. @Wangchuk66 जी ने सिर्फ़ एक अनशन नहीं किया
उन्होंने देश को लोकतंत्र और अहिंसा की ताकत याद दिलाई।
यह दिखाया कि बिना गाली,
बिना हिंसा, बिना भड़काऊ भाषा के भी गलत के खिलाफ़ डटा जा सकता है।
उन्होंने सत्ता को भी एक संदेश दिया है,
जनता की आवाज़ सुनिए।
क्योंकि जनमत में ही सत्ता का हित छिपा होता है।
और देश को यह भी सिखाया कि
जब आवाज़ सच और जनहित के लिए उठती है!
तो उसके साथ खड़े होने वाले अपने आप जुड़ते चले जाते हैं।
यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।.....
यही कहलाता है लोकतंत्र।
अंग्रेजी शिक्षिका नीतू मैम ने राघव चड्ढा पर तीखा बयान देते हुए कहा कि आज राघव चड्ढा जिंदा होते तो वह जरूर छात्रों के लिए आवाज उठाते, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा, भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
#Bihar#India#RaghavChadha#NeetuMam#LawAdvisory
एक आदमी रोटी बेलता है,
एक आदमी रोटी खाता है,
एक तीसरा आदमी भी है—जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है,
वह सिर्फ़ रोटी से खेलता है,
मैं पूछता हूँ— यह तीसरा आदमी कौन है?
मेरे देश की संसद मौन है - सुदामा पांडेय 'धूमिल'
#JantarMantar
NEET-UG 2024 की परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ सिस्टम ने सबसे भद्दा मजाक किया है। CBI का कहना है कि 2024 में जिसे खुद सरकार और एजेंसियों ने पेपर लीक का 'मास्टरमाइंड' बताकर गिरफ्तार किया था, उस संजीव मुखिया के खिलाफ नीट 2024 पेपर चोरी का कोई सबूत ही नहीं मिला!
पहले अपनी नाकामी छिपाने और छात्रों का गुस्सा शांत करने के लिए एक गिरफ्तारी का ढिंढोरा पीटा गया और खूब वाहवाही लूटी गई। अब 'सबूतों के अभाव' की कहानी गढ़कर उसे बचाया जा रहा है। अगर संजीव मुखिया ने पेपर लीक नहीं किया, तो फिर देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा में सेंध किसने लगाई।
उस समय भी शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान जी ने कहा था कि कोई पेपर लीक नहीं हुआ है कोई सबूत नहीं मिला है।
गिरफ्तारी का दिखावा करना और मामला ठंडा पड़ते ही सबूत न मिलने का बहाना बनाकर छोड़ देना, ऐसी हरकत सरकार की सबसे बड़ी नाकामी को दर्शाती है सत्ता में बैठे लोग देश को स्पष्ट जवाब दें— अगर संजीव मुखिया मुजरिम नहीं है, तो वो असली 'मास्टरमाइंड' कौन है जो आपकी राजनीतिक छतरी के नीचे बैठकर लाखों होनहार युवाओं के भविष्य से खेल गया! (हालांकि 2024 में पेपर लीक होने के बावजूद पूरे देश में नीट पेपर कैंसिल नहीं हुआ था बस कुछ सेंट्ररो पर देरी की वजह से जिन छात्रों को NTA ने ग्रेस मार्क्स दिया था उन्हीं छात्रों का सुप्रीम कोर्ट के कहने पर दोबारा एग्जाम कराया गया था)
इस्तीफ़ा माँगना सबसे आसान काम है.. - Sutra* ???
अच्छा? तो फिर PM साहब की प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आसान ही होगी !
शायद इसीलिए आज तक हुई नहीं।
पेपर लीक माफिया को जड़ से उखाड़ना भी आसान है।
शायद इसीलिए आज तक उखड़ा नहीं पेपर लीक होते रहें l
परीक्षाओं में जवाबदेही तय करना भी आसान है।
शायद इसीलिए हर बार टाल दी जाती है।
छात्रों की चीख सुनना भी आसान है।
शायद इसीलिए महीनों-सालों से अनसुनी पड़ी है।
कल को कोई छात्र भी कह देगा - पास होना आसान था... इसलिए फेल हो गए।
स्वास्थ्य मंत्री कह देंगे -
मिलावटखोर पकड़ना आसान था... इसलिए छोड़ दिया।
ठेकेदार कह देगा -
अच्छी सड़क बनाना आसान था...
