प्रदेश के पंचायती राज विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ग्राम प्रधान की जाति देख रहा था, सबसे ज्यादा ग्राम प्रधान ओबीसी वर्ग से हैं उसमें से ज्यादा से ज़्यादा 2,3 जातियों के हैं।
सामान्य वर्ग का तो बिल्कुल प्रतिनिधित्व ही नहीं रह गया है, इसके पीछे भी बहुत बड़ी वजह है, SC सीट पर SC उम्मीदवार रहेंगे, ओबीसी सीट पर ओबीसी उम्मीदवार रहेंगे,और सामान्य सीट पर सवर्ण समाज के साथ SCST, ओबीसी सभी वर्ग के उम्मीदवार फाइट करेंगे, ऐसे तो सामान्य वर्ग का प्रतिनिधत्व ही खत्म हो जाएगा।
‼️बड़ी खबर‼️
कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य की 56% आरक्षण नीति को रद्द कर दिया है!
बता दें कि 2022 में भाजपा सरकार ने SC/ST आरक्षण बढ़ाकर 24% कर दिया था जिससे कुल आरक्षण 56% हो गया था!
हम बीजेपी की सब गलती माफ़ कर सकते है
लेकिन इन्होंने
जो गायकवाड़ कमीसन बनाकर छत्रपति शिवाजी महाराज को शूद्र लिखवाया है वो कभी जीवन में माफ नहीं करेंगे
इस पाप की सजा तो इन्हें भोगना ही पड़ेगा
BREAKING: The Karnataka High Court strikes down the state’s 56% reservation law, which increased the SC quota from 15% to 17% and the ST quota from 3% to 7%.
The judiciary is literally saving this country!
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अम्बेडकर जी ने खुद संविधान सभा में कहा था कि "आरक्षण minority seats पर ही होना चाहिए!"
उनके द्वारा दिये गए भाषण को भी जजमेंट में लिखा गया है!
तब भी भाजपा सरकार अम्बेडकर जी के शब्दों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाकर आरक्षण 73% करना चाहती है!
#BJPAgainstGC
आज जो GC भाई BJP के समर्थन में खड़े हैं, एक दिन आपके बच्चे आपसे सवाल करेंगे :
पापा, जब हमारे लिए सिर्फ़ 27% सीटें बची थी, तब आप क्या कर रहे थे?
जब कॉलेज में मेरे साथ मारपीट करके उल्टा मुझे ही फँसाने की धमकी दी गई, तब आप कहाँ थे?
जब हमारे देवी देवताओं को गालियाँ देने वालों के खिलाफ बोलने पर हमें ही कानून का डर दिखाया गया, तब आप चुप क्यों थे?
और तब आपके पास क्या जवाब होगा?
कि पार्टी बड़ी थी, इसलिए बच्चों का भविष्य छोटा पड़ने दिया?
कि सत्ता ज़रूरी थी, इसलिए अपने बच्चों के सवालों को नज़रअंदाज़ कर दिया?
या फिर यह कि जब तक आग दूसरों के घर में लगी थी, तब तक आपको सब ठीक लग रहा था?
याद रखिए, आज आप जिस राजनीति का समर्थन कर रहे हैं, कल आपके बच्चे उसी का हिसाब आपसे माँगेंगे।
#BJPAgainstGC #GCLivesMatter
ब्राह्मण के बेटी लिख दिया... अहीर की मेहरारू कौन लिखेगा😅 ?
ब्राह्मण सिर्फ वही है जिसके मां-बाप पति-पत्नी ब्राह्मण हो... जो दूसरी कास्ट में शादी करते हैं उसे वर्ण व्यवस्था के अनुसार महाराज मनु ने मिक्सब्रीड कहा है जाकर चेक कर लो.
@grok verify कर दो भाई मनुस्मृति के अनुसार
डियर प्रज्ञा भरत यादव जी …
जब निजी ज़िंदगी के फ़ैसले लेने थे तब कोई समाज याद नहीं आया लेकिन जब भी सार्वजनिक जीवन में सवाल उठते हैं या आलोचना होती है, तो 'ब्राह्मण की बेटी' बनकर सहानुभूति बटोरने लगती हैं।
ब्राह्मण समाज को इस तरह के राजनीतिक और सस्ती सहानुभूति के हथकंडों में मत घसीटिए, शादी व्यक्तिगत चॉइस है, और अपने उसी निर्णय से अब आप यादव समाज की ‘बहु और माँ’ है,
ब्राह्मण समाज को आपके इस विक्टिम कार्ड से कोई सरोकार नहीं है, ब्राह्मण समाज को इस तरह के राजनीतिक और सस्ती सहानुभूति के हथकंडों में मत घसीटिए,
यूपी, उत्तराखंड और पंजाब के सामान्य वर्ग (𝗚𝗲𝗻𝗲𝗿𝗮𝗹 𝗖𝗮𝘁𝗲𝗴𝗼𝗿𝘆) के मतदाता:
भाजपा के राजनीतिक बंधक बनना बंद करें!
• आरक्षण पर सभी पार्टियां एक जैसी हैं:
भाजपा सामान्य वर्ग की रक्षक नहीं है। यह आरक्षण के मामले में कांग्रेस की नीतियों पर ही चल रही है:
महाराष्ट्र (72%), मध्य प्रदेश (73%), बिहार (75%), छत्तीसगढ़ (68%), राजस्थान (64%) और ओडिशा में बीजेपी सरकारों या उनके कार्यकाल में आरक्षण बढ़ा है।
आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा, कांग्रेस, सपा, डीएमके और राजद सभी समान हैं।
• भाजपा को 'ब्लैंक चेक' देना बंद करें: सिर्फ इस डर से भाजपा को वोट न दें कि कांग्रेस अधिक खराब है। यदि भाजपा आपकी विरोधी नीतियों के बाद भी जीतती रहेगी, तो वह कभी नहीं बदलेगी।
• अपने वोट की ताकत को समझें: किसी भी पार्टी को अपना स्थायी वोट बैंक न बनने दें। केवल उन उम्मीदवारों (चाहे वे किसी भी दल के हों या निर्दलीय) का समर्थन करें जो जातिगत कोटे के खिलाफ खड़े हों।
आपका वोट ही आपकी शक्ति है! जवाबदेही मांगिए ताकि नेता आपको हल्के में न लें।
#BJPAgainstGC