आरक्षण किसे मिलना चाहिए?
राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति राज्यपाल के परिवार को या गरीब किसान-मजदूर के बच्चों को?
सांसद विधायक मंत्री मुख्यमंत्री के परिवार को या गरीब किसान-मजदूर के बच्चों को?
थानेदार तहसीलदार कलेक्टर कप्तान कमिश्नर सचिव जज के परिवार को या गरीब किसान-मजदूर के बच्चों को
@Nishantjdu81 निशांत बाबू आप बहुत अच्छा कर रहे है और जीतना आपके बारे मे सूना है उससे यह पता है की आपमें काबिलियत भी बहुत है. जैसे आपके पिता ने बिहार मे सड़क, बिजली का सुधार कर दिया वैसे ही आप अस्पतालो को बेहतर बना दीजिये. बिहार आपको हमेशा याद रखेगा. बिहार मे गरीबी का एक कारण महँगा इलाज है
किसी भी अस्पताल की वास्तविक स्थिति फाइलों से नहीं, बल्कि वहाँ इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत करके समझी जा सकती है। इसलिए जब भी किसी अस्पताल में जाता हूँ, लोगों से अवश्य मिलता हूँ, उनकी बातें सुनता हूँ और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का प्रयास करता हूँ।
मेरा मानना है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर आम लोगों, पीड़ितों और सरकारी सेवाओं का लाभ लेने वाले नागरिकों से सीधे संवाद करना चाहिए। इससे व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आती है, कमियों की पहचान होती है और उन्हें दूर करने का अवसर मिलता है।
आज भी IGIMS में कई मरीजों और उनके परिजनों ने अपनी समस्याएँ और शिकायतें मेरे सामने रखीं। मैंने उनकी हर बात गंभीरता से सुनी, संबंधित अधिकारियों से तत्काल चर्चा की और अस्पताल प्रबंधन को सभी शिकायतों की सूची तैयार कर उनके कारणों की पहचान करते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी।
इसी उद्देश्य से आज IGIMS में सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का भी शुभारंभ किया गया है। इसके माध्यम से अस्पताल की व्यवस्थाओं पर 24×7 निगरानी रखी जाएगी, समस्याओं की समय पर पहचान होगी और उनके त्वरित समाधान के साथ शिकायतों की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी।
मैं अस्पताल केवल उद्घाटन करने नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने जाता हूँ कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलें।
आपका स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते मेरा द्वार हमेशा आपके लिए खुला है। आपकी हर शिकायत, हर सुझाव और हर समस्या मेरे लिए महत्वपूर्ण है। मैं विश्वास दिलाता हूँ कि आपकी बात न केवल सुनी जाएगी, बल्कि उस पर पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता से कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
#IGIMS #BiharHealthDepartment #bihar
#WATCH | Jharkhand: JPSC-JSSC aspirants, protesting against alleged irregularities in the exam, take out a flash light protest march from Jaipal Singh Munda Stadium in Ranchi.
सरकार का काम है अस्पताल, स्कूल, सड़क जैसी सुविधाएं देना पर सरकार समाज सुधार और जाती तुष्टिकरण करके सत्ता मे बने रहना चाहती है और हम सब मृतप्राय होकर तमाशा देखते है जिसका नतीजा अब हमारे डीएनए को भी बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है. समाज मे सुधार के लिये हमारे संत समाज है
85% बहुजन हैं, लेकिन अंतरजातीय विवाह सिर्फ सवर्ण से करना है!!
तभी जाति खत्म होगी??
अच्छा, मज़े की बात ये कि इसमें भी कोई क्रीमी लेयर नहीं है!
माने करोड़पति होकर भी पैसे ले सकते हैं!
पता नहीं ये कैसा सामाजिक न्याय हो रहा है देश में!!!
कानपुर की मसाला फैक्ट्री में चावल में रंग मिला के हल्दी पाउडर बना के पैसा छापा जा रहा था,
fssai ने पकड़ के इनका लाइसेंस रद्द कर दिया।
अरे भाई ये कैंसर बेच रहे हैं इनपे मुकदमा करके जेल में भरो सबको।
गुरूजी इतने ताकतवर है तो अपना कैंडिडेट क्यों नहीं जिताया जो सवर्णो की बात करता. कांग्रेस और भाजपा मे क्या फर्क है?सवर्ण राष्ट्र का नुकसान कर नहीं सकते और शांति पूर्वक सरकार किसी की सुनती नहीं है.बेहतर है हम सांसद और विधायक बनाये और संसद तथा विधानसभा से अपनी बात देश को समझाये 🙏🙏
दतिया का चुनाव घनश्याम सिंह को ब्राह्मणों ने जिताया , क्योंकि राजपूत वहाँ 10 हज़ार हैं और ब्राह्मण 45 हज़ार ये एकता बनी रहनी चाहिए
#सवर्ण_एकता_जिन्दावाद
इंग्लिश मीडियम से पढ़ायेंगे, अंग्रेजी बोलने वालो को काबिल माना जायेगा और अंग्रेजो के बताये शिक्षा को सर्वोपरि मानियेगा तो बच्चे अंग्रेज ही बनेंगे.भारतीय संस्कृति संयुक्त परिवार मे विश्वास करती है पर हम फ्लैट सिस्टम मे रहने को तरक्की मानने लगे है. संस्कार कहाँ सीखेंगे बच्चे?
