कुछ तस्वीरे जो आये दिन सोशल मीडिया की पर पोस्ट की जाती है, आज उन्ही तस्वीरो को हम पोस्ट कर रहे है मगर असली परिचय के साथ
पंडित नेहरु अपनी भांजी नयनतारा सहगल के साथ London airport 1955 #NehruFacts 1/n
Hey everyone!🙏 My friend's account was withheld in India due to a legal demand from authorities — he's actively fighting it. Until then, show him some love on his new handle! Follow, like, RT & comment — it truly makes a difference. Let's stand by him! 💪
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साथियों, फॉलो कीजिये मित्र @GoIShadow को, इनका पुराना अकाउंट भारत सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने की वजह से भारत में ब्लाक कर दिया गया है, सभी इस हैंडल को सपोर्ट कीजिये.
Dear friends 🙏
This is @GoIShadow — the alternate space for the @IndiaAwakened_ initiative.
Due to the original account being withheld in India, we’re continuing here with the same commitment to transparency, accountability, unity in diversity, and equality for the people of India.
Thank you for your continued support and for staying connected through these challenges. We look forward to constructive dialogue with all of you.
Let’s keep building a stronger, more accountable India together.
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दोस्तों! मेरे मित्र का अकाउंट सरकारी नोटिस की वजह से बंद हो गया है — पर वो हार नहीं माना, लड़ रहा है! आप लोग भी साथ दो — नए हैंडल को फॉलो करो, लाइक-RT-कमेंट करो। हर एक सपोर्ट मायने रखता है! 🙏💪
नया हैंडल: @GoIShadow
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पहले अपमान किया, बात नहीं बनी, फिर डराया फिर भी बात नहीं बनी, अब प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ एडीजे पोक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने यौन शोषण के आरोप में मामला दर्ज करने के आदेश दिए गये है.
जिस आशुतोष पांडेय उर्फ़ आशुतोष महाराज की शिकायत पर शंकराचार्य जी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने के आदेश हुए है,उनके आपराधिक रिकॉर्ड देखिए
समझिये सनातन / हिन्दू किससे खतरे में है. #SanatanDharma
यह सिर्फ़ तुलना नहीं है, यह सत्ता के चरित्र का एक्स–रे है।
1967 में भुवनेश्वर में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर भीड़ से पथराव हुआ, उनकी नाक टूट गई। एक महिला थीं। दर्द असली था। ख़तरा वास्तविक था।
लेकिन उन्होंने सभा स्थल नहीं छोड़ा। न डर का प्रदर्शन किया, न भीड़ को राष्ट्रद्रोही कहा, न लोकतंत्र को सुरक्षा के बहाने गिरवी रखा।
आज एक धूर्त नौटंकीबाज़ सिर्फ़ एक किताब के पन्ने और कुछ खुलासों से घबराकर संसद नहीं आ रहा। और देश का लोकसभा अध्यक्ष खुलेआम कहता है कि प्रधानमंत्री इसलिए नहीं आएंगे क्योंकि विरोधी उनकी जान ले सकते हैं।
यह मूर्खता नहीं तो क्या है?
यह लोकतंत्र की हत्या नहीं तो क्या है?
2009 में अहमदाबाद में डॉ मनमोहन सिंह पर जूता फेंका गया, वह उनके कान के पास से गया। यह एक गंभीर सुरक्षा चूक थी। तब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे।
लेकिन मनमोहन सिंह ने कभी आरोप–प्रत्यारोप नहीं किए, न किसी को साज़िशकर्ता कहा, न राजनीतिक रुदन किया। क्योंकि वे गली–छाप राजनीति नहीं, राजनीतिक मर्यादा जानते थे।
पहले के प्रधानमंत्री Statesman होते थे—संजीदा, गंभीर, आत्मविश्वासी।
आज वाला Actor है—ड्रामेबाज़, नौटंकीबाज़, डर को हथियार बनाने वाला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश को जवाब देना होगा—
अगर संसद भवन में ही प्रधानमंत्री सुरक्षित महसूस नहीं करता,
तो देश का आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित माने?
एक औरत टूटी हुई नाक लेकर नहीं भागी।
और यह तथाकथित 56 इंची मर्द डर के मारे इंदिरा गांधी की पुरानी साड़ी में छुपा बैठा है, कि कहीं एप्सटीन फ़ाइलें और एक पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल की किताब उसकी पोल न खोल दे।
लोकतंत्र बहादुरी से चलता है, बहानों से नहीं।
नेतृत्व साहस से पहचाना जाता है, डर की पटकथाओं से नहीं।
कोई इस प्रधानमंत्री को इंदिरा गांधी की चूड़ियाँ लाकर दे दे—
शायद उसी से इनमें थोड़ी हिम्मत आ जाए।
महात्मा गांधी की हत्या के ठीक 5 दिन बाद, 4 फरवरी 1948 को सरदार पटेल ने RSS पर प्रतिबंध लगाया था।
⚖️ नेहरू का दृष्टिकोण: हत्या से पहले ही नेहरू ने चेताया था कि संघ की गतिविधियां सांप्रदायिक और हिंसक हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा माना था।
👤 सरदार पटेल का रुख: पटेल का मानना था कि RSS द्वारा निर्मित 'नफरत के माहौल' के कारण ही ऐसी भीषण घटना संभव हो सकी।
🔍 संगठन की प्रकृति: पटेल ने इसे एक 'गुप्त संगठन' कहा था, जिसके पास सदस्यों का कोई रिकॉर्ड नहीं था, जिससे जाँच करना कठिन था।
🚫 कड़ा फैसला: सरकार ने स्पष्ट किया कि संगठन की विध्वंसक प्रवृत्तियां राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा थीं, इसलिए प्रतिबंध अनिवार्य था।
Funny how Rahul Gandhi calling out one politician is framed as a national insult to an entire community, while Himanta Biswa Sarma’s literal dehumanization of Muslims is celebrated as 'bold' leadership. The bias is loud
क्या ये पत्रकारिता है ?
कुछ महीने पहले - 25% टैरिफ़ बहुत बढ़िया है , जितना ज़्यादा उतना अच्छा
कुछ महीने बाद - 18% टैरिफ़ हो गया , टैरिफ़ कम करके कमाल कर दिया
" Election commission is WhatsApp commission "
Kattar Brhamin Sherni @MamataOfficial has taken the Gujarati gang to the cleaners.
From writing several public letters to PMO & ECI to presenting herself in SC over the SIR robbery, she is putting up a brave show. 👑
आज लीखने को शब्द नहीं है
बस एकबार आप भी देखो ओर महसुस करो
एक मुख्यमंत्री अपने राज्य के लिए खुद सुप्रीम कोर्ट मे उनका पक्ष रखती है,
ये एक ऐतिहासिक पल है 👌👌