मिस्टर सोनम वांगचुक जिस मुद्दे को लेकर पिछले 19 दिनों से अन्न त्याग कर बैठे हैं, उसका समर्थन है। उनके स्वास्थ्य की स्थिति अच्छी नहीं है। बहुत से आम लोग उन्हें अपना समर्थन दे रहे हैं। कोई भी विवेकशील भारतीय नागरिक चाहेगा कि पेपर लीक रुके, शिक्षा व्यवस्था सुधरे, पेपर लीक जैसे मामलों के लिए शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय हो।
लेकिन इसके इतर उस मंच पर जो कुछ हो रहा है, उसका समर्थन भी कोई विवेकशील भारतीय नहीं करेगा।
जिस मंच पर वह अन्न त्याग करके बैठे हैं, उसी मंच से पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा कर दी कि धर्मेंद्र प्रधान की ज��ह सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाया जाए।
मतलब, क्या सोनम वांगचुक इसलिए भूख हड़ताल पर बैठे हैं कि उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया जाए?
यह अपने आप में उनके आंदोलन और उसके उद्देश्य को छोटा करने जैसा है।
सोनम वांगचुक के बहुत से शुभचिंतक, आम लोग और राजनीति के मंझे हुए लोग भी कह रहे हैं कि उन्हें अपने स्वास्थ्य और अन्य परिस्थितियां को देखते हुए भूख हड़ताल समाप्त कर देनी चाहिए। सोनम वांगचुक को उन ���भी की बात सुननी चाहिए।
राम मंदिर धर्मध्वजा
मंदिर जब टूटते हैं, तो केवल शिलाएँ, ध्वजा या प्रतिमाएँ खंडित नहीं होती, तोड़ने वालों का लक्ष्य मंदिरों में बसी सनातन आत्मा का भंजन होता है। उनकी सोच उस पवित्र देवालय को अदृश्य करने ��ात्र की नहीं होती, वरन एक-एक टूटता मंदिर, एक-एक जलता गाँव, एक-एक धर्मविमुख होता व्यक्ति उसी सोच के विस्तार को अवलम्ब देती सीढ़ियाँ होती हैं कि यदि आक्रांता लगा रहे, तो एक दिन सनातन के धरातली अर्थ का आध्यात्मिक लोप भी हो जाएगा।
एक पुस्तक वालों ने हमारे पुस्तकालयों को जला कर यह सोचा कि हमारी सभ्यता या तो वो मिटा देंगे, या उनकी आने वाली पीढ़ियाँ। परंतु ऐसा हो नहीं पाया। हड्डियों में धँसे छर्रे ह��ं या खोपड़ी में लगी सात-सात गोलियाँ, वो खंडित शिलाएँ, प्रतिमाओं के नोंचे टुकड़े, वायु में जलते पताकाओं के उड़ते धागे, अपने समय की प्रतीक्षा करते रहे कि कालचक्र घूमेगा और धर्मचक्र पुनर्स्थापित होगा।
राम मंदिर के शिखर पर शोभायमान भगवा ध्वज एक मंदिर मात्र की पूर्णता नहीं बल्कि लाखों हिन्दुओं की टूटती साँसों, बिखरते विमर्श और धुँधली होती जाती आशा की राह पर खड़ा वह स्तंभ है, जो आज हमारा सामूहिक अवलम्ब बन चुका है।
यह धर्मध्वजा और मंदिर, कपड़े और पत्थर नहीं सनातन की गति, लहर और शाश्वत स्थायित्व का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि हिन्दू था, हिन्दू है, और हिन्दू, ब्रह्मांडों की उत्पत्तियों और विनाशों के बाद हर बार पुनः आ जाएगा। मैंने पहले भी कहा था कि राम मंदिर के महत्व का अनुभव हमें वर्तमान में नहीं हो पाएगा क्योंकि हमें यह ‘एक और मंदिर परिसर’ की तरह बताया जाएगा।