5100 रुपये भेजे और वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार देख लिया💔
ये घटना सुन के इंसान की आत्मा रो पड़ेगी😢
मुंबई के बड़े कपड़ा व्यापारी शिवचरण रामरत्न गुप्ता, 74 साल,पिछले 3 साल से सोनीपत के वृद्धाश्रम में थे।
2 साल पहले उनकी पत्नी का भी यहीं निधन हुआ था।
मंगलवार को जब आश्रम ने मौत की सूचना दी,तो उनकी तीनों बेटियों ने जवाब भेजा:"5100 रुपये ऑनलाइन भेज रहे हैं।अंतिम संस्कार सोनीपत में ही करवा दीजिए।
मुखाग्नि के समय वीडियो कॉल कर दीजिए, हम देख लेंगे।
आश्रम संचालक आनंद कुमार के अनुसार: जिन हाथों ने पाला-पोसा, पढ़ा-लिखाकर टीचर बनाया...आज वो हाथ पिता को कंधा देने नहीं आए।वाह रे मेरे देश के लोगों की सोच 😢
ये तरक्की है?
ऐसे संस्कार किसी बाप ने नहीं दिए होगे?
आदरणीय बंधुओ इस तरह की गलत सूचना फैलाने वाले लोगों को उनके कृत्यों के लिए सार्वजनिक रूप से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
वामपंथियों द्वारा इसी तरह से बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है। इसलिए, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले, उनकी बातों की हमेशा पुष्टि करें।
@bihar_police
If reservation starts from school itself, why is it still needed in PG, faculty, jobs and promotions?
This isn’t justice. This is lifelong caste capture.
If the first step was enough → later quotas are pure theft of merit. If it wasn’t enough → the system has failed for 75 years. Scrap it.
रिजर्वेशन को बढ़ाकर बिश्वगुरु बनने के सपने दिखाए जा रहे हैं, लेकिन ज़रा देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत भी देख लीजिए।
बिहार के शिवहर की 20 वर्षीय रेखा कुमारी कान का इलाज कराने पटना के महावीर आरोग्य संस्थान गई थीं। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद नर्स ने नस की बजाय आर्टरी में इंजेक्शन लगा दिया। रेखा ने दर्द और तकलीफ़ की शिकायत भी की, लेकिन कथित तौर पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा इन्फेक्शन इतना बढ़ा कि उनका हाथ काटना पड़ा। नवंबर में होने वाली शादी भी टूट गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि FIR दर्ज कराने गए तो पुलिस ने मना कर दिया।
सोचिए, जिस देश में इलाज कराने जाओ और इलाज के बदले अपना हाथ गंवाकर लौटो, वहाँ सिर्फ़ नारे लगाने से क्या होगा? पहले अस्पतालों में जवाबदेही, डॉक्टरों-नर्सों की जिम्मेदारी और पीड़ितों को न्याय तो सुनिश्चित कीजिए। 100 में से 99 पाने वाले घर बैठेंगे और -40 लानेवाले इलाज करेंगे तो और क्या ही उम्मीद करेंगे हम सब ।
नारों से नहीं, व्यवस्था से देश महान बनता है।
OBC समाज का एक युवा देवराज सिंह UGC नियमों के विरोध में लड़ाई लड़ते-लड़ते शहीद हो गया। 🙏🏻
अब UGC Roll Back होकर ही रहेगा,
साथियों यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। 💪
झारखंड, रांची में स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट का यह वीडियो अभी रात 1.15 मिनट का है।
स्टूडेंट्स पहले टैंट के नीचे रातें गुजार रहे थे, पर झारखंड सरकार ने उनके तंबू भी उखड़वा दिए। बारिश में तिरपाल ओढ कर स्टूडेंट्स रात को भी धरने पर बैठे रहे। और अब स्थितियां की लाइटें भी काट दी गई हैं।
प्रदर्शन स्थल पर घुप्प अंधेरा है और सर छिपाने को सिर्फ एक चादर या तिरपाल।
वीडियो रांची के मित्र जॉनी वॉकर खान जी ने भेजा है।
महिपाल सिंह मकराना बोले ; हम चाहते हुए CM हाउस के अंदर घुसने की हमारी औकात थी, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया"
स्वर्ण समाज को ओबीसी से टाइड जा रहा है, SC -ST को हमसे 80 साल लगले अलग कर दिया गया। आज वे हिंदू ना होकर बौद्ध हो गए हैं, क्रिश्चियन हो गए है, मुस्लिम हो गए हैं। उसने हिंदू देवी - देवताओं को गालियां निकलवाई जा रही है। अब हमें मूल ओबीसी का जो समाज है, जो हमारे जीवन से मृत्यु तक साथ रहने वाली कौम है। अब उनको हमसे दूर करने के लिए ये ये लोग UGC लेकर आए हैं।
हम लोग यहां गांधीवादी तरीके से आए है, आपको हमारी 24 दिन की 800 किलोमीटर की पैदल यात्रा आखिर क्यों रास नहीं आई ? क्या आपको उसी तरह के आंदोलन पसंद है जिसमें आपकी बहन -बेटियों को गाली निकाली जाए ? आपकी मातृ शक्ति को गाली दी जाए ? गंदे - गंदे स्लोगन लिखे पोस्टर लाए जाएं ? पुलिस के मुठभेड़ की जाए ? ऐसे लोग जो हाथापाई करे ? वो ही पसंद है ?
मकराना ने कहा कि हम हाथ में गीता और संविधान लेकर चल रहे थे। इनको संविधान से चलना है या लाठी - भाटे से चलना है ? मकराना का आरोप है कि "हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए इन्होंने हर एक वो हथकंडा अपनाया।"
मकराना ने कहा कि लेकिन, हमने इनको वापस प्रतिउत्तर नहीं दिया....हालांकि, हम उनको प्रतिउत्तर देने के लिए इनसे 20 गुना ज्यादा थे। अगर, हम चाहते हुए CM हाउस के अंदर घुसने की हमारी औकात थी। लेकिन, हम संविधान से चलने वाले लोग है, इसलिए रुक गए।