@airtelindia की हालत बहुत खराब है। पैसे लेने के बाद ये ग्रहकों को प्रताड़ित करते हैं। फोन नहीं उठाते। कस्टमर केयर पर शिकायत करने पर भी कोई नतीजा नहीं निकलता है। सुनील भारती मित्तल को पैसे की इतनी जरूरत थी तो सीधे मांग लेते, 14-15 हजार तो दे ही सकता हूं!
@airtelindia की हालत बहुत खराब है। पैसे लेने के बाद ये ग्रहकों को प्रताड़ित करते हैं। फोन नहीं उठाते। कस्टमर केयर पर शिकायत करने पर भी कोई नतीजा नहीं निकलता है। सुनील भारती मित्तल को पैसे की इतनी जरूरत थी तो सीधे मांग लेते, 14-15 हजार तो दे ही सकता हूं!
@pankajjha_ पार्टनर, @ajitanjum जैसे धूर्त, बेहूदे और बेशर्म लोगों की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया मत दिया करो। ये सूअर से कीचड़ में लड़ने जैसा है। इन्हें इनके हाल पर छोड़ दो।
पर उपदेश, कुशल बहुतेरे . जो लोग घूम घूम कर महाराष्ट्र में महा विकास अघाडी और हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बना रहे थे.. बिहार की सत्ता में महा गठबंधन की वापसी करा रहे थे.हर दिन मोदी की सरकार गिरा देते हैं. फिर अगले दिन का इंतज़ार करते हैं. अब वही पत्रकारिता के नैतिक बल की दुहाई देते हैं. No one is infallible. गलती हमसे भी होती है. पर उससे हम सीखते हैं.
नवंबर 2005 में पहली बार नीतीश कुमार जी फुल टर्म के लिए बिहार सीएम बने।
लगभग 20 साल बिहार में उनका शासन रहा। इस दौरान बिहार ने बहुत कुछ पाया। आज उन्होंने सीएम के पद से इस्तीफ़ा दे दिया। @NitishKumar जी आप स्वस्थ रहें। बिहार के अभिभावक की तरह नई सरकार को आपका मार्गदर्शन मिलता रहे।
नई पारी के लिए शुभकामनाएं।
-: ये तस्वीर 24 नवंबर, 2005 की है। पटना के गांधी मैदान पहुंचे थे नीतीश जी शपथ लेने।
इसलिए हुजूर प्रदेश की सत्ता से बेदखल होने के बाद संसद पहुंच गए क्योंकि इन्हें बड़ा बनना था! मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी तो फिर तड़ से छोटा बन जाएंगे। हुजूर की घर की पार्टी है जब मन चाहे और जो मन चाहे बन सकते हैं! मौज है!
5 बड़ा या 7 ?
विधायक बड़ा या सांसद ?
राज्य बड़ा या केंद्र ?
राज्य सरकार का मंत्री बड़ा या केंद्र सरकार का?
फिर सवाल ये है कि 5 बार के विधायक को भाजपाई राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाते हैं और 7 बार के सांसद को राज्य का अध्यक्ष।
इसका तर्क क्या है… दरअसल इसका कोई तर्क भाजपा के पास नहीं है… इसका कारण सिर्फ़ ये है कि प्रभुत्ववादी भाजपाई ये संदेश देना चाहते हैं कि PDA समाज का व्यक्ति कितना भी क़ाबिल हो पर वो वर्चस्ववादियों के आगे एक सीमा से आगे नहीं बढ़ सकता है।
भाजपा ने पीडीए समाज को नीचा दिखाने को लिए ये नया तरीका अपनाया है। ये अपमान पीडीए समाज अब और नहीं सहेगा… अब अपनी पीडीए सरकार बनाएगा, पीडीए को मान दिलाएगा।
345 days. Countless Hours. Sleepless Nights. Multiple Campaigns. Data crunching. Micro targeting and what not!
Everything looks so satisfying today. JD (U)’s tally has made our team proud.
