एक ऐसा व्यक्ति, अभाव और असफलताएँ ही जिसका भाग्य बन चुकी हों तथा पुरुषार्थ के बावजूद जिसको महत्वाकांक्षा की मंज़िल प्राप्त नहीं होती, यदि वह निराशा के नश्तरों की चुभन से पीड़ित और अभावों से आहत होकर वैराग्य ग्रहण कर लेता है तो इसमें न तो कुछ उल्लेखनीय है और न ही अनुकरणीय।
वर्द्धमान नाम का कोई राजकुमार, वैभव जिसके चँवर डुलाता हो, सुविधाएँ जिसके पाँव पखारती हों, ऐश्वर्य जिसकी आरती उतारता हो, वह यदि सब कुछ स्वेच्छा से त्यागकर, वैराग्य धारण करके वनविहारी हो जाता है तो निस्संदेह वह घटना अलौकिक भी है, असाधारण भी है, अविस्मरणीय भी है, अनुकरणीय भी।
वैभव को ठुकराने वाले, विलास से विरक्त रहने वाले, आत्मसाधन के माध्यम से आत्मज्ञान और कैवल्यज्ञान प्राप्त करने वाले ऐसे राजकुमार ही वर्धमान से महावीर हो जाते हैं और ऐसे महामानव की ही मनाई जाती है महावीर जयंती।
१५ अक्तूबर सन ५२७ ई. पूर्व दीपावली के दिन इस युग के अंतिम चौबीसवें तीर्थकर भगवान महावीर ने ७२ वर्ष की आयु में अपनी भौतिक देह पावापुरी में त्याग कर निर्वाण प्राप्त किया।
जय महावीर 🙏🏻जयजिनैंद्र
महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🏽
भाजपा सवर्णों के आंदोलन के आयोजन से भयभीत नहीं है, उसे भय इस बात का है कि एक बार आंदोलन के चलते यूजीसी का मुद्दा छा गया, घर-घर तक ये बात पहुँच गई कि नरेंद्र मोदी ने गत 11 वर्षों में कैसा तुष्टिकरण किया है, तो उनका बनाया हुआ अवतारी पुरुष हिन्दू हृदय सम्राट का तिलस्म तो खत्म होगा ही, साथ में अमित शाह का किला भी भरभरा कर गिर सकता है। वो इस खबर को, विषय को यहीं रोकना चाहते हैं क्योंकि संघ से लेकर भाजपा के अंदरूनी सर्कल में अब समझ सबको आ गया है कि ये विषय उतना छोटा नहीं था। क्योंकि जब UGC अधिनियम आया और लोगों ने विरोध करना शुरू किया तब भाजपा और संघ के नेताओं का अंदरुनी कहना था कि इस विरोध से कुछ होने जाने को नहीं है। चार लोग सड़क पर नहीं आएगा। किन्तु जब लोगों ने सड़कों पर उतरना शुरू किया तब हाउस अरेस्ट किया गया और राजधानी आने वाले लोगों को प्रदर्शन स्थल पर प्रदर्शन न करने की पूरी ताकत झोंक दी गई।
#UGC #UGC_RollBack
#बीजेपी_हटाओ
Courtesy raj k Sharma fb post
UGC विरोध में कल रामलीला मैदान में प्रदर्शन के लिए जा रहे नेताओं और पत्रकारों को नजरबंद और गिरफ्तार किया जा रहा है! जाहिर है सरकार प्रदर्शन नहीं होने देना चाहती और इसलिए बल प्रयोग किया जा रहा है।
आप सोचिए, जिस देश में भीम आर्मी जब चाहे जहां चाहे सड़क जाम कर दे। मुल्ले सालों साल शहीनबाग में बैठे रहें, खालिस्तानी दिल्ली जाने का रास्ता जाम कर दें, लालकिले पर खालिस्तानी झंडा फहरा दें वहां सवर्णों को अपने अधिकार के लिए एक प्रदर्शन तक नहीं करने दिया जा रहा है।
खैर अगर आपको लगता है कि नजरबंद कर लेने से या गिरफ्तार कर लेने से हमारी आवाज दब जाएगी तो यह आपकी भूल है। आपके नीलराष्ट्र के निकृष्ट सपने के लिए सवर्ण अब अपना बलिदान नहीं देगा।
#RollbackUGC #8March_Ramleela_Maidan
भाजपा रामलीला मैदान के आयोजन से नहीं भयभीत है।
उसे किसी यूट्यूबर, नेता अथवा ट्विटर हैंडल से फर्क नहीं पड़ता और ना ही उनसे वह डरती है....
