@AshwiniVaishnaw जी इसको क्या नाम देंगे ?
आप लोग पैसेंजर को फाइन दीजिए उसके 5 घंटे बर���बाद करने का ?
वो टाइम पर ही आया था अपने परिवार को छोड़ने के लिए ।
She casually walked up to the stage in the low waist saree in an audio function.
The walk up to the stage alone created news all over because of the way she walked and the way she draped the saree around her waist.
Such was the craze back then.
Queen Kajal👑
Police have arrested this cook who was preparing food in the kitchen of Hotel Flourish Stays, where the fire reportedly started.
Next, they should arrest the vegetable, grocery, and dairy suppliers. Had they not supplied ingredients that day, there would have been no cooking and no fire.
After that, they should arrest the farmers who grew the vegetables, the factory owners who produced the grocery items, and the cows that gave the milk.
Sabko pakad lena. Kisi ko mat chhodna. Except, of course, the officials whose job it was to inspect such establishments and flag safety violations before a tragedy occurred.
इनका नाम रियाजउद्दीन है लेकिन मेरा मन करता है कि इनका नाम फरिश्ता रख दूं।
क्योंकि इन्होंने जो काम किय��� है न वो सबके बस की बात भी नहीं है, बात छोड़िए ऐसी परिस्थिति में लोग अपनी दुकान बंद करके भाग लेते।
दिल्ली के जिस होटल में आग लगी थी वहीं सामने रियाजउद्दीन के गद्दे की दुकान है, जब आग लगी और लोग होटल से कूदने लगे तो
रियाजउद्दीन ने वहां अपनी दुकान के सारे गद्दे बिछा दिए जिससे 8-10 लोगों की जान बच गई, इसमें उनका लगभग 2 लाख का नुकसान भी हुआ, लेकिन
रियाजउद्दीन कहते हैं कि ��ो बहुत संतुष्ट हैं कि लोगों की जान बच गई।
नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार छात्र आशुतोष पांडेय की परीक्षा छूट गई।
आंदोलनों में शामिल छात्रों के प्रति प्रशासन इतना कठोर क्यों है?
लोकतांत्रिक अधिकारों की बात करने वाले लोग आखिर छात्रों की आवाज़ को दबाने पर क्यों उतारू हैं?
यदि आशुतोष निर्दोष हैं, तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। न्याय सभी के लिए समान होना चाहिए।
#ReleaseAshutoshPandey
You want the young officer to sacrifice his life for the love of the Nation, but you don’t want him to express his love for his fiancée.
In the Army we say ‘Youngster nahi karega, toh kaun karega’.
If you can not find a fault in his professional capabilities, don’t do this nuktachini for such a pure gesture of love and belonging.
Military equipment has been on display during many ‘Know your Army’ exhibitions around the country. The students and non military personnel have clicked pics with it showing pride and love for the Army. So, please don’t bring in the national security angle into this.
Let the young soldier do his national duty with pride and honour 👍
Jai Hind 🇮🇳
कंपनी को बचाने के लिए ‘ब्लैकलिस्ट’ क्लॉज हटाया गया?
आज @cbseindia29 की यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि इसने एक ऐसी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया जिसने इस स्केल पर न तो काम किया था, न कोई पायलट प्रोजेक्ट। कंपनी तेलंगाना में जिस नाम से थी, और जो डायरेक्टर थे, उन्हें ही आगे कर के ये कॉन्��्रैक्ट लिया गया।
टेंडर के नियम बदले गए, ढील दी गई, शिक्षकों ने मना किया फिर भी पैन इंडिया परीक्षा कराई गई। आज पता चला है कि @dpradhanbjp की प्रिय कंपनी को CBSE ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकती।
अगस्त 2025 में जो नियम थे, उसमें यह संभावना थी कि कंपनी का पेमेंट रोक सकते हैं, पैनल्टी लगा सकते हैं, ब्लैकलिस्ट कर सकते हैं। परंतु, अगले महीने में नियमों से ‘ब्लैकलिस्ट’ शब्द हटा दिया गया।
प्रश्न यह है कि किसके कहने से ब्लैकलिस्ट शब्द हटाया गया? क्या CBSE या शिक्षा मंत्रालय/मंत्री को यह बात पता थी कि OSM हैंडल नहीं हो पाएगा? और अगर ऐसा हुआ भी तो कंपनी बची रहेगी?
