24 वर्षीय • शायरी • दिल की बातें • पुरानी दुनियां
मेरे बाद तुम किसी की भी लाडली नहीं रहोगी,
मैं वो कमी हूँ जिसे तुम अपने शौहर के पास बैठ कर भी महसूस करोगी।
मैं बेरागी हूं... महादेव नहीं
पर तुम्हारी काया से अधिक तुम्हारी आत्मा को चाहूंगा..!
मैं प्रेमी हूँ... कान्हा नहीं
पर तुम्हारे नाम को सदैव अपने आगे लगाऊंगा..!
मैं मर्यादित हूं... श्रीराम नहीं
पर तुम्हारे अलावा मैं किसी और का न हो पाऊंगा..!
#निस्वार्थ ✍🏻
सदैव मेरा मार्गदर्शन करने वाले लोगों ने कहा है,
कि मैं बहुत आगे जाऊँगा, मैं बस इतना चाहता हूँ कि
सफर चाहे जितना बड़ा हो जाए, ऐसे लोगों को हमेशा अपने आगे पाऊँ।
किसी को नफ़रत है मुझसे, कोई प्यार कर बैठा है।
किसी को यकीन नहीं मुझपे, कोई ऐतबार कर बैठा है।
कितनी अजीब है ना ये दुनिया, कोई मिलना नहीं चाहता और कोई इंतज़ार कर बैठा है।
त्याग दिया,
मैंने वो रिश्ता जो ना मेरे सामने कभी मेरा हुआ, और नही मेरे पीठ पीछे हुआ, वो कहती जरूर थी कि मैं सिर्फ तेरी हूँ...
हमेशा मुझे झूठी तसल्ली देती थी उसने जब भी मुंह खोला मेरे विरोध के लिए खोला पर
मेरे अधिकार के लिए उससे दो शब्द तक ना बोले गए...
थक कर सो जाने का वो बहाना कमाल था,
10 बजे का वो Good Night भी एक सवाल था,
जब देखा रात के 3 बजे तुम्हें online...
तब समझ आया कि तुम्हारा जागना किसी के नाम था।
मैं उन लोगों को कभी माफ़ नहीं करूँगा,
जिन्होंने मेरे दिल में घुटन पैदा की, मुझे खुशियों से डरना सिखाया,
मुझे उल्टा बोलने पर मजबूर किया, मेरे सहने की सारी हदें पार करवा दी,
मुझे वो बनने पर मजबूर किया, जो मैं कभी था ही नहीं..।