@ishita_9529 धर्म कोई भी हो, आस्था किसी की भी हो—सम्मान हर किसी की भावना का होना चाहिए। लेकिन उसके साथ अपनी ज़िम्मेदारी भी समझनी चाहिए।
कहीं बोल बम यात्राओं के दौरान रास्तों में फूलों की बारिश की जाती है, तो कहीं धार्मिक आयोजनों में इसी तरह चीज़ें सड़कों पर बिखर जाती हैं।
कौशांबी के कड़ाधाम थाना क्षेत्र के देवीगंज में कल के वीडियो में भगवा झंडे दिखाकर माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश नजर आ रही है। प्रशासन संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करे और दोषियों पर कार्रवाई करे।
#कौशांबी#देवीगंज#शांति@kaushambipolice@deo__kaushambi@Uppolice
सच बोलने की आदत हो तो अक्सर लोग दुश्मन बन जाते हैं, क्योंकि सच हर किसी को पसंद नहीं आता। मगर याद रखिए—सच बोलने वालों के दुश्मन भले ज्यादा हों, लेकिन ज़मीर हमेशा साफ रहता है।
@danishali_BMP
हर 5 साल में जब जब UP में चुनाव आता है तो समाजवादी पार्टी को Azam Khan साहब की याद आती है 2022 के चुनाव से पहले चाचा की मुलाक़ात हुई थी 2021 में अब 2027 के चुनाव से पहले फिर मुलाक़ात हुई है 2026 में
सपा मुस्लिम नेताओं का सिर्फ इस्तेमाल करती रही है और फिर इस्तेमाल करना चाह रही है
कभी 5 भाई हुआ करते थे,आज सिर्फ़ 3 बचे हैं पूरा परिवार बिखर गया
भाई तो आख़िर भाई होते हैं,4 साल बाद मिले लेकिन मौक़ा ऐसा जो भगवान किसी को नसीब न करे
कुछ लोग अतीक अहमद के बेटे के एक्सीडेंट पर ख़ुश थे ,ख़ुशी बनाए ऐसे लोग मानसिक बीमार होते हैं
गलती अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ और बेटे की थी जिसकी सजा उन्हें मिल चुकी,अब कोई अपने भाई से मिलने जेल जा रहा है रास्ते में दुर्घटना में उसकी मौत हो गई तो इस पर वही हँस सकता जो मानसिक रोगी हो …
इंसान होगा तो दुखी नहीं तो खुश भी नहीं होगा
अपने भाई अबान अहमद को मिट्टी देने के बाद फफककर रो पड़ा अली अहमद। भाई उमर ने गले लगाकर हौसला बढ़ाया । अबान पिछले एक साल में अली अहमद से जेल में 49 बार मिलने गया था। वह अपने भाई के लिए किताबें व जरूरत के समान लेकर जाता था।
4 साल बाद ये भाई आपस में मिले थे, वह भी भाई की मौत पर।
अपने भाई अबान अहमद को मिट्टी देने के बाद फफककर रो पड़ा अली अहमद भाई उमर ने गले लगाकर हौसला बढ़ाया! अबान पिछले एक साल में अली अहमद से जेल में 49 बार मिलने गया था। वह अपने भाई के लिए किताबें व जरूरत के समान लेकर जाता था। 4 साल बाद ये भाई आपस में मिले थे, वह भी भाई की मौत पर।
अपने भाई अबान अहमद को मिट्टी देने के बाद फफककर रो पड़ा अली अहमद। भाई उमर ने गले लगाकर ढांढस बंधाया।
अबान पिछले एक साल में अली अहमद से जेल में 49 बार मिलने गया था। वह अपने भाई के लिए किताबें व जरूरत के समान लेकर जाता था।
4 साल बाद ये भाई आपस में मिले थे, वह भी भाई की मौत पर।
प्रयागराज
➡कसारी मसारी कब्रिस्तान से अली,उमर रवाना
➡उमर को लखनऊ जेल के लिए रवाना किया गया
➡अली को झांसी जेल के लिए रवाना किया गया
➡कई सुरक्षा के बीच दोनों को रवाना किया गया
➡भाई अबान के जनाजे में शामिल होने आए थे
➡झांसी में सड़क हादसे में अबान की मौत हुई थी
#Prayagraj #AtiqAhmed #UttarPradesh
मुस्लिम का दर्द, डरावना सच 📢
यह महिला बतला रही है,
नफ़रत मे पुलिस भी पीछे नहीं है, मुस्लिम समझ के हिन्दू को बेरहमी से पीटा, ज़ब पता चला की पीड़ित हिन्दू है तो कहा ‘ अरे पहले कह दिया होता, मारते नहीं ’ यह हाल है भारत के निर्लज्ज पुलिस प्रशासन की, मुस्लिम को बेमतलब मारो।
.@kpmaurya1 को इतिहास पढ़ने की ज़रूरत है। आज़ादी की लड़ाई में हमारे उलेमा ने अपनी जानें कुर्बान कीं, संघ परिवार के लोगों ने नहीं: Barrister @asadowaisi
Video Credit: @ANI