आज कांग्रेस मुख्यालय, 24 अकबर रोड, दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
अपनी सादगी, ईमानदारी और दूरदर्शी नेतृत्व से उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय को नई दिशा दी।
देश के निर्माण में उनका अमूल्य योगदान सदैव याद किया जाएगा।
#DrManmohanSingh
आज कांग्रेस मुख्यालय, 24 अकबर रोड, दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
अपनी सादगी, ईमानदारी और दूरदर्शी नेतृत्व से उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय को नई दिशा दी।
देश के निर्माण में उनका अमूल्य योगदान सदैव याद किया जाएगा।
#DrManmohanSingh
जब भी मैं डॉ. मनमोहन सिंह जी को याद करता हूं, मेरा मन भावुक हो जाता है। उनका मेरे प्रति विशेष स्नेह था। जब मुझ पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बन रही थी और उसके निर्देशक उनसे मिलने गए, तो उन्होंने मेरे बारे में ऐसे शब्द कहे, जिनके योग्य मैं स्वयं को भी नहीं मानता।
देश के प्रति उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 2013–14 के दौरान जिस तरह उन पर आरोप लगाए गए, इतिहास ने उस समय उनके साथ बहुत अन्याय किया।
मुझे याद है कि 2014 में अपनी अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था—‘इतिहास मेरे प्रति अधिक उदार होगा।’
आज वास्तव में इतिहास उन्हें दोषमुक्त कर रहा है और उनके योगदान के साथ न्याय कर रहा है।”
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी का देश के प्रति उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 2013–14 के दौरान जिस तरह उन पर आरोप लगाए गए, इतिहास ने उस समय उनके साथ बहुत अन्याय किया।
2014 में अपनी अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था—‘इतिहास मेरे प्रति अधिक उदार होगा।’
जब भी मैं डॉ. मनमोहन सिंह जी को याद करता हूं, मेरा मन भावुक हो जाता है। उनका मेरे प्रति विशेष स्नेह था। जब मुझ पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बन रही थी और उसके निर्देशक उनसे मिलने गए, तो उन्होंने मेरे बारे में ऐसे शब्द कहे, जिनके योग्य मैं स्वयं को भी नहीं मानता।
देश के प्रति उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 2013–14 के दौरान जिस तरह उन पर आरोप लगाए गए, इतिहास ने उस समय उनके साथ बहुत अन्याय किया।
मुझे याद है कि 2014 में अपनी अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था—‘इतिहास मेरे प्रति अधिक उदार होगा।’
आज वास्तव में इतिहास उन्हें दोषमुक्त कर रहा है और उनके योगदान के साथ न्याय कर रहा है।”
स्वतंत्र भारद्वाज को ज़मानत और उमर ख़ालिद को जेल! न्याय के इन फैसलों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जब तक उच्च न्यायपालिका में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की समुचित भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, न्यायपालिका में सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का सवाल बना रहेगा।
The DUSU election is not just an election for Delhi University it is an election of national significance!
This is why the responsibility of every student who wants change becomes even greater. The DUSU mandate helps shape the direction of youth across the country.
Come forward for change in DU!
Support the NSUI panel and ensure its victory!
NSUI 2026–27 Panel – Ballot Numbers:
✅ 6 – Vijay Shankar Meena (President)
✅ 4 – Veer Chatrath (Vice President)
✅ 1 – Namrata Chaudhary (Secretary)
✅ 2 – Gopal Chaudhary (Joint Secretary)
#NSUI #DUSU @rahulgandhi@kharge
The paths to becoming judges in High Courts and the Supreme Court are almost closed for the Sikh, Dalit, Adivasi, OBC, Muslim, and Christian communities.
Why was Justice Arun Palli appointed to the Supreme Court despite being junior to Sikh Justice Gurmeet Singh Sandhawalia?
Look at the dates of appointment of both judges in the High Court:
Justice Gurmeet Singh Sandhawalia - 30 September 2011
Justice Arun Palli - 28 December 2013
On this basis, Justice Sandhawalia is senior by almost 2 years and 3 months.
Is there any written examination to become a judge? Is there any interview? Is there a review of good advocacy records, etc.? No!
Then on what basis are judges appointed? No answer!
हाई कोर्टों और सुप्रीम कोर्ट में सिख, दलित, आदिवासी, ओबीसी, मुस्लिम और ईसाई समुदायों के लिए जज बनने के रास्ते लगभग बंद हैं।
जस्टिस अरुण पल्ली को सिख जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया से जूनियर होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट में क्यों नियुक्त किया गया?
दोनों न्यायाधीशों की हाई कोर्ट में नियुक्ति की तारीखें देखिए:
जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया - 30 सितंबर 2011
जस्टिस अरुण पल्ली -28 दिसंबर 2013
इस आधार पर जस्टिस संधावालिया लगभग 2 साल 3 महीने वरिष्ठ हैं।
जज बनने के लिए क्या कोई लिखित परीक्षा होती है? क्या कोई साक्षात्कार होता है? क्या वकालत के अच्छे रिकॉर्ड आदि की समीक्षा होती है? नहीं!
फिर किस आधार पर जज बनते हैं? जवाब नहीं!
देश की राजधानी दिल्ली से हृदय विदारक खबर
उत्तर-पश्चिम दिल्ली के कंझावला के भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील को मुंडका से भाजपा विधायक गजेंद्र द्राल ने अपने कार्यालय में बुलाकर मार-मार कर घायल कर दिया।
शिकायत के बावजूद कंझावला थाने में FIR दर्ज नहीं हो रही है।
अगर इस एमएलए को गिरफ्तार नहीं किया गया तो पूरे दिल्ली के दलित आंदोलन करेंगे।
उपरोक्त मामले में SC/ST Act सहित उचित धाराओं में तत्काल FIR दर्ज करके गिरफ्तार किया जाए।
Contact: +919415037180
#Delhi #Castism #Mundka #SocialJustice #Kanjhawala #SC_STact @CPDelhi
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