हालाँकि कालांतर में, जब हजारों वर्षों के इतिहास, संघर्ष, आक्रमण, विनाश और जीर्णोद्धार की समय रेखा बनाई जाएगी तो राम मंदिर वह उदाहरण बनेगा जिसके समक्ष सब फीका होगा।
माता अहिल्याबाई, या कृषणदेवराय, राजा सुहंगमंग, शिवाजी महाराज या सवाई मान सिंह द्वितीय आदि के शत्रु ज्ञात थे, विधर्मी थे, परंतु राम मंदिर उस काल खंड में नकारा जाता रहा जब सत्ता हिन्दुओं के हाथ में थी और उन हिन्दुओं ने ��ीर्णोद्धार के नाम पर राम लला को वैसे कपड़े के नीचे रखा जैसे अवैध लोग किसी स्लम में विज्ञापन के फ्लेक्स की छत बना कर रहते हैं।
हमने उनसे भगवान को मिथक बताते सुना और अंततः स्वयं के ही समूहों से स्वयं ही लड़ते हुए इस मंदिर का निर्माण किया है।
आज २५ नवंबर २०२५ है, लहू के थक्कों का बोझ उठाते यज्ञोपवीत���ं ने आज मानो एक रक्तबंध का निर्माण किया है जो हमारे पूर्वजों के शौर्य की पताका को सभ्यता के इस प्रतीकात्मक शिखर पर स्थापित करता है। इस यात्रा के हर पथिक, हर नेता, हर गिलहरी और हर जटायु-सम्पाति को प्रणाम।
@_Sukoon एक-दो रोज़ में हर आँख ऊब जाती है
मुझ क��� मंज़िल नहीं, रस्ता समझने लगते हैं
जिन को हासिल नहीं वो जान देते रहते हैं
जिन को मिल जाऊँ वो सस्ता समझने लगते हैं...!
~कुमार विश्वास
मेरी याद होगी, जिधर जाओगे तुम,
कभी नग़मा बन के, कभी बन के आँसू
तड़पता मुझे हर तरफ़ पाओगे तुम
कभी नाम बातों में आया जो मेरा
तो बेचैन हो हो के दिल थाम लोगे
निगाहों पे छायेगा ग़म का अंधेरा
किसी ने जो पूछा, सबब आँसुओं का
बताना भी चाहो, बता ना सकोगे
#तलाश#तेरी_याद
हम ग़ज़ल में तिरा चर्चा नहीं होने देते
तेरी यादों को भी रुस्वा नहीं होने देते
कुछ तो हम ख़ुद भी नहीं चाहते शोहरत अपनी
और कुछ लोग भी ऐसा नहीं होने देते...!
~मिराज़ फैजाबादी
#तलाश@SadhaMaanus@LaxmiMeena43
@i_surabhi07
@mann_singh10@The_saarang
@v
शोला था जलबुझा हूँ हवाएँ मुझे न दो
मैं कब का जा चुका हूँ सदाएँ मुझे न दो
जो ज़हर पी चुका हूँ तुम्हीं ने मुझे दिया
अब तुम तो ज़िंदगी की दुआएँ मुझे न दो
ऐसा न हो कभी कि पलट कर न आ सकूँ
हर बार दूर जा के सदाएँ मुझे न दो
- अहमद फ़राज़
#तलाश#तेरी_याद
@_Sukoon इससे क्या फ़र्क पड़ता है दूर हैं तुझसे या पास हैं
हमको कोई आदमी तो नहीं, हम तो एहसास हैं
जो रहे तो हमेशा रहेंगे
और गए तो मुड़ कर वापिस नहीं आएँगे...!
~तहज़ीब हाफी
छुट्टियों पर घर आए सैनिकों की छुटियां निरस्त होने के बाद जब वापिस कर्तृत्व निर्वाह के लिए रवाना हुए तो माताओं ने कुछ यूं विदा किया है। वीडियो बालोतरा जिले का बताया जा रहा है।