Train :12472 @IRCTCofficial@RailMadad NDLS(11 april,10:20pm)80 ki thali ko 120rs btakr becha bill manga to 130 ka dia.jisme(veg thali+chole chawal ka double bill bnake dia jo khaya nhi uskepaise mange jabran.Maine COMPLAIN ki. to MANAGER sahit sbne milkr physically assault kia
@GyanvardhanS@ceoup भाई मेरा ऐसा ही हुआ मैने भी संशोधन किया था फॉर्म08 एक्सेप्ट हो गया लेकिन डाउनलोड करने के बाद पुराना डाटा ही दिखा रहा है क्या वजह है?
@ceoup Sir, I had amended my address in my voter ID by filling Form 8. The status has been updated, but the complete details have not been updated. Please solve the problem.
यूपी में गुंडे, आतंकियों का गिरोह चलाने वाले दक्ष चौधरी ने अपने साथियों के साथ मिलकर मथुरा में SP, CO समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की कई गाड़ियों में न सिर्फ़ तोड़फोड़ की हैं बल्कि पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया है, और पुलिस पर फायरिंग भी की गई हैं जिसके खोखे भी पुलिस ने लाठी, डंडों समेत बरामद कर लिए हैं, इस हमलें में कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं और अन्य यात्रियों की गाड़ियां भी तोड़ दी गई।
एक FIR में नाम दर्ज होते ही मुस्लिमों के घर पर बुलडोजर कार्रवाई करने वाले यूपी CM @myogiadityanath क्या इस गिरोह पर कार्रवाई करने की जहमत उठायेंगे? सरकारी संपत्ति में नुक़सान करने पर वसूली की बात करने वाले CM आतंकियों के इस गिरोह से सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की वसूली करेंगे?
जिस रोज़ दिल्ली में तरुण की हत्या हुई उसी रोज़ दिल्ली में चार और अन्य हिंदुओं की हत्या हुई। लेकिन उन चारों हत्या के आरोपी ‘दूसरे’ नहीं हैं, इसलिए हिंदू ख़तरे में नहीं आया। @DelhiPolice@CMODelhi@MCD_Delhi ने उन चारों हिंदुओं की हत्या के आरोपितों का घर भी नहीं गिराया। @vinod_bansal ने उन चारों हिंदुओं की हत्या के आरोपितों को जानवर भी नहीं बताया। उन चारों हिंदुओं की हत्या के आरोपितों को पीड़ित परिवार ने पाकिस्तान भेजने की मांग भी नहीं की! उन चारों हिंदुओं की हत्या पर किसी ललित शर्मा नामी नफ़रती जीव ने उन हत्यारोपितो के खून से होली खेलने का आह्वान भी नहीं किया। उन चारों हिंदुओं की हत्या पर कोई @Abhinav_Pan नामी शातिर संघी रिपोर्टिंग करने उनके घर नहीं गया। उन चारों हिंदुओं की हत्या पर किसी अभिनव ने उन हिंदुओं को कत्ल करने वाले उनके ही समुदाय के लोगों से सवाल नहीं किया कि उन्हें बचाने कोई आगे क्यों नहीं आया?
ऐसे ही कितने ही सवाल हैं, जो उन चारों हिंदुओं की हत्या के बाद उनकी चिता के साथ ही धुआँ बनकर उड़ गए। सबसे बड़ा सवाल तो बुलडोजर का है! उत्तम नगर में एक हिंदू मारा गया तो सरकार ने आरोपी का घर गिरा दिया। उसी रोज़ चार और हिंदू मारे गए तो सरकार ने चुप्पी साध ली। जो सरकार ‘दूसरे’ अपराधी हत्यारों का घर गिरवाकर खुद ही इबारत लिखती है, वही सरकार ‘अपने’ अपराधी हत्यारों का घर नहीं गिराकर एक और इबारत लिखती है। इबारत यह कि अगर पीड़ित ‘अपना’ है और आरोपी ‘दूसरा’ है तो उसका घर गिरा दिया जाएगा, एनकाउंटर कर दिया जाएगा। अगर पीड़ित भी अपना है और आरोपी भी अपना है, तब सामान्य कार्रावाई होगी। अगर पीड़ित ‘दूसरा’ है और आरोपी ‘अपना’ है तब पीड़ित की रिपोर्ट भी बमुश्किल दर्ज होगी।
यह मदर ऑफ डेमोक्रेसी की निष्पक्षता है! मदर ऑफ डेमोक्रेसी के अफसर नेता शपथ लेते हैं कि वो बिना अनुराग एवं द्वेष का कर्तव्य निर्वहन करेंगे। लेकिन वास्तविक अमल कुछ और ही रहता है।
जब साल में 12 महीने होते हैं, तो टेलीकॉम कंपनियाँ 28-28 दिन का महीना बनाकर 12 की जगह 13 बार रिचार्ज क्यों वसूलती हैं? क्या कंपनियाँ अपना नया कैलेंडर चला रही हैं, जिसमें हर महीना 28 दिन का है? आखिर यह 28 दिन वाला महीना किस स्कूल में पढ़कर बनाया गया है, और उपभोक्ताओं से अतिरिक्त पैसा वसूलने की इस व्यवस्था पर सरकार और नियामक संस्थाएँ चुप क्यों हैं?
