सरग ल पिरथी म लाने के, परन कहूँ मैं ठानंव।
मनखे के बस म ये नइ हे, बात ल मैं नई मानव।
मैं ठान लेहेंव त बुड़ती सुरुज, काबा म धर लाहूँ।
दहकत अंगरा सीतल करके, नवा अंजोर बगराहूँ।
भुंइया के मनखे के खातिर, मैं जब रार मचाहूँ।
देंवता मन के कउंर झटक के, इहेँ सरग बसाहूँ।
@तमंचा रैपुरी
कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ का समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।
इस त्रासदी में अपनों को खोने वाले सभी परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।
माँ दुर्गा से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें।
विगत दिनों भिलाई पधारे लोकप्रिय पत्रकार और वक्ता @Prakharshri78 को अपनी पुस्तक "विधान पुरुष" भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
यह पुस्तक हमारे संविधान की हिंदी ड्राफ्ट कमेटी के अध्यक्ष घनश्याम सिंह गुप्त के अवदानों पर आधारित है।
@vijaysharmacg@AmitShah विनय न मानत जलधि जड़... समय बीत गया है महोदय अब मात्र गोली ही इनका इलाज है। पुनर्वास से प्राप्त करोडों रुपयों को ये न तो सम्हाल पाएंगे न ही उसका सही उपयोग कर पाएंगे। ये वापस आकर व्यवस्था को बिगाड़ेंगे।
@vijaysharmacg@AmitShah@AmitShahOffice भोले भाले आदिवासियों को दिग्भ्रमित कर लेवी वसूली वसूली इनका मूल उद्देश्य था। जंगल से तो इनका सफाया हो गया किंतु अब करोड़ों की लेवी डकारने वालों की सफाई जरूरी है, नहीं तो असम में उल्फा के बाद सुल्फा पैदा हो गया उसी तरह छत्तीसगढ़ में समानांतर खाओवाद पैदा हो जाएगा।
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के दूसरे दिन “साहित्य: उपनिषद से एआई तक” विषय पर परिचर्चा आयोजित हुई। वक्ताओं ने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बीच संबंध, संभावनाओं और चुनौतियों पर विचार रखे।
डॉ. ओमप्रकाश व्यास ने एआई के तेज़ विकास और भाषा के मानकीकरण को बड़ी चुनौती बताया, जबकि श्री प्रफुल्ल केतकर ने गहरे प्रश्नों को ज्ञान का आधार बताया। सत्र में डॉ. गोपाल कमल की पुस्तक ‘गुणाढ्य की गुणसूत्र कथा’ का विमोचन भी किया गया।
Day 2 of #BahuBhasa2025 explored AI, localisation & open knowledge for Indian languages - from inclusive tech & BhashaVerse to reimagining translation as creative mediation between science and art.
Dr. Rukmini Banerji's keynote: https://t.co/IxLuZ15ysb
#BahuBhasa#IIITHyderabad
कि उन्हें भासा आयोग का अध्यक्ष-सध्यक्ष बना दिया जाएगा। कई भइया तो प्रदेश के मशहूर बैंड पार्टी के मालिक के आगे-पीछे घूमते रहे, कि उन्हें सरकारी परकासन अकादमी में बड़ा पद मिल जाएगा किन्तु सरकार के मुखिया लॉलीपॉप दिखा-दिखा कर बैंड बजवाते रहे और सबको "धमसा" नचवाया।
दैनिक भास्कर में बोरे-बासी दिवस के लिए करोड़ों रुपयों की बंदरबाँट के समाचार को पढ़ने के बाद, खुद पे शर्म आ रही है। छत्तीसगढ़ी अस्मिता ने मुझे भी बोरे-बासी दिवस (एकमई 2022) के दिन वीडियो बनाकर पोस्ट करने को विवश कर दिया था। आगे कमेंट में..
हम सोशल मीडिया में उजबक बने बोरे-बासी खाते हुए वायरल होते रहे और उधर चोट्टे लोग करोड़ों रुपये का "टाड़ो" पी गए।
इसी तरह पिछली सरकार भौंरा-बांटी खेलती रही और कई साहित कार इस "अगोरा" में मंजीरा बजाते रहे ...