वह तोड़ती पत्थर
कोईन छायादारपेड़
वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार
नत नयन,प्रिय कर्म-रत मन
गुरु हथौड़ा हाथ करती बार-बार प्रहार
सामने तरु-मालिका अट्टालिका,प्रकार
चढ़ रहीथी धूप
गर्मियों के दिन
दिवाका तमतमाता रूप
उठी झुलसाती हुई लू
रुई ज्यों जलती हुई भू
--सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
कर्नाटक में लगे मुगल शासक औरंगजेब के पोस्टर!
पोस्टर में औरंगजेब को बताया फाउंडर ऑफ अखंड भारत, जमकर हुआ विरोध।
पोस्टर की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बेलगावी के शाहूनगर इलाके में सांप्रदायिक तनाव वाले हालात पैदा हो गए लेकिन पुलिस ने स्थिति को संभाल लिया।
कर्नाटक में पिछले कुछ सालों में सांप्रदायिक तनाव की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
ग्रीन टी शर्ट में जिस व्यक्ति को कपड़े फाड़ कर घसीटते हुए मारते हुए गंदी गाली देते हुए कोलकाता पुलिस ले जा रही है
वह व्यक्ति सर्जरी डिपार्टमेंट में सर्जन है और लेक्चरर है
वह मौन प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन एक सर्जन के साथ कोलकाता पुलिस का सुलूक देखिए
वह भी तब जब धरना बिल्कुल शांति से हो रहा था
मैडम @rashtrapatibhvn और सर @PMOIndia सुप्रीम कोर्ट से तो कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों पर ही सुओ मोटो लेता है
आप लोगों से ही उम्मीद है
बंगाल सरकार अब बर्खास्त होनी चाहिए
ममता बनर्जी के खिलाफ सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी!
जी हां, ये बिल्कुल सच है और आज ये पश्चिम बंगाल में हुआ है।
रेप कोलकाता में हुआ, कोलकाता पुलिस की नाक के नीचे रेप हुआ, आरोपी भी कोलकाता का ही है!
तो फिर ममता बनर्जी किसके खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं ?
अपनी सरकार की नाकामी छुपाने के लिए ममता बनर्जी किस हद तक राजनीति कर रही हैं?
ममता बनर्जी के लिए राजनीति ज्यादा महत्वपूर्ण है और एक बेटी को न्याय दिलाना कम महत्वपूर्ण है!
कोलकाता रेप पीड़िता के माता-पिता का दर्द देखिए!
"हमें पैसे नहीं चाहिए, मुझे अपनी बेटी के लिए न्याय चाहिए।"
"हमारा सब कुछ खत्म हो चुका है, अब केवल हमें न्याय का इंतजार है।"
"अगर देशभर में प्रदर्शन नहीं हुए होते तो इस मामले को कब का दबा दिया जाता।"
"बंगाल पुलिस एक एक सबूत मिटाने की कोशिश कर रही है।"
"आखिरी बार जब अपनी बेटी को देखा तो हमने भी अपना जीवन स्वाहा कर दिया था।"
कोलकाता का आंदोलन अब जनता का आंदोलन बन चुका है!
लाखों आम लोग जब अपने जॉब से शाम घर आ रहे हैं तो प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं!
बुजुर्ग महिला से लेकर छोटी बच्ची तक हर कोई एक जुनून के साथ आंदोलन में हिस्सा ले रही हैं!
कोई भोजन बांट रहा है तो कोई पानी की बोतलें बांट रहा है!
बंट गयी बेटियां..
दिल्ली में निर्भया हत्याकांड पूरे देश को रोष से भर देता है।
किंतु बंगाल में एक डॉक्टर के ऐसे ही जघन्य बलात्कार पर राजनीति चुप्पी की चादर चढ़ा देती है।
मामले को भटकाने, लोगों को धमकाने के संगठित प्रयास बताते हैं कि मानवीय संवेदनशीलता और इसकी कसौटियां भी बुरी तरह बंट गई हैं।
बंगाल की पटरी से उतरी कानून व्यवस्था और सड़े-गले तंत्र में गुंडों के बोलबाले की अंतर्कथा सामने रखती विशेष रिपोर्ट।
बिटिया हम सब शर्मिंदा है
उफ्फ्फ निर्दयी ने कैसे इस बिटिया को इतनी दरिंदगी से मारा होगा
यह इंसान नहीं बल्कि किसी हैवान का काम है
हत्या और बलात्कार जैसी घटनाओं में जब तक कानून और अदालत सख्त नहीं होगी तब तक इनमें कमी नहीं आ सकेगी
अभी एक जज ने एक 10 साल की बच्ची के हत्या और बलात्कार के आरोपी को सिर्फ इसलिए मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया क्योंकि वह पांच बार नमाज पढ़ता था
दिल्ली के निर्भया कांड में जिसने निर्भया पर सबसे ज्यादा दरिंदगी किया था जिसने निर्भया को दीदी बोलकर बस में बैठाया था उसे एक दिन भी जेल में नहीं रहना पड़ा क्योंकि इसकी उम्र बालिग होने से 17 दिन कम थी
और वह आज भी हमारे और आपके बीच में एक बदले हुए नाम और एक बदले हुए पहचान के साथ रह रहा है
हर कुछ समय के बाद एक कांड होता है फिर हम लोग कुछ दिनों तक सोशल मीडिया पर गुस्सा जताते हैं और फिर कुछ महीनो में एक और कांड होता है
अब जरूरत यह है की हत्या बलात्कार के मामले में जुवेनाइल एक्ट खत्म कर देना चाहिए अमेरिका और यूरोप में यही है वहां पर यदि कोई नाबालिक भी हत्या और बलात्कार करता है तो उसके ऊपर मुकदमा चलाया जाता है
और अदालतों को यह सोचकर की भले ही इसने जघन्य हत्या और जघन्य बलात्कार किया है लेकिन यह नमाजी है तो इसे छोड़ दिया जाए इस तरह के चीजों से बचना होगा