आज मारुति कुंज भौंडसी में 8मई,2019 बुधवार को होने वाले माननीय राजनाथ सिंह जी (ग्रह मंत्री)भारत सरकार के कार्येक्रम को लेकर लोगों के साथ बैठक की और कार्येक्रम में आने का नियोता दिया
स्थान:जगमाल स्टेडियम भौंडसी
समय:सुबह 10:30 बजे
संदीप राघव(जिला अध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा)गुरुग्राम
सफल कार्येक्रम की कुछ झलकियां 🙏🙏
कल दिनांक 8,मई,2019 को माननीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह जी ने गुरुग्राम लोकसभा के ऐतिहासिक गावँ भोंडसी में जनसभा को सम्बोधित किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मैं गांव भौंडसी के समस्त ग्रामवासियों,माताओं बहनों, युवा साथियों का आभार व्यक्त करता हूं
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पराक्रम-प्रकर्ष महाराणा सांगा की जयंती पर भारतीय युयुत्सा व पौरुष पर बलिहारी प्रत्येक स्वाभिमानी भारतीय को महाराणा के असीम शौर्य जैसी अपार शुभकामनाएँ। इतिहास के शिलालेख पर सदैव के लिए अंकित हो चुकी उनकी अनन्य शौर्य-गाथा सदियों तक वीरता की परिभाषा के रूप में उल्लेखित होती रहेगी💪🏼🇮🇳🙏❤️
जुगनू की कुछ औलादों ने सूरज पर प्रश्न उठाए हैं,
शेरों की मादों के आगे कुछ ग्रामसिंह चिल्लाए हैं।
मेवाड-वंश कुल-कीर्तिकोष जिनके होने से दीपित है,
उन राणा सांगा के घावों पर कुछ भुनगे मँडराए हैं।
उनसे कह दो अब देश शौर्य की मुठ्ठी खूब तानता है,
उनसे कह दो यह देश महाराणा की ज्योति जानता है।
इतिहास तुम्हारी सरकारों का बंधक नहीं रहेगा अब,
उनसे कह दो यह देश लुटेरों को अब नहीं मानता है ॥
उनसे कह दो यह देश ऋणी है ऐसे पुण्य-प्रवाहों का,
यह देश ऋणी है वीर शिवा के परम प्रतापी छावों का।
उनसे कह दो वे राजनीति का गुणा भाग घर में रक्खें,
यह देश ऋणी है महाराणा सांगा के अस्सी घावों का॥” #MaharanaSanga
जब आदिवासी (मूलनिवासी) समाज की आवाज़ दबाई जा रही थी, तब एक इंसान उनकी कहानी लिख रहा था 👉🏼 कुमार सुरेश सिंह - पेशे से IAS officer, लेकिन दिल से एक chronicler of Adivasi history. उन्होंने जंगलों, गाँवों में रहकर आदिवासियों को सिर्फ study नहीं किया बल्कि उनकी पीड़ा, उनकी संस्कृति और उनकी पहचान को समझा। बिरसा मुंडा जैसे नायकों को इतिहास में उनकी सही जगह दिलाने में उनका बड़ा योगदान रहा। उन्होंने 4600+ आदिवासी समुदायों का दस्तावेज़ीकरण किया ताकि कोई भी समाज “गुमनाम” न रह जाए। उन्होंने सिर्फ किताबें नहीं लिखीं…उन्होंने एक पूरी कौम की पहचान को बचाया।
आज कुमार सुरेश सिंहजी को याद करना, आदिवासी इतिहास को याद करना है।
#Adivasi #Moolniwasi #TribalHistory
जनपद अलीगढ़ की बरौली विधानसभा में क्षेत्र भ्रमण के दौरान
* डॉ अवनीश कुमार सिंह जी निवासी पैराई के सुपुत्र विवाह ।
* श्री चेतन राना जी निवासी श्यामपुर गभाना के यहां मण्डप प्रतिभोज ।
* श्री गणेश दत्त शर्मा जी निवासी चंडौस के सुपुत्र विवाह।
* श्री अन्नू तोमर प्रधान जी निवासी
उत्तर प्रदेश के मेरे जिले बुलंदशहर से शिखा सिंह ने UPSC सिविल सर्विसेज में 113वीं रैंक हासिल की है।
उनके पिता एक इंटर कॉलेज में चपरासी हैं और दादा भी यही काम करते थे।
जब खबर मिली कि पोती अब अफसर बन गई है, तो दादाजी की आंखें गर्व और खुशी से छलक पड़ीं।
कड़ी मेहनत का असली रंग यही है 💪❤️
ये है सादगी!
