बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी कह रहे हैं कि हमने प्रधान अध्यापकों के पद समाप्त नहीं किए हैं
हम कह रह कि पद यदि समाप्त नहीं है तो स्वीकृत पदों के सापेक्ष नियुक्त प्रधान अध्यापक को सप्लस क्यों घोषित किया जा रहा है
तो अधिकारी का कहना है कि नियुक्ति बहीं होगी जहाँ पीएस में 150 तथा यूपीएस में 100 छात्र संख्या होगी क्योंकि आर टी ई के अनुसार बहाँ प्र अ नहीं होगा तो ऐसे पदों का शिक्षक क्या करेंगे ।
आर टी इ वर्ष 2009 में आया और उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2011 में लागू किया
2011 से 2012 तक की सरकार में तत्कालीन शिक्षा मंत्री जी से अनुरोध किया गया कि यदि किसी विद्यालय में आपको न्यून तम २ स अ रखने हैं तो एक प्र अ एवं एक स अ रखिए तो उस सरकार ने इस सुझाव को माना और किसी भी प्र अ को नहीं हटाया गया
2012 से 2017 तक की सरकार में तत्कालीन शिक्षा मंत्री श्री राम गोबिंद चौधरी जी के समय भारत सरकार से आर टी ई के अनुसार शिक्षक तैनाती की बात जब आई तो उन्होंने संघ को वार्ता को बुलाया और चर्चा के बाद निर्णय लिया कि प्रत्येक विद्यालय में एक प्रधान अध्यापक अवश्य नियुक्त करेंगे उसके बाद उन्होंने प्र अध्यापकों की कमी को पूरा करने के लिए प्रा वि के प्र अध्यापक के पद पर पदोन्नति हेतु आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि 5 वर्ष को घटाकर 3 वर्ष कराया और लगभग एक लाख शिक्षकों की पदोन्नति हुई
यही बात आज भी विभाग से कह रहे हैं कि प्रत्येक विद्यालय में एक प्र अध्यापक अवश्य रखिए लेकिन यह मानने को तैयार नहीं है
वर्ष 2015 से आज तक एक भी शिक्षक की पदोन्नति नहीं हुई ।
कोई भी विभाग,संस्था या सरकार बिना मुखिया के नहीं चलता लेकिन यह विद्यालय विना हेड मास्टर के चलायेंगे और हेड काम सहायक अध्यापक से लेंगे वो भी हेड के पद का वेतन दिए बिना ।यह तानाशाही नहीं तो क्या है ।
जब तमाम तथाकथित संघ केवल एक ही मुद्दों पर शिक्षकों को आंदोलन को सपोर्ट करने की बात करते थे तो हमने सदैव कहा कि शिक्षकों की प्रत्येक समस्या के निराकरण को प्राथमिकता में नहीं रखा तो यह सब छीन लेंगे
आज बही दिन हम सबके सामने है
हजारों प्रधान अध्यापकों को सरप्लस घोषित कर दिया गया अर्थात उन विद्यालयों में प्रधान अध्यापक के पद समाप्त कर दिये गये ।आप हेड मास्टर के पद माँग रहे थे तो उन्होंने हजारों विद्यालय बंद करने का निर्णय ले लिया ।
इसलिए आवश्यक है कि आम शिक्षक को इस मनमानी से अवगत कराए
शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात सहन नहीं किया जायेगा ।
सर्व शिक्षा अभियान पूर्व प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी बाजपेई जी के नेतृत्व वाली सरकार ने पारित किया था सरकार की सोच थी कि 6-14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाए ।इस अभियान के अंतर्गत सरकार ने प्रत्येक गाँव व मजरे में प्राथमिक विद्यालय व प्रत्येक किमी पर उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थापना हेतु भवन सहित तमाम संसाधन उपलब्ध कराए
परंतु आज कम/अपर्याप्त छात्र संख्या के आधार पर विद्यालयों को समाप्त करके अन्य विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने की योजना तैयार की गई है
परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत जनसंख्या वृद्धि की दर घट रही है दूसरी तरफ़ विभाग ने तमाम अधो मानक विद्यालयों को मान्यता प्रदान कर रखी है तमाम ग़ैर मान्यता के विद्यालय अधिकारियों की मिलीभगत से आज भी संचालित हो रहे है ऐसे में नामांकन कम होना स्वाभाविक है
सरकार ने विधान सभा में सदैव माना है कि छात्र व शिक्षक अनुपात उत्तर प्रदेश में मानक के अनुसार सही है तो फिर विद्यालयों को बंद करने की जरूरत क्या है और यदि सरकार को लगता है कि शिक्षकों की आवश्यकता है तो उसकी कमी नई भर्ती करके करनी चाहिए न कि विद्यालय बंद करके ।
इससे गाँव देहात के तमाम बच्चों से शिक्षा दूर हो जाएगी
लगभग २० हज़ार विद्यालयों का मर्जर पूर्व में करके शिक्षकों की पदोन्नति के अवसर समाप्त कर दिए गए ।वर्ष 2015 से आज तक किसी भी शिक्षक की पदोन्नति नहीं हुई ।इस आदेश से शिक्षकों के हजारों पद समाप्त हो जायेंगे
जिससे कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति नहीं होगी
जो डी एल एड या बीटीसी पास युवक युवतियाँ शिक्षक बनने की उम्मीद में हैं वे शिक्षक नहीं बन पाएंगे
माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि इस आदेश को निरस्त करने की कृपा करें।
वैसे भी किसी राज्य में शराब की दुकानों की संख्या में वृद्धि तथा विद्यालयों की संख्या में कमी की नीति आलोचना का कारण बनेगी
जब ग्रामीणों को पता चलेगा कि उनके गाँव का विद्यालय दूसरे गाँव में शिफ्ट किया जा रहा है तो जन आक्रोश लाजिमी होगा ।
शराब की दुकान की संख्या में बढ़ोतरी और विद्यालय की संख्या में कमी यह प्रशासक की विफलता को दर्शाता है। आदरणीय मुख्यमंत्री जी शिक्षा समाज की है शिक्षा के मंदिरों को समाप्त करके समाज और संस्कृति को समाप्त करने का काम कर रहे है। विद्यालय में शिक्षक दीजिये आकड़ो का खेल बंद हो।