जंतर-मंतर के धरने से मोहम्मद #इरफान की तार्किक, भावपूर्ण और कविता-शायरी से भरी लयात्मक भाषा और राजनीतिक अभिव्यक्ति ने बहुतों का ध्यान खींचा है।लोग हैरान हैं।
मुझे #धूमिल की #मोचीराम कविता याद आ गई। जैसाकि धूमिल ने लिखा- यह चौंकने की नहीं, सोचने की बात है।
“…यह चौंकने की नहीं, सोचने की बात है
मगर जो ज़िंदगी को किताब से नापता है
जो असलियत और अनुभव के बीच
ख़ून के किसी कमज़ात मौके पर कायर है
वह बड़ी आसानी से कह सकता है
कि यार! तू मोची नहीं, शायर है
असल में वह एक दिलचस्प ग़लतफ़हमी का
शिकार है
जो यह सोचता कि पेशा एक जाति है
और भाषा पर
आदमी का नहीं, किसी जाति का अधिकार है
जबकि असलियत यह है कि आग
सबको जलाती है सच्चाई
सबसे होकर गुज़रती है
कुछ हैं जिन्हें शब्द मिल चुके हैं
कुछ हैं जो अक्षरों के आगे अंधे हैं
वे हर अन्याय को चुपचाप सहते हैं
और पेट की आग से डरते हैं
जबकि मैं जानता हूँ कि ‘इनकार से भरी हुई एक चीख़’
और ‘एक समझदार चुप’
दोनों का मतलब एक है—
भविष्य गढ़ने में, ’चुप’ और ‘चीख़’
अपनी-अपनी जगह एक ही क़िस्म से
अपना-अपना फ़र्ज़ अदा करते हैं।”
मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी द्वारा “आदिनिवास” ऐप का शुभारंभ आदिवासी समाज की संस्कृति, ज्ञान और विरासत को डिजिटल मंच पर सहेजने की एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह महज एक ऐप नहीं, बल्कि आदिवासी पहचान, परंपरा और इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास है। आधुनिक तकनीक के इस दौर में अपनी जड़ों, भाषा और संस्कृति को संरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
उम्मीद है “आदिनिवास” आदिवासी समाज के ज्ञान, कला और परंपराओं के दस्तावेजीकरण में मील का पत्थर साबित होगा।
@JmmJharkhand
One’s grief becomes another’s relief!
Captured this while covering a protest on the #AyodhyaBypass in #Bhopal, where locals were gathering to protest against mass cutting of trees for widening the road into a 10-lane highway.
प्रदूषण लगाम के उपायों की दूसरी खेप लागू। लेकिन टूटी सड़कों पर धूल का गुबार कम नहीं हो रहा। सुबह की सैर पर झाड़ू से उड़ते धूल की परेशानी बनी हुई है। गाड़ी मोटर, निर्माण वगैरह तो है हीं, उस पर से पराली का प्रकोप। और इन सब के बीच बस आरोप-प्रत्यारोप। कैसे होगा समाधान?
WHO listing #NoisePollution as the second most dangerous environmental threat to human life.
Meanwhile #Delhiites having vehicles: #Traffic Noise se Noise Pollution? Wo kya hota hai?
@dtptraffic
किसी भी जेंडर,धर्म,वर्ग या जाति के व्यक्ति के लिए भोजन प्राथमिक ज़रूरत है,लेकिन समझना होगा कि कैसे ये सब कारक व्यक्ति के भोजन विकल्पों को आकार देते हैं। मेरे द्वारा लिखे इस लेख में भोजन और जेंडर के बीच के अंतर्सम्बन्ध को समझाने की कोशिश की गई है। आप इसे @FIIHindi पर पढ़ सकते हैं।
कुछ खाद्य पदार्थों को कथित औरतों या पुरुषों के खाने की चीज़ के रूप में लेबल किए जाने जैसे इन पूर्वाग्रहों ने महिलाओं के लिए पोषण सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इन रूढ़ियों ने महिलाओं के लिए पोषण को सीमित कर दिया है। #FoodAndWomen#Stereotypes
https://t.co/EkOevRB0IM
महिला खिलाड़ियों पर बनी हाल की इक्का-दुक्का फ़िल्में छोड़ दें तो अधिकतर फ़िल्मों के निर्देशक, लेखक और पटकथा लेखक पुरुष ही हैं। वे कहानी के किन पहलुओं को दर्शक तक पहुंचाना चाहते हैं ये उन पर निर्भर करता है। #Bollywood#WomenPlayers#Cinema
https://t.co/U234yIvJOx
कल्चरल, सोसाइटल और पैट्रियार्कल नॉर्म्स को तोड़कर खेल को अपने करियर के रूप में चुनने वाली महिलाओं के संघर्ष को पर्दे पर इतने नाटकीय ढंग से दिखाया जाता है कि वो बस सतही बनकर रह जाते हैं।
#WomenInSports#SportsBiopics
पूरा लेख पढ़ें: https://t.co/sNjA7FTfjq
मेकर्स एक खिलाड़ी के जीवन से प्रेरित होकर उनकी कहानी उठाते हैं, जब तक सुविधाजनक हो अपने अनुसार उसमें फेर-बदल करते हैं और क्रिएटिव लिबर्टी के नाम पर इसे ऐसे पेश करते हैं कि ये उपभोक्ताओं के लिए एक स्वादिष्ट उत्पाद बन सके। महिला खिलाड़ियों पर केंद्रित लगभग हर फ़िल्म इसी तरह से बनती है। जो महिलाएं कल्चरल, सोसाइटल और पैट्रियार्कल नॉर्म्स को तोड़कर खेल को अपने करियर के रूप में चुनती हैं और आने वाली पीढ़ी की लड़कियों के लिए एक रोल मॉडल बनती हैं। अक्सर उनके यह संघर्ष पर्दे पर इतने नाटकीय ढंग से दिखाए जाते हैं कि वो बस सतही बनकर रह जाते हैं। #WomenInSports #SportsBiopics #BreakingBarriers #PatriarchalNorms
पूरा लेख पढ़ें: https://t.co/1AFivpXSeV
आप सबका बहुत-बहुत शुक्रिया! आप सबके प्रयास से आधी रात में भी डोनर्स मिल गए। फ़िलहाल व्यवस्था हो गई है। पर चूंकि गम्भीर स्थिति है पेशेंट की, तो सम्भवतः आगे भी डोनर्स की ज़रूरत पड़ सकती है। इसलिए अलर्ट रहिएगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर लोग मौजूद रहें।
एक बार फिर आप सबका बहुत शुक्रिया!
