@Kapil_Jyani_ आप यहाँ भी बीजेपी को हल्के मे ले रहे हो भाई वो UPA GOVT थी, सवेदनशील थी विरोध भी स्वीकार करती थी!
अब जब इन्हें पता है वोट किसी को भी डालें आना तो अपने खाते मे है फिर काहे का डर 🙄
प्रदर्शन करेंगे तो जैल मे डाल देंगे जनता करे भी तो क्या ?
स्वीकार करने के अलावा 😏
'सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे विरोध नहीं कर सकते, वे आंदोलन नहीं कर सकते, यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो गए हैं। अगर लोग विरोध करेंगे, तो क्या आप केस कर देंगे?
नागरिक, भाजपा सरकार मुर्दाबाद या अमित शाह मुर्दाबाद जैसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? लोगों को सरकार का गुलाम बनाया जा रहा. पुलिस, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की नौकर नहीं है. वे पब्लिक सर्वेंट हैं.'
-जस्टिस माधव जामदार
बॉम्बे हाईकोर्ट
@POOJA_VOF पहली बात तो राजाराम मील हमारा अध्यक्ष नहीं है, इसलिए सभी से हाथ जोड़कर विनती है कृपया उनकी बातों को अधिक महत्व ना दें और जाट समाज से जोड़कर समाज का विचार ना समझें! 🙏
दूसरी बात इस बूढ़े ने एक रजिस्ट्रेशन करवाकर खुद को समाज पर थोपा है की लो जी आज में आपका अध्यक्ष हुँ 😆
बात ये नहीं कि ईरान हारेगा,
बात ये नहीं कि ईरान बर्बाद हो जाएगा,
बात ये नही कि ख़मनाई मारे गए,
बात ये है कि,
जिन देशों के सामने लोगों का तरल पदार्थ निकल जाता है, वो उनसे भिड़ गया है।
जो ट्रेड डील की धमकी देकर सीजफायर करवा देता है, उसके खिलाफ ईरान मैदान में है।
जज्बा...आत्मसम्मान.......
“सरेंडर होने से अच्छा है युद्ध में लड़ते-लड़ते मर जाना” यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, यह आत्मसम्मान की ज्वाला है।
जब मनुष्य के सामने दो रास्ते खड़े होते हैं एक आसान, जो घुटनों पर ले जाता है; और दूसरा कठिन, जो सीना तानकर खड़े रहने की हिम्मत देता है तब इतिहास गवाह है कि जिन्होंने दूसरा रास्ता चुना, वही अमर हुए।
महाराणा प्रताप ने जंगलों में भटकना स्वीकार किया, पर आत्मसमर्पण नहीं किया।
रानी लक्ष्मीबाई ने तलवार हाथ से गिरने नहीं दी, भले ही प्राण क्यों न चले जाएँ।
और भगत सिंह ने फाँसी का फंदा हँसते हुए चूमा, पर झुकना नहीं सीखा।
युद्ध केवल मैदान में तलवारों से नहीं लड़ा जाता, कई बार यह भीतर चलता है अपने डर से, परिस्थितियों से, असफलताओं से। हार जाना उतना दर्द नहीं देता, जितना बिना लड़े हार मान लेना देता है। क्योंकि जो व्यक्ति संघर्ष करते हुए गिरता है, उसकी आत्मा कभी पराजित नहीं होती।
सरेंडर में साँसें बच सकती हैं, पर आत्मा मर जाती है।
संघर्ष में शरीर गिर सकता है, पर आत्मसम्मान अमर हो जाता है।
इसलिए जब भी जीवन तुम्हें घुटनों पर लाने की कोशिश करे, याद रखना
हार से बड़ा कलंक है बिना लड़े हार मान लेना।
अगर गिरना ही है, तो गिरो इस तरह कि दुनिया कहे
“वह झुका नहीं… वह आख़िरी साँस तक लड़ा।”
मोदी जी का जीत और हार से कोई कनेक्शन है क्या, जहां जाते वही लंका लग जाती है ?
एक तो अहमदाबाद स्टेडियम का नाम भी मोदी जी के नाम से है।
📍 मोदी चंद्रयान-2 लॉन्च में शामिल हुए
❌ हम फेल हुए
📍 मोदी चंद्रयान-3 लॉन्च में शामिल नहीं हुए
✅ हम सफल हुए
📍 मोदी 2023 ICC क्रिकेट WC में शामिल हुए
. हम हार गए
📍 मोदी 2024 ICC T20 WC में शामिल नहीं हुए
✅ हम जीत गए
📍 मोदी 2025 चैंपियंस ट्रॉफी में शामिल नहीं हुए
✅ हम जीत गए
मोदी 2025 ICC विमेंस WC में शामिल नहीं हुए
✅ हम जीत गए
📍 वानखेड़े स्टेडियम में इंडिया बनाम श्रीलंका 2011 WC फाइनल।
✅ हम जीत गए।
नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इंडिया बनाम ऑस्ट्रेलिया 2023 ICC WC फाइनल।
❌ हम हार गए।
📍 नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इंडिया बनाम साउथ अफ्रीका T20 WC मैच।
❌ हम हार गए।
Rt क्योंकि कोई भी आपको इसके बारे में नहीं बताएगा।
Chhattisgarh का एक वीडियो Social Media पर वायरल है. रायपुर में पेट्रोल पंप पर शख़्स को सिगरेट पीने से मना किया तो उसने लाइटर से पंप के नोजल पाइप में आग लगा दी.
पंप कर्मचारी ने सूझबूझ से आग बुझाई. घटना के बाद पुलिस ने शख़्स को गिरफ़्तार कर लिया है.
विनोद जाखड़ जी को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।
यह नियुक्ति केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि देशभर के संघर्षशील, जागरूक और परिवर्तन की आकांक्षा रखने वाले विद्यार्थियों की उम्मीदों का सम्मान है। हमें पूर्ण विश्वास है कि आपके ऊर्जावान, संवेदनशील और दूरदर्शी नेतृत्व में एनएसयूआई नए आयाम स्थापित करेगा तथा विद्यार्थियों के अधिकार, शिक्षा की गुणवत्ता और रोजगार के मुद्दों को और अधिक मजबूती से राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा।
आपके नेतृत्व में देश की छात्र शक्ति संगठित होकर अन्याय के विरुद्ध आवाज बुलंद करेगी और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी।
एक बार पुनः आपको इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल कार्यकाल हेतु मंगलकामनाएँ।@nsui@VinodJakharIN
बांग्लादेश का चुनाव बनाम भारत के एक राज्य का चुनाव।
बांग्लादेश की आबादी: 17 करोड़
वोटर: 12.7 करोड़
पोलिंग: 12 Feb
नतीजे: 13 Feb
भारत के एक राज्य बिहार की आबादी: 13 करोड़
वोटर: 7.45 करोड़
पोलिंग: 2 फेज, 6 और 11 Nov
नतीजे: 14 Nov
मतलब भारत के राज्य मे चुनाव कराने में 6 दिन और 7.45 करोड़ वोटरों की गिनती में 3 दिन लगते हैं, जबकि बांग्लादेश 2 दिन में सब कुछ मैनेज कर लेता है।
यह भी उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश मे चुनाव बैलट पेपर से होता है और हमारे यहाँ EVM से।
और मजेदार बात या है की भारत का CEC अपनी इस काबिलियत पर अपनी पीठ भी थपथपाता है ।
और हम अपने को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और विश्वगुरु कहते है ।