उसे भय इस बात का है कि एक बार आंदोलन के चलते यूजीसी का मुद्दा छा गया, घर-घर तक ये बात पहुँच गई कि नरेंद्र मोदी ने गत 6-7 वर्षों में कैसा तुष्टिकरण किया है,
तो उनका बनाया हुआ हिन्दू हृदय सम्राट का तिलस्म तो खत्म होगा ही, साथ में अमित शाह का किला भी भरभरा कर गिर सकता है।
वो इस खबर को, विषय को यहीं रोकना चाहते हैं क्योंकि संघ से लेकर भाजपा के अंदरूनी सर्कल में अब समझ सबको आ गया है कि ये विषय उतना छोटा नहीं था।
हित वचन तूने नहीं माना
मैत्री का मूल्य न पहचाना
तो ले, मैं भी अब जाता हूँ
बहुत-बहुत धन्यवाद @BJP4India! नमन रहेगा @narendramodi यह दिन दिखाने के लिए कि इस राष्ट्र में आतंकवादी सड़क घेर सकते हैं, दंगे कर सकते हैं, फिर वापस प्रदर्शन कर सकते हैं, पर आपकी कायर सरकार को समस्या मेरे जैसों से है।
आज मैं अपने घर में कैद हूँ। आज मेरा आना-जाना बंद है। न तो व्यक्ति अमर होता है, न सत्ता!
आप लोग कायरों का एक समूह मात्र हैं। आप समाज को बाँटने वाले, डरपोक हो जो ट्रोल बंदरों की एक सेना बिठा कर हमें कलंकित करना चाहते हो।
दिल्ली में आए मित्रों का आह्वान करता हूँ कि रामलीला मैदान की ‘मोदी छावनी’ तक पहुँचिए। मोदी ने छावनी बनवाई है तो आप उसी मोदी तक अपने नारों को पहुँचाइए।
ये आपके बच्चों को जन्मजात अपराधी बना चुके हैं और आपको आतंकवादी की तरह देखते हैं। आप सवर्ण हैं तो इसका प्रतिकार कीजिए।
#March8DelhiChalo
श्री अजीतभारती सवर्णो की आवाज बन चुके है. इनको इग्नोर करना बहुत बड़ी भूल होगी. सवर्ण समाज चट्टान की तरह पीछे खड़ा है
@ajeetbharti की लोकप्रियता X पर देखिये.10k,9K ,7K ,6k Repost हो रहा है.
इसका अनुमान @BJP4India को नहीं है?
अपने और UGC समर्थकों के Repost को देखिए बहुत पीछे है
आइटी सेल का जातिवादी नैरेटिव योगी को हराने के लिए सोच-समझकर बुना गया है। वो 2027 को लक्ष्य कर, हर सवर्ण जाति के लोगों को गाली दे रहे हैं। यह अजेंडा स्पष्ट हो गया है।
Forced to speak. Took more than 30 days to open his mouth.
Nevertheless, a welcome move. That’s why we must keep writing, ask appropriate questions to high and mighty.
सवर्ण समाज में क्या विभूतियों की कमी थी? क्या विद्वानों की कमी थी? क्या ब्रह्मचर्य पालकों की कमी थी? क्या आचार्यो की कमी थी जो पुरा समाज एक OBC प्रधानमंत्री को सिर पर चढ़ाकर पूजा?
चाहे मंदिर का शिलान्यास हो, प्राण प्रतिष्ठा हो, पूजा- अर्चना हो, सवर्ण समाज ने कभी नाक -भौं नहीं सिकोड़ा की एक OBC समाज का आदमी, जो गृहस्थ आश्रम से भी दूर है,जिनका वामांगी भी नहीं है,यजमान के आसनी पर बैठ सनातन के सबसे बड़े मंदिर का शिलान्यास कर क्यों कर रहें हैं? प्राण प्रतिष्ठा कर क्यों रहें हैं? क्योंकि सवर्ण कभी जातिगत भेदभाव करते नहीं.. जहां विश्वास एकबार अपना स्थान बना लेता है, वहाँ सवर्ण भूल जाता है कि वो क्या कृति है भगवान का.. सबको समाहित करके चलता है।
प्रभु राम के वनगमन की यात्राएं और घटित घटनायें इस बात को पुख्ता करती हैं कि, चाहे सबरी के जूठे बेर हों या केवट का सानिध्य,, प्रभु ने प्रेम को ऊपर रखा, विश्वास को आगे रखा, लेश मात्र भी संकोच नहीं किया कि वे रघुकुल के राजकुमार हैं, और सबरी निम्नकुल की हैं.. वैसे हीं भारतवर्ष का सवर्ण समाज भी प्रेम में अभिभूत हो पीएम के हर कार्यो को गले लगाया, हर फैसले को बिना संकोच, बिना कोई हिचक के आत्मसात किया..
