जाटों के छोरों की ज़िद—हेलीकॉप्टर उड़ेगा! 🚁
कलेक्टर ने मना किया तो तेजा भक्त गोविंद सिंह डोटासरा ने कॉल ठोका: — "मैं सरकार बोल रहा हूँ, लेटर पर साइन करो।"
बस फिर क्या था! तुरंत साइन हुए, हेलीकॉप्टर उड़ा और आसमान से फूलों की बारिश हुई 🔥🌸
@GovindDotasra
🔥🚁🌸
गणपति बप्पा मोरिया.🙏
अगले बरस जल्दी आ🙏
नागौर सांसद और RLP सुप्रीमो @hanumanbeniwal ज़ी अपने निवास पे स्थापित भगवान श्री गणेश का विसर्जन किया और क्षेत्र एवं परिवारजनों के लिये बप्पा से मंगलकामनाये की. 🙏
ले थूक दिया तुम्हारे वोटो पर ।
वैसे ये सही कर रही है इसे मेयर बनाया है प्रशासन ने ,चुनाव आयोग ने ,ओम बिरला ने ,जनता ने तो इन पगचंपी वालो को नकार दिया लेकिन मेहरबानी चुनाव आयोग और प्रशासन की ये इस पोस्ट पर आ गई ।
वैसे क्या ये हिंदू ध���्म का अपमान नहीं है ��ो सर दंडवत ईश्वर के सामने झुकाया जाना चाहिए वो एक ब्रोकर के सामने झुकाया जा रहा है ।
"तीन बाण के धारी तीनों बाण चलाओ ना "
बोलो श्याम प्यारे की जय 🙏
हिंदुत्व का झूठा स्वांग करने वाली पार्टी क़ो असली सबक तो देवनगरियों में मिल रहा है
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का अयोध्या से हारना
निकाय चुनाव में खाटूश्याम जी की पावन धरा ��े बीजेपी का हारना क्या दिखाता है?
मानेसर का जिन्न !
मानेसर घटनाक्रम एक तथ्य है इसलिए यह जिन्न किसी ना किसी बोतल से हमेशा निकलता रहेगा
हालिया जिस बोतल से वह एक सामाजिक का��्यक्रम में बोलते हुए हनुमान बेनीवाल ने निकाला है उसकी उम्मीद थोड़ी ज़्यादा रहेगी क्योंकि उनकी पार्टी का चुनाव चिह्न भी बोतल ही है।
सचिन पायलट राजनीति में जब तक रहेंगे चाहे कांग्रेस के बनकर या फिर किसी और पार्टी का दामन थाम कर नेपथ्य में मानेसर की ग़द्दारी कि नारे कांग्रेस के भीतर से ही आते रहेंगे क्योंकि तथ्य धोये नहीं जा सकते हैं।
हनुमान बेनिवाल का मानेसर-कांड जिक्र —-
हाल ही में एक का���्यक्रम में हनुमान बेनीवाल ने सचिन पायलट को लेकर अपने अंदाज़ में तंज कसा है और उनके राजनीतिक मायने देखने चाहिए क्योंकि समाज में लोकोक्ति या मुहावरों के संदर्भ समाज के बीच से ही उठाए जाते हैं और शब्दावली भी कुशल राजनीतिज्ञ वहीं से चयन करते हैं ताकि समाज के बड़े तबके तक उसे उतारा जा सके वही सचिन पायलट पर हमलावर होते हुए हनुमान बेनीवाल ने किया है और यही कारण है कि उसकी चर्चा पुनः उठ खड़ी हुई है वरना वे इसे सामान्य भाषा में बोल देते तो उसका ज़िक्र सोशल मीडिया पर इतने बड़े पैमाने पर नहीं हो रहा होता कुशल राजनेता यह अच्छी तरह जानते हैं कि किसी बात को कैसे कहना है।
“सचिन पायलेट - गहलोत की लुगाई मायने”
हनुमान बेनिवाल अक्सर अपनी बात कहने के लिए आमजन को लुभाने वाली शब्दावली उपयोग करते हैं वो चाहते हैं कि उनकी बात के मायने वो कह रहे हैं वो तो लगें ही उसके इतर भी लोगों की दिमा��ी घोडे शांत ना बैठें।
जबकि वे इसे केवल यह कह देते कि सचिन पायलेट को गहलोत ने अपने आदेशों के नीचे रखे जबकि वे महिला सशक्तिकरण की के जैसे अपने तथाकथित अधिकार मांग रहे थे लेकिन उस दिशा में किया यह भेडें लड़ रही होती ?
क्या यहां का पत्रकार वर्ग टी आर पी की रेस लगा रहा होता ? नहीं ना !