@airtelindia@reliancejio@TRAI@JM_Scindia
ईरान ने 400 मिसाइलों से एक साथ 7 देशों पर हमला किया
जो मुस्लिम मुल्क अमरीका के तलवे चाट रहे थे उन सबको ईरान के खौफ से आज अपना एयरबेस बंद करना पड़ा।
इसराइल और अमरीका को लगा था कि बाकी देशों की तरह ईरान भी उनके आग झुक कर SIR, SIR करेगा।
ईरान इसीलिए युद्ध नही चाहता था क्योंकि उसे पता था कि हमला होगा तो पूरा मिडिल ईस्ट प्रभावित होगा....
फिरसे बजरंग दल के हिंदुत्व ब्रिगेड एक मुस्लिम बुजुर्ग को बुरी तरह पीट रहे हैं और देश का क़ानून चूड़ियाँ पहन कर तमाशा देख रहा है।
@unwomenindia@UN@USCIRF
कोटद्वार के ASP मेरे सवालों से क्यों चिढ़े?
बजरंग दल के लफंगों पर कार्रवाई के सवाल पर क्या बोले ASP?
मैंने जब बजरंग दल के हुड़दंगी कार्यकर्ताओं के वीडियो दिखाकर सवाल किए तो क्यों नाराज़ हो गए ASP?
दीपक कुमार पर FIR के सवाल पर क्यों हुए असहज?
ASP से पूछे जा रहे सवालों का जवाब देने क्यों आ गए CO और SHO?
ASP साहब से पूरी बातचीत मेरे यूट्यूब चैनल पर ...
काश! उस जगह कोई ‘फैसल’ होता!
हमारे सामने दो ख़बरें हैं। दोनों ख़बर उत्तर प्रदेश से हैं। एक ख़बर पीलीभीत से है, तो दूसरी नौएडा से है। पीलीभीत वाली ख़बर थोड़ी सी पुरानी है तो नौएडा वाली ख़बर इसी सप्ताह की है। लेकिन यह महज़ इत्तेफाक ही है कि दोनों घटना लगभग एक जैसी हैं। पीलीभीत के शुभम तिवारी की कार अनियंत्रित होकर तालाब में जा गिरी थी, उसी तालाब में एक छोर पर मछली पकड़ रहे फैसल ने शुभम तिवारी की जान बचाने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा दी। तालाब के किनारे खड़े लोगों की साँसें अटकी थीं, शुभम को ज़िंदा बचाने की जद्दोजहद में फैसल की नाव डूब गई, लेकिन उसने शुभम तिवारी का हाथ नहीं छोड़ा और आखिरकार उसमे शुभम को ज़िंदा बचा लिया। सबने फैसल की बहादुरी और इंसानियत को बचाने की उसकी कामयाब कोशिश की सराहना की, मालूम नहीं इस गणतंत्र फैसल नामी पीलीभीत के उस ‘फरिश्ते’ को सरकार सम्मान देगी या नहीं! लेकिन इतना तय है कि उसने एक इंसान की जान बचाकर इंसानियत को डूबने से बचा लिया। इस संवाददाता ने उसे तब भी सैल्यूट किया था और अब भी सैल्यूट कर रहा है। फैसल ज़िंदाबाद! इंसानियत ज़िंदाबाद!
अब दूसरी ख़बर देखिए! इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम से ग्रेटर नोएडा अपने घर जा रहे थे। उन्हें कोहरे के कारण कुछ दिखाई नहीं दिया, उनकी कार का संतुलन बिगड़ा, और कार सड़क किनारे बनी दीवार को तोड़कर एक मॉल के निर्माणाधीन बेसमेंट में जा गिरी, बेसमेंट में पानी भरा हुआ था लिहाजा कार डूब गई।
युवराज मेहता पूरे दो घंटे तक खुद को बचाने के लिए चिल्लाते रहे इस दौरान उन्होंने अपने पिता से फोन पर कहा कि पापा बचा लो। जवान बेटे की पुकार सुनकर उनके बूढे पिता भी मौके पर आ पहुंचे। उन्होंने भी बेटे को बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन फिर भी वो बेटे को बचा नहीं सके। अपनी आंखों के सामने बेटे को डूबते देखते रहे। युवराज के पिता राजकुमार मेहता का कहना है कि युवराज गाड़ी से निकलकर बाहर आया और हिम्मत करके छत पर लेट गया था। वहां से वह 'हेल्प हेल्प' चिल्ला रहा था ताकि को राह चलता आदमी उसकी हेल्प कर पाए! रेस्क्यू टीम आई उसके पास पर्याप्त साधन नहीं थे. एक डिलिवरी बॉय ने रस्सी फेंककर युवराज को बचाने की कोशिश की लेकिन वो भी नाकाम रहा। आखिरकार युवराज ज़िंदगी की हार गए, उनकी जान चली गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार युवराज की मौत दम घुटने से हुई! अब इस घटना की ज़िम्मेदारी चाहे जिस पर डालिए! लेकिन वो सभी युवराज के मुजरिम हैं, जिन्होंने किनारे खड़े होकर युवराज को डूबते देखा है। काश! इनमें कोई ‘फैसल’ होता! जो डूबते युवराज को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा देता। युवराज को नम आंखों और भीगी पलकों से विदाई! और एक ही मलाल कि काश वहां कोई ‘फैसल’ होता! तो युवराज आज ज़िंदा होते।