जो लोग ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत में आस्था रखते हुए जीवन जीते हैं, उन्हें कभी भी जाति, धर्म, नस्ल, रंग, लिंग, वर्ण, भाषा और स्थान के आधार पर किसी से भी कोई समस्या नहीं होती है।
यही सनातन धर्म है।
जय हिन्द 🙏🙏🇮🇳🇮🇳
प्राचीन काल में राजा अश्वमेध यज्ञ किया करते थे।
एक घोड़ा छोड़ दिया जाता था।
वह जहाँ जहाँ निर्बाध घूम आता, वहाँ-वहाँ यह घोषणा मानी जाती कि उस भूमि पर अब यज्ञकर्ता राजा का अधिकार है। यदि किसी राजा में साहस होता, तो वह उस घोड़े को रोक लेता। फिर तलवारें बोलतीं, सेनाएँ भिड़तीं और इतिहास का नया अध्याय लिखा जाता।
वह घोड़ा केवल घोड़ा नहीं था,चलता फिरता भू सर्वेक्षण अधिकारी था, जो तय करता था कि अगला नक्शा किस रंग से रंगा जाएगा।
लेकिन समय बदल गया है।
अब न राजा रहे, न अश्वमेध। अब साम्राज्य तलवारों से नहीं, ठेकों, निवेशों और ब्रांडिंग से बढ़ते हैं।
आज घोड़े की जगह एक गधा छोड़ा जाता है।
वह देशों की यात्रा करता है, मंचों पर मुस्कुराता है, मेडल पहनता है, तस्वीरें खिंचवाता है और लौटते समय अपने मालिक के लिए व्यापारिक समझौते, निवेश और परियोजनाएँ लेकर आता है।
इस आधुनिक अनुष्ठान का नाम है
गदहामेघ यज्ञ।
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ढाणीपुर में एक बड़े व्यापारी हैं,ढाणी जी।
उनके पास एक अत्यंत प्रशिक्षित, अत्याधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का गधा है, घोचेंद्र।
घोचेंद्र कोई साधारण गधा नहीं।
उसके कान में Bluetooth लगा है, सामने Teleprompter रहता है और उसके भाषण इतने स्वाभाविक होते हैं कि कई बार स्वयं घोचेंद्र भी चौंक जाता है कि उसने यह सब कब सोच लिया।
लोकतंत्र के वैश्विक विशेषज्ञ उसे लोकतंत्र प्रेमी बताते हैं, जबकि वह लोकतंत्र को उतना ही जानता है जितना गधा सितार बजाना।
अफ्रीका से उसे साहस का तमगा मिला।
लैटिन अमेरिका से सनातन समर्थक सम्मान।
सेशेल्स में ai जनरेटेड गलत स्पेलिंग वाले award से नवाजा गया।
इन्डोनेशिया में अवॉर्ड देने के पहले उसे उसके शत्रु की प्रशंसा करके बेइज्जत किया गया।
एक देश में तो कोकाकोला का ढक्कन फीते में लगाकर उसके गले में लटका दिया गया।
ब्राज़ील में उसे विदेशी घोड़े जैसा गधा कहकर सम्मानित किया गया।
लेकिन ब्राज़ील वाले भी कम अनुभवी नहीं निकले।
उन्होंने पहचान लिया कि यह घोड़ा नहीं, घोड़े की खाल में लिपटा हुआ गधा है।
सो उन्होंने उसके गले में मेडल तो डाल दिया, पर मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने से विनम्रतापूर्वक इंकार कर दिया।
घोचेंद्र हर मंच पर मुस्कुराता है।
हर कैमरे की दिशा पहचानता है। और हर मेडल को इस तरह पहनता है, जैसे उसे ऑस्कर या नोबेल मिला हो।
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ढाणी जी का व्यापार दिन दूना, रात चौगुना बढ़ रहा है।
जहाँ जहाँ घोचेंद्र जाता है, वहाँ-वहाँ ढाणी जी के व्यापारिक समझौते खिल उठते हैं।
कई देशों को भ्रम हो जाता है
"जब प्रतिनिधि इतना चमकदार है, तो मालिक तो अवश्य ही विश्वगुरु होगा।"
पहले घोड़े को पकड़ने पर युद्ध होता था।
अब गधे को पकड़कर मेडल पहना दिया जाता है, संयुक्त वक्तव्य जारी हो जाता है और अगले दिन व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर हो जाते हैं।
घोचेंद्र साधारण गधा नहीं है।
वह ढाणी समूह का Global Brand Ambassador, Public Relations Officer और Business Development Manager है।
इतिहास जब ढाणी की व्यापारिक सल्तनत का लेखा-जोखा लिखेगा, तब उसमें इस गधे और उसके अंधभक्तों के योगदान को स्वर्णाक्षरों में नहीं...
