श्रृंखला है
इज़हार की
इक़रार की
हिजर्रतों की
प्यार की
बातों की
बरसों की
यादों की
अरसों की
रुकने की
पूर्ति की
बैठने की
ख़ूबसूरती की
लबों की
मिठास की
ग़ुस्से की
खट्ठास की
एक श्रीख़ला है
���ेरी शख़्सियत की
तेरा मज़ाक में कहना कि छोड़ दूंगा तुझे
और एकदम से मेरा मुस्कुरा के रो पड़ना,
वो आईने में बहुत देर तक देखना खुद को
फिर अपने ज़ब्त पे ताली बजा के रो पड़ना!
ज़ब्त - self control.