नायब सैनी जी, जब सरकार जनता के सवालों से डरती है तो पुलिस को आगे कर देती है। सत्ता का घमंड इतना बढ़ गया है कि अब जनप्रतिनिधियों पर भी पुलिस की ताकत दिखाई जा रही है।
याद रखिए नायब सैनी जी, पुलिस के डंडे और धक्के से आवाज दबाई जा सकती है, जनता का गुस्सा नहीं। जिस कुर्सी के अहंकार में आज आप लोकतंत्र को कुचल रहे हैं, कल उसी कुर्सी से जनता आपको बाहर का रास्ता दिखाएगी।
#अहंकारीभाजपासरकार #बीजेपी_हटाओ_देश_बचाओ #हरियाणा_विधानसभा
किरण चौधरी एक तरफ सज्जन कुमार और टाइटलर के साथ अपने रिश्तों का गुणगान कर उन्हें धन्यवाद दे रही हैं कि इन्हीं नेताओं ने उन्हें आगे बढ़ाया।
निशाना चौधरी दीपेंद्र सिंह हुड्डा जी को बना रही हैं, उसके लिए जो उन्होंने बोला ही नहीं।
'इसे ही कहते हैं दोगली राजनीति'
#भाजपा_हटाओ
#देश_बचाओ
हरियाणा में बड़ी-बड़ी बातें करने वाले इनेलो नेताओं की राजनीति का सच अब छात्र राजनीति में भी सामने है।
ABVP और ISO का गठबंधन साफ सवाल खड़ा करता है—
हरियाणा में भाजपा की ‘B टीम’ कौन है?
जनता सब देख रही है, सब समझ रही है।#PanjabUniversity#Haryana#Bteam
लगातार कांग्रेसी ब्राह्मण नेताओं द्वारा कुलदीप शर्मा के कर्म-कांड को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पहले विधायक कुलदीप वत्स और सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने सवाल उठाए, अब पूर्व विधायक नीरज शर्मा ने कहा कि कुलदीप शर्मा ने तो अपने पिता जी के साथ भी धोखा किया और अपने परिवार के भी सगे नहीं हैं।
नीरज शर्मा बोले, जो अपने परिवार का सगा नहीं, वह दूसरों का क्या सगा होगा?
@DeependerSHooda
वरिष्ठ पत्रकार सुशील मानव और रवींद्र श्योराण के विश्लेषण ने साफ कर दिया है कि दीपेंद्र हुड्डा जी ने उस कथित अंग्रेज़ी शब्द का प्रयोग किया ही नहीं था। गहन पड़ताल के बाद भी उनके बयान में ऐसा कोई शब्द नहीं मिला।
इसके बावजूद दीपेंद्र जी ने उस शब्द के लिए भी खेद व्यक्त किया, जो उन्होंने कभी कहा ही नहीं था।
यह कदम दर्शाता है कि उनके लिए सिख समाज का मान-सम्मान और आपसी भाईचारा किसी भी राजनीतिक विवाद से कहीं ऊपर है।
@DeependerSHooda
#Haryana
1907 में अंग्रेजों के किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ सरदार अजीत सिंह जी और शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी के पिता सरदार किशन सिंह जी ने ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन की अगुवाई की थी। उस दौर में चौधरी मातू राम हुड्डा जी भी इस संघर्ष में उनके साथ खड़े थे।
@DeependerSHooda
@Vishavdeep_Inc सिख समाज और दीपेंद्र सिंह हुड्डा जी का रिश्ता दिलों का रिश्ता है। यह रिश्ता सम्मान, विश्वास, भाईचारे और संघर्ष के साथ का है। वक्त चाहे कितना भी बदल जाए, सच्चे रिश्ते मुश्किल वक्त में निभाए गए साथ से पहचाने जाते हैं। यही प्रेम और सद्भाव इस रिश्ते की असली ताकत है। ❤️🙏
दीपेंद्र हुड्डा जी ने हमेशा भाईचारे और एकता की बात की है। कुछ लोगों द्वारा उनके बयान को गलत तरीके से पेश करके हरियाणा-पंजाब के भाईचारे और सिख-पंजाबी समाज के साथ हमारे सदियों पुराने रिश्ते को नहीं तोड़ा जा सकता। नफरत की राजनीति पर भाईचारा हमेशा भारी पड़ेगा।
@DeependerSHooda
#Mp_साहब
दीपेन्द्र जी के परिवार का सिख समाज से 110 साल पुराना रिश्ता है। किसान आंदोलन हो या कोई और मुद्दा, दीपेन्द्र जी हमेशा सिख समाज के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं।
सिख समाज ने देश के लिए जो कुर्बानियां दी हैं, हम उनका सम्मान करते हैं और उन्हें दिल से सलाम करते हैं।
@DeependerSHooda@MLAKuldeepVats
दीपेन्द्र हुड्डा जी के बयान को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर ऐसे शब्द उनके मुंह में डाल दिए गए, जो उन्होंने कहे ही नहीं। उन्होंने स्वयं स्पष्ट किया कि ‘रोल मॉडल’ शब्द का उन्होंने इस्तेमाल नहीं किया।
हरियाणा और सिख समाज का रिश्ता सदियों पुराना है। इस भाईचारे को राजनीतिक स्वार्थ के लिए तोड़ने की कोशिश निंदनीय है। सच्चाई को सामने रखना जरूरी है, अफवाहों को नहीं।
@DeependerSHooda
#Haryana
#Punjab