इसलिए मुश्किल वाला रास्ता चुना ,पहली बारिश में तोड़ो, अगले साल फिर टेंडर लो।
और कल गडकरी जी भी कह देंगे
शुद्ध पेट्रोल देना आसान था, इसलिए एथेनॉल मिलाना ही असली चुनौती चुनी।
वाह साहब… अगर 'आसान' होना ही कोई काम न करने की दलील है, तो फिर हर नाकामी का यही जवाब दे दीजिए
विपक्ष रोटियाँ सेंक रहा है…
तो आग बुझा दीजिए।
गैस सिलेंडर, माचिस और चूल्हा तो आपके ही हाथ में है।
पेपर लीक रुकवा दीजिए । युवाओ का भविष्य बचा लीजिए ।
राजनीति अपने आप ठंडी पढ़ जाएगी।
8 सालों से ज्यादा समय के बाद UPSSSC आयोग ने लोअर PCS की भर्ती PET-2025 के जरिए पहली बार विज्ञापित किया जिसके मुख्य परीक्षा के लिए कैटिगरी वाइज कट-ऑफ (UR/OBC/SC/EWS: 67.94, ST: 56.26) तय कर 2,587 पदों के सापेक्ष केवल 1,00,492 छात्रों को शॉर्टलिस्ट किया गया, जो कि विज्ञापित पदों का मात्र 38-39 गुना है।
वहीं दूसरी ओर, अभी कुछ दिनों पहले ही इसी आयोग ने 'लेखपाल भर्ती' में 7,994 पदों के सापेक्ष 3,66,712 छात्रों को मुख्य परीक्षा का अवसर दिया था, जो कि लगभग 46 गुना था! जब लेखपाल में 46 गुना छात्रों को अवसर मिल सकता है, तो लोअर PCS के अभ्यर्थियों के साथ यह अन्याय क्यों
सालों बाद आई इस भर्ती में छात्रों की यह मांग पूरी तरह से तार्किक है कि शॉर्टलिस्टिंग का मानक 60 गुना किया जाए। अगर लोअर PCS के लिए आयोग 60 गुना अभ्यर्थियों को बुलाता है, तो लगभग 1,55,220 छात्रों को परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। यानी वर्तमान में जो 1 लाख छात्र शॉर्ट लिस्ट किए गए हैं, उनके अलावा करीब 55,000 अतिरिक्त होनहार और मेहनती युवाओं के सपनों को उड़ान मिलेगी, जो महज़ दशमलव के कुछ अंकों से पीछे रह गए हैं।
सत्ता को युवाओं के दर्द का अहसास होना चाहिए; मनमाने नियम-कायदों की आड़ लेकर आप उनकी उम्मीदों की हत्या नहीं कर सकते।
इसलिए हमारा सीधा सवाल और मांग है: आयोग शॉर्टलिस्टिंग का दायरा बढ़ाकर 60 गुना करे, ताकि सालों से बंद कमरों में तैयारी कर रहे प्रदेश के होनहार युवाओं को अपनी प्रतिभा साबित करने का एक न्यायपूर्ण मौका मिल सके। मुख्यमंत्री जी, युवाओं के इस दर्द का संज्ञान लें और शॉर्ट लिस्टिंग का दायरा बढ़ाकर 60 गुना करें।
#60XForLowerPCS #UPSSSC #LowerPCS
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
और इस तरीके से चादर से Cover करके ताकि कोई वीडियो ना बना सके उठा कर ले जाना उस शख़्स को जो देश के तमाम बच्चो के भविष्य के लिए अनशन पर है कहा तक उचित है ?
क्या सही तरीका ये नहीं कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा करवा देते , या आप सरकार के किसी मंत्री के द्वारा बातचीत करके उनका अनशन तुड़वाने की कोशिश करते लेकिन जबरदस्ती इस तरीके से अनशन तुड़वाना ये अनशन और देश का अपमान है
लोकतंत्र की हत्या है ! ......
दमन हर चीज का हुआ है ! तो दमन सत्ता के गलियारों में घर कर गया उस घमंड का भी होगा जिसके सामने आम नागरिकों की आवाज नहीं सुनाई दे रही !......
