Remembering Veer Savarkar on his Jayanti. His courage and patriotism will always inspire people. His intellect and emphasis on social reform are also noteworthy.
Did anyone else receive this extreme weather alert with the warning tone on their phone today? 🌩️📱
Which city are you from?
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Facing an imposing supreme court bench, Senior Advocate @jsaideepak takes us on an incredible journey in constitutional law to bolster his case for overturning Sabarimala judgment. He is fighting ferociously for dharma, armed with nothing but his intellect.
Watch, and be amazed:
आजकल एक साध्वी जी हैं, बहुत आक्रामक चल रही हैं। इनका इतिहास बहुत संदिग्ध रहा है।
आप अनुसूचित जाति से आती हैं। पहले एक दूसरे संगठन से जुड़ी थीं, मंचों पर रहा करती थीं। वहाँ आप लोगों के मोबाइल फोन, गहने आदि चुराया करती थीं।
किसी के घर यदि रुकना हुआ तो घर का सामान उठाना इनकी आदत थी। आपको उस ‘समाज’ से निकाल दिया गया।
आजकल नाम में ‘साध्वी’ लगा कर, ट्विटर पर ट्रोलिंग एवम् लोगों को गालियाँ देने का पूर्णकालिक कार्य कर रही हैं।
1. Cyber attack on delhi airport 2 days back...
2. Biological (large scale) castor extract attack preparations ceased
3. Chemical amonium nitrate (2900kg) ceased Chemical blast attack Red fort
Most of them Indian nationals. The enemy is among us..need of the hour is "Shatrubodh"
@1stIndiaNews@satyatv99_news@PoliceRajasthan#neerjamodi#madandilawar shameful act by an educational institution...at least they could have taken it's responsibility. Big schools are now be coming king cobras engulfing kids...
Honble madan dilawar ji should take serious investigation.
क्या यह नितिन गडकरी के बेटे की कंपनी है? जी हाँ। इसे निखिल गडकरी चलाते हैं। इथेनॉल बनाती है। पाँच साल में 22-गुणा बढ़ी है। दूसरे बेटे सारंग, मानस एग्रो चलाते हैं, वो अनलिस्टेड है, इथेनॉल बनाती है। मानस का रेवेन्यू 2021 में ₹5990 करोड़ था, जो 2024 में ₹9591 करोड़ हो गया।
@nitin_gadkari का इथेनॉल ब्लेंडिंग से कोई संबंध नहीं होना चाहिए क्योंकि वह @HardeepSPuri का मंत्रालय है। टार्गेट भी 2030 का था 20% ब्लेंडिंग का, फिर गडकरी यह कह कर क्यों नाचते रहते हैं कि 2025 में ही पूरा हो गया?
@narendramodi जी, क्या यह ‘खाने दूँगा’ के अंतर्गत नहीं आता? क्या यह स्पष्ट रूप से ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ नहीं है? किसी की कंपनी आगे बढ़े, कोई समस्या नहीं, परंतु जबरन हर गाड़ी में, बिना शोध के, अपनी कंपनियों के लाभ के लिए, करोड़ों लोगों की पॉकेटमारी कैसे हो रही है?
इस पर वृहद जाँच होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने Udaipur Files पर रोक लगाने से किया इनकार।
एक ऐतिहासिक जीत।
सिनेमा रुकेगा नहीं – बोलेगा!
इस लड़ाई में साथ खड़े रहने के लिए आप सबका आभार
अब सच्चाई सामने आएगी, सेक्युलर चुप्पी नहीं चलेगी। कनहैया लाल और उनके परिवार को न्याय मिलेगा
#UdaipurFiles
‘आदर्श जज’ चंद्रचूड़ का विकलांग बच्ची कार्ड
चंद्रचूड़ द्वारा सरकारी आवास खाली न करने की वजह एक विक्टिम कार्ड है: मेरे दो विकलांग बच्चे हैं, उनके हिसाब का घर नहीं मिल रहा।
सत्य यह है कि नवंबर से जून तक सात महीने बीत चुके हैं, इन्हें नियमानुसार एक सेवानिवृत्ति वाला आवास दिया जा चुका है। पिछले CJI ने इन्हें खाली करने कहा, पर इन्होंने वही विक्टिम कार्ड निकाला।
नए ने कहा कि अब कोई एक्सटेंशन नहीं मिलेगा। तब पत्र भेजा गया कि खाली करें।
सात महीने में कोई भी व्यक्ति अपने बच्चों के हिसाब के मोडिफिकेशन्स आराम से करवा सकता है। चंद्रचूड़ ने यह सोचा होगा कि उसकी पहुँच इतनी है कि ये सब चलता रहेगा और वो आवास खाली नहीं करेंगे।
चंद्रचूड़ का पूरा जजैती का जीवन ‘आदर्शवाद’ की बकचोदी पर आधारित रहा है। बकचोदी इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि जस्टिस वर्मा जैसे लोगों को सिस्टम में लाने वाला व्यक्ति यही है।
जो आदर्शों की रोटी खाने से अधिक इन्स्टा फिल्टर मार कर पोस्ट करते हैं, उन्हें तो सेवानिवृत्ति के अगले दिन आवास खाली कर देना चाहिए था। हालाँकि, व्यक्तिगत रूप से खोखले और आदर्श का दंभ भरने वाले लोग हर नियम को ताक पर रख कर चलते हैं।
देश में बहुत सारे लोगों को बहुत सारी समस्याएँ हैं। नियम में छः महीने के एक्सटेंशन का प्रावधान है, ताकि आप सुविधानुसार कोई विकल्प ढूँढ लें। लेकिन ऐसे लोगों को सिस्टम अपने बाप की जागीर लगता है।
इनके साथ कोई भी करुणा का भाव नहीं दिखाना चाहिए। ये तंत्र को मोड़ने वाले लोग हैं, जो पहचान देख कर न्याय का ढोंग करते रहें हैं।