The party which many thought would perform ‘okay okay’, has achieved great numbers.
Congratulations to CM Sh. @NitishKumar , National Working President Sh. Sanjay Kumar Jha and the entire leadership team & members of the JD (U).
Special thanks to Sh. @SanjayJhaBihar for giving us the opportunity to manage the campaign for the assembly elections after a successful Lok Sabha campaign.
Time for the team to celebrate!!!! @tadeep@SummitPolCom ✌️ 🥳
राजीव प्रताप रूडी ने कंस्टीट्यूशन क्लब का चुनाव जीता।उन्होंने संजीव बाल्यान को 102 वोटों से शिकस्त दी।रूडी और बाल्यान दोनों बीजेपी के नेता हैं इसलिए ये लड़ाई चर्चा का केंद्र बनी हुई थी।
(वैसे आज के पहले कम लोग ही जानते होंगे कि कंस्टीट्यूशन क्लब संसद के पास बना सांसदों के लिए एक क्लब है)
महाराष्ट्र: ठाणे हादसे के बाद रेलवे बोर्ड का बड़ा फैसला- मुंबई लोकल ट्रेनों में लगेंगे ऑटोमैटिक डोर क्लोजर
मुंबईः महाराष्ट्र के ठाणे जिले में सोमवार सुबह एक चलती लोकल ट्रेन से गिरने के कारण 4 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य यात्री घायल हो गए। यह हादसा मुंब्रा स्टेशन के पास हुआ जब भीड़भाड़ वाली ट्रेन से कई यात्री अचानक गिर पड़े। घटना के बाद रेलवे प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।
हादसे के कुछ घंटे बाद ही रेलवे बोर्ड ने मुंबई लोकल नेटवर्क के लिए दो महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की। रेलवे बोर्ड के सूचना और प्रचार निदेशक दिलीप कुमार ने बताया कि अब मुंबई उपनगरीय रेलवे के लिए बन रही सभी नई ट्रेनों (रैक) में ऑटोमैटिक डोर क्लोजर की सुविधा अनिवार्य की जाएगी। साथ ही पहले से चल रही ट्रेनों में भी दरवाजों के डिजाइन में बदलाव कर उन्हें स्वचालित तरीके से बंद करने की सुविधा दी जाएगी।
दिलीप कुमार ने कहा कि मुंबई की सभी उपनगरीय ट्रेनों को चरणबद्ध तरीके से ऑटो डोर क्लोजर सुविधा से लैस किया जाएगा ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
हादसे का क्या कारण बताया गया?
सेंट्रल रेलवे ने एक बयान में बताया कि हादसे का प्रमुख कारण ट्रेन में असामान्य रूप से अधिक भीड़ होना था। हादसा उस समय हुआ जब ट्रेन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) की ओर जा रही थी। ठाणे जीआरपी की वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अर्चना दुसाने ने बताया कि जब यात्री ट्रेन से गिरे, उसी वक्त पास की ट्रैक पर एक मेल/एक्सप्रेस ट्रेन गुजर रही थी। हादसे की जानकारी सुबह करीब 9:30 बजे कासारा की ओर जा रही एक अन्य ट्रेन के गार्ड द्वारा दी गई, जिन्होंने घायल यात्रियों को ट्रैक पर पड़ा देखा।
रेलवे प्रशासन ने बताया कि घायल यात्रियों को तुरंत निकटवर्ती अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और हादसे की जांच शुरू कर दी गई है। इस घटना के कारण मुंबई लोकल की कई सेवाएं प्रभावित हुई हैं। रेलवे के अनुसार, जांच चल रही है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा मानकों को और मजबूत किया जाएगा। #MumbaiTrainAccident
'...मैं अभी भी कांप रहा हूं', कनाडाई पत्रकार ने खालिस्तानियों पर हमला करने का लगाया आरोप
वैंकूवरः कनाडा के एक स्वतंत्र पत्रकार ने आरोप लगाया कि उसे खालिस्तान समर्थक कार्यकर्ताओं द्वारा शारीरिक हमला किया गया और उन्हें धमकाया गया। रविवार को वैंकूवर में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार पर हमला हुआ।
पत्रकार मोचा बेजिरगन ने इस बारे में कहा कि उन्हें उनकी स्वंतत्र संपादकीय और पूर्व में खालिस्तान से संबंधित आंदोलनों को कवर करने के चलते निशाना बनाया गया।