#बुलंदशहर के विपिन राजौरा दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से ग्रेजुएट है. लंदन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीजी किया है. घर रहकर पढ़ाई की और UPSC क्रेक कर दिया. मगर विपिन को बाईक या कार चलाना नही आता. अपने लोकल में वह सभी काम साइकिल पर सवारी करके निपटाते है.
मैंने दो बार UPSC की परीक्षा दी थी पहली बार प्रिलिम्स निकल गया लेकिन मेंस में रुक गया, और दूसरी बार प्रिलिम्स भी नहीं निकल पाया।
मैने अपने जीवन काल में -
NDA दिया नहीं हुआ (2 बार ssb दिया नहीं हुआ)
AFCAT दिया नहीं हुआ।
CDS दिया नहीं हुआ।
UPSC दिया नहीं हुआ।
SSC CGL दिया नहीं हुआ।
Banking ट्राई किया मन नहीं लगा।
किसी भी परीक्षा में सफलता नहीं मिली। अगर जीवन को सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामों से आँका जाए तो मेरी कहानी असफलताओं से भरी दिखेगी, लेकिन जीवन का सच इससे कहीं बड़ा है।
पाँच साल पहले मैंने एक स्कूल शुरू किया था; आज वहाँ प्लेग्रुप से 10वीं तक लगभग 500 बच्चे पढ़ते हैं और औसत फीस लगभग ₹1500-2500 के बीच है यही मेरी वास्तविक उपलब्धि है। जीवन में ज़रूरी नहीं कि हम जो चाहते हैं वही मिले; कभी-कभी असफलताएँ हमें उस राह पर ले जाती हैं जहाँ हमारा असली प्रभाव और उद्देश्य हमारा इंतज़ार कर रहा होता है।
इसलिए अगर यूपीएससी या कोई भी परीक्षा नहीं निकली है तो निराश मत होइए एक परीक्षा आपकी क्षमता तय नहीं करती। खुद को बेहतर बनाइए, तुलना छोड़िए और कम से कम एक मज़बूत स्किल ज़रूर सीखिए, क्योंकि इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में डिग्री से ज़्यादा आपकी कौशल, हिम्मत और निरंतर प्रयास ही आपको पहचान और सफलता दिलाते हैं।
बरौली विधानसभा क्षेत्र में क्षेत्र भ्रमण के दौरान सम्मानित क्षेत्रवासियों का हाल-चाल जाना एवं उनकी समस्याओं के निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को तत्काल निर्देशित किया।
राजवीर सिंह सर क़ायदे की बात कर रहे हैं किंतु जिस शख़्स के सामने कर रहे हैं, वह कुछ भी नहीं समझ रहा है। हर एक शब्द, मर्म और भाव उसके बोध से परे है। बस यंत्रवत सर हिलाये जा रहा है। बहरहाल, राजवीर जैसे लोगों को मंच दिया, यही प्रशंसनीय।
कभी बड़ा असहाय महसूस होता था जब चर्चित पॉडकास्टों में ऐसे मेहमानों को बुलाया जाता था जो राजपूत इतिहास का सार्वजनिक रूप से उपहास करते थे, उसे तोड़मरोड़ कर प्रस्तुत करते थे। उस समय न तो राजपूतों के पास अपना मंच था, न प्रभावी प्रतिनिधि। लेकिन इतिहासविद् राजवीर सिंह चालकोई ने रणवीर इलाहाबादिया के पॉडकास्ट में जिस स्पष्टता, तथ्यों और ठोस प्रमाणों के साथ राजपूत इतिहास को प्रस्तुत किया, उसने सचमुच संतोष से भर दिया।
पॉडकास्टर का झुकाव भले ही बार-बार बातचीत को महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान तक सीमित कर हिंदू बनाम तुर्क का कोण देने की कोशिश करता दिखा, लेकिन राजवीर सर ने परिपक्वता के साथ चर्चा का दायरा व्यापक रखा। उन्होंने उन अनेक राजपूत योद्धाओं को भी सामने रखा, जिनका योगदान राजस्थान के इतिहास में तो दर्ज है, पर मुख्यधारा के इतिहास लेखन में जिन्हें अक्सर “क्षेत्रीय” कहकर हाशिए पर डाल दिया गया। अर्नोराज, महाराजा जयचंद गहड़वाल, दुर्गादास राठौड़, गोगाजी चौहान, नायिकादेवी चंदेल और विग्रहराज चौहान जैसे योद्धाओं का उल्लेख कर उन्होंने अपनी धरती और विरासत के प्रति दायित्व निभाया है।
आशा है कि आज की पीढ़ी यह समझेगी कि वर्तमान समय में शिक्षा ही सबसे प्रभावी शस्त्र है। राजवीर सर शतायु हों, यही कामना है।