मगर मिला क्या? मिला दुत्कार, मिला अपमान, मिला दोयम दर्जे की नागरिकता, मिली आसमानता, मिला अपने हीं देश में देश निकाले की सजा।
कुछ दोष तो अपना भी है, समय रहते डांट लगा देते तो आज इतनी हिम्मत ना पड़ती..
कहते हैं ज्यादा संकोची और लज्जा करने वाला पुरुष गरीब और ज्यादा संकोची और लज्जा करने वाली औरत चरित्रहीन हो जाती है.. लोग फायदा उठाते हैं।
एक हत्यारे को पुलिस ने पकड़ा, न्यायालय में पेश किया, उसे फांसी की सजा हुई. अंतिम इच्छा पूछे जाने पर उसने अपनी माँ से मिलने का अनुरोध किया. जब माँ से मिला तो बोला, माँ तुम्हारे कान में कुछ कहना है, और इसी बहाने उसने माँ का कान दांतो से काट लिया. दर्द से बिलबिलाई माँ ने जोर का थप्पड़ लगाया.
लड़का रोते हुए बोला - "काश! ये थप्पड़ तुम मुझे उसदिन मार दी होती जिसदिन मैंने स्कूल में अपने दोस्त की कान काट दी थी, तो आज मैं इतना खूंखार हत्यारा नहीं बनता और ना तो फांसी की सजा होती "
माँ आवाक देखती रह गयी।
हमने छूट दी थी, हमने हीं हिम्मत दी थी, हमने हीं अपने लिए भस्मासुर पाला था, हमने हीं आस्तीन में सर्प रखे थे,, हमें सजा तो मिलनी तय है..
काश हमने आज वाला थप्पड़ पहले हीं लगा दिया होता तो किसी की हिम्मत ना होती हमसे भेदभाव सोचने की भी..
खैर, जो हुआ सो हुआ. गलती की पुनरावृति होनी नहीं चाहिए किसी कीमत पर।
योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के बजट को लेकर जनता के नाम एक चिट्ठी लिखी है। पूरी चिट्ठी में जाति की कोई बात नहीं है। पूरी चिट्ठी डेटा, एआई, रिसर्च, ओलंपिक्स, युवा, महिलाओं की बात करती है। 21वीं सदी में हिंदू समाज को ऐसे नेताओं की आवश्यकता है। जाति-जाति करने वालों की नहीं।
एक बीजेपी समर्थित मित्र का फ़ोन आया वो थोड़े चर्चित भी है !!
बोल रहे थे ज़्यादा सवर्ण सवर्ण करोगे तो अकाउंट भी उड़ सकता है !! क्या फ़ायदा होगा अपना ही नुक़सान कराओगे !!
फॉलोवर तो वैसे भी इस मुद्दे पर लिखने बोलने से नहीं बढ़ेंगे !!
मतलब “सवर्ण समाज के बच्चों का भविष्य उड़ाया जा रहा है”
यहाँ मेरे अकाउंट और फॉलोअर की लोगों को पड़ी है !!
जब तक अकाउंट है अकाउंट से लिखेंगे फिर कलम से लिखेंगे , फिर जब तक है जान जुबान से बोलेंगे
लेकिन अब नहीं बोलेंगे तो सवर्ण समाज के बच्चों के साथ सीधा अन्याय हो रहा है !!
BJP IT cell worked overtime last week, making personal attacks on me just because we spoke against UGC.
Today, they’re shedding crocodile tears for Ruchi Tiwari.
So, stop this drama. We can fight our own battle !