रैली को कर रहे थे कवर
यह घटना तब घटित हुई जब बेजिरगन वैंकूवर में खालिस्तान समर्थकों द्वारा आयोजित एक रैली को कवर कर रहे थे। पत्रकार ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने "गुंडों" की तरह काम किया और जानबूझकर उन्हें निशाना बनाया।
पत्रकार ने इस संबंध में एक्स पर एक पोस्ट भी किया जिसमें लिखा कि "यह सिर्फ दो घंटे पहले हुआ है और मैं अभी भी कांप रहा हूं। मुझे कई खालिस्तानियों ने घेर लिया जो गुंडों की तरह व्यवहार कर रहे थे। उन्होंने मुझे घेर लिया, धमकाया और मेरे साथ मारपीट की और उन्होंने मेरे हाथ से मेरा फोन छीन लिया।"
पत्रकार ने आरोप लगाया कि उन पर एक व्यक्ति ने हमला किया जो उन्हें लंबे समय से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अमानवीय भाषा का प्रयोग करके परेशान कर रहा था।
पत्रकार ने आगे बताया कि वह कनाडा,अमेरिका, न्यूजीलैंड में खालिस्तान आंदोलनों को करव करते रहे हैं। उन्होंने कहा "मेरा एकमात्र लक्ष्य स्वतंत्र पत्रकारिता करना है और जो कुछ हो रहा है उसे रिकॉर्ड करना है क्योंकि मैं संपादकीय रूप से स्वतंत्र हूं, इससे कुछ लोगों को निराशा होती है।"
पत्रकार ने क्या आरोप लगाया?
बेजिरगन ने आगे आरोप लगाया कि खालिस्तान समर्थक समूह मुझे "प्रभावित" और "खरीदना" चाहते हैं। पत्रकार ने इस घटना के संबंध में एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि ये धमकाने वाली रणनीतियां मुझे रोक नहीं पाएंगी, मेरी स्वतंत्रता को प्रभावित नहीं करेंगी। इस वीडियो में एक व्यक्ति पत्रकार से भिड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
"उसने मेरे चेहरे से दूरी बनाए रखने से इनकार कर दिया और मुझे धमकी दी कि अगर मैंने उसे छुआ तो वह हिंसा करेगा। मैं उससे दूर जाता रहा लेकिन उसका परेशान करने वाला व्यवहार बंद नहीं हुआ... वह मेरे पीछे-पीछे घूमता रहा, दूसरों को मेरे काम में बाधा डालने के लिए उकसाता रहा और मुझसे दूर रहने के लिए कहने के बावजूद मेरे पीछे-पीछे आता रहा।"
पत्रकार ने कहा कि यह कथित हमलावर इससे पहले भी उन पर हमला कर चुका है। पत्रकार ने उस दौरान उस पर पुलिस रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा कि आज फिर एक रिपोर्ट दर्ज कराई है।
भारत लगातार इस बात पर चिंता व्यक्त करता रहा है कि कनाडा खालिस्तानी उग्रवादियों और उनके समर्थकों को खुली छूट दे रहा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों में गिरावट देखी गई है।
ऐसी ही अन्य खबरों के लिए पढ़ते रहें https://t.co/MYMGAEfSr4
मेघालय में लापता इंदौर दंपति केस में ट्विस्ट, पत्नी यूपी के गाजीपुर से गिरफ्तार
मध्य प्रदेश के इंदौर के नवविवाहित जोड़े के मेघालय में हनीमून के दौरान लापता हो जाने के चर्चित केस में 18 दिनों बाद एक चौंकाने वाला अपडेट सामने आया है। दंपति के लापता होने के करीब 10 दिन बाद पति राजा रघुवंशी की लाश मिली थी और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद हुआ था। पत्नी लापता थी। अब इस केस में पुलिस ने केस में पत्नी सोनम को यूपी के गाजीपुर से गिरफ्तार किया है। साथ ही तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।
इसकी पुष्टि सोमवार सुबह मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने एक पोस्ट के जरिए भी की। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'राजा हत्या मामले में 7 दिनों के भीतर मेघालय पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है...मध्य प्रदेश के 3 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया गया है, एक महिला ने आत्मसमर्पण किया है और एक अन्य हमलावर को पकड़ने के लिए ऑपरेशन अभी भी जारी है।'
पत्नी पर पति की हत्या कराने का आरोप!