और फाइन कितना है? यदि आपने बेसिक समस्याओं का निदान नहीं किया तो ₹5,000/घंटा; समस्या पता होने पर निदान न आने पर लाख रुपये प्रति पंद्रह मिनट; रूटकॉज एनालिसिस और उसे सही करने की योजना न जमा करने पर लाख रुपये/घंटा की पैनल्टी है।
अधिकांश समस्याएँ ₹5000/घंटा वाले में ही हैं: लॉगिन, हैंडहोल्डिंग डॉक्स, यूजर मैनुअल्स, ऑन साइट
सपोर्ट, ऑनबोर्डिंग असिस्टेंस या और कुछ जो CBSE के साइट को ठीक से चलाने के लिए आवश्यक है।
यह सड़ाँध अत्यंत गहरी है, इसकी जाँच होनी चाहिए कि जिस परीक्षा में पूरे देश के 18 लाख बच्चे बैठ रहे हों, उसे सुचारू रूप से न करा पाने की स्थिति में CBSE ने ‘ब्लैकलिस्ट’ का विकल्प क्यों नहीं हटाया?
PS: और हाँ मंत्री जी, ₹150/पोस्ट वाले ट्रोल को नियंत्रण में रखो, बेहतर रहेगा वरना डॉकूमेंट्स खोदना मुझे आता है। उसी AI से सब कुछ निकालने में बहुत कम समय लगेगा।
Michael Jackson watched RUSH HOUR 2 (2001) and immediately called Chris Tucker.
“This is Michael Jackson. I saw Rush Hour 2… and you’re kicking with the wrong leg. Stop making me look bad.”
That phone call ended up starting their friendship.
‼️Welcome To MODI's India‼️
Meet IAS DIVYA MITTAL (@divyamittal_IAS)
She Solved 75 year Old Water Problem But Got Removed
Because of the Ego of BJP MLA
"Rama Shankar Singh Patel".
In Lahuria Village, Mirzapur there was water crisis for 75 years.
To Solve This Water Problem, IAS Divya Mittal Started Tap Water Suppy.
Local BJP MLA was not invited to the Jal Puja ceremony which hurt his ego.
MLA complained this to the CM, which resulted in Divya's Transfer.
Just after Divya Mittal Transfer, Unknown people broke the pipeline.
Because of the BJP MLA,
The village lost water supply again.
This is exactly why India struggles to progress when politics becomes bigger than people.
Now Andhbhakts will Defend "MODI ne thodi kia hai?"
As if BJP is the Party of Donald Trump.
इनका नाम अरुणा रॉय है।
26 मई 1946 को मद्रास में जन्मी अरुणा रॉय ने दिल्ली में अंग्रेज़ी साहित्य की पढ़ाई की और 1968 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) जॉइन की। लेकिन सिर्फ सात साल बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी। उन्होंने सत्ता, सुविधाएँ और सरकारी ताकत को छोड़कर राजस्थान के गाँवों का रास्ता चुना, जहाँ मज़दूरों को कानूनन तय न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही थी।
1990 में उन्होंने राजस्थान के देवडूंगरी गाँव में “मज़दूर किसान शक्ति संगठन” (MKSS) की सह-स्थापना की। यह आंदोलन एक मिट्टी की झोपड़ी से शुरू हुआ था। गाँवों में जन सुनवाई होने लगी। लोग सरकारी रिकॉर���ड लेकर अधिकारियों के सामने खड़े होते और बताते कि कागज़ों में मजदूरी का भुगतान दिखाया गया, लेकिन असल में पैसा कभी मिला ही नहीं। स्थानीय प्रशासन ने कई बार विरोध किया, लेकिन अरुणा रॉय और उनके साथी पीछे नहीं हटे।
धीरे-धीरे यह लड़ाई सिर्फ मजदूरी तक सीमित नहीं ��ही। एक बड़ा सवाल उठाया गया — अगर जनता को सरकारी फाइलें और रिकॉर्ड देखने का अधिकार मिल जाए, तो भ्रष्टाचार कैसे छिपेगा? MKSS ने भारत में सोशल ऑडिट और जन जवाबदेही की अवधारणा को मजबूत किया। अरुणा रॉय ने वर्षों तक आंदोलन, पदयात्राएँ और धरने किए। हज़ारों आम लोगों को सिखाया गया कि सरकारी विभागों से जानकारी कैसे मांगी जाती है।