गधे के गोबर अक्षरों में अवश्य लिखा जाएगा।
#VijayShukla
“हमारा मंदिर कॉरिडोर हो गया और इनका कार्यालय तीर्थ हो गया। भाजपा के लोग नकली हिंदू हैं। ये ढोंगी, पाखंडी कालनेमि हैं जिन्होंने रूप हिंदू का धारण किया हुआ है लेकिन काम सब उसके विपरीत है। जो मूर्ति वहां आई, वह रामलला विराजमान की नहीं है, भाजपा के पसंद की मूर्ति है।
हमसे पूछा गया कि मंदिर क्यों नहीं गए? हमने कहा, मंदिर बन जाए तो जाएं। वह तो इनका कार्यालय है। वहां जितने भ्रष्टाचार और कदाचार हुए, सबके पीछे नरेंद्र मोदी हैं। अब ये कुछ घटना करके जनता का ध्यान भटकाएंगे ताकि ये मामला रफा-दफा किया जा सके।”
~ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
हाँ मैं लिखता हूँ शेखर सुमन का शो, तो इसमें ग़लत क्या है, मैंने इंडस्ट्री में शेखर सुमन से लेकर कपिल शर्मा और अमिताभ बच्चन तक के लिए लिखा है.. कुछलोग सलाह दबाव के फॉर्मेट में कहने की कोशिश कर रहे है कि ये शो लिखना बंद कर दो, आपके लिए अच्छा नहीं होगा, भाई ये कौन सी दुनिया में आ गये हम.. पहले मेरा फेसबुक पेज बंद कर दिया, मुझे बोलने से रोका गया, अब लिखने से भी रोका जा रहा है.. मैं लिखना बंद करूँगा तो बोलना शुरू कर दूंगा.. इसलिए बेहतर होगा देश के एक शानदार अभिनेता को शानदार तरह से परफॉर्म करते हुए देखा जाए.. आप यकीन जानिये उनसे बेहतर ईमानदार अदाकार देश ने नहीं देखा होगा... बांकी तो इस देश में भगवान राम भी ठगा महसूस कर रहे है, हमारी और आपकी क्या औकात है
निर्माण घटिया होगा तभी तो दुर्घटनाएँ होंगीं! सूखा मसाला भरकर पिलर ढाला जा रहा है.
क्या रेलवे के इंजीनियर और ठेकेदार अपने घरों का पिलर भी इसी तरह ढलवाते हैं?
जो लोग नफरत में बिल्कुल ही अंधे हो चुके हैं उन्हें छोड़कर अब ये तसल्ली है कि ज्यादातर युवा समझ रहे हैं कि कांग्रेस और बीजेपी की सरकार में क्या फर्क है...आप भी इस युवा को सुनिए और समझिए
सालों साल एक झूठ परोसा गया
‘अजमल कसाब को मटन बिरयानी दी गई’
अब उज्जवल निकम सच बता रहे हैं
उन्होंने यह झूठ बोला और नैरेटिव सेट किया था
उनके एक झूठ ने UPA सरकार को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी
इसके बाद वह BJP के टिकट पर चुनाव लड़े और अब BJP के राज्य सभा MP हैं
❗सुप्रीम कोर्ट में सुप्रीम ड्रामा
😳
“न्यायिक सेवक महोदय,
मैं आपको ऑर्डर देता हूं कि लखनऊ के ACP विकास नगर के खिलाफ FIR दर्ज करें”
जज ने पूछा आप ऑर्डर देंगे तो काले कोट वाले ने कहा -जी हां ऑर्डर...
और फिर हाथ में रखे सारे दस्तावेज़ उड़ाकर कोर्ट रूम में फेंक दिए और कहा। आख़िर में कहा -
“ये दे देना 'मा ...' CJI को…।”
आरोपी का नाम प्रबल प्रताप, निवासी लखनऊ है।
ऑस्ट्रेलिया में पूछा गया कि मोदी जी प्रेस कांफ्रेंस क्यों नहीं करते?
जवाब आया कि भारत में ज़्यादातर लोग ग्रामीण हैं इसलिए सीधे भाषण करते हैं।
तो भइये, प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकार कौन सा न्यूटन का सिद्धांत पूछेंगे जिसका जवाब ग्रामीणों को नहीं समझ आयेगा और मोदी जी कौन सा फ्रेंच में जवाब देंगे जो ग्रामीण नहीं समझ पायेंगे?
नरेंद्र मोदी ने बताया कि वो 30 साल पहले न्यूजीलैंड गए थे, तब उनको गिफ्ट में मफलर, एक कैप और एक दस्ताना मिला था. उस वक्त उन्हें कोई जानता नहीं था.
मोदी ने इससे पहले ये भी बताया है कि वो 35 साल तक भीख मांगकर खाए हैं. उससे पहले 17 साल की उम्र तक चाय बेची है.
सोचिए... कांग्रेस की सरकार में भीख मांगकर खाने वाले भी इतने अमीर थे कि न्यूजीलैंड घूम रहे थे.
है ना कमाल की बात
सुप्रीम कोर्ट में जो हुआ वह दुखद है। माननीय जस्टिस ने संयम और उदारता का परिचय देते हुए उचित ही कोई एक्शन नहीं लिया। यह बात तारीफ़ के क़ाबिल है। सुप्रीम कोर्ट का कंधा चौड़ा होना चाहिए और दिल बड़ा। इस बात को भी संज्ञान में लेना चाहिए कि समाज में न्याय को लेकर हताशा फैलती जा रही है। उसकी निष्पक्षता पर संदेह बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं होती। कोई किसी का एनकाउंटर कर दे रहा है, किसी का घर गिरा दे रहा है। नागरिक अपने सवालों को लेकर कोर्ट की सीढ़ियाँ चढ़ता है लेकिन दीवारों से टकरा जा रहा है। इन्हीं कारणों से हताशा बढ़ती जा रही है। उम्मीद है, ऐसी घटना दोहराई नहीं जाएगी। यह भी कि न्याय व्यवस्था अपनी उदारता के साथ साथ विश्वसनीयता को बेहतर करेगी। उम्मीद की आख़िरी मंज़िल कोर्ट है और उस मंज़िल का बने रहना ही हताशा का इलाज है।
महाराष्ट्र में नेशनल हाईवे पर फ्रांस की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की गई है.
इस टेक्नोलॉजी में रास्ते के बीच में अचानक सुरंग बन जाती है, ताकि लोग आसानी से नेशनल हाईवे पार कर सकें.
इस टेक्नोलॉजी पर मोदी सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च किए हैं, पूरी ईमानदारी से काम किया है.
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