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मेघालय के डीजीपी इदाशिशा नोंग्रांग ने बताया है कि सोनम ने कथित तौर पर अपने पति की हत्या के लिए कुछ लोगों को सुपारी दी थी। उन्होंने कहा, 'एक व्यक्ति को यूपी से पकड़ा गया, और दो अन्य आरोपियों को एसआईटी ने इंदौर से पकड़ा है। गिरफ्तार आरोपियों ने कुछ और लोगों के नाम बताए हैं। उन्होंने खुलासा किया कि मृतक की पत्नी ने उन्हें किराए पर लिया था...सोनम ने यूपी के नंदगंज पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण किया, और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।'
गौरतलब है कि यह पूरा मामला पिछले कई दिनों से चर्चा में था। पिछले महीने ही शादी करने वाले इस जोड़े के हनीमून के दौरान मेघालय के सोहरा में यात्रा के समय लापता होने की खबर सामने आई थी। पति की लाश बाद में मिल गई थी और पत्नी लापता थी। इस केस को लेकर मेघालय पुलिस पर काफी दबाव भी था। मेघालय पुलिस मामले में स्थानीय लोगों और टूरिस्ट गाइडों से पूछताछ भी कर रही थी।
इंदौर कपल केस: क्या है पूरा मामला?
इंदौर के राजा और सोनम रघुवंशी की शादी 11 मई को हुई थी। जोड़ा 20 मई को हनीमून के लिए असम में मां कामाख्या के दर्शन करने के बाद 23 मई को मेघालय के शिलॉन्ग रवाना हुआ। शुरुआत में परिवार की दोनों से बात होती रही, फिर संपर्क टूट गया।
24 मई से ही दोनों के मोबाइल बंद हो गए तो परिवार वालों को चिंता हुई। कई कोशिशों के बाद जब कोई संपर्क नहीं हो सका तो सोनम के भाई गोविंद और राजा के भाई विपिन इमरजेंसी फ्लाइट से शिलॉन्ग पहुंचे थे।
यहां दोनों के लापता होने पर एनडीआरएफ और पुलिस ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया, जिसके करीब 10 दिन बाद राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई में मिला। 2 जून को ईस्ट खासी हिल्स में वेइसाडोंग फॉल्स के पास गहरी खाई में राजा का शव मिला था। वहीं, लापता पत्नी सोनम रघुवंशी की तलाश जारी थी। मामले को लेकर देशभर में खूब शोर मचा, इसके बाद दोनों के परिवार और मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने भी सीबीआई जांच की मांग की थी।
'शो खत्म', इजराइली सेना ने गाजा जा रही शिप को बीच में रोका, ग्रेटा थनबर्ग समेत अन्य कार्यकर्ता इजराइल ले जाए गए
इजराइली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने गाजा जा रहे उस नौका को बीच में रोक दिया, जिसमें ग्रेटा थनबर्ग सहित कुछ और कार्यकर्ता सवार थे। यह नौका इजराइली नौसेना की घेराबंदी को नजरअंदाज करते हुए हुए गाजा पट्टी में प्रवेश करने की कोशिश कर रही थी। आईडीएफ ने नौका को इजराइल की ओर भेज दिया है।
समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार मानवीय सहायता की भी कुछ चीजें अपने साथ लेकर जा रहे इस जहाज पर यूनाइटेड किंगडम का झंडा लगा हुआ था। इसका संचालन फिलिस्तीनी समर्थक फ्रीडम फ्लोटिला कोलिशन (एफएफसी) समूह कर रहा था। शिप का नाम मैडलीन है। इस समूह के टेलिग्राम अकाउंट पर बताया गया कि मैडलीन नौका 6 जून को सिसिली से रवाना हुई थी और दिन में गाजा पहुंचने की उम्मीद थी, हालांकि इजराइली सेना ने उसे रोक लिया।