इसी संघर्ष ने आगे चलकर भारत के सूचना के अधिकार आंदोलन की नींव रखी। 2005 में सं���द ने Right to Information Act (RTI) पारित किया। आज देशभर में करोड़ों लोग जिस RTI कानून का इस्तेमाल करते हैं, उसके पीछे वर्षों का जन संघर्ष था।
साल 2000 में उन्हें Ramon Magsaysay Award से सम्मानित किया गया। 2011 में उन्होंने Padma Bhushan लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वे सरकारी सम्मान प्रणाली में विश्वास ��हीं करतीं।
80 वर्ष की उम्र में भी वे जनता के अधिकारों और पारदर्शिता की लड़ाई से जुड़ी हुई हैं।
भारत को ऐसी महिलाओं की कहानियाँ याद रखनी चाहिए, जिन्होंने सत्ता नहीं, जनता को चुना।
नेहरू का गिरेबान और शहाबुद्दीन का काला झंडा
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डरपोक आदमी को देश का पीएम नही होना चाहिए। नार्वे में जैसे पीएम मोदी सवालों से पीछा छुड़ाकर आए थे उसके बाद एक पुरानी कहानी याद आई।पढ़िए-
एक कहानी 1955 की है. बिहार में छात्रों पर पुलिस ने फ़ायरिंग की थी. बाद में जब नेहरू पटना पहुंचे तो उस समय 20 साल के एक नौजवान सैय्यद शहाबुद्दीन ने 20 हज़ार छात्रों के साथ पटना हवाई अड्डे पर नेहरु के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया और उन्हें काले झंडे दिखाए। नेहरू मुर्दाबाद के नारे लग रहे थे। प्रेस हमलावर था। नेहरू की भारी आलोचना हुई। सभी अखबारों के फ्रेंटपेज पर शहाबुद्दीन की तस्वीर थ���।
समय बीता।केवल दो साल के बाद उसी नौजवान ने सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल की। लेकिन ख़ुफ़िया विभाग ने उसी विरोध प्रदर्शन का हवाला देते हुए उन्हें वामपंथी क़रार दिया और उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी।
बाद में जब फाइल नेहरू तक पहुंची तो नेहरू ने ख़ुद अपने हाथों से फ़ाइल पर लिखा कि "उस विरोध प्रदर्शन का राजनीति से कोई संबंध नहीं है और ये नौजवानी के उल्लास (एक्सप्रेशन ऑफ़ यूथफुल एक्जूबि���ेंस) में किया गया काम था." विदेश मंत्री रह चुके नटवर सिंह ने ख़ुद शहाबुद्दीन को ये बात बताई और नेहरू की फाइल नोटिंग की एक कॉपी भी शहाबुद्दीन को दी थी।
शहाबुद्दीन विदेश सेवा के लिए चुन लिए गए और जब अटल बिहारी वाजपेयी जनता पार्टी की सरकार में विदेश मंत्री थे, उसी समय शहाबुद्दीन ने नौकरी से इस्तीफ़ा देकर राजनीति में आने का फ़ैसला किया।80 के दशक में बाबरी मस्जिद और शाहबानो मामले को राजनीतिक म��द्दा बनाकर शहाबुद्दीन एक बड़े नेता बनकर उभरे थे।
वो एक बार राज्यसभा और दो बार लोकसभा के लिए चुने गए। नेहरू ने अगर शहाबुद्दीन को क्लीन चिट नहीं दी होती तो उनका क्या होता ये कहना मुश्किल है।
हम सबके प्यारे चाचा नेहरू को विनम्र श्रद्धांजलि
Iskra Lawrence was bullied for being over weight when she was 15, As a typical teenager she went into extreme diet and realised that the diet routine was so toxic and decided to embrace her curves, instead of being size zero
In 2016, Iskra lawrence received some nasty comments for making a video of eating chips.
Iskra didn't delete that reel instead she made a slow motion video of herself eating chips in lingerie, surrounded by dozens of chips pockets, that one video went viral for her body positivity
Iskra Lawrence never used photoshop or any retouch in her social media photos, saying women need to be real in all forms.