दीपेंद्र सिंह हुड्डा जी ने किसान आंदोलन में शहीद हुए 750 किसानों, जिनमें बड़ी संख्या सिख किसानों की थी, के परिजनों को सरकारी नौकरी और शहीद किसान-मजदूरों की याद में हरियाणा में राष्ट्रीय किसान आंदोलन स्मारक बनाने की मांग उठाई थी।
कुछ लोगों द्वारा भाईचारा तोड़ने की कोशिश में उनके मुंह में ऐसे शब्द डालकर, जो उन्होंने कहे ही नहीं, उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
समाज को बांटने वालों ध्यान से सुन लो, ऐसी हरकतों से न सिख समाज के साथ हमारा भाईचारा टूटेगा, न हरियाणा-पंजाब की एकता।
@DeependerSHooda
न ये बेरोजगार हैं, न ये तनख्वाहदार हैं,
युवाओं को बना दिया दिहाड़ीदार,
शिक्षित युवा हैं लाचार,
जिनका शोषण हो रहा है बार-बार।
HKRN के तहत युवाओं को डिप्लॉय कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए। युवाओं को वेजेस (दिहाड़ी) नहीं, सम्मानजनक सैलरी और नियमित सेवा चाहिए।
संविधान के मौलिक अधिकारों के अनुच्छेद 16 में रोजगार के समान अवसर की गारंटी दी गई है। फिर एक ही काम के लिए पक्के कर्मचारी को ₹80,000 और HKRN कर्मी को मात्र ₹20,000 क्यों? समान काम के लिए समान वेतन और पक्का अधिकार युवाओं का हक है।
HKRN व्यवस्था को बंद किया जाए, स्वीकृत पदों पर पारदर्शी व नियमित भर्तियां हों और HKRN में कार्यरत युवाओं को पक्का कर सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिले।
हरियाणा में कच्चे सफाई कर्मचारियों का आंदोलन चल रहा है। उनकी मांगें जायज हैं और कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी है। सरकार द्वारा सफाई कर्मियों की मांगों को अनदेखा करने के चलते सफाई व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है, पूरे प्रदेश में गंदगी का अंबार लग गया है।
कांग्रेस सरकार के दौरान हमने एक कलम से 11000 ग्रामीण और 14000 शहरी सफाईकर्मी नियुक्त किए थे। लेकिन बीजेपी सरकार ने आज तक उनको पक्का भी नहीं किया।
सरकार हठधर्मिता छोड़कर सफाई कर्मचारियों से बातचीत करे और उनकी समस्याओं का समाधान करे।
मेरे अभिन्न मित्र, निष्ठावान सहयोगी और निःस्वार्थ जनसेवक श्री अहमद पटेल जी की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि।
कांग्रेस के सच्चे सिपाही और आजीवन पार्टी की विचारधारा के प्रति समर्पित रहे हरदिल अजीज अहमद भाई की कमी हमेशा खलेगी। उनकी स्मृतियां सदैव हमारे दिलों में जीवित रहेंगी।
आज चंडीगढ़ स्थित आवास पर आगामी 27 अगस्त से शुरू हो रहे हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर कांग्रेस विधायक दल की महत्त्वपूर्ण बैठक ली। इस दौरान प्रदेश के आम जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों को विधानसभा में पुरजोर तरीके से उठाने की रणनीति तय की गई।
बैठक की शुरुआत पूर्व सांसद सज्जन कुमार जी को दो मिनट का मौन रख भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई।
पूर्व सांसद एवं मेरे मित्र सज्जन कुमार जी के निधन का समाचार पीड़ादायक है। वह न केवल अच्छे नेता थे बल्कि जिंदादिल इंसान थे।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें एवं परिजनों, समर्थकों को यह दुःख सहन करने की शक्ति दें।
विनम्र श्रद्धांजलि!
1907 में अंग्रेजों के किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ सरदार अजीत सिंह जी और शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी के पिता सरदार किशन सिंह जी ने ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन की अगुवाई की थी। उस दौर में चौधरी मातू राम हुड्डा जी भी इस संघर्ष में उनके साथ खड़े थे। इतना ही नहीं, अंग्रेजी हुकूमत से बचने के लिए सरदार अजीत सिंह जी ने कुछ समय चौधरी मातू राम जी के घर में रहकर भूमिगत जीवन बिताया था।
आज कुछ लोग राजनीतिक स्वार्थ के लिए दीपेंद्र हुड्डा जी पर सिख समाज के अपमान का आरोप लगा रहे हैं। उन्हें इतिहास के पन्ने भी पलट लेने चाहिए और पहले यह देखना चाहिए कि इस परिवार ने सिख समाज और किसान संघर्ष के साथ रिश्ता कब से निभाया है।
सिखों के सम्मान की बात जुबान से नहीं, इतिहास और कर्म से साबित होती है। और हुड्डा परिवार का इतिहास इस बात का गवाह है।
@BhupinderShooda@DeependerSHooda