@BloodDonorsIn @the_Ajaysah @apradhan1968@ShyamMeeraSingh@SamarRaj_ @vivekvashistha_ @PMishra_Journo नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मेल ब्लड डोनर की ज़रूरत है। ब्लड ग्रुप कोई भी चलेगा।
इस नम्बर पर खुशहाल से सम्पर्क कर सकते हैं:
+91 80766 52568
हालांकि अभी दो लोग ब्लड डोनेट करने पहुंचे हुए हैं लेकिन और लोगों की ज़रूरत पड़ सकती है, तो तैयार रहिएगा।
“सबके मन में एक आम धारणा है कि पश्चिमी देश विकसित है तो वहाँ पीरियड्स को लेकर सबमें स्वीकृति का भाव होगा या ये टैबू नहीं होगा लेकिन सच्चाई इसके उलट है।”
- #poulomi_basu@_rshonali07 द्वारा लिखे इस लेख में #MAYA लघु फ़िल्म के बारे में पढ़े।
#Cannes2024
रिएलिटी में सैनिटरी नैपकिन को अख़बार/पॉलीथिन में लपेटकर लेने से लेकर इस शॉर्ट फ़िल्म के वर्चुअल रिएलिटी में पीरियड्स का जीवंत अनुभव करने तक का सफ़र काफ़ी कठिन रहा है।पौलोमी बसु की ये फ़िल्म इस कठिन सफ़र को आसान करने की कोशिश करती है।
रिव्यू पढ़िए! पसन्द आए तो फ़िल्म भी देख डालिए!
यह शॉर्ट फ़िल्म उनके फ़ोटोग्राफ़ी प्रॉजेक्ट ‘ब्लड स्पीक्स-अ रिचुअल ऑफ़ एक्ज़ाइल’ (2013) से प्रेरित है जिसमें उन्होंने दक्षिणी एशिया, विशेष रूप से नेपाल में ‘चौपाड़ी प्रथा’ के पालन से महिलाओं की स्थिति पर वैश्विक समुदाय का ध्यान खींचा था। #PeriodTaboo
https://t.co/CWvuZAKPTF
IIMC के मौजूदा बैच के इन साथियों ने हमारी कंपनी Fortuna PR में इंटर्नशिप की। इन लोगों ने एक महीने से भी कम के इस अंतराल में बहुत तेज़ी से सीखा…पांचों साथियों को उनके उज्जवल भविष्य की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ…
@apradhan1968@IIMCAA@IIMC_India
पोलिंग स्टाफ़ ने इतने सब्र से इंडेलिबल इंक लगाया कि मुझे लगा अगर फ़ोटो पोस्ट नहीं की तो उनकी मेहनत वेस्ट हो जाएगी।
कुल मिलाकर, दोनों ही मायनों में अपनी ज़िम्मेदारी निभा दी है।
#Election2024
What else can they do when getting really late?
This is a serious concern! 429 bus services have fallen drastically after the Lockdown period. Otherwise every 5–10 minutes, there was a bus.
I think #DTC should have a reasonable answer to this very concern of the people!
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@dtchq_delhi What is this behaviour?
I've been waiting long for the Bus No. 429 at the bus stop DDA Flats Kalkaji. I reached bus stop at 09:04, it was almost an hour but not even one 429 bus came at the stop. Though I could see buses coming, but not even one was ready going.
1/4
This is actually everyday's problem. I travel by 429 bus from DDA Flats Kalkaji to the Supreme Court daily, & honestly I and many people do have to wait long if we reach the bus stop after 9 am. There are many who wait long and then go for metro or autorickshaw.
3/4
@kgahlot