एक अमीर औरत गार्ड को भद्दी गालियाँ देते हुए कहती है
“BJP से त���रे मुँह पर चप्पल पढ़वाऊँगी”
“अखिलेश यादव के कुत्ते”
संभवतः गार्ड पिछड़ी जाति का है
BJP और उनके समर्थक गरीब, पिछड़ों से इतनी नफ़रत क्यों करते हैं?
राहुल गांधी सही कहते हैं - ��िना संसाधनों पर हक़ के बराबरी की बातें बेमानी हैं
(गालियाँ मैं नहीं साँझा कर रही - लेकिन कौन BJP का समर्थक है यह समझना ज़रूरी है)
सरकार की चाटुकारिता करते करते रुबिका लियाक़त फेक न्यूज फैलाने लग गयी , 2013 में सिलेंडर की कीमत 900+ बता रही है , लेकिन उस समय सिलेंडर की कीमत 400 के ��स पास थी ,
सरकार सब्सिडी 430 रूपये से ज़्यादा सब्सिडी देती है , लेकिन रुबिका लियाक़त जैसी गोदी मीडिया की पत्रकार को सिर्फ पैसा कमाने से मतलब , सरकार रहेगी तभी तो पैसा मिलेगा , सरकार की तारीफ करने के अच्छे पैसे तो मिलते ही होंगे ,
बदायूँ में राजेश को पुलिस रात में घर से उठाकर ले गयी, दूसरे दिन खबर मिली की तबीयत खराब होने पर अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई…उनकी बीवी की पीड़ा सुनिए!!
क्या इसे “कस्टोडियल डेथ” कहना गलत है?
आखिर यूपी में ये चल क्या रहा है?
2012 में मायावती, 2017 में अखिलेश ��िर्फ पुलिस की कारगुज़ारियों के चलते चुनाव हारे थे!
इलाहाबाद वि��्वविद्यालय की वाइस चांसलर संगीता श्रीवास्तव
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार राजीव श्रीवास्तव
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के फाइनेंस ऑफिसर हिमांशु श्रीवास्तव
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक विष्णु श्रीवास्तव
संगीता श्रीवास्तव के निजी सचिव निखिल आनंद श्रीवास्तव
ये इलाहाबाद यूनिवर्सिटी है या लाला यूनिवर्सिटी 😂
ये सब नियुक्तियां जाति देखकर हुई है या टैलेंट?
पत्रकार - चीनी के दाम बढ़ गए
जयंत चौधरी - इससे किसान फायदे में है
इनसे पूछिए कि गन्ना किसान का गन्ना रेट क्यों नहीं बढ़वा पा रहे हैं ये महोदय?
या भाजपा की गुलामी में किसान हितों को बेचने की कसम खा ली है?
गन्ना किसान, गेहूं किसान, धान किसान, आलू किसान सब के सब रो रहे हैं
इस भाजपा सरकार में किसान स���र्फ बर्बाद हुआ है और भाजपा ने किसानों के सौदागरों को छोटा मोटा पद, कमीशन, दलाली देकर उनका मुंह सिल दिया है
ये लोग भाजपा के सामने कभी सवाल नहीं पूछ पाएंगे, लेकिन जो विपक्षी नेता, पत्रकार, आम किसान इनसे सवाल करेगा उसके सवालों को अपने हल्के जवाब देकर पीछा छुड़ाएंगे
“आरक्षण सिर्फ़ 10 साल के लिए था।”
“आरक्षण योग्यता का हनन करता है।”
“एक ही परिवार को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आरक्षण मिल रहा है।”
आरक्षण के ख़िलाफ़ सबसे ज़्यादा दोहराए जाने वाले तर्क यही हैं। विडंबना यह है कि इन्हें दोहराने वाले बहुत से लोगों को आरक्षण के संवैधानिक आधार, उसके उद्देश्य और उसकी वास्तविक स्थिति के बुनियादी तथ्य तक नहीं मालूम।
जिस देश में बहुसंख्यक आबादी को सामाजिक न्याय और आरक्षण के बारे में व्यवस्थित रूप से शिक्षित ही नहीं किया गया, वहाँ वर्चस्वशाली मानसिकता कभी सीधे आरक्षण का विरोध करती है और कभी ‘सुधार’ और ‘रिफॉर्म’ की आड़ में उसके मू�� उद्देश्य को ही कमज़ोर करने की कोशिश करती है। टीवी की बहसों में बैठे अधिकांश लोग या तो इन बुनियादी तथ्यों से वाक़िफ़ नहीं होते, या फिर अपने सामाजिक पूर्वाग्रहों से बाहर निकलना नहीं चाहते।
लेकिन अब समय बदल रहा है। सामाजिक न्याय, समाजवाद और संविधान के ख़िलाफ़ होने वाली ऐसी कोशिशों को OBC-SC-ST समाज पहले से कहीं बेहतर समझ रहा है, पहचान रहा है और उनका जवाब भी दे रहा है।
जाति जनगणना की माँग वर्षों के संघर्ष के बाद स्वीकार हुई, लेकिन अब उसकी प्रक्रिया को लेकर ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं कि कहीं उसे ही औचित्यहीन बनाने की कोशिश तो नहीं हो रही। दूसरी तरफ़ आरक्षण को लेकर दशकों बाद भी सवाल यही है कि क्या उसका ईमानदारी और संवैधानिक भावना के अनुरूप पूरा क्रियान्वयन हुआ भी है? प्रतिनिधित्व का ��ास्तविक डेटा सामने आए बिना ‘आरक्षण सुधार’ की बहस आखिर किस आधार पर होगी?
