Since the launch of the iPhone 18 Pro and the latest iOS version, I’ve been facing frequent hanging and lagging issues on my iPhone.
I didn’t experience anything like this during the past year, but lately the issue has become very noticeable.
Requesting Apple’s software developers to please look into this and identify what’s causing it.
Aakash Srivastava
Kota, Rajasthan, India 🇮🇳
iPhone User
#iPhone18Pro #iOS #Apple #iOSUpdate #iPhone #AppleSupport #iPhoneIssues @Apple@TechnicalGuruji@zollotech
THE WORKER MATTERS
BJP’s biggest strength is its grassroots workers.
If a worker spends decades serving the organisation but feels that loyalty and hard work are not enough to get an opportunity, what message does that send to the next generation?
We are not against any individual.
We are asking for transparency, fairness and respect for every worker.
Because this is not just about Mahesh Srivastava Ji.
It is about every worker who continues to believe in the BJP.
The question is simple:
Will the organisation value its workers’ trust as much as they value the organisation? @narendramodi@BhajanlalBjp@ombirlakota@BJP4India@BJP4Rajasthan@madanrrathore
Ramganj Mandi(Kota) has raised an important question for BJP workers.
Mahesh Srivastava Ji has served the party for decades and has repeatedly represented Ward No. 3.
When the Chairman’s post became open for consideration, his name was among those discussed.
But when the final decision came, the opportunity went elsewhere.
The question is not just about one person.
It is about whether years of dedication and loyalty still matter when a grassroots worker seeks an opportunity.
@narendramodi@NitinNabin@madandilawar@madanrrathore@BJP4India@BJP4Rajasthan@ombirlakota
MY FAITH
Since turning 18 and getting my voter ID, I have believed in the BJP—not just as a political party, but as an ideology that puts India First.
I remember the days when BJP was still growing in Rajasthan and had governments in only a few states.
We watched Narendra Modi Ji’s journey from those days to national leadership.
My faith in the ideology remains strong.
But today, one question deserves to be asked:
Does the same respect for dedicated workers exist at the grassroots? @BJP4India@BJP4Rajasthan@narendramodi@NitinNabin@madandilawar@madanrrathore@ombirlakota
@narendramodi@JPNadda@AmitShah@NitinNabin@madanrrathore@BhajanlalBjp@madandilawar@ombirlakota@BJP4India@BJP4Rajasthan@aajtak@indiatvnews@zeerajasthan_
जब मैं 18 वर्ष का हुआ और पहली बार मेरी वोटर आईडी बनी, तब से मैंने भारतीय जनता पार्टी को केवल एक राजनीतिक दल के रूप में नहीं, बल्कि एक विचार और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली विचारधारा के रूप में देखा है।
वह दौर भी याद है, जब राजस्थान में भाजपा आज जितनी मजबूत नहीं थी। देश के चुनिंदा राज्यों—विशेषकर मध्य प्रदेश और गुजरात—में भाजपा की सरकारें थीं। उसी दौर से नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व को देखते-देखते हमने एक ऐसे भारत को आगे बढ़ते देखा, जिसने दुनिया के सामने अपनी नई पहचान बनाई।
आज भी हमारी आस्था उसी विचार में है—देश पहले, संगठन बाद में और व्यक्ति सबसे अंत में।
लेकिन आज एक सवाल मन में जरूर उठता है—
क्या यही भावना भाजपा के जमीनी स्तर के प्रत्येक कार्यकर्ता के साथ भी दिखाई देती है?
क्या ईमानदारी से वर्षों तक संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता को उसका उचित सम्मान और अवसर मिलता है?
क्या एक सामान्य कार्यकर्ता यह भरोसा कर सकता है कि उसकी मेहनत, निष्ठा और संघर्ष उसके राजनीतिक भविष्य का आधार बनेंगे?
