@NavbharatTimes अभिव्यक्ति की आजादी का काँकरोच नाजायज फायदा ऊठा रहे है। इन्हें सवैधानिक पद की गरीमा का सम्मान करना चाहिए। गलती ईनकी नही है काँकरोच मानसिकता ऐसी ही होती है। काँकरोचो का मूल ठिकाना क्या होता है, किसी को कहने की आवश्यकता नहीं है।
@BBCHindi जंतर मंतर पर विघार्थियों का प्रर्दशन अपनी मांग को लेकर बिल्कुल जायज है, परन्तु विघार्थी जिस बैनरतले प्रर्दशन कर रहे है वो बैनर गलत है। अब तो इस बेनर मे कही दिमक भी जुड रहे हैं, लगता है अब एक नई पार्टि दिमक जनता दल का भी उदय होने वाला है।
@BBCHindi@jugalrp@smserajali Gen-Z का युवा तो युही बदनाम हो रहा है। असली काँकरोच तो यह अधेड़ प्रर्दशनकारी है और इस आंदोलन मे कही असामाजिक तत्व भी मौजूद है जो किसी दल के टूलकिट है जो वातावरण को हिंसा से हिंसक बना रहे है।
@Flipkart
Fraudsters are running scams by using Flipkart's name and showing reels of sofas and various types of chairs. Please take appropriate action to stop these fake companies. These fraudulent entities are damaging Flipkart's reputation and brand image.
@ABPNews@chitraaum प्रदर्शन की आड़ में प्रेस पर हमला, यह निंदनीय है। लगता है सीजेपी मे असामाजिक तत्व ज्यादा है जो विघार्थियों की आड मे पुलिसकर्मियों व प्रेस रिपोर्टर पर हिंसक हमला कर रहे है। हमलवारों की पहचान करके उनके विरुद्ध कडी कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए।
@PiyushGoyal@narendramodi कांग्रेसियों का ईतिहास रहाँ है, किसी भी मुद्दों पर चर्चा न करना और सदन से वाकआउट करना व सदन के बारह हगामा करना और पुरे देश को डिस्टर्ब करना। यह पार्टी तो विपक्ष की परिभाषा मे भी खरी नही है, और विपक्ष के काबिल भी नही है। इनका राजनीतिकरण केवल स्वयं का हित साधना तक ही सीमित है।
@ZeeNews@RahulSinhaTV@yogrishiramdev काँकरोचो की ओकात नही है की वो अपनी तुलना किसी महान व्यक्ति के व्यक्तित्व से करे। काँकरोच, काँकरोच ही रहेंगे। इनका ईलाज व खात्मा बेगोन या हिट स्प्रे से ही होगा।
बडी ही शर्मनाक बात है की मानसून सत्र के दो दिन हगांमे के भेट चढ गये और जनता की गाढी कमाई का पैसा बर्बाद। इससे लगता है नेताओं को कोई फर्क नही पडता, बस राजनीति चमकनी चाहिए। और उधर प्रधानमंत्री आवास के बाहर हगांमा। राजनीति स्तर का यु गीरना देश हित मे नही है।
@SushantBSinha पुलिस प्रशासन पारदर्शिता के साथ अगर जाँच करे तो यह हगामेबाज कोई न कोइ टूलकिट के हत्यार निकलेगे। और मुख्य टूलकिट किसी राजनीति दल का ही होगा, बस जाँच पारदर्शिता से होनी चाहिए। रियल आ़दोलनकारी विघार्थी हिंसक नही हो सकते है। मंच कोई भी हो, वो तो अपने हक की लडाई शांति से लड रहे है।
@NavbharatTimes वर्तमान सरकार मे अहंकार तो नजर आ रहा है।सरकार समय रहते NEET घोटाले पर शक्ति से उचित न्यायपूर्ण कदम उठाती तो आज विघार्थी वर्ग सवाल खडा नही करते, शायद आंदोलन भी नही होता। NEET पेपर लीक घोटाला अमृत काल पर कलंक है।इन सब से सरकार की छवि धुमिल हो रही है।इन का असर आने वाले बेलट तक रहेगा
@ndtvindia@sucherita_k@atullondhe यह बिल्कुल सत्य है की आंदोलनकारियों मे असामाजिक तत्वो की घुसपैठ के कारण मूल आंदोलन दिशाहीन हो जाता है। अगर पुलिस प्रशासन पारदर्शिता से हर पहलु की जाँच करे तो यह पता चले की जो टूलकिट है वो किस दल का है। और मुझे विश्वास है की जाँच के पश्चात चौकाने वाले नतीजे आयेंगे।
@ABPNews@chitraaum CJP के प्रदर्शनकारियों के पथराव में 50 पुलिसकर्मी घायल, परन्तु पुलिस के लाठीचार्ज मे कितने प्रदर्शकारी घायल हुए वो भी आकडे न्यूज चैनलों पर पारदर्शिता से आने चाहिए।
@RubikaLiyaquat I believe that credible journalism serves as a bridge between the public and the government. The rude behavior directed at a journalist on the ground today is condemnable and shameful, and constitutes an attack on democratic culture. Protesters must stay within their limits.
@priyankagandhi Priyanka is right; the govt. needs to thoroughly review its policies & address the systemic inadequacies regarding instances of paper leaks & irregularities. Recurring paper leaks or irregularities reflect govt. negligence. It is a matter concerning the future of the students.
@news24tvchannel@rajeevranjanMKH इसमें कोई दोराय नही है की कुछ असामाजिक तत्व शांति पूर्ण आंदोलन को भटकाने के लिए आंदोलनकारियों के दल मे सम्मलित हो जाते है। पुलिस को ऐसें तत्वों की पहचान कर उन पर कडी कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए। विघार्थी अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे है, वो उग्रता का रास्ता नही अपना सकते है।
@news24tvchannel@RahulGandhi वर्तमान देश मे हो रही घटनाओं पर यह अनुमान लगाना गलत नही है की सरकार युवाओं की घोर विरोधी है। पेपर लीक होना गंभीर मुद्दा है। जन्तर मन्तर पर शांति पूर्ण विरोध मे प्रशासन द्वारा अधिकतर मासूम विघार्थियों पर लाटी चार्ज करना निंदनीय है। समय पर शांतिपूर्ण वार्ता से उचित हल निकल सकता था।
@TNNavbharat@RubikaLiyaquat The media should bring the real issues before the country, which could largely help avert agitations. As for the 'agitators' (professional protesters), they invariably use such platforms to further their own political interests.
@aajtak@SwetaSinghAT NEET पेपर लिक से जो विघार्थीगण आघात हुए वो इस मुद्दे के विरुद्ध सडको पर उतरे, अब उनके खिलाफ शिकायतों के आधार पर FIR दर्ज कर विघार्थियों के भावि भविष्य पर प्रशासन प्रश्न चिन्ह लगाने का काम कर रहा है। मतलब जले पर नमक छिडकना।