'सेल्फी यॉट' पर सभी सुरक्षित: इजराइल
इस बीच इजराइल के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर तंज भरे अंदाज में एक बयान में कहा, 'सेलिब्रिटीज' की 'सेल्फी यॉट' सुरक्षित रूप से इजराइल के तटों की ओर बढ़ रही है। यात्रियों के अपने देश वापस लौटने की उम्मीद है। 'सेल्फी यॉट' के सभी यात्री सुरक्षित हैं। उन्हें सैंडविच और पानी मुहैया कराया गया। शो खत्म हुआ।'
दूसरी ओर फ्रीडम फ्लोटिला कोलिशन ने इजराइल पर मैडलीन को 'जबरन रोकने' का आरोप लगाया। एफएफसी ने कहा कि उनके सहायता जहाज पर 'लगभग 3:02 बजे CET (सेंट्रल यूरोपियन टाइम) पर अवैध रूप से चढ़ाई की गई, इसके निहत्थे नागरिक चालक दल का अपहरण कर लिया गया। साथ ही इसमें रखे गए बेबी फॉर्मूला, भोजन और चिकित्सा आपूर्ति सहित जीवन रक्षक सामान को जब्त कर लिया गया।'
फ्रीडम फ्लोटिला गठबंधन के हुवैदा अराफ के अनुसार, 'इजरायल के पास मैडलीन पर सवार अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवकों को हिरासत में लेने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।'
गाजा जा रहे शिप में कौन-कौन था सवार?
12 चालक दल के सदस्यों वाले इस याट में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर काम करने वाली स्वीडेन की ग्रेटा थनबर्ग और यूरोपीय संसद की फ्रांसीसी सदस्य रीमा हसन जैसे लोग सवार थे। इस याट में कुछ मानवीय सहायता वाले सामान भी थे और इसे गाजा पट्टी के तट पर पहुंचना था। हालांकि, इजराइली सेना ने इसे रोकते हुए इजराइल की ओर मोड़ दिया।
इससे पहले इजराइली विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उनकी नौसेना ने शिप को चेतावनी दी थी कि वह एक प्रतिबंधित इलाके की ओर जा रही है, इसलिए उसे रास्ता बदलना होगा। इजराइल का कहना है कि गाजा पर नाकाबंदी जरूरी है ताकि हमास तक किसी तरह के हथियार नहीं पहुंच सकें।
बिहार में राजनीति एक रोचक मोड़ पर है। @laluprasadrjd और @NitishKumar का सियासी सफर अंतिम पड़ाव पर है। और अब लड़ाई अगली पीढ़ी के बीच है। नए दावेदार ताल ठोक रहे हैं। और इन दावेदारों के बीच कुछ ऐसे संजीदा और लोकप्रिय चेहरे हैं जो पार्टी अनुशासन से बंधे हैं। कोई दावेदारी नहीं पेश कर रहे हैं। मगर ताकतवर समुदायों से आते हैं। सियासी प्रदर्शन भी अच्छा रहा है। इस चुनाव में नजर इन चर्चित चेहरों पर भी रहेगी। @BJP4India के @ShahnawazBJP भी ऐसा ही एक नाम हैं। इनकी पहचान सौम्य और सुलझे हुए नेता की रही है। एक समय में सबसे कम उम्र में कैबिनेट मंत्री बने थे। लेकिन बीजेपी के स्वर्णिम दिनों में संघर्ष कर रहे हैं। खैर, ये सियासत है और सियासत में जब किसी नेता का समय बदलता है तो नया इतिहास बनता है। बोले भारत की संपादक शांता सिंह ने शाहनवाज हुसैन जी से प्रदेश और देश की सियासत पर खास बातचीत की है। इसमें अतीत और वर्तमान के साथ भविष्य की बातें हैं। साथ ही शाहनवाज हुसैन जी की मोहब्बत भी है। उन दिनों लव जिहाद जैसा शब्द इजाद नहीं हुआ था।
समय निकाल कर ये बातचीत देखिए और संभव हो तो अपनी राय भी दीजिए। आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है!