रामगंजमंडी की हालिया घटना ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है।
महेश श्रीवास्तव जी वर्षों से वार्ड नंबर 3 से भाजपा के लिए चुनाव लड़ते और जीतते रहे हैं। 2026 के निकाय चुनाव में भी उन्होंने वार्ड 3 से भाजपा के प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। (https://t.co/xc7vHD6kdD)
अध्यक्ष पद को लेकर भी उनका नाम सामने आया और उनके साथ अन्य दावेदारों ने आवेदन किया। (https://t.co/OuFnA1rplo)
यदि किसी समर्पित कार्यकर्ता को वर्षों की सेवा के बाद यह भरोसा दिलाया जाता है कि सामान्य सीट होने पर उसे नेतृत्व का अवसर मिलेगा, तो स्वाभाविक है कि वह उस आश्वासन को संगठन के प्रति विश्वास मानकर चलेगा।
लेकिन जब अंतिम निर्णय का समय आता है और परिस्थितियाँ बदल जाती हैं, तो सवाल केवल एक व्यक्ति का नहीं रह जाता।
सवाल उस हर कार्यकर्ता का बन जाता है, जो वर्षों से बिना किसी पद और स्वार्थ के पार्टी का झंडा उठाए हुए है।
आज चर्चा यह भी है कि क्या राजनीतिक निर्णयों में धनबल की भूमिका रही? यदि ऐसी कोई बात है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। क्योंकि बिना प्रमाण किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं है, लेकिन ऐसी चर्चाओं को पूरी तरह अनदेखा कर देना भी संगठन के हित में नहीं हो सकता।
भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसके करोड़ों कार्यकर्ता हैं।
अगर कार्यकर्ता को यह विश्वास ही न रहे कि मेहनत, निष्ठा और समर्पण के आधार पर उसे आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, तो फिर नए कार्यकर्ता संगठन से जुड़कर अपना भविष्य किस भरोसे से देखेंगे?
हम व्यक्ति के विरोध में नहीं हैं।
हम संगठन के भीतर पारदर्शिता और कार्यकर्ता के सम्मान के पक्ष में हैं।
हमारी अपेक्षा सिर्फ इतनी है कि भाजपा वही पार्टी बनी रहे, जिसे हमने बचपन से देखा और माना है—जहाँ निर्णय का आधार निष्ठा, संगठन के प्रति समर्पण, जनसेवा और कार्यकर्ता की मेहनत हो; न कि ऐसी कोई धारणा, जिसमें धनबल या व्यक्तिगत समीकरण कार्यकर्ता की वर्षों की तपस्या पर भारी पड़ जाएँ।
क्योंकि अंततः सवाल महेश श्रीवास्तव जी का अकेले नहीं है।
सवाल उस हर कार्यकर्ता का है, जो आज भी भाजपा को दिल से अपना संगठन मानकर उसके लिए खड़ा है।
और सवाल यह है—
क्या पार्टी उस कार्यकर्ता के भरोसे को भी उतनी ही गंभीरता से लेगी, जितनी गंभीरता से कार्यकर्ता पार्टी के विचार और नेतृत्व पर भरोसा करता है?
रामगंजमंडी नगर पालिका अध्यक्ष के प्रबल दावेदार महेश जी श्रीवास्तव को बहुमत होने के बाद भी पार्टी सिम्बल नरेन्द्र काला को दे दिया गया जिसकामहेश जी श्रीवास्तव के समर्थकों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जी की गाड़ी रोकी और विरोध दर्जकिया @zeerajasthan_@1stIndiaNews@News18Rajasthan
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रामगंजमंडी के भाजपा संगठन और कार्यकर्ताओं के सामने आज एक सीधा सवाल है—
महेश श्रीवास्तव — जो लंबे समय से भाजपा संगठन के लिए सक्रिय रहे हैं, पूर्व रामगंजमंडी नगरपालिका वाइस चेयरमैन और पाँच बार के पार्षद रहे हैं — क्या वर्षों की संगठनात्मक मेहनत, जनसमर्थन और राजनीतिक अनुभव का यही सम्मान है?
रामगंजमंडी में अध्यक्ष पद को लेकर भाजपा के सामने कई दावेदार रहे हैं और महेश श्रीवास्तव ने भी अध्यक्ष पद के लिए आवेदन किया है। (Public)
ऐसे में सवाल यह है—
क्या पार्टी के निर्णय में संगठनात्मक योगदान, स्थानीय जनसमर्थन और निर्वाचित पार्षदों की राय को पर्याप्त महत्व दिया गया?
और यदि धनबल के प्रभाव को लेकर कार्यकर्ताओं में सवाल उठ रहे हैं, तो पार्टी नेतृत्व को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
क्या राजनीति में वर्षों की मेहनत और संगठन के प्रति निष्ठा का महत्व है?
क्या स्थानीय कार्यकर्ताओं की आवाज़ सुनी जाएगी?
क्या राजनीतिक निर्णय पारदर्शी तरीके से होंगे?
रामगंजमंडी की जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं के इन सवालों का जवाब कौन देगा?