दिलचस्प यह भी है कि कई बार टीवी की शोरभरी बहसों से कहीं अधिक तथ्यपूर्ण और सार्थक चर्चा सोशल मीडिया पर दिखाई देती है। फिर भी हर मंच पर अपनी बात रखनी होगी—तथ्यों, तर्कों और संविधान के साथ।
आप भी देखिए, सुनिए और विचार कीजिए। क्योंकि आने वाले दिनों में बहस केवल आरक्षण की नहीं होगी; अस���ी सवाल प्रतिनिधित्व, हिस्सेदारी और सामाजिक न्याय की दिशा का होगा।
देखना है कि आरक्षण वाला यह विवाद अब किस करवट बदलता है।
HDFC बैंक में Chq बाउंस चार्जेज - 450 रूपये
Yes Bank में Chq बाउंस चार्जेज - 590 रूपये
Axis बैंक में Chq बाउंस चार्जेज - 472 रूपये
Union बैंक में Chq बाउंस चार्जेज - 236 रूपये
ये ना किसी की मज़बूरी देखते हैँ, ना कोई वजह
पर यही चारों बैंक सुभाष चंद्रा को लोन देते हैँ
और रकम 22000 करोड़ तक पहुंच जाती है
बदले में 6 करोड़ री पेमेंट लेकर चूँ नहीं करते.
आम इंसान को उसकी मज़बूरी पर Insufficient Balance का कारण बताने वाले ये बैंक सुभाष चंद्रा से कौन सा चार्जेज वसूल पायेंगे??
इनके खर्च बढ़ेंगे, तो ग्राहक ही पिसेगा
उसकी जेब कटती रहेगी और बड़े लोगों के लोन सेटलमेंट होते रहेंगे.
कांग्रेस चाहे कितनी भी बुरी थी, ये करप्शन नहीं था
2017 के बाद यूपी में चाहे कितनी भी बड़ी घटना हो जाए लेकिन म���डिया की हिम्मत नहीं है सीएम से एक सवाल पूछ ले
बल्कि चाटुकारिता की हद पार करते हुए हमेशा सीएम की कड़ी चेतावनी यूपी पुलिस का तग��़ा एक्शन जैसी हेडलाइन ही लिखी हैं...
कल अ��मदाबाद में वस्त्रापुर इलाके में एक बाग में किताबें पढ़ रहे मोटे तौर पर Gen Z पर कुछ गुंडों ने हमला बोल दिया। किताबें पढ़ रहे लोग करीब ३०-३५ युवा थे।
अहमदाबाद से प्रो Hemantkumar Shah की रिपोर्ट
अब गुजरात में किताब पढ़ना हुआ गुनाह, Gen Z पर गुंडों का हमला https://t.co/kDSdOHsxRV
अभी एक सर्वे आया है, जिसको गोदी मीडिया उछल-उछलकर दिखा रहा है कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा है।
बस यूपी चुनाव आने दीजिए…
यही चैनल, यही एंकर और यही सर���वे वाले अचानक भाजपा में “जबरदस्त आत्मविश्वास” दिखाने लगेंगे।
भइया, मौसम बाद में बदलता है, अपने यहाँ चुनाव देखते ही मीडिया का मिजाज पहिले बदल जाता है!
इसीलिए तो 4000 EVM जलायी गई थी
इस हिसाब से तो पक्का है
देश के अधिकांश राज्य में चोरी से बनी है
सारी समस्या एक समाधान EVM हटाओ देश बचाओ
SIR का फर्जीवाड़ा रंगे हाथ पकड़ा! लपेटे में BJP नेता, ज्ञानेश कुमार चुप SIR Fraud
केंचुआ बताएं SIR FORM दुकानों पर कैसे पहुंचा?
भागवत जी का इतना ज़ोरदार स्वागत तो कहीं नहीं हुआ होगा!
RSS को “India’s Nazis” की उपाधि से नवाज़ा गया है! Title पसंद तो आया होगा!
मुंजे हो या गोलवलकर इनके प्रेरणाश्रोत तो Nazi ही थे!
वाराणसी : स्कूल की बदहाली का वीडियो पोस्ट करना पड़ा भारी, AAP प्रवक्ता मुकेश सिंह गिरफ्तार हुए
◆ आम आदमी पा���्टी राज्य में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को उजागर करने के लिए 'स्कूल ठीक करो' अभियान चला रही है
◆ उन्होंने आदमपुर के कोनिया प्राथमिक विद्यालय की स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था
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