पूरा देश समझता है- किसने फ़ायर है और कौन कायर है!
रात दिन #Godimedia का एक ही राग, किसी भी तरह श्री @Rahulgandhi जी की छवि धूमिल करों और फिर कहेंगे कि राहुल गांधी जी में फ़ायर नहीं है…
अरे भाई सही पूछो तो तुम #Godimedia के अलावें अब #Modiji को कोई नहीं सुनता…
बीजेपी के पदाधिकारी एवं दर्जनों कार्यकर्ता को शो में बतौर #आम_जनता बनाकर श्रीमती @chitraaum जी #कांग्रेस को अपमानित करने के लिए हमेशा मौक़ा तलाशती है। आज उनके इस साज़िश का सार्वजनिक पर्दाफाश हुआ..
आप ख़ुद ही देख लीजिए कैसे आज भी #विपक्ष से प्रायोजित सवाल पूछवाये जा रहें हैं..
नोएडा जिला सोशल मीडिया सह संयोजक #रचना_जैन और उनकी टिम को मुखौटा लगाकर बतौर #आम_जनता बताया जा रहा था और कांग्रेस से सवाल करवाया जा रहा था।
ताज्जुब तो तब हुआ जब एक्सपोज़ करने के बाद भी एंकर महोदया पूरे दृढ़ता से ऐसे लोगों का बचाव करती रहीं…
यदि थोड़ी भी नैतिकता बची हो तो इस शर्मनाक खेल के लिए देश और पत्रकार समाज से माफ़ी माँगनी तो बनती है मैडमजी
मुझे तो एक शायरी याद आ गई…
कुछ लोगोंसे आशा करना बेईमानी है,
जिनके आँखों का मर गया पानी है।
#ABPNews #IranUSWar #LPGCrisis
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कांग्रेस के अध्यक्ष रहे देशमान्य गोपाल कृष्ण गोखले का नाम राष्ट्रीय स्वराज्य का रास्ता बनाने वाले देशनेताओं की पहली कतार में शामिल है। तपस्वियों जैसे उनके सादे जीवन में भारत के आदर्श सेवक का दर्शन मिलता था।
गोखले जी का विश्वास था कि राजनीति तभी लोगों की सेवा का साधन हो सकती है, जब उसे 'धर्मयुक्त' बनाया जाए। गांधीजी ने एक योग्य शिष्य की तरह अपने गुरु के विश्वास को हृदय में संजोया और देश के सामने सत्य, अहिंसा, करुणा, सर्वधर्म समभाव, सहिष्णुता जैसे महान सद्गुणों के पालन का उदाहरण रख दिया।
राजनीति को 'धर्मयुक्त' बनाने का काम साम्प्रदायिक उन्मादियों और उपद्रवियों के बस का नहीं है और इन अनैतिक गिरोहों में ऐसी सदिच्छा पनप भी नहीं सकती है। ये तो धर्म के नाम को चुनाव का ऐसा औज़ार बना लेते हैं, जिससे नफ़रत और घृणा का कीचड़ फैलाया जा सके। इनकी यह दुर्भावना देशमान्य गोखले सहित हमारे तमाम महापुरुषों का घोर अपमान है।
जो समाज या राष्ट्र अपने महापुरुषों की सीख से मुख मोड़ लेता है, उसका भविष्य भी उससे मुख मोड़ लेता है।
इसलिए उत्कट देशभक्त गोपाल कृष्ण गोखले की जयंती के पवित्र दिन पर उन्हें श्रद्धांजलि देने और उनकी उपलब्धियों का बखान करने की जगह हम उनके जीवन का सार याद करें। निःसंदेह वह है सच्ची देशभक्ति, जिसमें नफ़रत या घृणा की कोई जगह नहीं है। ऐसी देशद्रोही भावना केवल उन्हीं के अंदर जगह बना सकती है, जिन्होंने देश की आज़ादी के साझे संघर्ष को धोखा दिया हो।