सवाल किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं—
सवाल संगठन, कार्यकर्ता के सम्मान, जवाबदेही और पारदर्शिता का है।
— महेश श्रीवास्तव
पूर्व रामगंजमंडी नगरपालिका वाइस चेयरमैन एवं पाँच बार के पार्षद #BJP_Corruptions #bjpscam #bjpfails @RajCMO@RajGovOfficial@rpbreakingnews@zeerajasthan_@DainikBhaskar@JagranNews@aajtak@IndiaToday@indiatvnews@republic@ndtvindia@ABPNews@News18India@News18Rajasthan
महेश श्रीवास्तव जी जैसे वर्षों से समर्पित कार्यकर्ता की निष्ठा और राजनीतिक अनुभव पर सवाल नहीं, सम्मान होना चाहिए।
भाजपा से बस इतना सवाल है—क्या ऐसे समर्पित कार्यकर्ता अपने हक और अवसर के हकदार नहीं हैं?
दशकों की सेवा और संगठन के प्रति समर्पण का मूल्यांकन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।
रामगंजमंडी की जनता भी इस निर्णय के संदर्भ में जवाब और स्पष्टता चाहती है। @aajtak@ABPNews@ndtvindia@indiatvnews@rpbreakingnews@DainikBhaskar@madandilawar@ombirlakota@NitinNabin@narendramodi
It is truly surprising that a senior leader like Shri Mahesh Srivastava Ji from Ramganj Mandi, Kota, who has been active in politics for nearly 30 years and has earned the support of 12–13 elected representatives, was denied a BJP ticket, while Kalra Ji, who has only four ticket holders, was given the BJP ticket.
The question is not just about one ticket—it is about the value given to years of political experience, public support, and dedication.
Sometimes, political decisions leave people with more questions than answers. @narendramodi@NitinNabin@ombirlakota@madandilawar@BhajanlalBjp@BJP4India@aajtak@indiatvnews@news24tvchannel@ndtvindia@republic
30 साल से संगठन और राजनीति में सक्रिय महेश श्रीवास्तव रामगंजमंडी कोटा, जनता के बीच अपनी पकड़ रखने वाले कार्यकर्ता को टिकट नहीं… और टिकट वितरण में ऐसे फैसले, जिन पर कार्यकर्ताओं के मन में सवाल खड़े हों?
सवाल सीधा है—क्या भाजपा में अब निष्ठा, ईमानदारी और वर्षों की मेहनत से ज्यादा प्रभाव और सौदेबाजी मायने रखती है?
अगर जमीन पर वर्षों से खड़ा कार्यकर्ता ही खुद को उपेक्षित महसूस करेगा, तो फिर पार्टी के लिए कौन समर्पण करेगा और किस भरोसे से आगे बढ़ेगा?
भाजपा नेतृत्व को कार्यकर्ताओं के इन सवालों का जवाब देना चाहिए।
पार्टी कार्यकर्ता की मेहनत से बनती है, सिर्फ टिकटों से नहीं।
#BJP #RajasthanBJP #MadanDilawar #BJPWorkers @narendramodi@AmitShah@NitinNabin@ombirlakota@madandilawar@BhajanlalBjp
श्रीकृष्ण ने कभी किसी को अपना रास्ता नहीं दिया…
उन्होंने बस इतना सिखाया कि रास्ता चाहे कितना भी कठिन हो,
अगर मन में कृष्ण हैं—तो मंज़िल से पहले ही इंसान बदल जाता है। 🦚🙏
— राधे राधे
राहुल गांधी की भाषा और राजनीतिक आचरण का स्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री और इटली की राष्ट्राध्यक्ष जैसी संवैधानिक एवं सम्मानित शख्सियतों के लिए जिस तरह की आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया है, वह किसी भी सभ्य लोकतांत्रिक और राजनीतिक संस्कृति के लिए शर्मनाक है।
राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन अशोभनीय भाषा, व्यक्तिगत टिप्पणी और संवैधानिक पदों का अपमान राजनीति नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कारों के पतन का प्रमाण है।
यह भारत की महान लोकतांत्रिक परंपरा की भाषा नहीं है। यह उस राजनीतिक संस्कृति पर सीधा प्रहार है, जिसने हमेशा असहमति के बावजूद मर्यादा और सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया है।
देश की जनता सब देख रही है, शब्द भी, संस्कार भी और सोच भी। यही कारण है कि जनता ने बार-बार राहुल गांधी की राजनीति को नकारा है और आगे भी उनके अहंकार, अमर्यादित भाषा और नकारात्मक राजनीति को करारा जवाब देती रहेगी।