ख़ान Sir की पूरी बात ध्यान से सुनिए एक सच्चे इंसान को बदनाम करने के लिए भाजपा के हिंदू मुस्लिम और युवाओं को बाँटने के एजेंडा में मत फँसिए।
ख़ान Sir वही हैं जिन्होंने लाखों बच्चों को न्यूनतम शुल्क में पढ़ाया कभी हिंदू मुसलमान नहीं देखा।
इन्होंने तो सम्राट सरकार की तारीफ़ भी की ऐसे में ख़ान Sir को टारगेट करना ठीक नहीं।
मामले की गहनता से निष्पक्ष जाँच कराई जाए।
Khan Sir अब मुसलमान हो गए हैं,क़ानून व्यवस्था के मसले पर नफरती लोगों को मौका मिल गया। TV चैनल तो ऐसे लिख रहे हैं…फैसल खान के ठिकानों पर छापेमारी।
ठिकानों पर…वाह! दो-चार दिन में ISI से संपर्क भी खोज लाएंगे सूत्र। हजारों बच्चों की उम्मीद Khan Sir को नहीं छोड़ा तो किसी और की क्या बिसात!
मध्यप्रदेश से लेकर ओडिशा तक आदिवासी समुदाय अपनी जमीन बचाने के लिए बीजेपी सरकार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन इन गंभीर मुद्दों पर मीडिया में कोई बहस तक नहीं हो रही है।
भाजपाइयों का दोहरापन निंदनीय है, महिलाओं के नाम पर निकाली गयी रैली के बाद, जनता की आवाज़ उठानेवाली महिला पर ही एफ़आइआर करवाकर, भाजपा महिला का ही अपमान कर रही है।
भाजपा दोमुँही बातें करती है।
भाजपा जाए तो महिला सम्मान पाए!
अमेरिका के इन जागरूक लोगों को सलाम, जो दिखा रहे हैं कि लोकतंत्र केवल वोट देने से नहीं, बल्कि लगातार जागरूक और सक्रिय रहने से चलता है। और हम? हम तो अभी मंदिर मस्जिद की बहस में उलझे हुए हैं।
आज जो बालिका विद्यालय दिखाई देते हैं और बेटियाँ पढ़-लिखकर IAS, IPS, CM और PM बन रही हैं यह सब सावित्रीबाई फुले के संघर्ष की देन है।
देश की प्रथम महिला शिक्षिका एवं महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
राष्ट्रपति को बंगाल में किसने रिसीव किया और किसने नहीं किया, यह अपमान का मुद्दा नहीं है।
अपमान तब हुआ था जब राम मंदिर के उद्घाटन में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया।
अपमान तब हुआ था जब नए संसद भवन के उद्घाटन में देश की प्रथम नागरिक को नहीं बुलाया गया।
अपमान तब हुआ था जब मणिपुर में महिलाओं को नग्न घुमाया गया और उस पर भी उन्होंने मौन साध लिया।