https://t.co/tiMHP9DuDA
Shahnawaz Hussain Interview:
देखिए BJP के कद्दावर नेता शाहनवाज हुसैन का दमदार इंटरव्यू। @ShahnawazBJP
बिहार चुनाव 2025 ( Bihar Elections 2025 )
मोदी, मुस्लिम, मिडिल क्लास ( PM Modi )
सियासत का सफर ( Indian Politics, Bihar Politics )
बस नंबर 740 से इश्क की शुरुआत ( Love Story )
भाजपा के प्रति वफादारी और मंत्रालय का इनाम ( BJP )
और भी बहुत कुछ...
FULL PODCAST on 3rd JUNE 2025, AT 7 PM on YouTube of @BoleBharatHindi
#ShahnawazHussain #BJPLeader #podcasts #BiharElections #BiharPolitics
केन्याई लेखक न्गुगी वा थ्योंगो का 87 वर्ष की आयु में निधन
केन्या के प्रतिष्ठित साहित्यकार न्गुगी वा थ्योंगो ( Ngũgĩ wa Thiong'o) का बुधवार को निधन हो गया। वे 87 साल के थे। थ्योंगो के नाम दर्जनों उपन्यास, लेख और संस्मरण दर्ज हैं जिसमें उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य से लेकर आजादी के बाद भी अपने देश की सरकारों के शासन के तहत हुए अत्याचारों तक को दर्शाया। वे केन्या में असहमति की मुखर आवाज माने जाते रहे।
केन्या की आजादी के बाद देश में बनी सरकार के कामकाज को लेकर कई बार मुखर आलोचक रहे थ्योंगो को इस वजह से जेल भी जाना पड़ा। उन्हें दो दशक तक निर्वासित भी रहना पड़ा। रॉयटर्स समाचार एजेंसी के अनुसार किशोरावस्था में ब्रिटेन से स्वतंत्रता के लिए माउ माउ के सशस्त्र संघर्ष को देखने के अनुभव से प्रभावित होकर थ्योंगो ने अपने लेखन में औपनिवेशिक शासन के साथ-साथ उस केन्याई अभिजात वर्ग पर भी जमकर निशाना साधा जिन्होंने ब्रिटिश शासन के कई तौर-तरीके और विशेषाधिकार एक तरह से विरासत में मिले थे।
जब बिना किसी आरोप के रखा गया जेल में
दिसंबर 1977 में थ्योंगो को किसानों और मजदूरों द्वारा उनके नाटक "नगाहिका नेंडींडा" (मैं जब चाहूँ शादी करूँगा) का प्रदर्शन करने के बाद बिना किसी आरोप के एक साल के लिए जेल में बंद कर दिया गया था। थ्योंगो ने बाद में बताया कि नाटक में केन्याई समाज में असमानताओं की आलोचना की गई थी, जिससे नाराज होकर अधिकारियों ने थिएटर को ध्वस्त करने के लिए तीन ट्रक में भरकर पुलिस भेजी थी।
थ्योंगो को 1982 में निर्वासन में जाना पड़ा, जब उन्हें राष्ट्रपति डैनियल अराप मोई की योजनाओं के बारे में गुप्त तरीके से पता चला। मोई की योजना कथित तौर पर थ्योंगो को गिरफ्तार करने और मारने की थी। बाद में थ्योंगो कैलिफोर्निया-इरविन विश्वविद्यालय में अंग्रेजी और तुलनात्मक साहित्य के प्रोफेसर बन गए।
मोई के दो दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद पद छोड़ने पर थ्योंगो का भी निर्वसन खत्म हुआ। मोई पर अपने दो दशक के शासन मेबड़े पैमाने पर राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारी, हत्याएं और यातनाएं देने जैसे आरोप हैं।
