@GenZDeshBhakt@dromsudhaa आरक्षण अफीम है, एक बार लत लग गई है, तो उसके बिना जीना भी मुश्किल लग रहा है
सरकार उस अफीम को चटाती जा रही कि शांत रहे और धीरे धीरे खुराक भी बढ़ा रही जब तक पूरा देश बर्बाद न हो जाए
@shuklajimp पंडित जी, ये महाभारत gc ने नहीं चुना, वो तो बीजेपी को चुन कर अपने काम में लगा था
चूंकि बीजेपी ने भी विश्वासघात किया इसलिये अब लड़ना ही पड़ेगा
और रही बात तैयारी की, महाकाल और राम का नाम ले कर शुरू करिए, बाकी वो देख लेंगे
जिताना होगा तो जिताएंगे नहीं तो हरा देंगे
अब उनके हाथ में
I sincerely invite you to join this movement. If you are in Delhi, I would also request you to join us at the press conference tomorrow. This cause needs your support now more than ever.
पूरे इतिहास में सवर्ण समाज ने ऐसे अभिजात वर्ग को भी जन्म दिया है, जिसने अपने ही समाज और राष्ट्र के साथ विश्वासघात किया। प्रस्तुत है भेड़ की खाल में छिपा एक और भेड़िया।
यह वही व्यक्ति है जिसने कभी बसपा के प्रत्याशी के रूप में निर्वाचन लड़ा था, उसी राजनीतिक परंपरा से जिसका उद्घोष था: “तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार।” तब इसने अपनी सवर्ण पहचान भुलाकर उन लोगों से गठजोड़ किया, जो सवर्णों को अपशब्द कहते थे और उनके अस्तित्व को मिटाने की राजनीति करते थे।
आज राजनीतिक वेश परिवर्तित कर भाजपा में आने के उपरांत इसे सवर्ण पहचान तभी स्मरण आती है, जब उसका उपयोग सवर्णों पर प्रहार करने और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की चाटुकारिता करने में हो।
यह सवर्ण आंदोलन को राष्ट्रविरोधी बताता है और स्वयं को सवर्ण समाज का प्रतिनिधि प्रस्तुत करता है। इसका नवीनतम तर्क तो और भी अद्भुत है: सवर्णों को संपन्न वर्ग अथवा उपवर्गीकरण की चिंता क्यों हो, क्योंकि उन्हें आरक्षण नहीं मिलता।
अर्थात् सर्वाधिक कर दो। उन्हीं करों से संचालित योजनाओं का दासों की भाँति वित्तपोषण करो। अपने ही धन से व्यवस्था चलाओ। परंतु यह प्रश्न पूछने का दुस्साहस मत करो कि तुम्हारा धन कहाँ जा रहा है। भार वहन करो, जातिगत भेदभाव सहो और मौन रहो।
और यह महोदय हमें त्याग का पाठ पढ़ा रहे हैं।
इसका पाखंड यहीं समाप्त नहीं होता। इसके अपने बच्चे अमेरिकी नागरिक हैं। भारत की जातिगत राजनीति से इसके पास खोने को कुछ नहीं, पाने को बहुत कुछ है। यह चाहता है कि भारतीय नागरिक अपने बच्चों के भविष्य की बलि दें, ताकि यह और इसके राजनीतिक स्वामी उस राजनीति से लाभ उठाते रहें।
अर्थात् स्वयं का भविष्य सुरक्षित रखो, अपने बच्चों को विदेश भेजो और फिर भारत में रहने वाले भारतीयों से कहो कि वे अपने बच्चों का भविष्य जातिगत राजनीति की वेदी पर चढ़ा दें।
वाह रे त्याग!
जिस व्यक्ति का इस व्यवस्था के परिणामों में कोई वास्तविक हित नहीं है, वही चाहता है कि उसके समस्त परिणामों का भार आप उठाएँ।
यह सामाजिक न्याय नहीं है। यह सिद्धांत का मुखौटा धारण किए राजनीतिक अवसरवाद और विश्वासघात है।
@RameshDiga56172@ews_army Bhai, hero nahi banaya h. Many a times u don't even agree with him
Lekin agar koi kisi ki behen ke bare mein ulta-seedha bole, to phir no holds barred. And u know similar comments were made in d past for GC sisters nd daughters
He deserved the reply. It was long overdue
@rofulnai@beinganil29@SurajKrBauddh Didi u need to reply in their own language to make them understand how one feels when these parasites ask for GC sistes and daughters
@RiseofBurnol@himanshu11131 If u want to make BJP as ur father, go ahead.
BJP shd understand they r at the top bcs of Hindus and not the other way round. Don't be delusional, if BJP is out of power, wht will happen
Nthing'll happen. Hindus survived long before BJP existed and will remain after it is gone
@tarunjatav50 Kis Chu#$# ne btaya ki ek hi admi ne apne kamre me baith k sanvidhan banaya h
Constitution was made by the efforts of many, and reservation was a temporary provision which politicians just extended for their selfish means to garner votes
@AnilSir_Uncut नाम के आगे Sir लिखने से दिमाग नहीं आता
UGC, SC/ST, Reservation — सब सिर्फ GC को demonise और prosecute करने के लिए
ये equality नहीं, inequality का हथियार हैं
Reservation = legalised discrimination against GC
@kanha89@CAChirag Income Tax needs always need to be revised based on ppl purchasing power and inflation.
U cannot simply compare the rupee value from let's say 1990 or 2000 or even 2014 when comparing to current rate
@Shehzad_Ind Just adding “CA” before your name doesn’t make one intelligent.
If you’re comparing with the US, do it right:
Tax agricultural income (treat as business income + rebate if needed)
Cut the freebies
These two alone would ease the burden on the middle class.
Kavi - Laura-Skoda ki Kalam se...
प्यार किया तो ठीक है, मगर इतना तो मानो,
सादगी के नाम पर गंदगी को मत पहचानो।
साधारण कपड़े हों, पर धुले हुए तो हों,
जूतों पर धूल हो तो साफ किए हुए तो हों।
पसीने की बू को प्रेम की निशानी मत बनाओ,
नहाना भी सीखो, फिर प्रेम के गीत सुनाओ।
गरीबी कोई दोष नहीं, सादगी कोई गुनाह नहीं,
सस्ता होना शर्म नहीं, पर गंदा रहना वाह नहीं।
प्यार अगर सच में है, तो खुद का सम्मान भी रखो,
अपने तन, कपड़ों और आसपास का ध्यान भी रखो।
लापरवाही को इश्क़ का तमगा देना बंद करो—
प्यार करो, मगर पहले इंसान की तरह साफ रहो।
...और सबसे खतरनाक बात तब होती है जब कोई अपनी लापरवाही को “प्यार की कसौटी” बनाकर उसका महिमामंडन करने लगे।