बहन कु० मायावती जी पुराने नेताओं की ‘घर वापसी’ का रास्ता खोल सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार, सपा और भाजपा में गए कई पूर्व बसपा नेता लगातार संपर्क में हैं और संगठन में वापसी की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
यदि यह सिलसिला तेज़ हुआ तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं और विपक्ष की रणनीति पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।
क्या बसपा एक बार फिर अपने पुराने जनाधार और अनुभवी नेतृत्व के साथ नई राजनीतिक ताकत के रूप में उभरेगी?
🐘✊💙
#BSP #MayawatiJi
45 नौकरियों और शैक्षिक परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, जिनसे 3.86 करोड़ प्रतियोगी प्रभावित हुए। 1,658 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 925 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन मात्र दो मामलों में 18 लोगों को सजा हुई।
इससे न्यायपालिका की भूमिका और सरकारी पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
युवाओं को अब सोचना चाहिए कि क्या इस सरकार के रहते धांधली रुक पाएगी? क्या उन्हें शिक्षा और रोजगार के उचित अवसर मिल सकेंगे?
अमेरिका के फ़्रिस्को सिटी हॉल में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को फाड़कर अपमानित किया गया। क्या पहले कभी ऐसा हुआ है? मोदी हैं तो मुमकिन है।
ट्रम्प ने भारतीयों को बेड़ियां और हथकड़ियां लगाकर वापस भेजा, तब भी ये चुप रहे। पीएम मोदी बिना बुलाए अमेरिका पहुंच जाते हैं और ट्रम्प से पूछते हैं, “सर, क्या मैं आपसे मिल सकता हूँ?”
एच-1बी वीज़ा में कटौती कर दी गई, क्या ये कुछ कर पाए?
ये कायर, गोबरभक्त और अंधभक्त अपने से कमज़ोर लोगों पर हमला बोलते हैं लेकिन जब कोई बाप मिलता है तो लेट जाते हैं। क्या ये कभी राष्ट्रभक्त हो सकते हैं? ट्रम्प की पूजा किया और मिला लात ।
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कांग्रेस में ओबीसी का आखिरी किला आज ढह गया. अब वहां सिर्फ प्रभावशाली जातियों के मुख्यमंत्री (4) हैं. ओबीसी को कांग्रेस ने पूरी तरह बीजेपी में पहुंचा दिया है. खासकर अति पिछड़ी जातियों को.
बीजेपी ने केंद्र में 27 ओबीसी मंत्री बनाकर मिसाल कायम की है. मुख्यमंत्री तो कई हैं.
उठ खड़े हो इस देश के नौजवान
तुम्हें नौकरी नहीं मिलेगी!
NEET Exam के 22 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर है और प्रधानमंत्री चुप हो, तो सरकार जवाब देने नहीं, बचने में लगी है।
बहुत शर्मनाक बात है कि जिस सेना का काम दुश्मनों से देश की रक्षा करना है, आज उसे मोदी सरकार के अपने भ्रष्टाचार से बच्चों के पेपर बचाने भेजा जा रहा है।
एक पेपर लीक मतलब एक साल बर्बाद - अनेकों का भविष्य बर्बाद। उसके बाद की सरकारी लीपा-पोती सिर्फ धोखा है।
#NEETScam #JusticeForStudents #SaveStudentsFuture #ExamPaperLeak #EducationNotCorruption #StopExamMafia #YouthDemandJustice #FixEducationSystem #NoMorePaperLeaks
@ANI@PTI_News@ians_india
जिला कलेक्टर महोदय @collectornemuch@SP_Neemuch यदि जनपद अध्यक्ष ₹५०,०००/- लेते रंगे हाथ पकड़ा गया है तो वह गिरिफ्तार क्यों नहीं हुआ? अभी तक उसे पद से क्यों नहीं हटाया गया? सरपंच व सचिव के भ्रष्टाचार की जांच में वे दोषी पाए गए हैं तो उन्हें पंचायत अधिनियम के प्रावधानों अनुसार अपदस्थ क्यों नहीं किया गया?
इन प्रश्नों का तो उत्तर आपको देना पड़ेगा। अन्यथा मुझे आपकी जन सुनवाई में आना पड़ेगा।
जय सिया राम।
@INCMP@CMMadhyaPradesh@JVSinghINC@DCCNEEMUCH@incnmh
बहन कुमारी मायावती जी ने #बसपा शासनकाल में ऐतिहासिक कार्य किए जो आज तक कोई पार्टी नहीं कर पाई न राज्यों की न ही केंद्र की सरकार ने भी इतना काम नहीं किया जितना बसपा की एक पंचवर्षीय सरकार ने कर के दिखाया है।
धन्यवाद बहन जी
@Mayawati@AnandAkash_BSP
बीजेपी के प्रचारक दिलीप मंडल मौसम वैज्ञानिक की तरह बता रहे हैं 1990 में दिल्ली में ज्यादा गर्मी थी,
दिल्ली का तापमान 46 डिग्री था. बसें भीड़ से भरी रहती थी.
कहना चाहते हैं ओला उबेर और मेट्रो युग मे सब ठीक है. कहना चाहते हैं मोदी युग में मौसम सुहाना है. अब पसीना नही आता है, गर्मी नही लगती है.
बंगाल में OBC आरक्षण 17% से 7% हो गया है. दिलीप मंडल 5 रुपए में मछली भात योजना की तारीफ कर रहे हैं. आरक्षण कम होने पर खामोश हैं.