@kaankit विवेकपूर्ण नागरिक वही है जो सत्ता से सवाल करे, न कि सत्ता को बचाने के लिए नए तर्क गढ़े, राजनीतिक बयान से ज्यादा तकलीफ सिस्टम की विफलता से होनी चाहिए थी, पेपर लीक पर बोलने के बजाय आपको इस बात से दर्द हो रहा है कि किसने क्या कह दिया ।
सोनम वांगचूक के बाद JNU की छात्रा नेहा बोरा को लेकर अब बहुत बड़ी खबर , नेहा कभी भी कोमा में जा सकती है या उसकी मौत हो सकती है ,
मुंबई से आयी एक 40 साल अनुभव वाली डॉक्टर अंजलि छाबड़िया ने नेहा बोरा का चेक अप किया , ब्लड शुगर चेक किया , जिसके बाद डॉक्टर नेहा की रिपोर्ट देखकर हैरान रह गयी ,
डॉक्टर अंजलि छाबड़िया ने बताया कि अगर नेहा ने अपनी भूख हड़ताल खत्म नहीं की तो नेहा की जिंदगी खत्म हो सकती है , या फिर वो कोमा में जा सकती है , क्यूंकि नेहा का इम्युनिटी एक दम लो हो चुकी है , यूरिक एसिड बहुत हाई हो गया है , ब्लड शुगर काफी कम होने की वजह से अब उसके शरीर में इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ गया है ,
सोनम वंगचूक और नेहा की हालत इस समय काफी खराब है अगर 2 - 3 दिन में नेहा और सोनम वंगचूक ने भूख हड़ताल खत्म नहीं की तो देश का बहुत बड़ा नुकसान हो जायेगा , सोनम वंगचूक जैसे महान वैज्ञानिक ने इस प्रदर्शन में अपनी जान गंवा दी तो समझ लेना , भारत में लोकतान्त्रिक प्रदर्शन से लोगो का भरोसा उठ जायेगा ,
हम सोनम वंगचूक और नेहा बोरा की अच्छी सेहत की कामना करते है ,
जनकवि अदम गोंडवी जी ने ठीक ही कहां था 'तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है।'
कभी हमारे देश में लोकतांत्रिक आंदोलनों की एक साख होती थी, जहाँ जनता सड़क पर इसलिए उतरती थी ताकि गूंगी-बहरी व्यवस्था उसकी आवाज़ सुन सके, और नीति निर्माताओं को भी जनहित में झुकना पड़ता था।
लेकिन वर्तमान समय का राजनैतिक परिदृश्य बेहद चिंताजनक और डरावना हो चुका है।
आज की व्यवस्था का मिजाज ऐसा हो गया है कि आप चाहे जल, जंगल, ज़मीन, नदी या अपने मूल अधिकारों के लिए कहीं भी, कितना भी शांतिपूर्ण आंदोलन कर लें, अपनी जायज मांगों की आवाज उठा ले, पर कोई भी बात आपकी सुनी नहीं जाएगी क्योंकि शासन के शीर्ष स्तर ने एक पूरी तरह से नजर अंदाजी रवैया अपना लिया है। वर्तमान नेतृत्व जनता की तकलीफों को सुनने की इच्छा ही खो चुका है, यहाँ सिर्फ एकतरफा प्रशासनिक मनमानी का राज चल रहा है। चाहे देश के किसान हों, युवा हों या अपनी ज़मीन से उजाड़े जा रहे छतरपुर के बिजावर क्षेत्र के दर्जन भर से ज्यादा गांवो के हजारों आदिवासी समाज के लोग और सैकड़ो परिवार —जो पिछले 14 दिनों से 'चिता आंदोलन' 'फांसी आंदोलन' और भूख हड़ताल कर रहे हैं, उनका कहना है “न्याय दो या मार दो”— हर एक जन-आवाज को पूरी तरह से अनसुना कर दिया जा रहा है। लोकतंत्र संवाद से चलता है, किसी एकतरफा मनमानी से नहीं।
कुर्सी पर साख जमाए बैठे नेतृत्वकर्ताओ यह बात समझनी होगी ।
#KenBetwaProject
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥ (सज्जनों के कल्याण, बुराई के विनाश और समाज में सत्य व न्याय की दोबारा स्थापना के लिए हर युग में चेतना जागृत होती है।)
जब पूरा तंत्र गहरी नींद में सो जाता है, तब समाज और न्याय की रक्षा के लिए सोनम वांगचुक जी जैसी निस्वार्थ आत्माओं को तपना पड़ता है।
यह अनशन केवल एक व्यवस्था को सुधारने की मांग नहीं, बल्कि समाज में सत्य और न्याय की स्थापना के लिए जागृत हुई वही परम चेतना है जिसका जिक्र हमारे शास्त्रों में है।
जिस व्यक्तित्व ने देश की सीमाओं की सुरक्षा, पर्यावरण और भारत के शीर्ष शान लद्दाख की पहचान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, जिसने न कभी अपने लिए सत्ता मांगी और न कोई विशेषाधिकार, आज वही राष्ट्रभक्त आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर है।
इस भीषण उमस और गर्मी के बीच अनशन को आज लगातार 18 दिन हो चुके हैं, शरीर से 8 किलो से ज्यादा वजन घट चुका है और स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है, लेकिन हौसला अडिग है। यह बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है कि इतने दिनों के बाद भी सत्ता के गलियारों में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है।
शासन में बैठे किसी भी ज़िम्मेदार नेतृत्व की तरफ से इस गंभीर विषय पर अब तक कोई जवाबदेही न आना बेहद ही निंदनीय है।
आखिर यह लाचार व्यवस्था देश के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले सच्चे सपूतों के प्रति इतनी असंवेदनशील कैसे हो सकती है?