यह वो अच्छी तरह जानते हैं और इनको काम सौम्प कर घर में पूजा में बैठ ��ये हैं।।।।।।
मानेसर आबाद रहेगा——-
कभी यह सूक्ति लेकर सचिन पायलेट मानेसर गये थे तब हनुमान बेनीवाल अशोक गहलोत के साथ पायलेट के समर्थन में मानेसर से बाण छोड रहे थे वह भी उनकी अपनी राजनीतिक यात्रा थी और आज जब वो मानेसर विफलता के जिन्न को RLP की बोतल से बार बार निकाल नचा रहे हैं वो भी उनकी राजनीति का एक पहलू है।
कुल मिला कर मानेसर का जिन्न राजस्थान राजनीति में अमर हो गया है वो अलग-२ मंचों पर हमेशा ��ाचता रहेगा वो बात और है हर नचाने वाला अपनी लय का इस्तेमाल अपने तरह से करेगा दर्शकों को पसंद आये या ना आये।
मानेसर राजस्थान के लोगों खासकर मजदूर वर्ग की शरणस्थली के तौर पर दर्ज है जहां अधिकांश राजस्थानी वो भी पुर्वैइया गार्डों को आश्रय देता है।
जो रोजगार की तलाश में मानेसर जाते हैं लेकिन सचिन पायलेट ने मानेसर को जबसे राजनीतिक सीढ़ी बना खुद के गार्डों को हरियाणा पुलिस की सुरक्षा में सैर करा लाये हैं तब से मानेसर राजस्थान राजनीति में अमर हो गया है।
राजस्थान के “चाणक्य” गोविंद सिंह डोटासरा ने निकाय चुनाव में फिर अपना सियासी हुनर दिखा दिया।
बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर महज 0.94% रहा—इतना मामूली फासला कि के.सी. वेणुगोपाल जी भी डोटासरा जी की रणनीति ��र मुस्कुराए बिना नहीं रह पाए।
@GovindDotasra #congress #rajasthan
निकाय चुनावों मे जहाँ भी कांग्रेस क़ो जरुरत पड़ी कही मैनेज नही कर पाए
चाहे अजमेर मे धर्मेंद्र राठौर हो या जोधपुर में अशोक गहलोत सब फेल हूए मगर डोटासरा के गढ़ लक्ष्मणगढ़ मे 3 वोट अत���रिक्त मिले.
डोटासरा की बढ़ती लोकप्रियता और अपने नेता के प्रति विश्वास���
काचो गोलियों कोनी 🙏
राजस्थान कांग्रेस के "आरक्षण बचाओ प्रकोष्ठ" की कार्यकारिणी।
मुझे लगता है कि इस ���ार्यकारिणी में अशोक गहलोत जी को चेयरमैन और सचिन पायलट जी को उपाध्यक्ष बनाना चाहिए था, दोनों ने आज तक आरक्षण पर अपनी जुबान नहीं खोली है, अभी हाल में ही निकाय और पंचायत चुनाव में लॉटरी आरक्षण में वंचित वर्गों के साथ हुए कुठाराघात पर भी मुंह नहीं खोला था।
मुझे लगता है कि यहां गहलोत और पायलट को आरक्षण बचाओ प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी देकर उन्हें जिम्मेदार बनाया जा सकता था 🙂
पार्थ पारीक — जो अशोक गहलोत के खिलाफ बोल सकता है वह या तो भयंकर जातिवाद की बीमारी से ग्रस्त है या वह कांग्रेसी ही नहीं है!
वैसे तो शुरुआत अशोक गहलोत ने ही कांग्रेस को कमजोर दिखाने, मनोबल गिराने ���े लिए चलते चुनाव के बीच में ही प्रेस कांफ्रेंस कर कांग्रेस को गलत ठहरा रहे थे, कांग्रेस का विरोध सिर्फ कांग्रेस विरोधी या बीजेपी से कॉम्प्रोमाइज हुआ नेता ही कर सकता है।
CM रहते हुए ही ल��ातार 3 बार कांग्रेस को बुरी तरह से हरवाया था
2023 में भी अगर शेखावाटी बागड़ में कांग्रेस एकतरफा नहीं जीतती तो फिर से 2013 वाली 21 की जगह ज्यादा से ज्यादा 41 ही होती।
फर्जी और अपुष्ट सूत्रों के अनुसार: अशोक गहलोत और सचिन पायलट राजस्थान में संयुक्त रूप से "आरक्षण बचाने एवं उच्च संस्थानों में एक वर्ग के वर्चस्व के खिलाफ" के खिलाफ पदयात्रा करेंगे।
अशोक गहलोत और सचिन पायलट को वंचित वर्गों के हकों पर हो रहे कुठाराघात के खिलाफ मुखरता के लिए जाना जाता रहा है।
ओम बिड़ला के घर के बाहर जमीन पर धोक दे रही ये महिला कोटा से बीजेपी की मेयर चुनी गई है।
क्या जनादेश को इस प्रकार से किसी नेता की चौखट पर गिराना उस जनता का अपमान नहीं है??
अशोक गहलोत जी ने 2023 के बाद से ही मीडिया से ये क्यों माहौल बनवाया हुआ था कि
– गोविंद सिंह डोटासरा आज या कल ही PCC से हटाए जा रहे हैं
– PCC अध्यक्ष हटने के बाद कोई पूछेगा नहीं
– PCC अध्यक्ष नहीं हटे हैं तो क्या हुआ, लक्ष्मणगढ़ में तो मैं हरवा दूं���ा
– पहले रहे पीसीसी अध्यक्ष लोगों के साथ क्या किया था, भूलो मत
और अब 3 साल बीतने के बाद गहलोत जी के बनाए इस झूठे नैरेटिव वाले बुलबुले का क्या हुआ है??