झारखंड में पेपर लीक हो गया है, हजारों छात्र छात्रा कई दिन से धरने पर बैठे हैं?
काँग्रेस के सहयोगी पार्टी का शासन है?
अखिलेश यादव जी डिम्पल भाभी को भेजकर छात्रों का समर्थन कब करोगे?
@MrMishra अगर ये सच है तो वृद्धाश्रम प्रशासन को इस लड़के की जूतों जूतों पिटाई करनी चाहिए ... ये कमी वृद्धाश्रम के कर्मचारियों की कमी है वो लड़का वृद्धाश्रम आया कैसे ....??? ये एक बहुत बड़ा सवाल है
दुनिया में कितना ग़म है, मेरा ग़म कितना कम है।
इस दुनिया में इंसान कितना दुख झेल रहा है।
भगवान की कृपा से हम में से ज़्यादातर लोग ऐसे दुखों से बहुत दूर हैं। फिर भी हम अक्सर भगवान से शिकायत करते रहते हैं।
असल में इंसान अपने दुख से उतना परेशान नहीं होता, जितना दूसरों की खुशी देखकर हो जाता है।
अब इस मामले को ही देख लीजिए।
इंदौर में "महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी" के नाम से एक वृद्ध आश्रम चल रहा है। वहाँ एक नाबालिग लड़का अक्सर बुजुर्गों के साथ मारपीट करता है और बेचारों के पास सब कुछ सहने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
क्या आप कभी सोच सकते हैं कि अपने ही जीवन में ऐसा दुख झेलना पड़े, जैसा ये बेबस बुजुर्ग झेल रहे हैं?
इस वीडियो को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिए, ताकि इस नालायक को उसके किए की सज़ा मिल सके।
ये है पिछले 10 सालों का UPSC डेटा👇
मीणा जी 48% ST सीट को कब्ज़ा कर बैठे हैं! (मीणा आबादी कुल ST की 4.5% है)!
माने अपनी संख्या से 10 गुना ज्यादा सीट ली है!
ST में 744 जनजातियां हैं लेकिन सिर्फ एक 48% सीट ले रही है?
तो मीणा जी,
कितना भी ड्रामा करो, तुम्हारा आरक्षण छिनना तय है😂
मध्यप्रदेश में फिर से EWS वर्ग के पदों को 92% तक घटाया गया 😡🚨
एक ही परिवार में दादा, पिता और अब बेटा-बेटी भी आरक्षित कोटे से लाभान्वित हो रहे हैं..जबकि सामान्य वर्ग का गरीब लेकिन प्रतिभाशाली छात्र भूखे पेट पढ़कर भी पीछे छूट जाता है।
यह अन्याय इतना गहरा हो गया है कि सामान्य वर्ग के छात्र अब आत्मविश्वास खो बैठे हैं। वे सोचते हैं कि उनकी मेहनत व्यर्थ है क्योंकि सिस्टम ने पहले से ही सीटें बाँट रखी हैं।
#madhyapradesh #justice #ews #justice #generalcategory
जिस देश में चुनावो में ईमानदार व्यक्ति को टिकट ना देकर, जाती देखकर टिकट दिया जाता हो,
जिस देश में जाती देखकर सरकारी नौकरियाँ दी जाती हो
जिस देश में जाती देखकर परीक्षा में pass-fail किया जाता हो,
जिस देश में जाती देखकर एंट्रेंस एग्जाम के कटऑफ सेट किए जाते हो,
जिस देश में जाती देखकर सरकारी योजनाएं लाई जाती हो,
जिस देश में जाती देखकर कॉलेजो के नियम तय किए जाते हो
जिस देश में जाती देखकर कानून की धाराए लिखी जाती हो
जिस देश में उच्चतम राजनीतिक पदो पर जाती देखकर सत्ता सौंपी जाती हो,
जिस देश में मेरिट को स्थान ना देकर जाती को स्थान दिया जाता हो,
जिस देश में योग्यता ना देखकर जाती को ही योग्य माना जाता हो,
उस देश को बर्बाद होने से साक्षात भगवान भी नहीं बचा सकते।
यह घटना आपको भावुक कर देगी..😢
मुंबई के एक नामी गिरामी विद्यालय में 05 वर्ष की बच्ची के साथ एक घटना घट गई थी..।
एक दिन दोपहर के समय अचानक ही विद्यालय से उस बच्ची के संदर्भ में बच्ची की माता के पास घबराई हुई आवाज़ में फोन आता है, कि "आप तुरंत विद्यालय आ जाइए ...." बच्ची की मां कुछ समझ पातीं उससे पहले ही फोन कट गया..।
अचानक आए फोन से मां घबराती हुई विद्यालय की तरफ भागी..।
घर से स्कूल की दूरी अधिक होने की वजह से देरी हो रही थी की तभी पुनः विद्यालय से फोन आता है कि " आप कहां हैं?? जल्दी कीजिए, आपकी बच्ची आपको पुकार रही है..। "
मां ने रास्ते में होने की बात कही, तबतक फिर फोन कट चुका था..।
जैसे जैसे स्कूल नजदीक आता जा रहा था, मां की चिंता बढ़ती जा रही थी…।
कुछ ही मिनटों में, मां जैसे तैसे स्कूल पहुंचीं और बच्ची के विषय में एक अध्यापक से फौरन बात की..