एलपीजी सिलेंडर महंगा होने पर इंडक्शन को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं. मोदी जी अब इनको देवता और राहुल गांधी खलनायक नजर आ रहे हैं.
दिलीप मंडल की दूसरी सबसे बड़ी समस्या है इनको योगेंद्र यादव से ईर्ष्या बहुत है. बात बात पर योगेंद्र यादव को बदनाम करने की कोशिश करते हैं.
योगेंद्र यादव तो आज भी वहीं बने हुए हैं जहां वो आज से 40 साल पहले थे. अपनी विचारधारा से कभी समझौता नही किया. दिलीप मंडल ने तो अपनी विचारधारा ही बेच दी.
दलित समाज को अब समझाना होगा जो छोटी छोटी पार्टियाँ और मौसमी संगठन हर चुनाव में अचानक सक्रिय हो जाते हैं उनका असली उद्देश्य सिर्फ बसपा मिशन मुमेंट आंदोलन कोकी ताकत को कमजोर करना होता है !
@Dr_Uditraj बेचारी सरकार को अब कुछ समझ नहीं आ रहा है। इसलिए उनके मंत्री सरकार की साख वचाने के लिए ऐसे सेना के माध्यम से सरकार की साख बचाने की आखिरी कोशिश में लगी है:- नरेंद्र चौधरी
50 लाख सरकारी नोकरी के पद खाली हैं। वेरोजगरों को नोकरी नहीं दी जा रहीं हैं। इनका एक ही उद्देश्य है हिंदू मुश्लिम मन्दिर मस्जिद कर अपनी सत्ता बनाये रखना। आखिर कब तक युवा वेरोजगार रहेगे और उन्हें कब तक गुमराह करते रहेगें। वेरोजगरों को सरकारी नोकरी देना ही होगा
कश्मीर में डोमा की राष्ट्रीय चिंतन बैठक
वर्तमान हालात बहुत ख़राब हैं और लोग निराश हैं। संविधान, आरक्षण और लोकतंत्र — सभी खात्मे की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। मनुवादियों की संख्या कम होने के बावजूद वे संगठित हैं, जबकि बहुजन समाज छोटे-छोटे संगठनों में बंटा हुआ है। इन समस्याओं से लड़ने के लिए नए राष्ट्रीय चिंतन की आवश्यकता है। रोज़मर्रा की ज़िंदगी से कुछ समय निकालकर एकांत में गंभीर चिंतन करने की जरूरत है। गर्मी के मौसम में लोग छुट्टियों में घूमने जाते हैं, इसलिए इस अवसर का बेहतर लाभ उठाया जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर डोमा के अध्यक्ष श्री आर. के. कलसोत्रा ने प्रस्ताव रखा है कि यह चिंतन बैठक श्रीनगर में आयोजित की जाए। कहने की आवश्यकता नहीं कि कश्मीर धरती का स्वर्ग है।
प्रस्ताव है कि 18 जून 2026 की सुबह सभी प्रतिनिधि श्रीनगर पहुँचें। परिचय सत्र के उपरांत जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के ज़ेहनपोरा (उष्कारा) में स्थित कुषाण काल की लगभग 2,000 वर्ष पुरानी बौद्ध बस्ती और स्तूपों के हाल ही में मिले अवशेषों को देखने जाया जाएगा।
19 जून को ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र होगा और 20 जून को शहर भ्रमण एवं पर्यटन का कार्यक्रम रहेगा। इसके अगले दिन सुबह वापसी होगी।
अभी तक 35 लोगों की सहमति प्राप्त हो चुकी है और कम-से-कम 100 प्रतिनिधियों की आवश्यकता है। इसलिए यह सूचना मिलते ही अपना पंजीकरण तुरंत कराएँ।
ठहरने, भोजन और हॉल आदि का खर्च लगभग ₹10,000 प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है। कोशिश रहेगी कि खर्च कम-से-कम हो। निजी यात्रा पर जाने पर इससे अधिक खर्च होना स्वाभाविक है। इस अवसर पर हम सभी को डॉ. उदित राज के साथ समय बिताने और विचार-विमर्श करने का अवसर भी मिलेगा।
आयोजक एवं जम्मू-कश्मीर डोमा के अध्यक्ष श्री आर. के. कलसोत्रा जी से संपर्क करें: 094191 82452
*कार्यकारी सचिव*
*मुकेश सैनी, डोमा परिसंघ 9415037180*
कल सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है कि यदि माता-पिता दोनों IAS अधिकारी हैं, तो उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। जो लोग आरक्षण के माध्यम से आते हैं, वे परीक्षा और साक्षात्कार दोनों देकर आते हैं, और अक्सर अंतर केवल कुछ अंकों का होता है। लेकिन ये जज कैसे चयनित होते हैं? इनकी कोई खुली परीक्षा या साक्षात्कार नहीं होता, और वे मात्र जाति और रिश्तेदारी के आधार पर बैठे हैं।
हास्यास्पद यह है कि गैर-मेरिट वाले लोग मेरिट वालों की मेरिट तय कर रहे हैं।
बसपा के राष्ट्रीय संयोजक माननीय श्री आकाश आनन्द जी अपनें पुराने तेवर में वापस आ गए हैं! आतें ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर जोरदार तरीके से हमला करना शुरू कर दिया हैं!