कुछ मंत्री कह रहे थे कि UGC के नए नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा, लेकिन हालात तो नियम लागू होने से पहले ही साफ दिखने लगे हैं।
जिन्हें मिलकर नक़ल माफिया और पेपर लीक के खिलाफ लड़ना था, वे आज जात-पात में बँट गए हैं। असली लड़ाई सिस्टम से होनी चाहिए थी, पर हम आपस में उलझ गए। एक फैसले ने ऐसी दरार पैदा कर दी है, जिसे भरने में शायद दशकों लग जाएँ।
द्रौपदी भी सोंच रही थी कि वो पांच महाबलशाली योद्धाओं की धर्मपत्नी है, इस धरा पर कौन है जो उसका कुछ बिगाड़ भी दे, उसकी तरफ कोई देख भी ले.. लेकिन अपनी कमजोरीयों के कारण किसी के हाथों बिक जाने वाले युग कायर पांचो पति सिर नीचे करके बैठे रहे और उन्हीं के सामने उनकी रानी, द्रुपद राजकुमारी, पांचाली को रजस्वला के हालत में हीं बाल घसीट कर कुरु वंश की भरी सभा में जांघो पर बिठा नग्न करने का प्रयास किया गया था।इतिहास हमें चीख चीख कर चेतावनी देता रहता है कि अरे मूरख मानव, भीरू और कायर को अपना स्वामी मत बनाना जो अपने किसी फायदे के लिए तुम्हारा इज़्ज़त भी सरे बाज़ार नीलाम कर दे..
कल एक सवर्ण बेटी को नोंच खाने को भेड़िया सी भीड़ टूट पड़ी थी।किसी तरह स्वयं को और खुद की इज़्ज़त बचा पाई..लेकिन इतने पर भी सवर्ण बहु बेटियों के वोट से लग़जरी लाइफ काट रहे किसी अधर्मी के मुंह से ऐसा बोल नहीं निकला, जो मोदी जी ने एक सभा में दिया था कि, अरे गोली हीं मारनी है तो मुझे मार लो, पर मेरे दलित, पिछड़े भाइयों बहनों को कुछ मत कहो..। मोदी जी,, कम से कम वहीं पुराना डायलॉग दोहरा देते आप कि- जिसने अपनी माँ को, पिता को, खुद को सताया हुआ देखा हो और उसे अगर मौका मिल गया तो, हिसाब चुकता करेगा कि नहीं करेगा..
अन्य जातियों के मंत्री नेताओं से हम आशा भी नहीं रखते, मगर वो लोग जो खुद सवर्ण हैं और सवर्ण वोट पाते हैं, उनके भी होंठ सिल जाते हैं, स्याही खत्म हो जाती है..मुंह से बोल नहीं फुटते, संवेदना मर सी जाती है..कुछ बोलना भी चाहते हैं तो दिल्ली से उन्हें आँखे दिखाई जाती है.. अब उनकी भी मजबूरी है।
गृहमंत्री जी ने कहा है कि आनेवाले समय में नक्सल पुरी तरह खत्म हो जायेगा, और इस क्षेत्र में उन्हें अभूतपूर्व सफलता भी हाथ लग रही है। लेकिन फायदा क्या? जंगल के नक्सली खत्म करके मंत्री जी और पंत प्रधान जी ने गांव गांव, बस्ती बस्ती,, नगर नगर, शहर शहर नए प्रकार के नक्सल ईजाद कर दिए है. अगर आपको भरोसा ना हो तो कल रूचि तिवारी के मोलेस्टेशन की कोशिश वाली वीडियो हीं देख लीजिये, लिंचिंग होते होते बची है।
जंगली नक्सली और इन भेड़ियों में ज्यादा अंतर नहीं है, ये उनसे भी घातक हैं। और सरकार प्रश्रय देती जा रही है। सिर से पानी अब ऊपर की तरफ है। अंत सुनिश्चित है, आग का फफक इसी ओर इंगित कर रहा है कि पतन नजदीक है।
What used to happen in Bihar in the 1990s is happening today in the national capital.
Remember, Lalu is still paying the price for his anti-UC policies.
जातिवाद के नाम पर शिक्षा के मंदिर को हमने क्या बना दिया ?
एक लड़की को लड़कों ने घेर रखा है, सरेआम उसके साथ हाथापाई की जा रही है.
इनका नाम रूचि तिवारी है, पेशे से यूट्यूबर है. जरा सोचिये किसी भी और जाति धर्म से जुड़ी कोई दूसरी लड़की होती तो देश में क्या हो रहा होता. जाति के नाम पर सामान्य वर्ग के बच्चों के साथ घिनौना व्यवहार हो रहा है. उनके साथ जातिवादी टिप्पणी की जा रही है. ये सब हो रहा है देश की राजधानी दिल्ली में.
बेहद शर्मनाक, घृणा से भरा हुआ .
हम कहाँ थे और कहां जा रहे हैं?