अध्यापक ने दूसरी मंजिल पर जाने का संकेत दिया और मां उस ओर बेसुध ही दौड़ पड़ी..।
रास्ते में उन्हें बेटी के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ रही थी..।
उनका दिल बैठा जा रहा था क्योंकि, सामान्यतः स्कूल से कभी अचानक ही फोन नहीं आया था..।
मां बच्ची की क्लास में गई और बच्ची को देखते ही उनके होश उड़ गए…
नन्हीं सी बच्ची खून से लथपथ पड़ी हुई थी, उसके हाथ से खून लगातार टपक रहा था.. टीचर्स घेरे में खड़े होकर बगलें झांक रहे थे..।
बच्ची के हाथ और कपड़े रक्त से सने हुए थे और बच्ची जार - जार रोए जा रही थी…।
मां को मामला समझते देर नहीं लगी की उनकी बच्ची के हाथ में गहरी चोट लगी है..।
मां की स्थिति और मौके की नजाकत को समझते हुए, पास खड़ी एक मैडम ने बताया कि दरवाजा बंद करने के दौरान बेटी की अंगुली दरवाजे के बीच में आ गई थी, जिससे उंगली कटकर दूर जा गिरी..।
आनन फानन में बच्ची को अस्पताल ले जाया गया जहां उसे गंभीर चिकित्सीय परीक्षण हेतु भर्ती कर लिया गया..।
शर्म की डूब मरने की बात तो यह है, कि "लगभग आधे घण्टे से अधिक समय तक बच्ची विद्यालय में ही रही उसे विद्यालय प्रबंधन ने अस्पताल नहीं पहुंचाया.."
इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि कटी हुई उंगली को दोबारा से जोड़ना अब संभव नहीं था .. कटी हुई उंगली के जुड़ने की आशा अब हमेशा के लिए खत्म हो चुकी थी..।
डॉक्टरों चिंता जाहिर करते हुए, उनसे कहा की - अगर आप 1 मिनिट की भी देरी कर देते तो बच्ची को बचाना असंभव था.. बच्ची का रक्त काफी हद तक बह चुका था.. हिमोग्लोबिन न्यूनतम स्तर तक गिर चुका था। जोकि विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही और बेशर्मी का उदाहरण था..।
बाद में यह मामला आग की तरह फैला इसके तुरंत बाद बच्ची के माता पिता के द्वारा विद्यालय पर अमानवीय व्यवहार के चलते FIR दर्ज की गई थी..।
यह खबर वैसे तो पुरानी हो चुकी है किंतु जागरूकता के लिए यह अभी भी आवश्यक है..।
यह मुंबई का नामी और महंगा विद्यालय ठाकुर इंटरनेशनल स्कूल था, जिसकी लापरवाही से बच्ची मौत के मुंह में जा पहुंची थी..।
छोटे बच्चों का ख़ास ध्यान रखें..
छोटी सी लापरवाही बच्चे को शारीरिक और मानसिक रूप गंभीर आघात पहुंचा सकती है..।
जनसामान्य में इस विषय पर चर्चा करें और अपने बच्चों को भी इसमें शामिल करें..।
हमारी आपसे यह विनम्र प्रार्थना है..🙏
ब्राह्मण ही एक ऐसी जाति है कि किसी से अपना दुख कह नहीं सकता।
ये एक गरीब परिवार ब्राह्मण परिवार का हालत हे जो कि घुट घुट के जी रहे हे न रहने के लिए कोई जगह हे न खाने का कोई सुविधा सरकार से यह अनुरोध हे कि आप इनको सपोर्ट जरूर करे सिंगारपुर लखीसराय अमरपुर पंचायत पिन कार्ड 811310
UPSC पास करके IPS बने अविनाश पांडेय साहब
मेरठ में राज्यपाल का दौरा होने पर IPS अविनाश पांडेय दौड़ लगाते नजर आए है देख लो।
यदि इनकी यही Value है तो मेरी नजर में ये सिपाही से भी ज्यादा गए गुजरे है
कम से कम आम आदमी को इतनी गुलामी तो नहीं करनी होती है।
बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे के सुपुत्र The Indian Legal Profession and Code of Ethics का पेपर था.
एग्जाम की टाइमिंग थी: 11:00AM-02:00PM
यानी सेंटर पर कम से कम 30 मिनट पहले तो पहुंचना रहा होगा.
लेकिन विपक्ष का धरना युवाओं के समर्थन में शाम को करीब 03:15 बजे शुरू हुआ तो इनका बेटा लेट कैसे हुआ?
बाकी सिर्फ अपने बेटे की चिंता है देश के बेटों की क्यों नहीं?
छात्र लगातार अपनी भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे है उसपर एक शब्द नहीं??
जनता झूठ पकड़ चुकी है।