मौजूदा राष्ट्रपति ने दी थ्योंगो को श्रद्धांजलि
केन्या के वर्तमान राष्ट्रपति विलियम रुटो ने हाल के वर्षों में खराब स्वास्थ्य से जूझने और अमेरिका में हुई थ्योंगो की मृत्यु पर शोक प्रकट किया है और उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
रुटो ने अपने एक्स अकाउंट पर कहा, 'केन्याई साहित्य के इस दिग्गज ने आखिरी बार अपनी कलम नीचे रख दी है। हमेशा साहसी, उन्होंने हमारी स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय के साथ-साथ राजनीतिक और आर्थिक शक्ति के उपयोग और दुरुपयोग के बारे में हमारी सोच पर एक अमिट प्रभाव डाला।'
साल 2004 में हालांकि केन्या लौटने पर थ्योंगो ने कहा कि उन्हें मोई से कोई शिकायत नहीं है। लेकिन उन्होंने तीन साल बाद रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि केन्याई लोगों को उस दौर में हुए अत्याचारों को नहीं भूलना चाहिए।उन्होंने कहा था, '22 साल की तानाशाही के परिणाम लंबे समय तक हमारे साथ रहेंगे और मैं नहीं चाहता कि हम उस दौर में वापस लौटें।'
थ्योंगो के चर्चित उपन्यास
थ्योंगो की सर्वाधिक प्रसिद्ध कृतियों में उनका पहला उपन्यास 'वीप नॉट चाइल्ड' शामिल है, जिसमें माउ माउ संघर्ष का वर्णन है। इसके अलावा "डेविल ऑन द क्रॉस" भी शामिल है, जिसे उन्होंने जेल में रहते हुए टॉयलेट पेपर पर लिखा था।इसके अलावा 'द विजार्ड ऑफ द क्रो', 'पेटल्स ऑफ ब्लड' भी उनका प्रसिद्ध उपन्यास है।
1980 के दशक में उन्होंने अंग्रेजी छोड़कर अपनी मातृभाषा गिकुयु (Gikuyu) में लिखना शुरू कर दिया था और कहा कि वे केन्या के पूर्व औपनिवेशिक आयातित भाषा को अलविदा कह रहे हैं।
अपने पिता की चार पत्नियों में से तीसरी पत्नी से पैदा हुए पाँच बच्चों में से एक थ्योंगो नैरोबी के उत्तर में कामिरीथु गाँव में पले-बढ़े। उन्होंने उस दौर में एक अच्छी माने जाने वाली औपनिवेशिक शिक्षा प्राप्त की और उस समय उनका नाम जेम्स थ्योंगो था।
थ्योंगो की प्रशंसक दुनिया भर में रहे। जॉन अपडाइक से लेकर चिमामांडा न्गोजी अदिची जैसे लेखकों ने उनकी प्रशंसा की। अमेरिकी के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी एक बार थ्योंगो की 'इतिहास की घटनाओं का व्यक्तिगत जीवन और रिश्तों पर पड़ने वाले प्रभाव की एक सम्मोहक कहानी' कहने की क्षमता की प्रशंसा की थी।
थ्योंगो को 2009 में 'बुकर पुरस्कार' के लिए चुना गया था। वे 2012 में नेशनल बुक क्रिटिक्स सर्किल पुरस्कार के लिए फाइनलिस्ट थे और चार साल बाद पाक क्योंग-नी साहित्य पुरस्कार (Pak Kyong-ni Literature Award) के विजेता बने।