जो इंसान खुद के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य और देश की अखंडता के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा रहा है, उसकी आवाज़ को इस तरह अनसुना करना पूरे तंत्र की नाकामी को दर्शाता है।
इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज की भलाई के लिए ऐसे विद्वान, वैज्ञानिक और सच्चे राष्ट्रभक्तों को अपने प्राणों की बाजी लगानी पड़ी है, तब-तब सत्ता का घमंड धरातल पर आकर गिरा है।
हर आंदोलन गलत है।
लोग गलत हैं।
आवाज़ उठाना गलत है।
सवाल पूछना गलत है।
विरोध करना गलत है।
जवाब मांगना गलत है।
पारदर्शिता मांगना गलत है।
व्यवस्था पर प्रश्न उठाना गलत है।
अधिकार मांगना गलत है।
न्याय की उम्मीद करना गलत है।
फिर मैं पूछता हूँ -
क्या पेपर लीक सही है?
क्या मिलावटी पेट्रोल सही है?
क्या मंदिरों से चंदा चोरी सही है?
क्या भर्ती परीक्षाओं में वर्षों की देरी सही है?
क्या बेरोज़गारी सही है?
क्या महंगाई सही है?
क्या अस्पतालों में भ्रष्टाचार सही है?
क्या शिक्षा में घोटाले सही हैं?
क्या नकली दवाइयाँ सही हैं?
क्या पुलों का गिरना सही है?
क्या सड़कों पर गड्ढे और हादसे सही हैं?
क्या टैक्स देने के बाद भी बदहाल सुविधाएँ सही हैं?
क्या बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ सही है?
क्या युवाओं के सपनों का टूटना सही है?
आवाज़ उठेगी तभी तो कुछ बदलेगा अगर हर protest को हम ऐसे ही उसकी कमिया बताकर कमजोर करेंगे तो एक दिन आवाज़ उठाने वाले भी नहीं बचेंगे तब कौन आएगा आगे जब तुम पर ही बीतेगी |
मानवता जिन्दा रखो ||
🚨 RRB GROUP-D ASPIRANTS DEMAND 🚨
📢 RESULT DO
📢 FULL RECRUITMENT SCHEDULE DO
📢 WAITING LIST DO
CBT Result → PET → DV → Medical → Final Merit → Joining
हर चरण की तारीख आधिकारिक रूप से घोषित की जाए।
🕚 TODAY | 11:00 AM
#RAILWAY_GROUPD_RESULT_DO ✊🚆
जून में रेलवे ग्रुप-D रिजल्ट जारी करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक अपडेट नहीं आया।
हजारों नहीं,लाखों युवाओं की उम्मीदें रिजल्ट पर टिकी हैं।अब समय आ गया है कि हर अभ्यर्थी एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद करे।
हक़ की लड़ाई, एकजुटता के साथ!
#RAILWAY_GROUPD_RESULT_DO
करोड़ों छात्र लंबे समय से रेलवे ग्रुप डी के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। हमारा भविष्य अधर में लटका है। कृपया इस प्रक्रिया को और मत खींचिए। युवाओं के सब्र का इम्तिहान मत लीजिए! 🙏
#railway_groupd_result_do@AshwiniVaishnaw@RailMinIndia
जून में रेलवे ग्रुप-D रिजल्ट जारी करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक अपडेट नहीं आया
हजारों नहीं, लाखों युवाओं की उम्मीदें रिजल्ट पर टिकी हैं। अब समय आ गया है कि हर अभ्यर्थी एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद करे
हक़ की लड़ाई, एकजुटता के साथ
#RAILWAY_GROUPD_RESULT_DO